✅ B.Ed. vs B.T.C. Court Case
⏩ सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाई कोर्ट का फैसला बरकरार रखते हुए B.Ed. की सारी याचिकाएं खारिज कर दी गई।
⏩ B.Ed. प्राथमिक से बाहर, अब केवल B.T.C. प्राथमिक बनने के योग्य
⏩ पिछली भर्तियों पर नहीं पड़ेगा कोई असर
⏩ कोर्ट ने NCTE के गजट नोटिफिकेशन को खारिज कर दिया गया है।*
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⏩ अभी लोगों कहना है कि कोर्ट ने NCTE के गजट नोटिफिकेशन को खारिज कर दिया गया है। मुझे लगता है ये कहना जल्दबाजी होगी, order copy आने दीजिये तब ही सब साफ़ होगा।
अभी बस ये स्पष्ट है कि कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के निर्णय को सही ठहराया है। ☑️
अब उन्होंने गजट को खारिज किया है या राज्य सरकार के ऊपर छोड़ा हैं कि वे अपने राज्य में अपने हिसाब से नियम बना सकते हैं, यें नहीं पता अभी।
अगर गजट को रद्द कर दिया गया तो KVS की कटऑफ़ धड़ाम से नींचे गिरेगी, ये पक्का है
अभी बस ये स्पष्ट है कि कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के निर्णय को सही ठहराया है। ☑️
अब उन्होंने गजट को खारिज किया है या राज्य सरकार के ऊपर छोड़ा हैं कि वे अपने राज्य में अपने हिसाब से नियम बना सकते हैं, यें नहीं पता अभी।
अगर गजट को रद्द कर दिया गया तो KVS की कटऑफ़ धड़ाम से नींचे गिरेगी, ये पक्का है
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उत्तर प्रदेश परीक्षा | शिक्षक भर्ती UPSSSC PET लेखपाल VDO | UPSC
30718_2021_2_1501_46056_Judgement_11-Aug-2023.pdf
📌 Judgement के कुछ मुख्य बिंदु
✅ B.Ed. को शामिल करने या बाहर करने का निर्णय प्राथमिक विद्यालय में शिक्षकों के लिए योग्यता एक शैक्षणिक निर्णय है, जिसे शैक्षणिक निकाय यानी NCTE द्वारा उचित अध्ययन के बाद लिया जाना चाहिए और बेहतर होगा कि इसे इस विशेषज्ञ निकाय पर छोड़ दिया जाए।
👉🏻 लेकिन जैसा कि हमने बीएड को शामिल करने का निर्णय देखा है। योग्यता के रूप में योग्यता एनसीटीई का एक स्वतंत्र निर्णय नहीं है, बल्कि यह केंद्र सरकार का निर्णय था और एनसीटीई को इसे लागू करने के लिए केवल एनसीटीई अधिनियम की धारा 29 के तहत एक निर्देश के रूप में निर्देशित किया गया था, जिसका एनसीटीई ने पालन किया।
👉🏻 इसलिए हमारी सुविचारित राय में केंद्र सरकार के दिनांक 30.05.2018 के निर्देश और एनसीटीई की दिनांक 28.06.2018 की अधिसूचना आरटीई अधिनियम में निर्धारित सिद्धांतों का उल्लंघन है। इतना ही नहीं, यह अधिसूचना कानून के उद्देश्य और जनादेश के खिलाफ है, जो बच्चों को सार्थक और 'गुणवत्तापूर्ण' प्राथमिक शिक्षा प्रदान करना है।
⏩ दिनांक 28.06.2018 की अधिसूचना उचित विचार-विमर्श के बाद लिया गया एनसीटीई का एक स्वतंत्र निर्णय नहीं है, बल्कि यह केवल केंद्र सरकार के निर्देश का पालन करता है, एक ऐसा निर्देश जो दिन की वस्तुनिष्ठ वास्तविकताओं को ध्यान में रखने में विफल रहता है।
✅ B.Ed. को शामिल करने या बाहर करने का निर्णय प्राथमिक विद्यालय में शिक्षकों के लिए योग्यता एक शैक्षणिक निर्णय है, जिसे शैक्षणिक निकाय यानी NCTE द्वारा उचित अध्ययन के बाद लिया जाना चाहिए और बेहतर होगा कि इसे इस विशेषज्ञ निकाय पर छोड़ दिया जाए।
👉🏻 लेकिन जैसा कि हमने बीएड को शामिल करने का निर्णय देखा है। योग्यता के रूप में योग्यता एनसीटीई का एक स्वतंत्र निर्णय नहीं है, बल्कि यह केंद्र सरकार का निर्णय था और एनसीटीई को इसे लागू करने के लिए केवल एनसीटीई अधिनियम की धारा 29 के तहत एक निर्देश के रूप में निर्देशित किया गया था, जिसका एनसीटीई ने पालन किया।
👉🏻 इसलिए हमारी सुविचारित राय में केंद्र सरकार के दिनांक 30.05.2018 के निर्देश और एनसीटीई की दिनांक 28.06.2018 की अधिसूचना आरटीई अधिनियम में निर्धारित सिद्धांतों का उल्लंघन है। इतना ही नहीं, यह अधिसूचना कानून के उद्देश्य और जनादेश के खिलाफ है, जो बच्चों को सार्थक और 'गुणवत्तापूर्ण' प्राथमिक शिक्षा प्रदान करना है।
⏩ दिनांक 28.06.2018 की अधिसूचना उचित विचार-विमर्श के बाद लिया गया एनसीटीई का एक स्वतंत्र निर्णय नहीं है, बल्कि यह केवल केंद्र सरकार के निर्देश का पालन करता है, एक ऐसा निर्देश जो दिन की वस्तुनिष्ठ वास्तविकताओं को ध्यान में रखने में विफल रहता है।
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30718_2021_2_1501_46056_Judgement_11-Aug-2023.pdf
📌 Judgement के कुछ मुख्य बिंदु
⏩ शासन स्तर पर बीएड को शामिल करने का निर्णय लिया गया। चूँकि प्राथमिक स्तर पर शिक्षकों के लिए योग्यता एक नीतिगत निर्णय है, हमें कहना होगा कि यह निर्णय सही नहीं है क्योंकि यह अधिनियम के उद्देश्य के विपरीत है। वास्तव में, यह अनुच्छेद 21ए के तहत संविधान में निहित मौलिक अधिकार की भावना और अक्षरशः के विरुद्ध है। यह अधिनियम के विशिष्ट आदेश के विरुद्ध है, जो बच्चों को मुफ्त, अनिवार्य और सार्थक प्राथमिक शिक्षा का आह्वान करता है।
🛑 प्राथमिक विद्यालय के लिए शिक्षकों की योग्यता के रूप में B.Ed. को शामिल करके केंद्र सरकार ने संविधान के प्रावधानों और कानूनों के खिलाफ काम किया है।
👉🏻 केंद्र सरकार द्वारा बीएड को शामिल करने का एकमात्र तर्क दिया गया है। एक योग्यता के रूप में यह एक 'उच्च योग्यता' है। यह हम पहले ही देख चुके हैं कि यह सही नहीं है। इन परिस्थितियों में, हमें यह कहने में कोई झिझक नहीं है कि अधिसूचना सही तरीके से रद्द की गई है और राजस्थान उच्च न्यायालय की खंडपीठ के फैसले को बरकरार रखा जाना चाहिए।
⏩ शासन स्तर पर बीएड को शामिल करने का निर्णय लिया गया। चूँकि प्राथमिक स्तर पर शिक्षकों के लिए योग्यता एक नीतिगत निर्णय है, हमें कहना होगा कि यह निर्णय सही नहीं है क्योंकि यह अधिनियम के उद्देश्य के विपरीत है। वास्तव में, यह अनुच्छेद 21ए के तहत संविधान में निहित मौलिक अधिकार की भावना और अक्षरशः के विरुद्ध है। यह अधिनियम के विशिष्ट आदेश के विरुद्ध है, जो बच्चों को मुफ्त, अनिवार्य और सार्थक प्राथमिक शिक्षा का आह्वान करता है।
🛑 प्राथमिक विद्यालय के लिए शिक्षकों की योग्यता के रूप में B.Ed. को शामिल करके केंद्र सरकार ने संविधान के प्रावधानों और कानूनों के खिलाफ काम किया है।
👉🏻 केंद्र सरकार द्वारा बीएड को शामिल करने का एकमात्र तर्क दिया गया है। एक योग्यता के रूप में यह एक 'उच्च योग्यता' है। यह हम पहले ही देख चुके हैं कि यह सही नहीं है। इन परिस्थितियों में, हमें यह कहने में कोई झिझक नहीं है कि अधिसूचना सही तरीके से रद्द की गई है और राजस्थान उच्च न्यायालय की खंडपीठ के फैसले को बरकरार रखा जाना चाहिए।
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🛑 परिणामस्वरूप, अपीलें खारिज की जाती हैं और राजस्थान उच्च न्यायालय के दिनांक 25.11.2021 के फैसले को बरकरार रखा जाता है। दिनांक 28.06.2018 की अधिसूचना को रद्द कर दिया गया है। उपरोक्त आदेश के आलोक में रिट याचिकाएं और सभी लंबित आवेदनों का निपटारा किया जाता है।
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✅ B.Ed. vs B.T.C. Court Case
पूरे डिसीजन में तीन मुख्य बातें की गई है व इनको RTE 2009 की कसौटी पर परखा गया है-
1️⃣ क्या B.Ed. हायर क्वालिफिकेशन है ?
2️⃣ गजट नोटिस लाने का कारण क्या था ?
3️⃣ 2018 का गजट नोटिफिकेशन किस तरह से लाया था ?
1. सुप्रीम कोर्ट के अनुसार B.Ed. प्राथमिक शिक्षक बनने के लिए उचित अर्हता नहीं है जिसकी वजह से प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता नीचे जा सकती है और RTE 2009 के एक मुख्य पहलू का उल्लंघन होगा जो है- शिक्षा की गुणवत्ता
2. क्या B.Ed. हायर क्वालिफिकेशन है ?
👉🏻 इस पर भी सुप्रीम कोर्ट का कहना यह है कि अगर B.Ed. हायर क्वालिफिकेशन होता तो 6 महीने का ब्रिज कोर्स क्यों करवाया जाता है ? इसका मतलब NCTE भी जानता है कि B.Ed उचित योग्यता नही है और पेडागॉजी के विभिन्न पहलुओं से अछूता है।
3. एक जगह यह भी कहा गया है कि इस नोटिस का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता की आड़ में B.Ed. डिग्री बेरोजगारों को नौकरी देना प्रतीत होता है जो RTE ACT का उल्लंघन करता है क्योंकि गुणवत्ता सबसे जरुरी है।
4. सबसे मुख्य पहलू है कि यह गजट लाया कैसे गया था?
👉🏻 इस पर यह कहा गया है कि केंद्रीय विद्यालय संगठन के कमिश्नर के द्वारा मंत्रालय में यह बात रखी गई कि हमारे पास D.El.Ed. प्रशिक्षु नहीं होते जिसकी वजह से प्राथमिक स्तर पर शिक्षकों की कमी रहती है इसीलिए कृपया हमें B.Ed. डिग्री धारकों को प्राथमिक शिक्षक बनने के लिए एलिजिबल करने का मौका दीजिए जिस पर मंत्रालय ने एक तरह से NCTE को आदेश देकर B.Ed. को संपूर्ण देश में एलिजिबल करने के लिए नोटिफिकेशन निकालने हेतु बाध्य किया।
6. RTE 2009 के अनुसार NCTE योग्यता तय तो कर सकता है लेकिन पूरा सर्वे कर के, ना कि सरकार के कहने पर। तो यह policy decision नही अपितु academic decision था जो NCTE को खुद लेना चाहिए था।
7. ये निर्णय बिना किसी expertise के लिया गया है, इस वजह से इस गजट को इस नोटिफिकेशन को खारिज किया जाता है।
~ सेवा समाप्त ~
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पूरे डिसीजन में तीन मुख्य बातें की गई है व इनको RTE 2009 की कसौटी पर परखा गया है-
1️⃣ क्या B.Ed. हायर क्वालिफिकेशन है ?
2️⃣ गजट नोटिस लाने का कारण क्या था ?
3️⃣ 2018 का गजट नोटिफिकेशन किस तरह से लाया था ?
1. सुप्रीम कोर्ट के अनुसार B.Ed. प्राथमिक शिक्षक बनने के लिए उचित अर्हता नहीं है जिसकी वजह से प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता नीचे जा सकती है और RTE 2009 के एक मुख्य पहलू का उल्लंघन होगा जो है- शिक्षा की गुणवत्ता
2. क्या B.Ed. हायर क्वालिफिकेशन है ?
👉🏻 इस पर भी सुप्रीम कोर्ट का कहना यह है कि अगर B.Ed. हायर क्वालिफिकेशन होता तो 6 महीने का ब्रिज कोर्स क्यों करवाया जाता है ? इसका मतलब NCTE भी जानता है कि B.Ed उचित योग्यता नही है और पेडागॉजी के विभिन्न पहलुओं से अछूता है।
3. एक जगह यह भी कहा गया है कि इस नोटिस का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता की आड़ में B.Ed. डिग्री बेरोजगारों को नौकरी देना प्रतीत होता है जो RTE ACT का उल्लंघन करता है क्योंकि गुणवत्ता सबसे जरुरी है।
4. सबसे मुख्य पहलू है कि यह गजट लाया कैसे गया था?
👉🏻 इस पर यह कहा गया है कि केंद्रीय विद्यालय संगठन के कमिश्नर के द्वारा मंत्रालय में यह बात रखी गई कि हमारे पास D.El.Ed. प्रशिक्षु नहीं होते जिसकी वजह से प्राथमिक स्तर पर शिक्षकों की कमी रहती है इसीलिए कृपया हमें B.Ed. डिग्री धारकों को प्राथमिक शिक्षक बनने के लिए एलिजिबल करने का मौका दीजिए जिस पर मंत्रालय ने एक तरह से NCTE को आदेश देकर B.Ed. को संपूर्ण देश में एलिजिबल करने के लिए नोटिफिकेशन निकालने हेतु बाध्य किया।
6. RTE 2009 के अनुसार NCTE योग्यता तय तो कर सकता है लेकिन पूरा सर्वे कर के, ना कि सरकार के कहने पर। तो यह policy decision नही अपितु academic decision था जो NCTE को खुद लेना चाहिए था।
7. ये निर्णय बिना किसी expertise के लिया गया है, इस वजह से इस गजट को इस नोटिफिकेशन को खारिज किया जाता है।
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✅ B.Ed. vs B.T.C. Court Case
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उत्तर प्रदेश परीक्षा | शिक्षक भर्ती UPSSSC PET लेखपाल VDO | UPSC
✅ B.Ed. vs B.T.C. Court Case केन्द्रीय विद्यालय एवं मध्य प्रदेश के बीएड अभ्यर्थी प्राथमिक स्तर की शिक्षक भर्ती से बाहर हुए क्योकि इन्होने नियुक्ति को न्यायालय के निर्णय के अधीन रखने की शर्त रखी थी जबकि बिहार की शिक्षक भर्ती मे ऐसी कोई शर्त नहीं रखी गई थी
📍बिहार शिक्षक भर्ती
फिलहाल BPSC TRE पर न तो कोई रोक है और न ही इस पर रोक लगाने की कोई योजना है : अतुल प्रसाद (BPSC CHAIRMAN)
फिलहाल BPSC TRE पर न तो कोई रोक है और न ही इस पर रोक लगाने की कोई योजना है : अतुल प्रसाद (BPSC CHAIRMAN)
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उत्तर प्रदेश परीक्षा | शिक्षक भर्ती UPSSSC PET लेखपाल VDO | UPSC
📍बिहार शिक्षक भर्ती फिलहाल BPSC TRE पर न तो कोई रोक है और न ही इस पर रोक लगाने की कोई योजना है : अतुल प्रसाद (BPSC CHAIRMAN)
अरे चेयरमैन साहब
जो भी करना है साफ़ साफ़ बोलिए ना, ऐसे गोल गोल काहे घुमा रहे हैं
परीक्षा पूरी करा के योग्यता तय करियेगा क्या जी ?
इस परीक्षा को बिहार पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना तो नही न बना लिए हैं ??
कि बाहर से लइका लोग आएगा, 2 4 दिन रुकेगा फिर हमारी अर्थव्यवस्था मे सहयोग करेगा और जब वापस चला जाएगा तब उसको बतायेगे अरे तुमको गलती से योग्य बता दिए थे, गलती से ब्लंडर मिस्टेक हो गया
जो भी करना है साफ़ साफ़ बोलिए ना, ऐसे गोल गोल काहे घुमा रहे हैं
परीक्षा पूरी करा के योग्यता तय करियेगा क्या जी ?
इस परीक्षा को बिहार पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना तो नही न बना लिए हैं ??
कि बाहर से लइका लोग आएगा, 2 4 दिन रुकेगा फिर हमारी अर्थव्यवस्था मे सहयोग करेगा और जब वापस चला जाएगा तब उसको बतायेगे अरे तुमको गलती से योग्य बता दिए थे, गलती से ब्लंडर मिस्टेक हो गया
उत्तर प्रदेश परीक्षा | शिक्षक भर्ती UPSSSC PET लेखपाल VDO | UPSC
📍बिहार शिक्षक भर्ती फिलहाल BPSC TRE पर न तो कोई रोक है और न ही इस पर रोक लगाने की कोई योजना है : अतुल प्रसाद (BPSC CHAIRMAN)
✅ B.Ed. vs B.T.C. Court Case
📍 बिहार शिक्षक भर्ती
👉🏻 बिहार की प्राथमिक शिक्षक भर्ती से B.Ed. को बाहर करने लिए D.El.Ed. वालो ने सुप्रीम कोर्ट में 1 अगस्त को रिट पिटीशन दाखिल की गई थी जिसमें NCTE और भारत सरकार, दोनों पार्टियां है।
⏩ सुनवाई की तारीख 28 अगस्त है।
👉🏻 परीक्षा 24 से 26 अगस्त को है 🫣
📍 बिहार शिक्षक भर्ती
👉🏻 बिहार की प्राथमिक शिक्षक भर्ती से B.Ed. को बाहर करने लिए D.El.Ed. वालो ने सुप्रीम कोर्ट में 1 अगस्त को रिट पिटीशन दाखिल की गई थी जिसमें NCTE और भारत सरकार, दोनों पार्टियां है।
⏩ सुनवाई की तारीख 28 अगस्त है।
👉🏻 परीक्षा 24 से 26 अगस्त को है 🫣
उत्तर प्रदेश परीक्षा | शिक्षक भर्ती UPSSSC PET लेखपाल VDO | UPSC
✅ B.Ed. vs B.T.C. Court Case 📍 बिहार शिक्षक भर्ती 👉🏻 बिहार की प्राथमिक शिक्षक भर्ती से B.Ed. को बाहर करने लिए D.El.Ed. वालो ने सुप्रीम कोर्ट में 1 अगस्त को रिट पिटीशन दाखिल की गई थी जिसमें NCTE और भारत सरकार, दोनों पार्टियां है। ⏩ सुनवाई की तारीख 28 अगस्त…
दोनो को पहले ही नोटिस जारी हो चुके है।