borewell letter_1735622516993.pdf
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*खुले या परित्यक्त बोरवेल/ट्यूबवेल में छोटे बच्चों की घातक दुर्घटनाओं की रोकथाम के संबंध में* 👇
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*
* समानता का अधिकार
*
* स्वतंत्रता का अधिकार
*
* शोषण के विरुद्ध अधिकार
*
* धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार
*
* सांस्कृतिक व शिक्षा का अधिकार
*
* संवैधानिक उपचार का अधिकार
नोट:- हमारे *मौलिक अधिकार* संविधान के *तीसरे भाग* में अंकित है *(अनुच्छेद 𝟏𝟐 से 𝟑𝟓)*
*
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JEE (Main)-2025 (Session 1) Exam Schedule.pdf
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*✍️ JEE (Main)-2025 (Session 1) का परीक्षा कार्यक्रम (Exam Schedule) जारी 👇*
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०प्रथम संविधान संशोधन(1951)–नौवीं अनुसूची जोड़ी गई और संविधान में 15(4)
०7वां संशोधन(1956)–
० लोकसभा के सदस्यों की संख्या में वृद्धि।
०दो या दो से अधिक राज्यों के लिए एक उच्च न्यायालय प्रावधान।
०31वां संशोधन(1972)–लोकसभा सीटें 525 से बढ़ाकर 545 कर दी गईं।
०36वां संशोधन(1975)–सिक्किम को भारत का पूर्ण राज्य बनाया गया।
०38वां संशोधन(1975)–न्यायिक पुनरीक्षण शक्ति का परिसीमन।
०39वां संशोधन(1975)–राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति , स्पीकर और प्रधानमंत्री के चुनाव को चुनौती नहीं दी जा सकती।
०52वां संशोधन(1985)–दल-बदल विरोधी कानूनों का प्रावधान( नई दसवीं अनुसूची जोड़ी गई)
०58वां संशोधन(1987)–संविधान के प्राधिकृत हिन्दी पाठ को प्रकाशित करने हेतु।
०61वां संशोधन(1989)– मतदान की आयु 21 से घटाकर 18 वर्ष कर दी गई।
०69वां संशोधन(1991)–दिल्ली को 'राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली' का विशेष दर्जा दिया गया।
०70वां संशोधन(1992)–राष्ट्रपति चुनाव के लिए पांडिचेरी और दिल्ली विधायिका के सदस्यों को निर्वाचक मंडल में शामिल करने का प्रावधान ।
०73वां संशोधन(1992)–पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा दिया गया।
०74वां संशोधन(1992)–शहरी स्थानीय निकायों को संवैधानिक दर्जा दिया गया।
०86वाँ संशोधन(2002)–प्रारंभिक शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाया गया।
०89वाँ संशोधन(2003)–अनुच्छेद 338-A के तहत राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग का गठन।
०91वाँ संशोधन(2003)–मंत्रिपरिषद में प्रधान मंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या लोकसभा की कुल संख्या के 15% से अधिक नहीं होगी।
०97वाँ संशोधन(2011)–सहकारी समितियों का गठन।
०100वां संशोधन(2015)–भारत और बांग्लादेश के बीच भूमि सीमा समझौता।
०101वां संशोधन(2016)–जीएसटी।
०102वां संशोधन(2018)–राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया।
०103वां संशोधन(2019)–EWS को 10% आरक्षण।
०104वां संशोधन(2020)
०लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एससी और एसटी के लिए सीटों की समाप्ति की समय सीमा सत्तर साल से बढ़ाकर अस्सी साल कर दी गई।
० लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एंग्लो-इंडियन समुदाय के लिए आरक्षित सीटें हटा दी गईं।
०105वां संशोधन(2021)–सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों (एसईबीसी) की सूची तैयार करने की राज्य सरकारों की शक्ति बहाल की गई।
०106वां संशोधन अधिनियम(2023)–महिला आरक्षण से सम्बन्धित है।
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*आपके और सफलता के बीच केवल परिश्रम का ही अंतर है...*
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*📆 Shivira Calendar January 2025* 👇
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☝️ *शिविरा पंचांग January 2025*
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☝️ *शिविरा पंचांग January 2025*
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*🙏 LIC वाले सभी ग्राहकों के लिए नया आदेश, मिलेगा बंपर लाभ*
LIC के पास करोड़ों रुपये ऐसे पड़े हैं, जो पॉलिसी धारकों ने अब तक क्लेम नहीं किए है. अगर आपके पास कोई पुरानी LIC पॉलिसी है, तो यह जानकारी आपके बहुत काम आ सकती है. तो चलिए जानते है कि आप अपना पैसा कैसे वापस।
भारत की सबसे बड़ी बीमा कंपनी LIC ने हाल ही में पॉलिसी धारकों के लिए एक आवश्यक सूचना जारी की है. LIC में लाखों लोग बीमा कराते हैं, लेकिन कई लोग मैच्योरिटी के बाद अपनी रकम लेना भूल जाते हैं, या किसी वजह से उनकी मृत्यु हो जाती है. इसी कारण LIC के पास करोड़ों रुपये बिना किसी दावे के जमा रहते है।
LIC पॉलिसी वालों के लिए जारी हुआ नया आदेश
2023-24 में LIC के पास करीब 880.93 करोड़ रुपये का Unclaimed Maturity पड़ा है, जिसे पॉलिसी धारकों ने क्लेम नहीं किया है. यदि आपके पास LIC की कोई पुरानी पॉलिसी है और उसका मैच्योरिटी पर क्लेम नहीं किया गया है, तो यह आपके लिए एक शानदार मौका है. अब आप LIC के पास बिना क्लेम पड़े इस पैसे को आसानी से वापस ले सकते है. तो यह खबर उन लोगों के लिए बडी अच्छी है, जिन्होंने अपनी LIC पॉलिसी के सभी डा
डाक्यूमेंट्स रखे है. लेकिन अभी तक क्लेम नहीं किया है. LIC ने नए निर्देश जारी किए हैं, जिनके तहत पॉलिसी धारक अपनी मैच्योरिटी की रकम का क्लेम कर सकते है।
LIC Policy के Unclaimed Maturity की आवश्यक जानकारी। वित्त मंत्री पंकज चौधरी ने बताया है कि LIC के पास 3,72,282 पॉलिसी धारकों के पैसे जमा पड़े है. क्योंकि वे अपने मैच्योरिटी बेनिफिट्स का दावा नहीं कर सके. यदि आपके पास LIC की कोई पुरानी पॉलिसी है, तो आप इसे चेक कर अपना पैसा वापस ले सकते है. इसके लिए आपके पास पॉलिसी नंबर, पॉलिसी धारक का नाम, जन्म तिथि, PAN कार्ड, आधार कार्ड जैसे कुछ आवश्यक डाक्यूमेंट्स चाहिए होंगे।
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आप LIC की वेबसाइट licindia.in पर जाकर भी यह काम आसानी से कर सकते है. सबसे पहले वेबसाइट पर जाएं और Customer Service के लिंक पर क्लिक करना है. उसके बाद Unclaimed Amounts of Policy Holders ऑप्शन को सिलेक्ट करे. फिर अपनी पॉलिसी से जुड़ी जानकारी भरे. जैसे ही आप सभी जानकारी सबमिट करते है, तो आपकी पॉलिसी से जुड़ी पूरी जानकारी आपके सामने आ जाएगी।
LIC Policy Unclaimed Maturity के लाभ
LIC ने कुछ नए नियम निर्देश जारी है, जिसके अनुसार यदि किसी पॉलिसी का क्लेम 10 साल तक नहीं किया गया है. तो वह पैसा वरिष्ठ नागरिक कल्याण फंड में ट्रांसफर कर दिया जाएगा. इसका मतलब है कि सिर्फ 10 साल से पुरानी पॉलिसी के मामले में आपको ध्यान देने की जरूरत है, क्योंकि वह पैसा अब दूसरे फंड में चला जाएगा. यह नियम उन लोगों के लिए फायदेमंद है, जिन्होंने अपनी पॉलिसी पर पहले ध्यान नहीं दिया या क्लेम नहीं किया. इससे वे अपनी पॉलिसी चेक कर आसानी से पैसा वापस ले सकते है।
LIC के पास करोड़ों रुपये ऐसे पड़े हैं, जो पॉलिसी धारकों ने अब तक क्लेम नहीं किए है. अगर आपके पास कोई पुरानी LIC पॉलिसी है, तो यह जानकारी आपके बहुत काम आ सकती है. तो चलिए जानते है कि आप अपना पैसा कैसे वापस।
भारत की सबसे बड़ी बीमा कंपनी LIC ने हाल ही में पॉलिसी धारकों के लिए एक आवश्यक सूचना जारी की है. LIC में लाखों लोग बीमा कराते हैं, लेकिन कई लोग मैच्योरिटी के बाद अपनी रकम लेना भूल जाते हैं, या किसी वजह से उनकी मृत्यु हो जाती है. इसी कारण LIC के पास करोड़ों रुपये बिना किसी दावे के जमा रहते है।
LIC पॉलिसी वालों के लिए जारी हुआ नया आदेश
2023-24 में LIC के पास करीब 880.93 करोड़ रुपये का Unclaimed Maturity पड़ा है, जिसे पॉलिसी धारकों ने क्लेम नहीं किया है. यदि आपके पास LIC की कोई पुरानी पॉलिसी है और उसका मैच्योरिटी पर क्लेम नहीं किया गया है, तो यह आपके लिए एक शानदार मौका है. अब आप LIC के पास बिना क्लेम पड़े इस पैसे को आसानी से वापस ले सकते है. तो यह खबर उन लोगों के लिए बडी अच्छी है, जिन्होंने अपनी LIC पॉलिसी के सभी डा
डाक्यूमेंट्स रखे है. लेकिन अभी तक क्लेम नहीं किया है. LIC ने नए निर्देश जारी किए हैं, जिनके तहत पॉलिसी धारक अपनी मैच्योरिटी की रकम का क्लेम कर सकते है।
LIC Policy के Unclaimed Maturity की आवश्यक जानकारी। वित्त मंत्री पंकज चौधरी ने बताया है कि LIC के पास 3,72,282 पॉलिसी धारकों के पैसे जमा पड़े है. क्योंकि वे अपने मैच्योरिटी बेनिफिट्स का दावा नहीं कर सके. यदि आपके पास LIC की कोई पुरानी पॉलिसी है, तो आप इसे चेक कर अपना पैसा वापस ले सकते है. इसके लिए आपके पास पॉलिसी नंबर, पॉलिसी धारक का नाम, जन्म तिथि, PAN कार्ड, आधार कार्ड जैसे कुछ आवश्यक डाक्यूमेंट्स चाहिए होंगे।
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LIC Policy Unclaimed Maturity के लाभ
LIC ने कुछ नए नियम निर्देश जारी है, जिसके अनुसार यदि किसी पॉलिसी का क्लेम 10 साल तक नहीं किया गया है. तो वह पैसा वरिष्ठ नागरिक कल्याण फंड में ट्रांसफर कर दिया जाएगा. इसका मतलब है कि सिर्फ 10 साल से पुरानी पॉलिसी के मामले में आपको ध्यान देने की जरूरत है, क्योंकि वह पैसा अब दूसरे फंड में चला जाएगा. यह नियम उन लोगों के लिए फायदेमंद है, जिन्होंने अपनी पॉलिसी पर पहले ध्यान नहीं दिया या क्लेम नहीं किया. इससे वे अपनी पॉलिसी चेक कर आसानी से पैसा वापस ले सकते है।
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*📡 MGGS चयन परीक्षा : 9 जिले खत्म, जिला आवंटन से पहले फिर विकल्प सम्भव, शिक्षकों को 4 माह से पदस्थापन का इंतजार, अब 41 जिलों के आधार पर हो सकती हैं काउंसलिंग*
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*😨 कड़वी घूंट 😨 *
*सबको पता है कि दशकों संगठनों में बंटे हुए शिक्षक अपनी ऊर्जा कुछ राजनीतिक पिछलग्गुओं के चक्कर में खो चुके हैं। इसलिए आज शिक्षक, समाज या आम जनता के साथ-साथ सरकार में भी उपहास का पात्र बना हुआ है। 5 सितंबर के दिखावटी सम्मान के अलावा अब क्या ही बचा हुआ है।*
*"संघे शक्ति कलियुगै:" पढ़ाने वाले शिक्षकों के स्वयं के संघ निर्बल और शक्तिहीन हो चुकें हैं। भारतीय रेलवे कितना बड़ा है फिर भी केवल दो ही संघ हैं किन्तु राजस्थान में ही शिक्षकों के पचासों संघ हैं। तिस पर भी एक दूसरे को नीचा दिखाने की होड़। उनका संगठन हार गया, उनके संगठन की बात नहीं मानी कहकर खींसें निपोरते हैं। अरे सज्जन साथियों यह क्यों नहीं सोचते हो कि शिक्षक हारे हैं, शिक्षकों की बात नहीं मानी गई। जो हारे वह भी शिक्षक ही थे और आप भी शिक्षक ही हैं। उनकी हार आपकी भी हार ही है।*
*स्थानांतरण नीति क्या पांचवां वेद है जिसे सृष्टिकर्ता ब्रह्मा लेकर प्रकट होंगे ? क्यों देर लग रही है? और यदि अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं से पूर्व घसड़-फसड़ समायोजन हो सकते हैं तो जनवरी में ट्रांसफर क्यों नहीं हो सकते ?*
*पर सब संगठन हैं मौन ?*
*आखिर पूछेगा कौन ??*
*- भारी हृदय से, आपकी अपनी शुभचिंतक 👩🏻🏫 साथी CCE Guru*
*सबको पता है कि दशकों संगठनों में बंटे हुए शिक्षक अपनी ऊर्जा कुछ राजनीतिक पिछलग्गुओं के चक्कर में खो चुके हैं। इसलिए आज शिक्षक, समाज या आम जनता के साथ-साथ सरकार में भी उपहास का पात्र बना हुआ है। 5 सितंबर के दिखावटी सम्मान के अलावा अब क्या ही बचा हुआ है।*
*"संघे शक्ति कलियुगै:" पढ़ाने वाले शिक्षकों के स्वयं के संघ निर्बल और शक्तिहीन हो चुकें हैं। भारतीय रेलवे कितना बड़ा है फिर भी केवल दो ही संघ हैं किन्तु राजस्थान में ही शिक्षकों के पचासों संघ हैं। तिस पर भी एक दूसरे को नीचा दिखाने की होड़। उनका संगठन हार गया, उनके संगठन की बात नहीं मानी कहकर खींसें निपोरते हैं। अरे सज्जन साथियों यह क्यों नहीं सोचते हो कि शिक्षक हारे हैं, शिक्षकों की बात नहीं मानी गई। जो हारे वह भी शिक्षक ही थे और आप भी शिक्षक ही हैं। उनकी हार आपकी भी हार ही है।*
*स्थानांतरण नीति क्या पांचवां वेद है जिसे सृष्टिकर्ता ब्रह्मा लेकर प्रकट होंगे ? क्यों देर लग रही है? और यदि अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं से पूर्व घसड़-फसड़ समायोजन हो सकते हैं तो जनवरी में ट्रांसफर क्यों नहीं हो सकते ?*
*पर सब संगठन हैं मौन ?*
*आखिर पूछेगा कौन ??*
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*इसी माह भरे जा सकते हैं पांचवीं-आठवीं बोर्ड परीक्षा के आवेदन पत्र*
बीकानेर | cce.guru
पांचवीं एवं आठवीं बोर्ड परीक्षा के आवेदन पत्र इसी माह भरे जा सकते हैं। खबर है कि तिथि घोषित करने के लिए निदेशक को फाइल भी भेजी हुई है। फिलहाल, आवेदन से पूर्व पीईईओ- यूसीईईओ तथा संस्थाप्रधान को निर्देशित किया गया है कि परीक्षा आवेदन में परीक्षार्थी विवरण से सबंधित किसी भी प्रकार की त्रुटि की संभावना नहीं रहे। शाला दर्पण एवं पीएसपी पोर्टल पर विद्यालय प्रोफाइल, विद्यालय का नाम, यूडीआईएसई कोड, शैक्षणिक-सत्र, परीक्षा का माध्यम, तृतीय विषय, अतिरिक्त विषय, ब्लॉक का नाम आदि प्रविष्टियां गंभीरता पूर्वक जांच कर दर्ज की जाएं।
*Join :* https://whatsapp.com/channel/0029Va9F9FPJ3juzdBjMqL0H
परीक्षा आवेदन जमा करने से पूर्व समय रहते अभिभावकों से जन्म तिथि सहित अन्य जानकारी का सहमति पत्र भी लिया जाए। इसके अलावा यदि अभिभावक की ओर से विद्यालय रिकॉर्ड में विद्यार्थी के माता पिता का नाम, जाति, जन्म तिथि आदि में किसी प्रकार का संशोधन करना हो, तो विद्यालय नियमानुसार प्रक्रिया अपनाते हुए अभिभावक से प्रार्थना पत्र लेकर सबंधित सीबीईओ एवं डीईओ से संशोधन संबंधी आदेश जारी कराएं। परीक्षा आवेदनों की जांच के लिए समिति का गठन किया जाएगा। इस समिति का मुय काम परीक्षार्थी का नाम, फोटो, हस्ताक्षर, विषय, तृतीय भाषा तथा भाषा माध्यम आदि की जांच करना होगा
बीकानेर | cce.guru
पांचवीं एवं आठवीं बोर्ड परीक्षा के आवेदन पत्र इसी माह भरे जा सकते हैं। खबर है कि तिथि घोषित करने के लिए निदेशक को फाइल भी भेजी हुई है। फिलहाल, आवेदन से पूर्व पीईईओ- यूसीईईओ तथा संस्थाप्रधान को निर्देशित किया गया है कि परीक्षा आवेदन में परीक्षार्थी विवरण से सबंधित किसी भी प्रकार की त्रुटि की संभावना नहीं रहे। शाला दर्पण एवं पीएसपी पोर्टल पर विद्यालय प्रोफाइल, विद्यालय का नाम, यूडीआईएसई कोड, शैक्षणिक-सत्र, परीक्षा का माध्यम, तृतीय विषय, अतिरिक्त विषय, ब्लॉक का नाम आदि प्रविष्टियां गंभीरता पूर्वक जांच कर दर्ज की जाएं।
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परीक्षा आवेदन जमा करने से पूर्व समय रहते अभिभावकों से जन्म तिथि सहित अन्य जानकारी का सहमति पत्र भी लिया जाए। इसके अलावा यदि अभिभावक की ओर से विद्यालय रिकॉर्ड में विद्यार्थी के माता पिता का नाम, जाति, जन्म तिथि आदि में किसी प्रकार का संशोधन करना हो, तो विद्यालय नियमानुसार प्रक्रिया अपनाते हुए अभिभावक से प्रार्थना पत्र लेकर सबंधित सीबीईओ एवं डीईओ से संशोधन संबंधी आदेश जारी कराएं। परीक्षा आवेदनों की जांच के लिए समिति का गठन किया जाएगा। इस समिति का मुय काम परीक्षार्थी का नाम, फोटो, हस्ताक्षर, विषय, तृतीय भाषा तथा भाषा माध्यम आदि की जांच करना होगा
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*उलझन: पोर्टल की पेचीदगियां, सरकारी कार्मिकों की बढ़ गई परेशानियां*
जयपुर | cce.guru
प्रदेश सरकार ने शिक्षकों सहित विभिन्न राजकीय कर्मचारियों के वेतन, एरियर एवं अन्य बिलों के त्वरित भुगतान के लिए फरवरी 2024 से पे-मैनेजर के स्थान पर नया सिस्टम आईएफएमएस 3.0 लॉन्च किया है। पर, करीब 11 माह बाद भी सिस्टम को अपडेट नहीं किया है। इससे वित्त विभाग द्वारा संचालित राजस्थान आईएफएमएस 3.0 (इंटीग्रेटेड फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम) पर आहरण वितरण अधिकारियों (डीडीओ) को तकनीकी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके चलते जिले सहित प्रदेशभर के कार्मिक खासे प्रभावित हो रहे हैं।
*पहले और अब*
पूर्व की व्यवस्था के तहत पहले पे-मैनेजर पर सरकारी कार्मिकों और अधिकारियों के वेतन, एरियर, विविध वित्तीय बिलों से भुगतान किया जाता था। पर, फरवरी 2024 के बाद से पे-मैनेजर के डेटा आईएफएमएस 3.0 पर ट्रांसफर कर दिए है। पर, वित्तीय आहरण वितरण में तकनीकी और डिजिटली रूप ऑपरेट करना जटिल बना दिया है। पीडी और पे-मैनेजर से डेटा भी ट्रांसफर नहीं हो रहे हैं। वेतन बिल बनाने वाले सरकारी कार्मिक, तकनीकी जानकार, डीडीओ के साथ यहां तक कि ट्रेजरी कार्यालय के कार्मिक भी कई बार नए पोर्टल की समस्याओं से अनभिज्ञता जाहिर करते हैं। पोर्टल पर आने वाली समस्याओं का निस्तारण कही से नहीं हो पा रहा है। सिस्टम को अपडेट करने की जरूरत है।
*हेल्प डेस्क से नहीं मिल रही हेल्प*
आईएफएमएस पर वेतन, एरियर सहित विभिन्न बिलों में आ रही तकनीकी समस्याओं के लिए हेल्प डेस्क बनाई गई है। यहां डीडीओ द्वारा किसी समस्या को लेकर कोई कॉल किया जाता है, तो कोई कॉल ही नहीं उठाता है। यहीं नहीं हेल्प डेस्क पर कोई तकनीकी समस्या भी भेजी जाती है, तो उसका प्रतिउत्तर भी नहीं मिल रहा है। ऐसे में सरकारी विभागों के अधिकारी, कार्मिक एवं शिक्षक हर रोज विविध समस्याओं से परेशान हो रहे हैं।
*ये आ रही हैं समस्याएं*
किसी कर्मचारी का पुराना वेतन एरियर का भुगतान होने पर ही उस कार्मिक का बकाया अन्य वेतन एरियर बना सकते हैं।
सैलरी एरियर में ड्यू ड्रॉन स्टेटमेंट में एरियर बनाने में वास्तविक राशि में अंतर आता है और संशोधन का विकल्प नहीं है।
सैलरी एरियर का हर कर्मचारी का पृथक से बिल बनाना पड़ रहा है।
कर्मचारी का स्थानांतरण होने पर यदि कोई एरियर पेंडिंग है, तो पे-मैनेजर की तर्ज पर (अदर ऑफिस इपालाइ ) का ऑप्शन मौजूद नहीं है।
सर्विस डिटेल अपडेट नहीं हो पा रही है।
कार्मिक का एरियर बनाने में हर बार रिजन, रिजन डेट, सर्विस कैटेगरी, सब सर्विस केटेगरी, पद को भरना पड़ता है।
*Join :* https://whatsapp.com/channel/0029Va9F9FPJ3juzdBjMqL0H
एरियर बिल बनाने पर किसी कार्मिक का डीए एरियर मानइस आता है।
धीमी गति से चलता है
पीएल सरेंडर में डीडीओ-एचओ-डीडीओ रोल बार बार चयन कर बिल बनाना पड़ता है।
एक साथ सभी कार्यरत कार्मिक प्रदर्शित नहीं होते है। एक बार में पांच ही देख पाते हैं। इसलिए कई बार प्रोसेस रिपीट करना होता हैं।
सभी कार्य एक ही आईडी से होने से आहरण वितरण अधिकारी (डीडीओ) को अपनी आईडी और पासवर्ड सार्वजनिक करनी पड़ रही है।
जयपुर | cce.guru
प्रदेश सरकार ने शिक्षकों सहित विभिन्न राजकीय कर्मचारियों के वेतन, एरियर एवं अन्य बिलों के त्वरित भुगतान के लिए फरवरी 2024 से पे-मैनेजर के स्थान पर नया सिस्टम आईएफएमएस 3.0 लॉन्च किया है। पर, करीब 11 माह बाद भी सिस्टम को अपडेट नहीं किया है। इससे वित्त विभाग द्वारा संचालित राजस्थान आईएफएमएस 3.0 (इंटीग्रेटेड फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम) पर आहरण वितरण अधिकारियों (डीडीओ) को तकनीकी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके चलते जिले सहित प्रदेशभर के कार्मिक खासे प्रभावित हो रहे हैं।
*पहले और अब*
पूर्व की व्यवस्था के तहत पहले पे-मैनेजर पर सरकारी कार्मिकों और अधिकारियों के वेतन, एरियर, विविध वित्तीय बिलों से भुगतान किया जाता था। पर, फरवरी 2024 के बाद से पे-मैनेजर के डेटा आईएफएमएस 3.0 पर ट्रांसफर कर दिए है। पर, वित्तीय आहरण वितरण में तकनीकी और डिजिटली रूप ऑपरेट करना जटिल बना दिया है। पीडी और पे-मैनेजर से डेटा भी ट्रांसफर नहीं हो रहे हैं। वेतन बिल बनाने वाले सरकारी कार्मिक, तकनीकी जानकार, डीडीओ के साथ यहां तक कि ट्रेजरी कार्यालय के कार्मिक भी कई बार नए पोर्टल की समस्याओं से अनभिज्ञता जाहिर करते हैं। पोर्टल पर आने वाली समस्याओं का निस्तारण कही से नहीं हो पा रहा है। सिस्टम को अपडेट करने की जरूरत है।
*हेल्प डेस्क से नहीं मिल रही हेल्प*
आईएफएमएस पर वेतन, एरियर सहित विभिन्न बिलों में आ रही तकनीकी समस्याओं के लिए हेल्प डेस्क बनाई गई है। यहां डीडीओ द्वारा किसी समस्या को लेकर कोई कॉल किया जाता है, तो कोई कॉल ही नहीं उठाता है। यहीं नहीं हेल्प डेस्क पर कोई तकनीकी समस्या भी भेजी जाती है, तो उसका प्रतिउत्तर भी नहीं मिल रहा है। ऐसे में सरकारी विभागों के अधिकारी, कार्मिक एवं शिक्षक हर रोज विविध समस्याओं से परेशान हो रहे हैं।
*ये आ रही हैं समस्याएं*
किसी कर्मचारी का पुराना वेतन एरियर का भुगतान होने पर ही उस कार्मिक का बकाया अन्य वेतन एरियर बना सकते हैं।
सैलरी एरियर में ड्यू ड्रॉन स्टेटमेंट में एरियर बनाने में वास्तविक राशि में अंतर आता है और संशोधन का विकल्प नहीं है।
सैलरी एरियर का हर कर्मचारी का पृथक से बिल बनाना पड़ रहा है।
कर्मचारी का स्थानांतरण होने पर यदि कोई एरियर पेंडिंग है, तो पे-मैनेजर की तर्ज पर (अदर ऑफिस इपालाइ ) का ऑप्शन मौजूद नहीं है।
सर्विस डिटेल अपडेट नहीं हो पा रही है।
कार्मिक का एरियर बनाने में हर बार रिजन, रिजन डेट, सर्विस कैटेगरी, सब सर्विस केटेगरी, पद को भरना पड़ता है।
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एरियर बिल बनाने पर किसी कार्मिक का डीए एरियर मानइस आता है।
धीमी गति से चलता है
पीएल सरेंडर में डीडीओ-एचओ-डीडीओ रोल बार बार चयन कर बिल बनाना पड़ता है।
एक साथ सभी कार्यरत कार्मिक प्रदर्शित नहीं होते है। एक बार में पांच ही देख पाते हैं। इसलिए कई बार प्रोसेस रिपीट करना होता हैं।
सभी कार्य एक ही आईडी से होने से आहरण वितरण अधिकारी (डीडीओ) को अपनी आईडी और पासवर्ड सार्वजनिक करनी पड़ रही है।
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