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करीब 21 द्वीपों के साथ मन्नार की खाड़ी जीवमंडल आरक्षित क्षेत्र मुहानों, सुनहरे समुद्र तटों और कीचड़ वाले मैदानों से सजी एक अलग दुनिया है। लगभग 560 वर्ग किलोमीटर में फैला यह समुद्री उद्यान तमिलनाडु के थूथुकुडी, तिरुनेलवेली, रामेश्वरम और कन्याकुमारी तटों को समेटे हुए है।
यहाँ समुद्री घास, प्रवाल भित्तियाँ, शैवाल समुदाय, खारे दलदल और मैंग्रोव मिलकर एक जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र रचते हैं, जहाँ समृद्ध जैवमंडल में लगभग 3,600 से अधिक पौधों और जीवों की प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमे 6 मैंग्रोव प्रजातियाँ जैसी लुप्तप्राय प्रजातियाँ भी शामिल हैं।
पाँच प्रकार के कछुए, डॉल्फ़िन, व्हेल, समुद्री खीरे और 11 समुद्री घास व 117 कठोर मूंगों की प्रजातियाँ इसे और भी विशेष बनाती हैं। यही कारण है कि यहाँ की प्रवाल चट्टानों को अक्सर ‘पानी के नीचे का उष्णकटिबंधीय वर्षावन’ कहा जाता है।
यहाँ समुद्री घास, प्रवाल भित्तियाँ, शैवाल समुदाय, खारे दलदल और मैंग्रोव मिलकर एक जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र रचते हैं, जहाँ समृद्ध जैवमंडल में लगभग 3,600 से अधिक पौधों और जीवों की प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमे 6 मैंग्रोव प्रजातियाँ जैसी लुप्तप्राय प्रजातियाँ भी शामिल हैं।
पाँच प्रकार के कछुए, डॉल्फ़िन, व्हेल, समुद्री खीरे और 11 समुद्री घास व 117 कठोर मूंगों की प्रजातियाँ इसे और भी विशेष बनाती हैं। यही कारण है कि यहाँ की प्रवाल चट्टानों को अक्सर ‘पानी के नीचे का उष्णकटिबंधीय वर्षावन’ कहा जाता है।