छत्तीसगढ़ में राम वनगमन पथ विकास परियोजनाl
वर्तमान सरकार ने इस योजना का विस्तार करते हुए तीन चरणों में 31 धार्मिक स्थलों को विकसित करने का निर्णय लिया है।
• नया विकास मॉडल: इन 31 स्थलों पर श्रद्धालुओं के लिए आश्रम, सीता रसोई और सत्संग भवन बनाए जाएंगे। आवश्यकता के अनुसार भगवान राम की मूर्तियां भी स्थापित की जाएंगी।
• बजट: पहले चरण के 10 स्थलों के सर्वेक्षण और शुरुआती कार्यों के लिए 62 करोड़ रुपये का प्रारंभिक बजट रखा गया है।
• कार्यकाल: यह योजना तीन चरणों में वर्ष 2026 से 2029 के बीच पूरी की जाएगी।
वर्तमान सरकार ने इस योजना का विस्तार करते हुए तीन चरणों में 31 धार्मिक स्थलों को विकसित करने का निर्णय लिया है।
• नया विकास मॉडल: इन 31 स्थलों पर श्रद्धालुओं के लिए आश्रम, सीता रसोई और सत्संग भवन बनाए जाएंगे। आवश्यकता के अनुसार भगवान राम की मूर्तियां भी स्थापित की जाएंगी।
• बजट: पहले चरण के 10 स्थलों के सर्वेक्षण और शुरुआती कार्यों के लिए 62 करोड़ रुपये का प्रारंभिक बजट रखा गया है।
• कार्यकाल: यह योजना तीन चरणों में वर्ष 2026 से 2029 के बीच पूरी की जाएगी।
दक्षिण अफ्रीका की जानी-मानी न्यायविद और मानवाधिकार विशेषज्ञ नावी पिल्लई (Navi Pillay) को 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार मिलने की घोषणा किया गया है।
• नावी पिल्लई — जो भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी न्यायविद हैं।
• क्यों मिला: रंगभेद (Apartheid) के खिलाफ उनकी लंबी लड़ाई और अंतर्राष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के प्रयासों के लिए उन्हें इस प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया है।
भारत से संबंध: उनका पारिवारिक संबंध तमिलनाडु से है। उनके पिता नारायणसामी नायडू और माता सुशीला नायडू मूल रूप से भारत के दक्षिणी राज्य तमिलनाडु से ताल्लुक रखते थे।
• नावी पिल्लई — जो भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी न्यायविद हैं।
• क्यों मिला: रंगभेद (Apartheid) के खिलाफ उनकी लंबी लड़ाई और अंतर्राष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के प्रयासों के लिए उन्हें इस प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया है।
भारत से संबंध: उनका पारिवारिक संबंध तमिलनाडु से है। उनके पिता नारायणसामी नायडू और माता सुशीला नायडू मूल रूप से भारत के दक्षिणी राज्य तमिलनाडु से ताल्लुक रखते थे।
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के बतौली को मिला टीबी मुक्त विकासखंड का दर्जा, जो छत्तीसगढ़ और भारत स्तर पर एक बड़ी उपलब्धि है।
• केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा और छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के नेतृत्व में नई दिल्ली के भारत मंडपम से राष्ट्रव्यापी जोश (JOSH - Joint Squad for Health) कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
इस अभियान के तहत देश के 55 जिलों में युवा शक्ति और जनभागीदारी के माध्यम से घर-घर जाकर टीबी के संभावित मरीजों की पहचान, जांच, पोषण सहायता और उपचार किया जाएगा।
छत्तीसगढ़ में बतौली सहित 04 विकासखंडों (खड़गंवा, सोनहत, बतौली व घरघोड़ा) को टीबी मुक्त विकासखंड घोषित किया गया है।
• केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा और छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के नेतृत्व में नई दिल्ली के भारत मंडपम से राष्ट्रव्यापी जोश (JOSH - Joint Squad for Health) कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
इस अभियान के तहत देश के 55 जिलों में युवा शक्ति और जनभागीदारी के माध्यम से घर-घर जाकर टीबी के संभावित मरीजों की पहचान, जांच, पोषण सहायता और उपचार किया जाएगा।
छत्तीसगढ़ में बतौली सहित 04 विकासखंडों (खड़गंवा, सोनहत, बतौली व घरघोड़ा) को टीबी मुक्त विकासखंड घोषित किया गया है।
कर्मचारी चयन आयोग (SSC) CHSL के तहत 2,536 पदों पर भर्ती की जाएगी।
• शामिल पद: एलडीसी (LDC), जेएसए (JSA), डाटा एंट्री ऑपरेटर (DEO), और डीईओ ग्रेड-ए (DEO Grade-A)।
• शैक्षणिक योग्यता: उम्मीदवार का 12वीं पास होना जरूरी है।
• आयु सीमा: 18 से 27 वर्ष (1 अगस्त 2026 के अनुसार), आरक्षित वर्ग को नियमानुसार छूट मिलेगी।
• आधिकारिक वेबसाइट: आप इसकी आधिकारिक वेबसाइट [ssc.gov.in] पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।
• शामिल पद: एलडीसी (LDC), जेएसए (JSA), डाटा एंट्री ऑपरेटर (DEO), और डीईओ ग्रेड-ए (DEO Grade-A)।
• शैक्षणिक योग्यता: उम्मीदवार का 12वीं पास होना जरूरी है।
• आयु सीमा: 18 से 27 वर्ष (1 अगस्त 2026 के अनुसार), आरक्षित वर्ग को नियमानुसार छूट मिलेगी।
• आधिकारिक वेबसाइट: आप इसकी आधिकारिक वेबसाइट [ssc.gov.in] पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।
राष्ट्रीय इस्पात नीति 2047 के मसौदे (Draft) के मुख्य बिंदु:-
उत्पादन क्षमता का लक्ष्य: वर्ष 2047 तक भारत की कच्चे इस्पात (Crude Steel) की उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर 60.4 करोड़ टन करने का लक्ष्य रखा गया है।
• मांग और प्रति व्यक्ति खपत: इस नीति के अनुसार, 2047 तक तैयार इस्पात की मांग 50.5 करोड़ टन और प्रति व्यक्ति इस्पात की खपत 302 किलोग्राम होने का अनुमान है।
• निर्यात का लक्ष्य: देश से इस्पात के निर्यात को 4.5 करोड़ टन तक पहुँचाने का लक्ष्य तय किया गया है।
द्वितीयक इस्पात क्षेत्र (Secondary Steel Sector): इस क्षेत्र में लगभग 2,550 इकाइयाँ काम कर रही हैं, जो देश की कुल कच्चे इस्पात की उत्पादन क्षमता में करीब 47 प्रतिशत का योगदान देती हैं।
उत्पादन क्षमता का लक्ष्य: वर्ष 2047 तक भारत की कच्चे इस्पात (Crude Steel) की उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर 60.4 करोड़ टन करने का लक्ष्य रखा गया है।
• मांग और प्रति व्यक्ति खपत: इस नीति के अनुसार, 2047 तक तैयार इस्पात की मांग 50.5 करोड़ टन और प्रति व्यक्ति इस्पात की खपत 302 किलोग्राम होने का अनुमान है।
• निर्यात का लक्ष्य: देश से इस्पात के निर्यात को 4.5 करोड़ टन तक पहुँचाने का लक्ष्य तय किया गया है।
द्वितीयक इस्पात क्षेत्र (Secondary Steel Sector): इस क्षेत्र में लगभग 2,550 इकाइयाँ काम कर रही हैं, जो देश की कुल कच्चे इस्पात की उत्पादन क्षमता में करीब 47 प्रतिशत का योगदान देती हैं।
पीएम ई-बस सेवा योजना के तहत छत्तीसगढ़ के चार प्रमुख शहरों में कुल 240 इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी।
• शुरुआत की तारीख: 1 नवंबर 2026 तक बिलासपुर और भिलाई में प्रतीकात्मक रूप से 20-20 ई-बसों का संचालन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
शहरवार ई-बसों का आवंटन:
• रायपुर: सबसे अधिक 100 बसें
• दुर्ग-भिलाई: 50 बसें
• बिलासपुर: 50 बसें
• कोरबा: 40 बसें
प्रमुख विशेषताएं: बसों में यात्रियों की सुरक्षा के लिए 6 सीसीटीवी कैमरे, मोबाइल स्कैनर के जरिए किराया भुगतान और ऑनलाइन टिकट की सुविधा उपलब्ध होगी।
• शुरुआत की तारीख: 1 नवंबर 2026 तक बिलासपुर और भिलाई में प्रतीकात्मक रूप से 20-20 ई-बसों का संचालन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
शहरवार ई-बसों का आवंटन:
• रायपुर: सबसे अधिक 100 बसें
• दुर्ग-भिलाई: 50 बसें
• बिलासपुर: 50 बसें
• कोरबा: 40 बसें
प्रमुख विशेषताएं: बसों में यात्रियों की सुरक्षा के लिए 6 सीसीटीवी कैमरे, मोबाइल स्कैनर के जरिए किराया भुगतान और ऑनलाइन टिकट की सुविधा उपलब्ध होगी।
दो अमेरिकी अर्थशास्त्रियों को मिले नोबेल पुरस्कार:-
विजेता: यह पुरस्कार अमेरिकी अर्थशास्त्री रॉबर्ट ई. हॉल (स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय) और माइकल वुडवर्ड (कोलंबिया विश्वविद्यालय) को दिया गया है।
योगदान: दोनों अर्थशास्त्रियों ने ऐसे मॉडल विकसित किए हैं जो सरकारों और केंद्रीय बैंकों को आर्थिक झटकों (Economic Shocks) से निपटने और नीतियां बनाने में मदद करते हैं। इनका शोध यह समझने का आधार प्रदान करता है कि महंगाई या ऊर्जा संकट जैसी स्थितियों में आम लोगों के खर्च करने के फैसले और कंपनियों द्वारा कीमतें तय करने की रणनीति से अर्थव्यवस्था कैसे प्रभावित होती है।
विजेता: यह पुरस्कार अमेरिकी अर्थशास्त्री रॉबर्ट ई. हॉल (स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय) और माइकल वुडवर्ड (कोलंबिया विश्वविद्यालय) को दिया गया है।
योगदान: दोनों अर्थशास्त्रियों ने ऐसे मॉडल विकसित किए हैं जो सरकारों और केंद्रीय बैंकों को आर्थिक झटकों (Economic Shocks) से निपटने और नीतियां बनाने में मदद करते हैं। इनका शोध यह समझने का आधार प्रदान करता है कि महंगाई या ऊर्जा संकट जैसी स्थितियों में आम लोगों के खर्च करने के फैसले और कंपनियों द्वारा कीमतें तय करने की रणनीति से अर्थव्यवस्था कैसे प्रभावित होती है।
महिलाओं को सुरक्षित वातावरण, त्वरित सहायता और न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में प्रदेश के 33 जिलों में 42 सखी वन स्टॉप सेंटर संचालित हैं। इन केंद्रों के माध्यम से संकटग्रस्त एवं जरूरतमंद महिलाओं को आपातकालीन सहायता, बचाव और आश्रय जैसी सुविधाएँ प्रदान कर उन्हें कठिन परिस्थितियों से उबरने में सहयोग दिया जा रहा है।
कृषि में उत्कृष्टता, छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय सम्मान...
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ कृषि विकास और किसान कल्याण के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है।
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के अंतर्गत दंतेवाड़ा जिले को उत्कृष्ट कार्यों के लिए 'Certificate of Excellence' से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान जिले में कृषि विकास और किसानों की उन्नति के लिए किए जा रहे प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ कृषि विकास और किसान कल्याण के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है।
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के अंतर्गत दंतेवाड़ा जिले को उत्कृष्ट कार्यों के लिए 'Certificate of Excellence' से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान जिले में कृषि विकास और किसानों की उन्नति के लिए किए जा रहे प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान है।
सरगुजा संभाग में अंबिकापुर के संजय पार्क में घायल और असहाय वन्यजीवों के उपचार के लिए एक आधुनिक ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर (Transit Treatment Centre) बनाया जाएगा।
• स्वीकृति: इस परियोजना को राज्य वन्य जीव बोर्ड (State Wildlife Board) की स्थायी समिति की बैठक में मंजूरी दे दी गई है।
• लाइसेंस: इस सेंटर के संचालन के लिए सेंट्रल जू अथॉरिटी (Central Zoo Authority - CZA) से लाइसेंस लिया जाएगा।
• सुविधाएं:
• मानव-वन्यजीव संघर्ष या दुर्घटनाओं में घायल होने वाले हिरण और अन्य वन्यजीवों को त्वरित प्राथमिक उपचार दिया जा सकेगा।
• सेंटर के साथ डॉक्टर की भी नियमित उपलब्धता रहेगी।
• यहाँ वन्यजीवों की अल्पकालिक देखरेख (Short-term care) और क्वारंटाइन की सुविधा होगी।
• स्वीकृति: इस परियोजना को राज्य वन्य जीव बोर्ड (State Wildlife Board) की स्थायी समिति की बैठक में मंजूरी दे दी गई है।
• लाइसेंस: इस सेंटर के संचालन के लिए सेंट्रल जू अथॉरिटी (Central Zoo Authority - CZA) से लाइसेंस लिया जाएगा।
• सुविधाएं:
• मानव-वन्यजीव संघर्ष या दुर्घटनाओं में घायल होने वाले हिरण और अन्य वन्यजीवों को त्वरित प्राथमिक उपचार दिया जा सकेगा।
• सेंटर के साथ डॉक्टर की भी नियमित उपलब्धता रहेगी।
• यहाँ वन्यजीवों की अल्पकालिक देखरेख (Short-term care) और क्वारंटाइन की सुविधा होगी।
छत्तीसगढ़ शासन के महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा बच्चों को एनीमिया और कुपोषण से बचाने के लिए चलाए जा रहे 'हर-घर मुनगा' (सहजन) अभियान।
• उद्देश्य: प्रदेश के बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कुपोषण और एनीमिया (खून की कमी) से राहत दिलाना।
• मुनगा के गुण: मुनगा (सहजन) की फलियों और पत्तियों में आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन-ए और विटामिन-सी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
• वितरण और रोपण:
• अभियान के तहत राज्य के प्रत्येक घर में मुनगा के पौधे निःशुल्क वितरित और रोपित किए जाएंगे।
• आंगनबाड़ी केंद्रों, स्कूलों, आश्रमों और छात्रावासों में भी यह पौधे मुफ्त लगाए जाएंगे।
• लगभग 23,500 स्कूलों में 'शाला पोषण वाटिका' विकसित की जाएगी और मध्याह्न भोजन में मुनगा शामिल किया जाएगा।
• उद्देश्य: प्रदेश के बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कुपोषण और एनीमिया (खून की कमी) से राहत दिलाना।
• मुनगा के गुण: मुनगा (सहजन) की फलियों और पत्तियों में आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन-ए और विटामिन-सी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
• वितरण और रोपण:
• अभियान के तहत राज्य के प्रत्येक घर में मुनगा के पौधे निःशुल्क वितरित और रोपित किए जाएंगे।
• आंगनबाड़ी केंद्रों, स्कूलों, आश्रमों और छात्रावासों में भी यह पौधे मुफ्त लगाए जाएंगे।
• लगभग 23,500 स्कूलों में 'शाला पोषण वाटिका' विकसित की जाएगी और मध्याह्न भोजन में मुनगा शामिल किया जाएगा।