New Doc 01-18-2026 14.13.pdf
7.8 MB
अधीक्षक (महिला एवं बाल विकास)
इसमें CG GS के pattern को देखिए.. और उस हिसाब से भी अपना आंकलन करें।
इसमें CG GS के pattern को देखिए.. और उस हिसाब से भी अपना आंकलन करें।
❤13
शहीद गेंद सिंह छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और 'बस्तर के प्रथम शहीद' माने जाते हैं। उन्होंने 1825 में अंग्रेजों और मराठों के शोषण के विरुद्ध परलकोट विद्रोह का नेतृत्व किया था।
प्रारंभिक जीवन और परिचय
पद: वे बस्तर रियासत के अंतर्गत परलकोट के जमींदार थे।
व्यक्तित्व: उन्हें जनता के बीच 'नायक' और प्यार से 'बाऊ' कहा जाता था। वे हल्बा जनजाति से संबंधित थे और अपनी प्रजा की भलाई के लिए समर्पित थे।
परलकोट विद्रोह (1824-25)
शहीद गेंद सिंह ने आदिवासियों को एकजुट कर ब्रिटिश हुकूमत और मराठा शासकों के खिलाफ विद्रोह किया। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित थे:
शोषण के विरुद्ध: अंग्रेज और मराठा अधिकारी आदिवासियों का आर्थिक शोषण कर रहे थे।
बाहरी हस्तक्षेप: बस्तर के अबुझमाड़ क्षेत्र में बाहरी लोगों (जिन्हें 'धाकड़' कहा जाता था) के प्रवेश और नए करों (सिंचाई कर आदि) के कारण आदिवासियों में भारी आक्रोश था।
प्रतीक चिन्ह: विद्रोह का संदेश फैलाने के लिए 'धावड़ा वृक्ष की टहनी' का उपयोग गुप्त संदेश के रूप में किया गया था।
शहादत
विद्रोह की तीव्रता को देखते हुए छत्तीसगढ़ के तत्कालीन ब्रिटिश प्रशासक एग्न्यू ने कैप्टन पैबे (Captain Pew) के नेतृत्व में सेना भेजी।
गिरफ्तारी: 10 जनवरी 1825 को ब्रिटिश सेना ने परलकोट को घेर लिया। प्रजा को भीषण तबाही से बचाने के लिए गेंद सिंह ने आत्मसमर्पण कर दिया।
फाँसी: गिरफ्तारी के मात्र 10 दिन बाद, 20 जनवरी 1825 को उन्हें उनके ही परलकोट महल के सामने फाँसी दे दी गई।
विरासत और सम्मान
उन्हें 'बस्तर का प्रथम शहीद' और छत्तीसगढ़ का प्रथम बलिदानी कहा जाता है।
उनके सम्मान में कांकेर जिले के चारामा में एक शासकीय महाविद्यालय का नाम 'शहीद गेंदसिंह महाविद्यालय' रखा गया है।
हर साल 20 जनवरी को उनकी शहादत को नमन करने के लिए विभिन्न स्थानों पर गौरव दिवस और श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की जाती हैं।
प्रारंभिक जीवन और परिचय
पद: वे बस्तर रियासत के अंतर्गत परलकोट के जमींदार थे।
व्यक्तित्व: उन्हें जनता के बीच 'नायक' और प्यार से 'बाऊ' कहा जाता था। वे हल्बा जनजाति से संबंधित थे और अपनी प्रजा की भलाई के लिए समर्पित थे।
परलकोट विद्रोह (1824-25)
शहीद गेंद सिंह ने आदिवासियों को एकजुट कर ब्रिटिश हुकूमत और मराठा शासकों के खिलाफ विद्रोह किया। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित थे:
शोषण के विरुद्ध: अंग्रेज और मराठा अधिकारी आदिवासियों का आर्थिक शोषण कर रहे थे।
बाहरी हस्तक्षेप: बस्तर के अबुझमाड़ क्षेत्र में बाहरी लोगों (जिन्हें 'धाकड़' कहा जाता था) के प्रवेश और नए करों (सिंचाई कर आदि) के कारण आदिवासियों में भारी आक्रोश था।
प्रतीक चिन्ह: विद्रोह का संदेश फैलाने के लिए 'धावड़ा वृक्ष की टहनी' का उपयोग गुप्त संदेश के रूप में किया गया था।
शहादत
विद्रोह की तीव्रता को देखते हुए छत्तीसगढ़ के तत्कालीन ब्रिटिश प्रशासक एग्न्यू ने कैप्टन पैबे (Captain Pew) के नेतृत्व में सेना भेजी।
गिरफ्तारी: 10 जनवरी 1825 को ब्रिटिश सेना ने परलकोट को घेर लिया। प्रजा को भीषण तबाही से बचाने के लिए गेंद सिंह ने आत्मसमर्पण कर दिया।
फाँसी: गिरफ्तारी के मात्र 10 दिन बाद, 20 जनवरी 1825 को उन्हें उनके ही परलकोट महल के सामने फाँसी दे दी गई।
विरासत और सम्मान
उन्हें 'बस्तर का प्रथम शहीद' और छत्तीसगढ़ का प्रथम बलिदानी कहा जाता है।
उनके सम्मान में कांकेर जिले के चारामा में एक शासकीय महाविद्यालय का नाम 'शहीद गेंदसिंह महाविद्यालय' रखा गया है।
हर साल 20 जनवरी को उनकी शहादत को नमन करने के लिए विभिन्न स्थानों पर गौरव दिवस और श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की जाती हैं।
❤34🙏3👍1
IGKV द्वारा विकसित फसल व कृषि से संबधित योजनाएं जो अक्सर पूछे जाते हैं। 👇🏻👇🏻
💯9👍2❤1🏆1
👍9❤3🔥3💯1
कुछ सपने हैं जो लाइब्रेरी की सीट पर हमें घंटों रोके रखते हैं 🔥
वरना थकना हम भी जानते हैं 🥹
वरना थकना हम भी जानते हैं 🥹
❤101🔥16🤣7👌5❤🔥3👍2
कौन सा कथन सत्य है-
श्वसन के दौरान पौधे
श्वसन के दौरान पौधे
Anonymous Quiz
22%
O2 लेते है और Co2 छोड़ते है
46%
CO2 लेते है और o2 छोड़ते है
28%
CO2 ग्रहण करने और O2 छोड़ने की क्रिया एक साथ होती है
3%
पौधों मे श्वसन दर प्राणियों की अपेक्षा तीव्र होती है
❤11🔥5👌1