👉 *सुखी जीवन का रहस्य🙂*
👉 *क्या आप निरंतर प्रसन्न रहने की कला सीखना चाहते हैं❓*
👉 *क्या आप लक्ष्मीजी को खुश करने के वास्तविक रहस्यों को जानना चाहते हैं ❓*
👉 *क्या आप अपने मानव जीवन के अत्यंत गुप्त रहस्यों को समझना चाहते हैं❓*
👉 *क्या आप मृत्यु के बाद भी सुखी बनने की कला सीखना चाहते हैं❓*
👉 *क्या आप बरसों से आपके मन को बेचैन करने वाले प्रश्नों के तर्कपूर्ण उत्तर प्राप्त करना चाहते हैं❓*
👉 *तो हमारे इस यूट्यूब चैनल के अंदर जितने भी वीडियो दिए गए हैं उन सब को एक बार ध्यान से अवश्य देखें और इस मैसेज को जितना हो सके उतना ज्यादा से ज्यादा शेयर करें...🙏🙏*
https://youtube.com/c/BHAGWANKAJAWAB
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*अगर आप अपने सुपुत्र को आगे जाकर अत्यंत श्रीमंत, संस्कारी और बुद्धिशाली बनाना चाहते हैं तो उसके लिए क्या करना चाहिए यह समझने के लिए इस टेलीग्राम चैनल में दिए गए सभी विडियो को एकबार अवश्य देखना ।*
Dangerous Education System
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सावधान ❗️सरकारी नौकरी करने वाले
*देखो हमारे भारत देश की प्रजा को एज्युकेशन सिस्टम के द्वारा किस प्रकार से बर्बाद किया जा रहा है*
https://youtube.com/playlist?list=PLSWiAptP3QC6LViZmAsbmVwQDGtPEhY8u
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*अगर आप रेशम के वस्त्रों का उपयोग करते हैं तो इस वीडियो को अवश्य देखना ताकि आपको मरने के बाद रेशम का कीड़ा ना बनना पड़े ।*
https://youtu.be/4tbkVT42YqM
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फैक्ट्रियों में कैसे बनता है कीड़ों से रेशम || Silk Manufacturing Process in Factory in Hindi
Fact Fiction
फैक्ट्रियों में कैसे बनता है कीड़ों से रेशम || Silk Manufacturing Process in Factory in Hindi
#resammakingprocess #SilkManufacturingProcess #factfiction
Some Important Tag for this video (Fact Fiction)
resam making process in hindi
resam…
फैक्ट्रियों में कैसे बनता है कीड़ों से रेशम || Silk Manufacturing Process in Factory in Hindi
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😱😱जानिए भविष्य में आने वाली सबसे बड़ी समस्या क्या है।?😨 https://youtu.be/G3sMfTYxQHE
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भविष्य में आने वाली सबसे बड़ी समस्या !? vishal chavda #भगतसिंह #rajivdixit #subhashchandrabose
सभी लोगो तक ये जानकारी पहुंचाए
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"मॉडर्न मेडिकल साइंस" से जुड़े लोग दावा करते हैं कि प्रकृति में "वायरस" नामक अतिसूक्ष्म कण पाए जाते हैं जो गंभीर रोगों के वाहक होते हैं.
इस दावे को साबित करना तो आसान होना चाहिए!
दुनिया में ऐसे लोगों की भरमार है जिनके बारे में "मॉडर्न मेडिकल साइंस" दावा करती है कि उन्हें कोई न कोई "वायरस"-जनित रोग हुआ है, जैसे एड्स, फ़्लू, मीज़ल्स, चिकनपॉक्स और तथाकथित "कोविड-19".
1. ऐसा कोई "मरीज़" लिया जाए (जिसमें "बीमारी" के लक्षण स्पष्ट नज़र आएं)
2. उस मरीज़ के शरीर से बलग़म, मल, मूत्र, ख़ून वग़ैरह का सैंपल लिया जाए
3. उस सैंपल में से दोषी "वायरस" को प्रयोगशाला में अलग-थलग (isolate/आइसोलेट) किया जाए
4. अलग-थलग किए गए "वायरस" के कणों को चरितार्थ (characterize) किया जाए, यानी उनके स्वरूप और बनावट को रिकॉर्ड किया जाए
5. अब अलग-थलग किए गए (isolated/आइसोलेटेड) "वायरस" के कणों को कुछ स्वस्थ लोगों (या पशुओं) के शरीर में डालकर देखा जाए कि "वायरस" से स्वस्थ इन्सानों (या पशुओं) में वही लक्षण पैदा होते हैं जो पहले मरीज़ में पाए गए हैं
6. इस प्रयोग को कई बार किया जाए "कंट्रोल" (control) के साथ (मतलब स्वस्थ लोगों के समूह में कुछ ऐसे लोग भी रखे जाएं जिन्हें तथाकथित "वायरस" की डोस देने के बजाए साफ़ पानी की डोस दी जाए, ताकि दोनों तरह के लोगों की तुलना की जा सके).
क्या इस तरह के प्रयोग को कभी भी कहीं भी करके किसी भी "वायरस" के अस्तित्व को साबित किया गया है?
नहीं.
पूरी दुनिया में आज तक इस तरह के प्रयोग के ज़रिए ये साबित नहीं किया जा सका है कि "वायरस" नामक अतिसूक्ष्म कण होते हैं जिनसे कोई बीमारी फैलती है.
मतलब आज तक न "वायरस" का होना साबित हो पाया है और न "संक्रमण" (contagion) साबित हो सका है.
बल्कि किसी भी तथाकथित "वायरस" को आज तक अलग-थलग (आइसोलेट) ही नहीं किया जा सका है!
इसलिए "वायरस" अप्रमाणित है -- एक काल्पनिक चीज़ है.
ऐसे प्रयोग की जगह "मॉडर्न मेडिकल साइंस" वालों ने सिर्फ़ धोखाधड़ी और फ़्रॉड किए हैं प्रयोगशाला में.
जैसे मरीज़ के सैंपल में से कुछ निकालने का प्रयास करने के बजाए उसमें कई तरह के सेल कल्चर (cell culture - बन्दर, गाय और अन्य पशुओं से लिए कोशिका माध्यम) और एन्टीबायोटिक जैसी घातक चीज़ें मिलाना और उसके बाद ये झूठा दावा करना कि "वायरस" की वजह से इस मिश्रण में मौजूद कोशिकाओं की मृत्यु (cell death/cytopathic effect) हो गई!
जर्मनी के वैज्ञानिक स्टीफ़न लंका, अमेरिका के डॉक्टर टॉम कोवन और एंड्रू कॉफ़मैन जैसे अनेक व्यक्तियों ने "मॉडर्न मेडिकल साइंस" के इस पूरे फ़्रॉड की पोल खोली है.
ये फ़्रॉड है झूठे वायरस, झूठी महामारी और ज़हरीली "वैक्सीनों" का फ़्रॉड जिसके ज़रिए बहुत लम्बे समय से इंसानियत को लूटने, मारने, पंगु और ग़ुलाम बनाने का काम चल रहा है.
इस फ़्रॉड के ज़रिए "डीपॉपुलेशन" (निर्जनीकरण/महा-जनसंहार) किया जा रहा है दुनिया भर में!
भारत में भी कई लोग इस फ़्रॉड के बारे जानकारी फैलाने का काम कर रहे हैं.
सुनिए डॉक्टर मुफ़स्सिल दिगंकर और डॉक्टर सचिन पेठकर को इस फ़्रॉड की पोल खोलते हुए - गिन्नी अनेजा के साथ बातचीत में.
---
कपिल बजाज
dragada.com/kbforyou
---
https://www.youtube.com/watch?v=gje3G8p0jSU
इस दावे को साबित करना तो आसान होना चाहिए!
दुनिया में ऐसे लोगों की भरमार है जिनके बारे में "मॉडर्न मेडिकल साइंस" दावा करती है कि उन्हें कोई न कोई "वायरस"-जनित रोग हुआ है, जैसे एड्स, फ़्लू, मीज़ल्स, चिकनपॉक्स और तथाकथित "कोविड-19".
1. ऐसा कोई "मरीज़" लिया जाए (जिसमें "बीमारी" के लक्षण स्पष्ट नज़र आएं)
2. उस मरीज़ के शरीर से बलग़म, मल, मूत्र, ख़ून वग़ैरह का सैंपल लिया जाए
3. उस सैंपल में से दोषी "वायरस" को प्रयोगशाला में अलग-थलग (isolate/आइसोलेट) किया जाए
4. अलग-थलग किए गए "वायरस" के कणों को चरितार्थ (characterize) किया जाए, यानी उनके स्वरूप और बनावट को रिकॉर्ड किया जाए
5. अब अलग-थलग किए गए (isolated/आइसोलेटेड) "वायरस" के कणों को कुछ स्वस्थ लोगों (या पशुओं) के शरीर में डालकर देखा जाए कि "वायरस" से स्वस्थ इन्सानों (या पशुओं) में वही लक्षण पैदा होते हैं जो पहले मरीज़ में पाए गए हैं
6. इस प्रयोग को कई बार किया जाए "कंट्रोल" (control) के साथ (मतलब स्वस्थ लोगों के समूह में कुछ ऐसे लोग भी रखे जाएं जिन्हें तथाकथित "वायरस" की डोस देने के बजाए साफ़ पानी की डोस दी जाए, ताकि दोनों तरह के लोगों की तुलना की जा सके).
क्या इस तरह के प्रयोग को कभी भी कहीं भी करके किसी भी "वायरस" के अस्तित्व को साबित किया गया है?
नहीं.
पूरी दुनिया में आज तक इस तरह के प्रयोग के ज़रिए ये साबित नहीं किया जा सका है कि "वायरस" नामक अतिसूक्ष्म कण होते हैं जिनसे कोई बीमारी फैलती है.
मतलब आज तक न "वायरस" का होना साबित हो पाया है और न "संक्रमण" (contagion) साबित हो सका है.
बल्कि किसी भी तथाकथित "वायरस" को आज तक अलग-थलग (आइसोलेट) ही नहीं किया जा सका है!
इसलिए "वायरस" अप्रमाणित है -- एक काल्पनिक चीज़ है.
ऐसे प्रयोग की जगह "मॉडर्न मेडिकल साइंस" वालों ने सिर्फ़ धोखाधड़ी और फ़्रॉड किए हैं प्रयोगशाला में.
जैसे मरीज़ के सैंपल में से कुछ निकालने का प्रयास करने के बजाए उसमें कई तरह के सेल कल्चर (cell culture - बन्दर, गाय और अन्य पशुओं से लिए कोशिका माध्यम) और एन्टीबायोटिक जैसी घातक चीज़ें मिलाना और उसके बाद ये झूठा दावा करना कि "वायरस" की वजह से इस मिश्रण में मौजूद कोशिकाओं की मृत्यु (cell death/cytopathic effect) हो गई!
जर्मनी के वैज्ञानिक स्टीफ़न लंका, अमेरिका के डॉक्टर टॉम कोवन और एंड्रू कॉफ़मैन जैसे अनेक व्यक्तियों ने "मॉडर्न मेडिकल साइंस" के इस पूरे फ़्रॉड की पोल खोली है.
ये फ़्रॉड है झूठे वायरस, झूठी महामारी और ज़हरीली "वैक्सीनों" का फ़्रॉड जिसके ज़रिए बहुत लम्बे समय से इंसानियत को लूटने, मारने, पंगु और ग़ुलाम बनाने का काम चल रहा है.
इस फ़्रॉड के ज़रिए "डीपॉपुलेशन" (निर्जनीकरण/महा-जनसंहार) किया जा रहा है दुनिया भर में!
भारत में भी कई लोग इस फ़्रॉड के बारे जानकारी फैलाने का काम कर रहे हैं.
सुनिए डॉक्टर मुफ़स्सिल दिगंकर और डॉक्टर सचिन पेठकर को इस फ़्रॉड की पोल खोलते हुए - गिन्नी अनेजा के साथ बातचीत में.
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*मरोना बीमारी के नाम पर पूरी दुनिया को लपेटे में लेने वाले महापुरुष का चरित्र अवश्य सुनने जैसा है...*
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औरतों से पूछा- पति के अलावा किससे चक्कर है, मोबाइल में अश्लील फोटो हैं? डालर के लिए डांस करती हो?
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😱👹👺 डिजिटल करेंसी लागू होने के बाद भारत के हर घर में बाथरूम बेडरूम में कैमरा लगाने का है मास्टर प्लान
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क्या आपके दूध में यूरिया है❓❓ बड़ी कंपनी का दूध पीने वाले सावधान हो जाइए ।
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अगर आपके सिर पर बहुत बड़ा कर्जा चढ़ा हुआ है और अगर आप उसे उतारना चाहते हैं तो इस वीडियो को अवश्य देखें
Brain dead is a lie. It was invented so that organs can be harvested from living humans.
Hospitals harvest organs from people who might have survived.
Euthanasia (that is suddenly being pushed in white countries) is a big source for organs.
In some provinces in Canada you are automatically an organ donor unless you opt out.
https://www.bitchute.com/video/RQwWoZ4SNtGJ/
T.me/TheTrutherist
T.me/TheTrutheristChat
Hospitals harvest organs from people who might have survived.
Euthanasia (that is suddenly being pushed in white countries) is a big source for organs.
In some provinces in Canada you are automatically an organ donor unless you opt out.
https://www.bitchute.com/video/RQwWoZ4SNtGJ/
T.me/TheTrutherist
T.me/TheTrutheristChat
Bitchute
The BIGGEST LIE The MEDICAL INDUSTRY Is Telling You!
Taken from Telegram
🔗 Credit WHF Entertainment http://bitly.ws/KsYo
🔗 Credit WHF Entertainment http://bitly.ws/KsYo
https://twitter.com/Pritam/status/1676492853768249344?t=iLBX9xH1anVndrklWZzYkQ&s=08
*महत्वपूर्ण जानकारी*
*ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में बैंकों में कैश बंद किया जा रहा है ।*
*India में भी लगभग 60-70% डिजिटल पेमेंट हो रही है ।*
गूगल पे, फोन पे , अमेजन पे जैसे एप्स की भरमार है , धीरे धीरे लोग कैश को भूल जायेंगे और डिजिटस् को ही करेंसी समझेंगे ।
जैसे *सोने, चांदी, तांबे के सिक्के गायब किए गए वैसे ही करेंसी नोट गायब किए जा रहे हैं ।*
ऐसा पूरी दुनिया में होगा सिर्फ सैंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी *(CBDC)* चलेगा जिसका मालिक *रॉथ्सचिल्ड, बैंक ऑफ इंग्लैंड* है ।
*99% लोग करेंसी के असली मालिक को नहीं जानते और शायद कभी जान भी नहीं पायेंगे और करेंसी के पीछे पागल बने रहेंगे ।*
डिजिटल करेंसी प्रोग्रामेबल करेंसी है जिसमें लिमिट सेट की जायेगी, यहां तक कि एक्सपायरी डेट भी रखी जायेगी , साथ ही एरिया लिमिट तय की जायेगी ।
मतलब
*अगर आपके पास 100000 रूपये(digit in your wallet/account) हैं तो आप दिन/महीने/साल में कितना खर्च कर पायेंगे, कितने समय(एक्सपायरी डेट) में खर्च करना होगा और किस क्षेत्र (स्थान) खर्च कर पायेंगे ये सबकुछ बैंक बतायेगा ।*
*अगर सबकुछ उनकी योजना के अनुसार चलता रहा तो आपके खून पसीने से कमाया या जमा किया गया धन आपका नहीं रहेगा ।*
तभी तो वो कह पा रहे हैं कि
2030 तक
*You will OWN nothing and you will be HAPPY*
*महत्वपूर्ण जानकारी*
*ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में बैंकों में कैश बंद किया जा रहा है ।*
*India में भी लगभग 60-70% डिजिटल पेमेंट हो रही है ।*
गूगल पे, फोन पे , अमेजन पे जैसे एप्स की भरमार है , धीरे धीरे लोग कैश को भूल जायेंगे और डिजिटस् को ही करेंसी समझेंगे ।
जैसे *सोने, चांदी, तांबे के सिक्के गायब किए गए वैसे ही करेंसी नोट गायब किए जा रहे हैं ।*
ऐसा पूरी दुनिया में होगा सिर्फ सैंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी *(CBDC)* चलेगा जिसका मालिक *रॉथ्सचिल्ड, बैंक ऑफ इंग्लैंड* है ।
*99% लोग करेंसी के असली मालिक को नहीं जानते और शायद कभी जान भी नहीं पायेंगे और करेंसी के पीछे पागल बने रहेंगे ।*
डिजिटल करेंसी प्रोग्रामेबल करेंसी है जिसमें लिमिट सेट की जायेगी, यहां तक कि एक्सपायरी डेट भी रखी जायेगी , साथ ही एरिया लिमिट तय की जायेगी ।
मतलब
*अगर आपके पास 100000 रूपये(digit in your wallet/account) हैं तो आप दिन/महीने/साल में कितना खर्च कर पायेंगे, कितने समय(एक्सपायरी डेट) में खर्च करना होगा और किस क्षेत्र (स्थान) खर्च कर पायेंगे ये सबकुछ बैंक बतायेगा ।*
*अगर सबकुछ उनकी योजना के अनुसार चलता रहा तो आपके खून पसीने से कमाया या जमा किया गया धन आपका नहीं रहेगा ।*
तभी तो वो कह पा रहे हैं कि
2030 तक
*You will OWN nothing and you will be HAPPY*
X (formerly Twitter)
Pritam on X
Some banks in NZ and Australia are no longer holding any physical cash. Taryn Comptyn immediately closes her account after teller refuses to let her withdraw money.
@VishnuFNO
@VishnuFNO