ब्रह्मचर्य का पालन करने से मनोबल बढ़ता है। ब्रह्मचर्य का पालन करने से रोग प्रतिरोधक शक्ति बढती है। ब्रह्मचर्य मनुष्य की एकाग्रता और ग्रहण करने की क्षमता बढाता है। ब्रह्मचर्य पालन करने वाला व्यक्ति किसी भी कार्य को पूरा कर सकता है।
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चरित्र मानव की श्रेष्ठ संपत्ति है, दुनिया की समस्त संपदाओं में महान संपदा है। पंचभूतों से निर्मित मानव-शरीर की मृत्यु के बाद, पंचमहाभूतों में विलीन होने के बाद भी जिसका अस्तित्व बना रहता है, वह है उसका चरित्र।
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चरित्रवान व्यक्ति ही समाज, राष्ट्र व विश्वसमुदाय का सही नेतृत्व और मार्गदर्शन कर सकता है। आज जनता को दुनियावी सुख-भोग व सुविधाओं की उतनी आवश्यकता नहीं है, जितनी चरित्र की। अपने सुविधाओं की उतनी आवश्यकता नहीं है, जितनी की चरित्र की। अपने चरित्र व सत्कर्मों से ही मानव चिर आदरणीय और पूजनीय हो जाता है।
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किसी लक्ष्य तक पहुंचने के लिये सबसे पहले जरूरी है विचार करना और उसके बाद उसको हासिल करने का संकल्प करना,संकल्प के बिना हम निश्चित नहीं हो पाते की हम अपने लक्ष्य तक पहुंचगे या नहीं, अगर हम अपने कर्म को पूर्ण प्रयास लगाकर नहीं करेंगे तो हम किसी भी दौड़ में पीछे रह जायेंगे और अपने अंतिम लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाएंगे।
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काम, क्रोध और लोभ आत्मा का नाश करने वाले तीन घोर शत्रू है इन तीनों में से क्रोध सबसे भयानक है। यह बडी बुरी बला है और सभी बुराईयों और लडाईयों का घर है। क्रोध उस बारूद के समान है, जो दूसरों का नाश करने से पूर्व जिसमें यह रहता है उसे ही भस्म कर देता है। क्रोध की अग्नि भी दूसरों को जलाने से पहले जहां उत्पन्न होती है उसे ही जलाती है। क्रोध दूसरों को हानि पहुंचाने से पूर्व क्रोध करने वाले को ही जलाता है और कुरूप बना देता है। क्रोध से आंखे लाल हो जाती हैं, चेहरा भयंकर और विकराल हो जाता है। यह शरीर को जलाता है, हृदय को तपाता है, रक्त संचार को अनियमित कर देता है, व्याकुलता बढाता है, वाणी को कठोर कर्कश बनाता है और धर्म को छुडाता है। क्रोध से मनुष्य का धैर्य, विद्या, ज्ञान, विवेक सबका नाश हो जाता है ।
क्रोध अहंकार से उपजता है, मूढता से बढता है और पश्चाताप पर समाप्त होता है। यह मन में बुरे विचारों और भावों को जन्म देता है जिसके फलस्वरुप द्वेष, घृणा, वैमनस्य, प्रतिकार, दुख, अभिमान आदि उत्पन्न होते हैं। क्रोध में मनुष्य माता, पिता, आचार्य, संबंधियों आदि का भी अपमान कर बैठता है। क्रोधी मनुष्य दूसरों को दुखी करता है या नहीं पर स्वयं अंदर ही अंदर जलता रहता है। इस भयंकर रोग से शारीरिक, मानसिक, आत्मिक हर प्रकार की अवनति होती है ।
क्रोध के साथ यदि विवेक का अंकुश भी रहे तो यह एक रामबाण औषधि का काम करता है, जिस प्रकार बहुत से रोगों के उपचार में संखियां तक दी जाती हैं। परिवार के सदस्यों, सहयोगियों तथा अधीनस्थों को सुधारने के लिए और बिगाड़ से बचाने के लिए क्रोध के विवेकपूर्ण प्रदर्शन की आवश्यकता होती है। दंड और प्रताडना का भी उपयोग करना पडता है। यदि इस स्थिति का त्याग कर दिया जाए तो फिर मां, बाप, अध्यापक, अधिकारी आदि अपने कर्तव्यों का पालन नहीं कर सकेंगे। क्रोध का विवेकपूर्ण और व्यवहारिक प्रदर्शन वास्तव में प्रेम भाव का ही एक रूप है और इसके प्रयोग में बहुत संयम बरतना होता है। क्रोध केवल दूसरों को आत्म सुधार की प्रेरणा देने के एक सशक्त साधन के रूप में ही प्रयुक्त होना चाहिए ।
क्रोध निवारण के अनेक उपाय हैं। मौन धारण करके मन ही मन गायत्री मंत्र का जाप करने से क्रोध के विषय से ध्यान हट जाता है और वह शांत हो जाता है। यदि किसी की गलती पर क्रोध आए तो यह भी ध्यान करना चाहिए कि ऐसी गलती हम से भी हो सकती है। इस प्रकार विवेकानुसार विचार करने से क्रोध का वेग कम हो जाता है और बार बार के अभ्यास से अंततः उस पर विजय पाई जा सकती है। धैर्य और क्षमा का अभ्यास क्रोध निवारण के सर्वोत्तम उपाय हैं। धैर्य उसे शांत कर देता है और क्षमा तो समूल नष्ट कर देती है ।
क्रोध अहंकार से उपजता है, मूढता से बढता है और पश्चाताप पर समाप्त होता है। यह मन में बुरे विचारों और भावों को जन्म देता है जिसके फलस्वरुप द्वेष, घृणा, वैमनस्य, प्रतिकार, दुख, अभिमान आदि उत्पन्न होते हैं। क्रोध में मनुष्य माता, पिता, आचार्य, संबंधियों आदि का भी अपमान कर बैठता है। क्रोधी मनुष्य दूसरों को दुखी करता है या नहीं पर स्वयं अंदर ही अंदर जलता रहता है। इस भयंकर रोग से शारीरिक, मानसिक, आत्मिक हर प्रकार की अवनति होती है ।
क्रोध के साथ यदि विवेक का अंकुश भी रहे तो यह एक रामबाण औषधि का काम करता है, जिस प्रकार बहुत से रोगों के उपचार में संखियां तक दी जाती हैं। परिवार के सदस्यों, सहयोगियों तथा अधीनस्थों को सुधारने के लिए और बिगाड़ से बचाने के लिए क्रोध के विवेकपूर्ण प्रदर्शन की आवश्यकता होती है। दंड और प्रताडना का भी उपयोग करना पडता है। यदि इस स्थिति का त्याग कर दिया जाए तो फिर मां, बाप, अध्यापक, अधिकारी आदि अपने कर्तव्यों का पालन नहीं कर सकेंगे। क्रोध का विवेकपूर्ण और व्यवहारिक प्रदर्शन वास्तव में प्रेम भाव का ही एक रूप है और इसके प्रयोग में बहुत संयम बरतना होता है। क्रोध केवल दूसरों को आत्म सुधार की प्रेरणा देने के एक सशक्त साधन के रूप में ही प्रयुक्त होना चाहिए ।
क्रोध निवारण के अनेक उपाय हैं। मौन धारण करके मन ही मन गायत्री मंत्र का जाप करने से क्रोध के विषय से ध्यान हट जाता है और वह शांत हो जाता है। यदि किसी की गलती पर क्रोध आए तो यह भी ध्यान करना चाहिए कि ऐसी गलती हम से भी हो सकती है। इस प्रकार विवेकानुसार विचार करने से क्रोध का वेग कम हो जाता है और बार बार के अभ्यास से अंततः उस पर विजय पाई जा सकती है। धैर्य और क्षमा का अभ्यास क्रोध निवारण के सर्वोत्तम उपाय हैं। धैर्य उसे शांत कर देता है और क्षमा तो समूल नष्ट कर देती है ।
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चित्र की नहीं चरित्र की पूजा करो !
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ब्रह्मचर्य ही जीवन (हरीॐ)
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श्रीमद् भगवद्गीता जयंतीच्या हार्दिक शुभेच्छा... 🙏🏻💐♥️
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ओम नमस्ते जी 🙏
आशा करता हू आप सभी का ब्रम्हचर्य बोहोत सही चल रहा होगा.
बोहोत समय से आपसे दुरी बानाये रखने के लिये क्षमा चाहता हु. 🙏 , पर फिर भी आप हमसे जुडे रहे ये देख आपको दिलं से शुक्रिया करता हू.
आने वाले समय में हम ये चॅनल की ओर से और समूह तक ब्रम्हचर्य के बारे मे प्रसार करेंगे यही हम सबका उद्देश होगा ! इसमे आप भी हम से जुडकर अपने परिवार एवं अपने मित्रो तक ब्रम्हचर्य का प्रसार करेंगे ये हमे भरोसा है.
विशेष सूचना :- जलदी ही admin और member की सिधी संभाषण ही सके ऐसा bot भी हम बना रहे हैं ताकी आपकी कोई परेशानी, शंका या किसी अनुभव को हम अपने सभी subscribers se साझा कर सकते हैं.
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विशेष सूचना :- जलदी ही admin और member की सिधी संभाषण ही सके ऐसा bot भी हम बना रहे हैं ताकी आपकी कोई परेशानी, शंका या किसी अनुभव को हम अपने सभी subscribers se साझा कर सकते हैं.
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इस एक बिंदु वीर्यरक्षा को अपने जीवन का हिस्सा बना लो । फिर बाकी समस्त बिंदु अपने आप ठीक हो जाएँगी ।
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*इतिहासबोध🦁🚩*
*हिन्दू नववर्ष (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा) के दिन का ऐतिहासिक महत्व—*
*इसी दिन परमात्मा ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की।*
*प्रभु श्री राम के राज्याभिषेक का दिन यही है।*
*शक्ति और भक्ति के नौ दिन अर्थात् नवरात्र का पहला दिन यही है।*
*महाराज युधिष्ठिर का राज्यभिषेक भी इसी दिन हुआ।*
*सम्राट विक्रमादित्य ने इसी दिन राज्य स्थापित किया। इन्हीं के नाम पर विक्रमी संवत् का पहला दिन प्रारंभ होता है।*
*न्याय दर्शन प्रणेता महर्षि गौतम जयंती।*
*सिख पंथ के द्वितीय गुरू श्री अंगद देव जी का जन्म दिवस है।*
*ऋषि दयानंद सरस्वती जी ने इसी दिन आर्य समाज की स्थापना की एवं 'कृण्वंतो विश्वम् आर्यम्' का संदेश दिया।*
*सिंध प्रान्त में सिंधी हिंदुओं को 11 वीं सदी के मिरकशाह नामक क्रूर शासक से रक्षा करने वाले प्रसिद्ध धर्मरक्षक वरूणावतार संत झूलेलाल जी का जन्मदिवस(चेटीचंड महोत्सव)*
*सम्राट विक्रमादित्य की भांति सम्राट शालिवाहन ने हूणों और शकों को परास्त कर भारत में श्रेष्ठतम राज्य स्थापित करने हेतु यही दिन चुना। शक संवत की स्थापना की।*
*संघ संस्थापक प.पू.डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार का जन्म दिन।*
🪷 *भारतीय सनातनी नववर्ष का प्राकृतिक महत्व*
*वसंत ऋतु का आरंभ वर्ष प्रतिपदा से ही होता है जो उल्लास, उमंग, खुशी तथा चारों तरफ पुष्पों की सुगंधि से भरी होती है।*
*फसल पकने का प्रारंभ यानि किसान की मेहनत का फल मिलने का भी यही समय होता है।*
*नक्षत्र शुभ स्थिति में होते हैं अर्थात् किसी भी कार्य को प्रारंभ करने के लिये यह शुभ मुहूर्त होता है।*
🪷*भारतीय नववर्ष कैसे मनाएँ*
*हम परस्पर एक दुसरे को नववर्ष की शुभकामनाएँ दें। पत्रक बांटें , झंडे, बैनर....आदि लगावें ।*
*अपने परिचित मित्रों, रिश्तेदारों को नववर्ष के शुभ संदेश भेजें।*
*इस मांगलिक अवसर पर अपने-अपने घरों पर भगवा पताका फहराएँ।*
*अपने घरों के द्वार, आम के पत्तों की वंदनवार से सजाएँ।*
*घरों एवं धार्मिक स्थलों की सफाई कर रंगोली तथा फूलों से सजाएँ।*
*इस अवसर पर होने वाले धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लें अथवा कार्यक्रमों का आयोजन करें।*
*प्रतिष्ठानों की सज्जा एवं प्रतियोगिता करें। झंडी और फरियों से सज्जा करें।*
*इस दिन के महत्वपूर्ण देवताओं, महापुरुषों से सम्बंधित प्रश्न मंच के आयोजन करें।*
*वाहन रैली, कलश यात्रा, विशाल शोभा*
*यात्राएं, कवि सम्मेलन, भजन संध्या , महाआरती आदि का आयोजन करें।*
*चिकित्सालय, गौशाला में सेवा, रक्तदान जैसे कार्यक्रम।*
*हिन्दू नववर्ष (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा) के दिन का ऐतिहासिक महत्व—*
*इसी दिन परमात्मा ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की।*
*प्रभु श्री राम के राज्याभिषेक का दिन यही है।*
*शक्ति और भक्ति के नौ दिन अर्थात् नवरात्र का पहला दिन यही है।*
*महाराज युधिष्ठिर का राज्यभिषेक भी इसी दिन हुआ।*
*सम्राट विक्रमादित्य ने इसी दिन राज्य स्थापित किया। इन्हीं के नाम पर विक्रमी संवत् का पहला दिन प्रारंभ होता है।*
*न्याय दर्शन प्रणेता महर्षि गौतम जयंती।*
*सिख पंथ के द्वितीय गुरू श्री अंगद देव जी का जन्म दिवस है।*
*ऋषि दयानंद सरस्वती जी ने इसी दिन आर्य समाज की स्थापना की एवं 'कृण्वंतो विश्वम् आर्यम्' का संदेश दिया।*
*सिंध प्रान्त में सिंधी हिंदुओं को 11 वीं सदी के मिरकशाह नामक क्रूर शासक से रक्षा करने वाले प्रसिद्ध धर्मरक्षक वरूणावतार संत झूलेलाल जी का जन्मदिवस(चेटीचंड महोत्सव)*
*सम्राट विक्रमादित्य की भांति सम्राट शालिवाहन ने हूणों और शकों को परास्त कर भारत में श्रेष्ठतम राज्य स्थापित करने हेतु यही दिन चुना। शक संवत की स्थापना की।*
*संघ संस्थापक प.पू.डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार का जन्म दिन।*
🪷 *भारतीय सनातनी नववर्ष का प्राकृतिक महत्व*
*वसंत ऋतु का आरंभ वर्ष प्रतिपदा से ही होता है जो उल्लास, उमंग, खुशी तथा चारों तरफ पुष्पों की सुगंधि से भरी होती है।*
*फसल पकने का प्रारंभ यानि किसान की मेहनत का फल मिलने का भी यही समय होता है।*
*नक्षत्र शुभ स्थिति में होते हैं अर्थात् किसी भी कार्य को प्रारंभ करने के लिये यह शुभ मुहूर्त होता है।*
🪷*भारतीय नववर्ष कैसे मनाएँ*
*हम परस्पर एक दुसरे को नववर्ष की शुभकामनाएँ दें। पत्रक बांटें , झंडे, बैनर....आदि लगावें ।*
*अपने परिचित मित्रों, रिश्तेदारों को नववर्ष के शुभ संदेश भेजें।*
*इस मांगलिक अवसर पर अपने-अपने घरों पर भगवा पताका फहराएँ।*
*अपने घरों के द्वार, आम के पत्तों की वंदनवार से सजाएँ।*
*घरों एवं धार्मिक स्थलों की सफाई कर रंगोली तथा फूलों से सजाएँ।*
*इस अवसर पर होने वाले धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लें अथवा कार्यक्रमों का आयोजन करें।*
*प्रतिष्ठानों की सज्जा एवं प्रतियोगिता करें। झंडी और फरियों से सज्जा करें।*
*इस दिन के महत्वपूर्ण देवताओं, महापुरुषों से सम्बंधित प्रश्न मंच के आयोजन करें।*
*वाहन रैली, कलश यात्रा, विशाल शोभा*
*यात्राएं, कवि सम्मेलन, भजन संध्या , महाआरती आदि का आयोजन करें।*
*चिकित्सालय, गौशाला में सेवा, रक्तदान जैसे कार्यक्रम।*
👍6
वीर्य शरीर का तेल है । ये
शरीर रूपी गाड़ी चलने के लिए वीर्य रूपी तेल पीती । वीर्य की कमी होते ही । शरीर का इंजन बैठ जाता है।
शरीर रूपी गाड़ी चलने के लिए वीर्य रूपी तेल पीती । वीर्य की कमी होते ही । शरीर का इंजन बैठ जाता है।
👍26👏1
वीर्य तो खून से भी कही अधिक कीमती है और आप
लोग इसे नाले में पानी की
तरह बहाये जा रहे हो अपने आप को तबाह कर रहे हो।
लोग इसे नाले में पानी की
तरह बहाये जा रहे हो अपने आप को तबाह कर रहे हो।
🙏21👍5👏1
वीर्यवान बड़े से बड़े कार्य
को करने के लिए आतुर
रहता है, ये आतुरता
वीर्यरक्षा से ही आती है ।
को करने के लिए आतुर
रहता है, ये आतुरता
वीर्यरक्षा से ही आती है ।
👍8
सांसारिक वस्तु से
मोह बस कुछ क्षण
भर का ही आनंद दे
सकता है, क्योंकि
सबकुछ नाशवान है. इस धरा पर।
मोह बस कुछ क्षण
भर का ही आनंद दे
सकता है, क्योंकि
सबकुछ नाशवान है. इस धरा पर।
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