थोड़ा ऊपर उड़ते हुए मरेंगे
बजाय किसी अपने रचे दलदल में
बुझेंगे बेशक बुझेंगे
पर बुझते हुए नहीं जलते हुए बुझेंगे
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बुझेंगे बेशक बुझेंगे
पर बुझते हुए नहीं जलते हुए बुझेंगे
🔥98❤10❤🔥8🤣6
अशोक के किस अभिलेख में पशुओं के वध (killing) की एक प्रतिबंधित सूची दी गई है
Anonymous Quiz
29%
पहला शिलालेख
38%
पांचवा शिलालेख
21%
पहला स्तंभ लेख
12%
पांचवा स्तंभ लेख
👌19❤4💯3
वायुमंडल की किस परत का तापमान सबसे काम होता है
Anonymous Quiz
21%
क्षोभ मंडल
34%
सम ताप मंडल
16%
मध्य मंडल
29%
बाह्य मंडल
❤10
प्रेम में पड़ी स्त्री का नाराज होकर DP हटा लेना,
प्रेमी के लिए भारत बंद जैसा होता है ।
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https://youtu.be/zs1HgvlH2UY?si=cxaCoVEOlKLIHO9W
Prasoon sahab ka podcast hai jarur dekhen.. bhut kuch sikhne milenga❤️
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Success का मूलमंत्र। Secrets to crack CGPSC। Prasoon Gupta (DSP)
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🏫 Head Office – Bilaspur…
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❤16💯1
All the best everyone for Tommorows exam
Stay confident you'll do great 🔥 💪
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❤38
New Doc 01-18-2026 14.13.pdf
7.8 MB
अधीक्षक (महिला एवं बाल विकास)
इसमें CG GS के pattern को देखिए.. और उस हिसाब से भी अपना आंकलन करें।
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शहीद गेंद सिंह छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और 'बस्तर के प्रथम शहीद' माने जाते हैं। उन्होंने 1825 में अंग्रेजों और मराठों के शोषण के विरुद्ध परलकोट विद्रोह का नेतृत्व किया था।
प्रारंभिक जीवन और परिचय
पद: वे बस्तर रियासत के अंतर्गत परलकोट के जमींदार थे।
व्यक्तित्व: उन्हें जनता के बीच 'नायक' और प्यार से 'बाऊ' कहा जाता था। वे हल्बा जनजाति से संबंधित थे और अपनी प्रजा की भलाई के लिए समर्पित थे।
परलकोट विद्रोह (1824-25)
शहीद गेंद सिंह ने आदिवासियों को एकजुट कर ब्रिटिश हुकूमत और मराठा शासकों के खिलाफ विद्रोह किया। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित थे:
शोषण के विरुद्ध: अंग्रेज और मराठा अधिकारी आदिवासियों का आर्थिक शोषण कर रहे थे।
बाहरी हस्तक्षेप: बस्तर के अबुझमाड़ क्षेत्र में बाहरी लोगों (जिन्हें 'धाकड़' कहा जाता था) के प्रवेश और नए करों (सिंचाई कर आदि) के कारण आदिवासियों में भारी आक्रोश था।
प्रतीक चिन्ह: विद्रोह का संदेश फैलाने के लिए 'धावड़ा वृक्ष की टहनी' का उपयोग गुप्त संदेश के रूप में किया गया था।
शहादत
विद्रोह की तीव्रता को देखते हुए छत्तीसगढ़ के तत्कालीन ब्रिटिश प्रशासक एग्न्यू ने कैप्टन पैबे (Captain Pew) के नेतृत्व में सेना भेजी।
गिरफ्तारी: 10 जनवरी 1825 को ब्रिटिश सेना ने परलकोट को घेर लिया। प्रजा को भीषण तबाही से बचाने के लिए गेंद सिंह ने आत्मसमर्पण कर दिया।
फाँसी: गिरफ्तारी के मात्र 10 दिन बाद, 20 जनवरी 1825 को उन्हें उनके ही परलकोट महल के सामने फाँसी दे दी गई।
विरासत और सम्मान
उन्हें 'बस्तर का प्रथम शहीद' और छत्तीसगढ़ का प्रथम बलिदानी कहा जाता है।
उनके सम्मान में कांकेर जिले के चारामा में एक शासकीय महाविद्यालय का नाम 'शहीद गेंदसिंह महाविद्यालय' रखा गया है।
हर साल 20 जनवरी को उनकी शहादत को नमन करने के लिए विभिन्न स्थानों पर गौरव दिवस और श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की जाती हैं।
प्रारंभिक जीवन और परिचय
पद: वे बस्तर रियासत के अंतर्गत परलकोट के जमींदार थे।
व्यक्तित्व: उन्हें जनता के बीच 'नायक' और प्यार से 'बाऊ' कहा जाता था। वे हल्बा जनजाति से संबंधित थे और अपनी प्रजा की भलाई के लिए समर्पित थे।
परलकोट विद्रोह (1824-25)
शहीद गेंद सिंह ने आदिवासियों को एकजुट कर ब्रिटिश हुकूमत और मराठा शासकों के खिलाफ विद्रोह किया। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित थे:
शोषण के विरुद्ध: अंग्रेज और मराठा अधिकारी आदिवासियों का आर्थिक शोषण कर रहे थे।
बाहरी हस्तक्षेप: बस्तर के अबुझमाड़ क्षेत्र में बाहरी लोगों (जिन्हें 'धाकड़' कहा जाता था) के प्रवेश और नए करों (सिंचाई कर आदि) के कारण आदिवासियों में भारी आक्रोश था।
प्रतीक चिन्ह: विद्रोह का संदेश फैलाने के लिए 'धावड़ा वृक्ष की टहनी' का उपयोग गुप्त संदेश के रूप में किया गया था।
शहादत
विद्रोह की तीव्रता को देखते हुए छत्तीसगढ़ के तत्कालीन ब्रिटिश प्रशासक एग्न्यू ने कैप्टन पैबे (Captain Pew) के नेतृत्व में सेना भेजी।
गिरफ्तारी: 10 जनवरी 1825 को ब्रिटिश सेना ने परलकोट को घेर लिया। प्रजा को भीषण तबाही से बचाने के लिए गेंद सिंह ने आत्मसमर्पण कर दिया।
फाँसी: गिरफ्तारी के मात्र 10 दिन बाद, 20 जनवरी 1825 को उन्हें उनके ही परलकोट महल के सामने फाँसी दे दी गई।
विरासत और सम्मान
उन्हें 'बस्तर का प्रथम शहीद' और छत्तीसगढ़ का प्रथम बलिदानी कहा जाता है।
उनके सम्मान में कांकेर जिले के चारामा में एक शासकीय महाविद्यालय का नाम 'शहीद गेंदसिंह महाविद्यालय' रखा गया है।
हर साल 20 जनवरी को उनकी शहादत को नमन करने के लिए विभिन्न स्थानों पर गौरव दिवस और श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की जाती हैं।
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IGKV द्वारा विकसित फसल व कृषि से संबधित योजनाएं जो अक्सर पूछे जाते हैं। 👇🏻👇🏻
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