वीर्य सम्पूर्ण शरीर में उसी तरह व्याप्त रहता है जैसे गन्ने में रस जिससे पूरा शरीर हृष्ट पुष्ट और सुडौल बनता है
और जब मन में वासना युक्त कामुक विचार उठते हैं तो जिस प्रकार दूध को मथने पर मक्खन निकल कर ऊपर आ जाता है वैसे ही मन्मथ अर्थात काम पूरे शरीर से वीर्य को खींच कर बाहर कर देता है...और शरीर निस्तेज हो जाता है...... बिल्कुल रस निकल जाने के बाद गन्ने की तरह जितना रस निकलता जाता है गन्ने का हाल उतना ही बुरा होता जाता है...बाकी सभी ब्रम्हचारी साधक समझदार हैं....
भूलकर भी उस खुशी से न खेलो।
जिसके पीछे हों गम की कतारें।।
और जब मन में वासना युक्त कामुक विचार उठते हैं तो जिस प्रकार दूध को मथने पर मक्खन निकल कर ऊपर आ जाता है वैसे ही मन्मथ अर्थात काम पूरे शरीर से वीर्य को खींच कर बाहर कर देता है...और शरीर निस्तेज हो जाता है...... बिल्कुल रस निकल जाने के बाद गन्ने की तरह जितना रस निकलता जाता है गन्ने का हाल उतना ही बुरा होता जाता है...बाकी सभी ब्रम्हचारी साधक समझदार हैं....
भूलकर भी उस खुशी से न खेलो।
जिसके पीछे हों गम की कतारें।।
👍15🔥7
जब कामुकता जग रही हो तो..
मन को समझाना चाहिए कि-शरीर में है क्या ?
दो आडी हड़ियाँ और दो रवडी हड्डियाँ, मांस,
मल-मूत्र, रक्त और ऊपर से चमड़े का कवर...
मन को समझाना चाहिए कि-शरीर में है क्या ?
दो आडी हड़ियाँ और दो रवडी हड्डियाँ, मांस,
मल-मूत्र, रक्त और ऊपर से चमड़े का कवर...
🔥9🤩5👍3
वासना से बचने के लिए निरंतर कोशिश करती रहनी पड़ती है । और फसने के लिए वासना के बारे में एक विचार ही पर्याप्त है।
👍4🔥2
जो लोग वीर्य निकालते हैं और ये भी सोचते हैं कि वे जीवन में सफ़ल भी होंगे ये बिलकुल झूठी बात है क्योंकि ज़र्ज़र काया से जीत हासिल नहीं होती।
🔥5👏3👍2
This media is not supported in your browser
VIEW IN TELEGRAM
ये है शरीर की वास्तविकता !
शरीर तो बस कर्म करने का साधन है हम सब उस परमात्मा की आत्मा रूपी अंश है .
शरीर तो बस कर्म करने का साधन है हम सब उस परमात्मा की आत्मा रूपी अंश है .
👍14❤4🔥4👏4
फिर से कोशिश करने से मत
घबराना, क्योंकि इस बार शुरुआत शून्य से नहीं
अनुभव से होगी।
घबराना, क्योंकि इस बार शुरुआत शून्य से नहीं
अनुभव से होगी।
👍3🔥1
ब्रह्मचर्य का पालन करनेवाले लोग मानसिक रूप से बहुत मजबूत होते हैं। उन्हें जीवन के उतार-चढ़ाव दिमागी रूप से तोड़ नहीं पाते हैं। इनका मन बलवान होता है और कायरता इनसे कोसों दूर रहती है। निराशा और अवसाद जैसे रोग इन पर जल्दी से असर नहीं डाल पाते।
🔥12👍3👏2
जीवन की अधिकांश गलतियां
जल्दबाजी में लिए गए निर्णयों के कारण होती है। सोचें, विश्लेषण करें और फिर उस पर काम करें।
जल्दबाजी में लिए गए निर्णयों के कारण होती है। सोचें, विश्लेषण करें और फिर उस पर काम करें।
👍13🤩3
जैसे सूर्य अपने प्रखर प्रकाश से सारी पृथिवी को व्याप्त कर देता है। उसी प्रकार ब्रह्मचारी अकेला ही अपने प्रबल पराक्रम से सारे संसार को अपनी शक्ति का एहसास करा देता है।
❤9🤩4👍2
चरित्र से पवित्र रहो, किसी के बाप में इतना दम नहीं,
जो तुम पर उंगली उठा सके..
जो तुम पर उंगली उठा सके..
👍11
अपनी पीड़ा के लिए संसार को दोष मत दो बल्कि
अपने मन को समझाओ क्योंकि तुम्हारे मन का परिवर्तन ही तुम्हारे दुखों का अंत हैं।
अपने मन को समझाओ क्योंकि तुम्हारे मन का परिवर्तन ही तुम्हारे दुखों का अंत हैं।
👍14❤6🔥1
जो वीर्य निकलता है! वह खोया खोया सा,सोया सोया सा रहता है! और जो वीर्य बचाता है वह हर समय पूर्णजागृत अवस्था में रहता है!
👍22❤7