पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई के मरणोपरांत सम्मान में राज्य सरकार के निर्णय
📌 'पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई राज्य सम्मान' की स्थापना की जाएगी, जिसके माध्यम से लोक कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित किया जाएगा।
📌 गनियारी (जिला दुर्ग), जो डॉ. तीजन बाई का जन्मस्थान है, को 'कलाग्राम' के रूप में विकसित किया जाएगा ताकि छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति एवं पंडवानी कला का संरक्षण और संवर्धन हो सके।
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मुख्य परीक्षा देकर बाहर निकलने के बाद अक्सर सुनने को मिलता है-
"बिना पढ़े भी आते, तो इतना ही लिख लेते"
लेकिन आज के CGPSC pre ,Mainsका पैटर्न अब वैसा नहीं रहा।
केवल वही निकलेगा जो साल भर पढ़ेगा।
अब प्रश्न केवल सामान्य जानकारी नहीं पूछते, बल्कि समझ, विश्लेषण, समसामयिक घटनाओं की पकड़ और उत्तर लेखन की गुणवत्ता की परीक्षा लेते हैं।
जो अभ्यर्थी पूरे साल लगातार पढ़ते हैं, नोट्स बनाते हैं, करंट अफेयर्स से जुड़े रहते हैं और उत्तर लेखन का अभ्यास करते हैं, वही परीक्षा हॉल में अंतर पैदा करते हैं।
परीक्षा के बाद सबको अपना पेपर अच्छा या सामान्य लग सकता है, लेकिन असली अंतर मूल्यांकन में दिखता है।
इसलिए किसी की परीक्षा के बाद की राय से अपनी तैयारी का मूल्यांकन मत कीजिए। CGPSC Mains अब निरंतर और गंभीर तैयारी करने वालों की परीक्षा बन चुकी है।
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cgpsc_current_affairs_v2.pdf
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11 जुलाई का महत्वपूर्ण समसामयिक घटनाक्रम ( To the point)
• छत्तीसगढ़ विशेष
• राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम
• छत्तीसगढ़ विशेष
• राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम
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cgpsc_current_affairs_12_july_2026.pdf
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12 जुलाई 2026 के महत्वपूर्ण करेंट अफेयर्स
• छत्तीसगढ़
• राष्ट्रीय
• अंतरराष्ट्रीय
• स्पोर्ट्स
विशेष
• छत्तीसगढ़
• राष्ट्रीय
• अंतरराष्ट्रीय
• स्पोर्ट्स
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13_July_2026_Current_Affairs_Bilingual.pdf
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13_July_2026_Current_Affairs_Bilingual.pdf
• Nationa/international Current Affairs
• Nationa/international Current Affairs
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International Booker Prize 2027
✅ 2027 से आधिकारिक नाम: Bukhman International Booker Prize
✅ पुरस्कार राशि: £100,000 (लगभग ₹1.28 करोड़)
✅ पुरस्कार राशि पहले से दोगुनी कर दी गई है।
✅ राशि लेखक (Author) और अनुवादक (Translator) के बीच बराबर बांटी जाएगी।
✅ उद्देश्य: अनुवादित साहित्य और वैश्विक साहित्यिक संवाद को बढ़ावा देना।
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📍 1877 में रायपुर आये थे 14 साल के नरेंद्र स्वामी विवेकानंद के पिता विश्वनाथ दत्त वकालत के सिलसिले में रायपुर में आये थे।
📌 उनके यहां रहने के दौरान 1877 में 14 साल के नरेंद्र नाथ दत्त, जो बाद में स्वामी विवेकानंद के नाम से प्रसिद्ध हुए, रायपुर आये थे। उनके साथ उनकी मां भुवनेश्वरी देवी, उनके छोटे भाई महेंद्र नाथ दत्त और बहन जोगेंद्र बाला भी थीं.
📍 वे कोलकाता से नागपुर पहुंचे, जहां से उनका परिवार बैलगाड़ी से लंबी यात्रा कर रायपुर पहुंचा था।
📍 विश्वनाथ दत्त का परिवार इसी डे-भवन नाम की इमारत में 1879 तक रहा। बाद में यह परिवार वापस कोलकाता चला गया।
📌 उनके यहां रहने के दौरान 1877 में 14 साल के नरेंद्र नाथ दत्त, जो बाद में स्वामी विवेकानंद के नाम से प्रसिद्ध हुए, रायपुर आये थे। उनके साथ उनकी मां भुवनेश्वरी देवी, उनके छोटे भाई महेंद्र नाथ दत्त और बहन जोगेंद्र बाला भी थीं.
📍 वे कोलकाता से नागपुर पहुंचे, जहां से उनका परिवार बैलगाड़ी से लंबी यात्रा कर रायपुर पहुंचा था।
📍 विश्वनाथ दत्त का परिवार इसी डे-भवन नाम की इमारत में 1879 तक रहा। बाद में यह परिवार वापस कोलकाता चला गया।
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