📌 दो और सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के समूह आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ भारत का कड़ा संदेश, 'ज़ीरो टॉलरेंस' (zero tolerance) लेकर नई दिल्ली से रवाना हो गए हैं।
📌 भाजपा सांसद बैजयंत पांडा के नेतृत्व में समूह I बहरीन, कुवैत, सऊदी अरब और अल्जीरिया का दौरा करेगा।
📌 कांग्रेस सांसद शशि थरूर के नेतृत्व में समूह II यूएसए (USA), पनामा, गुयाना, ब्राजील और कोलंबिया का दौरा करेगा 🇮🇳
📌 भाजपा सांसद बैजयंत पांडा के नेतृत्व में समूह I बहरीन, कुवैत, सऊदी अरब और अल्जीरिया का दौरा करेगा।
📌 कांग्रेस सांसद शशि थरूर के नेतृत्व में समूह II यूएसए (USA), पनामा, गुयाना, ब्राजील और कोलंबिया का दौरा करेगा 🇮🇳
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📌 जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की उपलब्धि हासिल करने वाला भारत 2028 तक जर्मनी से आगे निकलते हुए तीसरी सबसे बड़ी जीडीपी बन जाएगा। तब सिर्फ अमेरिका और चीन ही इस मामले में भारत से आगे होंगे।
📌 नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रमण्यम ने कहा, वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है।
📌 नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रमण्यम ने कहा, वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है।
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शालाओं_का_युक्तियुक्तकरण_आदेश.pdf
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शालाओं का युक्तियुक्तकरण आदेश.pdf
Final Goshwara.pdf
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📜 भारत की कुल 11 शास्त्रीय भाषाएँ और उनके मान्यता वर्ष
1.तमिल – 2004
2.संस्कृत – 2005
3.कन्नड़ – 2008
4.तेलुगु – 2008
5.मलयालम – 2013
6. ओड़िया – 2014
7.मराठी – 2024
8.बंगाली – 2024
9.असमिया – 2024
10.पाली – 2024
11प्राकृत – 2024
📌 शास्त्रीय भाषा का दर्जा प्राप्त करने के लिए आवश्यक मानदंड:
1.प्राचीनता: भाषा के प्रारंभिक ग्रंथों का इतिहास कम से कम 1500–2000 वर्ष पुराना होना चाहिए।
2.समृद्ध साहित्य: प्राचीन साहित्य का एक भाग होना चाहिए जिसे पीढ़ियों द्वारा मूल्यवान विरासत माना गया हो।3.मौलिकता: साहित्यिक परंपरा में मौलिकता हो और यह किसी अन्य भाषा समुदाय से उधार न ली गई हो।
Note- 2024 में यह मानदंड बदला गया और अब "ज्ञान ग्रंथ" की परिभाषा में यह शामिल किया गया है:"ज्ञान ग्रंथ (विशेष रूप से कविता, पुरालेखीय और शिलालेखीय साक्ष्य के साथ गद्य ग्रंथ)"
यानी अब इसमें केवल मौलिक साहित्य ही नहीं, बल्कि कविता, गद्य ग्रंथ, पुरालेख और शिलालेखीय साक्ष्य भी शामिल माने जाते हैं।
4.अलग पहचान: शास्त्रीय भाषा और साहित्य का आधुनिक भाषा और साहित्य से भिन्न होना आवश्यक है।
2024 में शास्त्रीय दर्जा प्राप्त नई 5 भाषाएँ: मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया, बंगाली
1.तमिल – 2004
2.संस्कृत – 2005
3.कन्नड़ – 2008
4.तेलुगु – 2008
5.मलयालम – 2013
6. ओड़िया – 2014
7.मराठी – 2024
8.बंगाली – 2024
9.असमिया – 2024
10.पाली – 2024
11प्राकृत – 2024
📌 शास्त्रीय भाषा का दर्जा प्राप्त करने के लिए आवश्यक मानदंड:
1.प्राचीनता: भाषा के प्रारंभिक ग्रंथों का इतिहास कम से कम 1500–2000 वर्ष पुराना होना चाहिए।
2.समृद्ध साहित्य: प्राचीन साहित्य का एक भाग होना चाहिए जिसे पीढ़ियों द्वारा मूल्यवान विरासत माना गया हो।3.मौलिकता: साहित्यिक परंपरा में मौलिकता हो और यह किसी अन्य भाषा समुदाय से उधार न ली गई हो।
Note- 2024 में यह मानदंड बदला गया और अब "ज्ञान ग्रंथ" की परिभाषा में यह शामिल किया गया है:"ज्ञान ग्रंथ (विशेष रूप से कविता, पुरालेखीय और शिलालेखीय साक्ष्य के साथ गद्य ग्रंथ)"
यानी अब इसमें केवल मौलिक साहित्य ही नहीं, बल्कि कविता, गद्य ग्रंथ, पुरालेख और शिलालेखीय साक्ष्य भी शामिल माने जाते हैं।
4.अलग पहचान: शास्त्रीय भाषा और साहित्य का आधुनिक भाषा और साहित्य से भिन्न होना आवश्यक है।
2024 में शास्त्रीय दर्जा प्राप्त नई 5 भाषाएँ: मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया, बंगाली
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कांग्रेस पूर्व स्थापित संस्थाएं
◼️ईस्ट इंडिया एसोसिएशन: 1866: लन्दन
संस्थापक: दादाभाई नौरोजी
◼️ इंडियन सोसाइटी: 1872: लन्दन
संस्थापक: आनंद मोहन बो
◼️ इंडियन एसोसिएशन: 1876: कोलकाता
संस्थापक: आनंद मोहन बोस और एस एन बनर्जी
◼️पूना सार्वजनिक सभा: 1870: पूना
संस्थापक: एस एच चिपलुणकर, जी वी जोशी और एम् जी राणाडे
◼️ मद्रास महाजन सभा: 1884: चेन्नई
संस्थापक: जी एस अय्यर, एम् विरंघवाचारी और आनंद चारलु
◼️बॉम्बे प्रेसीडेंसी एसोसिएशन: 1885: मुंबई (पूर्व नाम: बम्बाई)
संस्थापक: फिरोजशाह मेहता, के टी तेलांग और बदरुद्दीन तैयबजी
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पर्यावरण से सम्बंधित महत्वपूर्ण सम्मेलन
◾️रामसर कन्वेंशन - 1971
◾️ वन्य जीवों और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन (CITES) - 1973
◾️बॉन कन्वेंशन - 1979
◾️मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल - 1987
◾️वियना कन्वेंशन - 1988
◾️बेसल कन्वेंशन - 1989
◾️जैविक विविधता पर कन्वेंशन (CBD) -1992
◾️जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC)-1992
◾️रियो शिखर सम्मेलन - 1992
◾️मरुस्थलीकरण से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन (UNCCD) - 1994
◾️क्योटो प्रोटोकोल - 1997
◾️रॉटरडैम कन्वेंशन - 1998
◾️जैव सुरक्षा पर कार्टाजेना प्रोटोकॉल -2000
◾️स्टॉकहोम कन्वेंशन - 2001
◾️UN-REDD - 2008
◾️नागोया प्रोटोकॉल - 2010
◾️मिनामाता कन्वेंशन - 2013
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