आपका युद्ध वासना से है,जो ब्रम्हचारी होते है वो डटकर इसका सामना करते है और जीतते है,और जो व्यभिचारी होते है वो इस वासना का गुलाम हो जाते है।
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जिस के शरीर में सुरक्षित वीर्य रहता है तब उस को आरोग्य,बुद्धि,बल,पराक्रम बढ़ के बहुत सुख की प्राप्ति होती है।
- महर्षि दयानन्द सरस्वती
- महर्षि दयानन्द सरस्वती
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प्राणों से मोह होना नाभि के नीचे आसक्ति होना
और धन के प्रति आसक्ति होना
ये तीन चीज़ों का जिसने अंत कर दिया वो देश धर्म के लिए कुछ भी कर गुजरेगा।
और धन के प्रति आसक्ति होना
ये तीन चीज़ों का जिसने अंत कर दिया वो देश धर्म के लिए कुछ भी कर गुजरेगा।
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जिस स्त्री का आकर्षण या वासना की चाहता आपको अपने वश में कर लेती है उसकी वास्तविकता को जान लो एक बार , जब त्वचा के दो इंच नीचे का दृश्य देखेगो तो यकीनन आप
भयभीत हो जाओगे, इस शरीर के चाहत में आप अपना अमूल्य वीर्यनाश कर रहे हैं।
भयभीत हो जाओगे, इस शरीर के चाहत में आप अपना अमूल्य वीर्यनाश कर रहे हैं।
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अब भी मौका है स्त्री को गंदी दृष्टि से देखना बंद कर और अपने भविष्य की चिंता
कर , क्योंकि समय बीतने के बाद आप ही अपने आप को
बोलेंगे कि वीर्यनाश से जिंदगी
बर्बाद कर दी अगर उस वक्त मैं वीर्यरक्षण कर लेता तो , आज मुझे इतना दुःख नहीं
सहना करना पड़ता।
कर , क्योंकि समय बीतने के बाद आप ही अपने आप को
बोलेंगे कि वीर्यनाश से जिंदगी
बर्बाद कर दी अगर उस वक्त मैं वीर्यरक्षण कर लेता तो , आज मुझे इतना दुःख नहीं
सहना करना पड़ता।
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हे महान देश के वासी ! बुढ़ापा, कमजोरी व लाचारी आ घेरे, उसके पहले अपनी
िदव्यता को, अपनी महानता को, महान पद को पा लो।
िदव्यता को, अपनी महानता को, महान पद को पा लो।
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वीर्य सम्पूर्ण शरीर में उसी तरह व्याप्त रहता है जैसे गन्ने में रस जिससे पूरा शरीर हृष्ट पुष्ट और सुडौल बनता है
और जब मन में वासना युक्त कामुक विचार उठते हैं तो जिस प्रकार दूध को मथने पर मक्खन निकल कर ऊपर आ जाता है वैसे ही मन्मथ अर्थात काम पूरे शरीर से वीर्य को खींच कर बाहर कर देता है...और शरीर निस्तेज हो जाता है...... बिल्कुल रस निकल जाने के बाद गन्ने की तरह जितना रस निकलता जाता है गन्ने का हाल उतना ही बुरा होता जाता है...बाकी सभी ब्रम्हचारी साधक समझदार हैं....
भूलकर भी उस खुशी से न खेलो।
जिसके पीछे हों गम की कतारें।।
और जब मन में वासना युक्त कामुक विचार उठते हैं तो जिस प्रकार दूध को मथने पर मक्खन निकल कर ऊपर आ जाता है वैसे ही मन्मथ अर्थात काम पूरे शरीर से वीर्य को खींच कर बाहर कर देता है...और शरीर निस्तेज हो जाता है...... बिल्कुल रस निकल जाने के बाद गन्ने की तरह जितना रस निकलता जाता है गन्ने का हाल उतना ही बुरा होता जाता है...बाकी सभी ब्रम्हचारी साधक समझदार हैं....
भूलकर भी उस खुशी से न खेलो।
जिसके पीछे हों गम की कतारें।।
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जब कामुकता जग रही हो तो..
मन को समझाना चाहिए कि-शरीर में है क्या ?
दो आडी हड़ियाँ और दो रवडी हड्डियाँ, मांस,
मल-मूत्र, रक्त और ऊपर से चमड़े का कवर...
मन को समझाना चाहिए कि-शरीर में है क्या ?
दो आडी हड़ियाँ और दो रवडी हड्डियाँ, मांस,
मल-मूत्र, रक्त और ऊपर से चमड़े का कवर...
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वासना से बचने के लिए निरंतर कोशिश करती रहनी पड़ती है । और फसने के लिए वासना के बारे में एक विचार ही पर्याप्त है।
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जो लोग वीर्य निकालते हैं और ये भी सोचते हैं कि वे जीवन में सफ़ल भी होंगे ये बिलकुल झूठी बात है क्योंकि ज़र्ज़र काया से जीत हासिल नहीं होती।
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ये है शरीर की वास्तविकता !
शरीर तो बस कर्म करने का साधन है हम सब उस परमात्मा की आत्मा रूपी अंश है .
शरीर तो बस कर्म करने का साधन है हम सब उस परमात्मा की आत्मा रूपी अंश है .
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फिर से कोशिश करने से मत
घबराना, क्योंकि इस बार शुरुआत शून्य से नहीं
अनुभव से होगी।
घबराना, क्योंकि इस बार शुरुआत शून्य से नहीं
अनुभव से होगी।
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ब्रह्मचर्य का पालन करनेवाले लोग मानसिक रूप से बहुत मजबूत होते हैं। उन्हें जीवन के उतार-चढ़ाव दिमागी रूप से तोड़ नहीं पाते हैं। इनका मन बलवान होता है और कायरता इनसे कोसों दूर रहती है। निराशा और अवसाद जैसे रोग इन पर जल्दी से असर नहीं डाल पाते।
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जीवन की अधिकांश गलतियां
जल्दबाजी में लिए गए निर्णयों के कारण होती है। सोचें, विश्लेषण करें और फिर उस पर काम करें।
जल्दबाजी में लिए गए निर्णयों के कारण होती है। सोचें, विश्लेषण करें और फिर उस पर काम करें।
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जैसे सूर्य अपने प्रखर प्रकाश से सारी पृथिवी को व्याप्त कर देता है। उसी प्रकार ब्रह्मचारी अकेला ही अपने प्रबल पराक्रम से सारे संसार को अपनी शक्ति का एहसास करा देता है।
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