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राष्ट्र_बड़ा_या_धर्म ?

धर्म_प्रथम_राष्ट्र_द्वितीय ॥

मेरा धर्म कहता है कि राष्ट्र सर्वोपरी है।।

धर्म रहेगा तो तुम्हारी यशोगाथा की कथा कही जाती रहेगी। धर्म नहीं रहा तो तुम्हारी विरासत खंडहर बनकर ढह जाएगी।
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UGC पर शोर मचना बिलकुल गलत नहीं है.

किसी को इस guideline मे गलत लगे, तो उसे पूरा अधिकार है अपनी बात रखने का.... इसे बदलने के लिए कानूनी या सामाजिक कार्यवाही करने का.

मैंने भी पहले दिन से यही कहा है.... कि इस guideline मे दो कमियां हैं... वो ठीक कर दी जाएं, तो सब ठीक हो जाएगा.

कुछ लोगों ने इस मामले मे अच्छा काम भी किया है.... तथ्यों के साथ बात रखी, सभ्यता से लोगों को हर पक्ष के बारे मे बताया..... मामले की पूरी Timeline भी बताई, इसके नुकसान फायदे भी बताये.....कुछ लोग कोर्ट भी गए, वहां पुरजोर तरीके से अपनी बात रखी... उनकी बातों मे मेरिट थी तभी सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगाई... अन्यथा मामला उल्टा भी हो सकता था.

अगले महीने इस पर आगे की कार्यवाही होगी.... और मुझे पूरी आशा है.... देश और समाज के लिए अच्छा ही Outcome आएगा.

हालांकि.. इस बीच मे कुछ लोगों ने UGC के बहाने इधर उधर के मुद्दों को उठा कर लोगों मे व्याप्त आक्रोश को रोजाना fake news या उत्तेजित posts से बढ़ाने का काम किया. उन्हें लगा कि सुप्रीम कोर्ट के द्वारा रोक लगाने से मामला ठण्डा ना होने पाए..... बड़ी मुश्किल से एक मौका मिला है.. उसे कैसे जाने देते भला?

इसलिए कभी आरक्षण पर, कभी अल्पसंख्यक बजट पर, कभी आरएसएस द्वारा हिन्दुओ के ठेका लेने पर, कभी आरएसएस द्वारा बेचें जाने वाली किताबो पर, लाभ आरएसएस द्वारा लिए जाने वाले चंदे पर... कभी मुस्लिमो के रमजान पर एक घंटा जल्दी घर जाने वाली फर्जी खबर पर..... इन्होने हल्ला मचाया.

और जो लोग UGC प्रकरण से दुखी थे, गुस्सा थे... उनके क्रोध को Mobilize किया

लेकिन समस्या इनके साथ भी वही थी... जो पिछले 14 साल से विपक्ष की थी..... Fake News या आधी news... क्लिप काटना, आधी अधूरी जानकारी फैलाना..... यही काम विपक्ष करता रहा है..... और उन्ही को कोस कोस कर अपना करियर बनाने वाले ये लोग भी अब वही कर रहे हैं.

और जैसे विपक्ष वाले expose होते थे... वैसे ही यह हो रहे हैं.... इन लोगों की बताई बातें 24 घंटे नहीं टिक पा रही हैं.

मुझे तो यह नहीं समझ आता.... कि Fake News और आधी अधूरी एजेंडा वाली पत्रकारिता ही करनी थी..... तो रवीश और ज़ुबैर ही क्या बुरे थे.... वो बेचारे भी तो यही कर रहे थे ना.

हाँ.. एक बात मे वह बेहतर हैं..... वो चाहे कितना झूठ बोलें.... भाषा का स्तर बनाये रखते हैं.... शायद यही कारण है कि उनका प्रोपेगंडा थोड़ा ज्यादा व्यापक और मान्य होता है लोगों मे.

इन कटटर लोगों की Facebook ट्विटर timeline पर चले जाइये.... आपको इनके संस्कार दिख जाएंगे.

आपको यह अतिश्योक्ति लग सकती है..... लेकिन आप स्वयं ये देख सकते हैं जा कर.


✍️ मनीष जी


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- संजय राउत ने अपने खिलाफ मानहानि मामले के बाद अदालत में माफी मांगी

- पवन खेड़ा ने कल अर्नब गोस्वामी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा वापस ले लिया

- राजदीप सरदेसाई ने फर्जी स्टिंग मामले में सार्वजनिक माफी मांगी

- राहुल गांधी ने राफेल मामले पर माफी मांगी

- सेना के खिलाफ टिप्पणी के बाद राहुल गांधी ने अदालत में आत्मसमर्पण किया

- बजरंग पुनिया ने मानहानि मामले में कुश्ती कोच से बिना शर्त माफी मांगी

- ध्रुव राठी ने SGPC से माफी मांगी, आलोचना के बाद सिख गुरुओं पर बनाया गया वीडियो डिलीट किया

- अनुराग कश्यप ने ब्राह्मणों पर विवादास्पद टिप्पणी करने के बाद हिंदुओं से माफी मांगी

- जुबैर और कामरा ने ANI मानहानि मामले को सुलझाने के लिए ट्वीट डिलीट किया

- साकेत गोखले ने पुरी मानहानि मामले में सार्वजनिक रूप से माफी मांगी

- तेजस्वी यादव ने 'गुजराती ठग हैं' टिप्पणी पर माफी मांगी

और इन लोगों और उनके समर्थकों में वीर सावरकर का मजाक उड़ाने की हिम्मत है, जो वर्षों तक सेलुलर जेल में काला पानी का सामना करते रहे ।


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योगी जी Rocks 👍👍



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एक दुर्दांत नक्सली, सोनू, जिसे भूपति के नाम से भी जाना जाता है, ने अपने 60 कैडर के साथ 15 अक्टूबर 2025 को गढ़चिरौली में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने सरेंडर कर दिया था।

21 फरवरी 2026 के इंडियन एक्सप्रेस में सोनू का इंटरव्यू छपा है जिसमे वह कहता है कि माओवादी (नक्सल) आंदोलन बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को परिवर्तित करने में असफल रहा है।

इस सन्दर्भ में सोनू, RSS-BJP की स्ट्राटेजिक फ्लेक्सिबिलिटी (रणनीतिक लचीलापन) का उदाहरण देकर कहते है कि RSS-BJP कभी ब्राह्मणों और बनियों की पार्टी थी। अब यह सिर्फ़ उन्हीं तक सीमित नहीं रही है। PM मोदी आए, अन्य लोग आए,  उन्होंने पार्टी का और विस्तार किया। वे समाज के सब वर्गो तक पहुंच रहे हैं। इससे हमें पता चलता है कि आगे बढ़ने के लिए आपको स्थिति के अनुसार बदलना होगा और यही हमें सीखने की ज़रूरत है।”

2010 के बाद माओवादी आंदोलनों में विश्व में आई गिरावट के बारे में पूछे जाने पर सोनू ने कहा कि यह गिरावट पहले ही शुरू हो गई थी। वे कहते हैं, “चीनी क्रांति के बाद, कोई भी क्रांति कहीं भी सच में सफल नहीं हुई है। हम इसलिए फेल होते रहे क्योंकि हालात बदलते रहे, हमें हालात के हिसाब से खुद को ढालना पड़ता है।”

सोनू की स्वीकारोक्ति में एक सत्य निहित है जो कुछ लोग समझना नहीं चाहते है।

लोकतंत्र में विभिन्न हित समूहों के मध्य लगातार मोल-भाव या बार्गेनिंग चलती रहती है। इस सन्दर्भ में लोकतंत्र को एक बाजार के रूप में लिया जा सकता है। जो राजनीतिक दल इस बार्गेनिंग में अधिकतर जनसमूहों को जोड़ ले जाता है, वह सरकार बना लेता है।

पूर्व में कांग्रेस को दलित, दीनी एवं ब्राम्हण समाज का वोट मिलता था। अतः वह 1984 के बाद 30 प्रतिशत से कम वोट पाकर भी केंद्र में सत्ता में थी। कुछ राज्यों में बसपा, सपा इत्यादि ने यही रणनीति अपनाई। वे भी 28 - 30 प्रतिशत से कम वोट पाकर सरकार बना ले जाते थे।

इसमें ध्यान देने की बात यह है कि अगर कोई समूह इस बार्गेनिंग में अत्यधिक अड़ियल व्यवहार करता है तो अन्य हित समूह उसे किनारे करकर अपनी अलग बार्गेनिंग करके आगे बढ़ जाते है।

उदहारण के लिए, दीनी समाज की "बार्गेनिंग" को देखा जा सकता है जो अपने अड़ियल व्यवहार के कारण नक्सलियों की तरह हाशिये में ला दिए गए है। ऐसा नहीं है कि दीनी समाज की स्ट्रेंथ में कमी आयी हो, लेकिन अन्य हित समूहों की सामूहिक बार्गेनिंग ने इनकी शक्ति को निष्प्रभाव कर दिया है।

संभव है कि एकाध हित समूह के कुछ उपसमूह अपने आप को भी दीनी समाज की तरह शक्तिशाली समझ रहे है।

लेकिन ध्यान रखना होगा कि भाजपा का वोट शेयर 37% पर स्थिर है। वर्ष 2024 में आप की नेगेटिव बार्गेनिंग के बाद भी आप इस वोट शेयर में डेंट नहीं मार पाए है जो दर्शाता है कि अन्य हित समूह भाजपा से जुड़ते जा रहे है।

लोकतंत्र के बाजार (चुनाव) में आपके पास विकल्प है। ठीक वैसे ही जैसे दीनी समाज के पास भी था।

इस "बाजार" में आज दीनी समाज कहाँ है?
***
अंत में, "अड़ियल" लोगो के "अड़ियल" कमेंट का एक मोलभाव मेरे पास भी है। पिछले एक माह में लगभग 50 लोगो को ब्लॉक कर दिया है जिससे मेरी वाल पर गाली-गलौज एवं जातिसूचक अपशब्द वाले कमेंट नगण्य हो गए है।  अब ऐसे अड़ियल लोगो को, जहाँ भी वे दिखाई दे रहे है, अमित्र करना भी शुरू कर दिया है।

लोकतंत्र में आपको बार्गेनिंग का अधिकार है।  वही अधिकार मुझे भी है।

✍️अमित सिंघल जी


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Micron के Advance Memory products भारत मे बनने की प्रक्रिया शुरू


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सरकार ने ईरान मे रह रहे भारतीयों को तीसरा नोटिस दिया है....तुरंत इरान छोड़ने के लिए.... क्यूंकि वहां इस समय युद्ध के हालात बन गए हैं

ये लोग अभी निकलेंगे नहीं.... बाद मे वहाँ युद्ध हो गया तो इनका रोना धोना शुरू हो जाएगा......इन्हे खुद की जान की परवाह नहीं है.

बाद मे सरकार को Plane भेजनें पड़ेंगे.... Rescue करने वालों को अपनी जान खतरे मे डालनी पड़ेगी... और तब यह लोग बचा कर लाये जाएंगे.

और एयरपोर्ट पर आ कर कहेंगे.. कि हमें समोसा नहीं मिला खाने को.. हमें टैक्सी नहीं मिली.. हमें बैठने को सीट नहीं मिली... हमें ये नहीं मिला वो नहीं मिला.


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भारत टैक्सी सेवा के बारे में बताते गृह मंत्री अमित शाह जी


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NEET-PG में Cut-off कम करने या निगेटिव Cut-off पर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार, याचिकाकर्ता व सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा है, आइए विस्तार से समझते हैं.

⚖️ 1️⃣ केंद्र सरकार के तर्क:-

(A) NEET-PG योग्यता नहीं, सिर्फ रैंकिंग परीक्षा है

NEET-PG का उद्देश्य डॉक्टर की क्लिनिकल क्षमता तय करना नहीं है।

यह केवल PG सीटों के लिए मेरिट लिस्ट बनाने का साधन है।

असली योग्यता MBBS पास करने से साबित हो चुकी होती है।

(B) MBBS ही बेसिक क्षमता का प्रमाण
सभी उम्मीदवार पहले से MBBS और इंटर्नशिप पूरी कर चुके होते हैं।

वे पहले से पंजीकृत (registered) डॉक्टर हैं और इलाज कर सकते हैं।

इसलिए कट-ऑफ कम करने से “अयोग्य” व्यक्ति डॉक्टर नहीं बन रहा।

(C) PG में अंतिम गुणवत्ता MD/MS परीक्षा से तय

3 वर्ष का कठोर प्रशिक्षण होता है।

अंतिम परीक्षा में थ्योरी + प्रैक्टिकल में अलग-अलग 50% अंक जरूरी।

जो सक्षम नहीं होगा, वह PG परीक्षा पास ही नहीं कर पाएगा।

(D) खाली सीटों का नुकसान

हजारों PG सीटें खाली रह जाती हैं।

इससे मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर और संसाधनों का नुकसान होता है।

देश में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी है, इसलिए सीटें भरना जरूरी है।

2️⃣ याचिकाकर्ताओं के तर्क :-

(A) गुणवत्ता से समझौता

यदि कट-ऑफ बहुत नीचे (यहाँ तक कि 0 या निगेटिव) कर दिया जाए, तो बहुत कम अंक वाले भी PG में प्रवेश पा सकते हैं।

इससे मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता गिर सकती है।

(B) मेरिट प्रणाली कमजोर होगी

PG स्तर विशेषज्ञता (specialisation) का है।

यह MBBS से उच्च स्तर है, इसलिए उच्च प्रतिस्पर्धा और मानक जरूरी हैं।

कट-ऑफ शून्य करना “मेरिट” की अवधारणा को खत्म करता है।

(C) मरीजों की सुरक्षा का प्रश्न

कम अंक वाले भविष्य में विशेषज्ञ बनेंगे।
इसका सीधा असर रोगी सुरक्षा (patient safety) पर पड़ सकता है।

(D) नीति में पारदर्शिता का सवाल

कट-ऑफ घटाने का निर्णय क्या ठोस डेटा और विशेषज्ञ राय पर आधारित है? या केवल प्रशासनिक सुविधा के लिए लिया गया है?

3️⃣ सुप्रीम कोर्ट की चिंता :-

कोर्ट ने संकेत दिया है कि वह यह जांचेगा:

क्या कट-ऑफ कम करने से चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होगी?

क्या यह निर्णय तर्कसंगत (reasonable) और डेटा-आधारित है?

क्या “सीट भरना” गुणवत्ता से अधिक प्राथमिकता बन गया है?

कोर्ट ने यह भी कहा कि MBBS और PG स्तर में अंतर है —

PG विशेषज्ञता का स्तर है, इसलिए मानकों की गंभीर समीक्षा आवश्यक है।

अगली सुनवाई 24 मार्च को होगी!



✍️ Abhijeet jee

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!!! जय जय सिया राम !!!
आज की तिथि
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फाल्गुन शुक्ल, सप्तमी
विक्रम संवत २०८२ (2082)
दिन: मंगलवार , 24 फरवरी 2026
आज का पंचांग

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ॐ

जबलपुर के ग्वारीघाट पर पवन पुत्र श्री हनुमान जी के दिव्य अलौकिक अभिषेक दर्शन, माँ नर्मदा के पवित्र जल से।

!!! जय श्री राम, हर हर नर्मदे !!!
!!! जय बजरंगबली !!!



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कुछ योग करो कुछ व्यायाम करो

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कुछ योग करो कुछ व्यायाम करो

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पहले कंपनी दिवालिया घोषित होने के बाद आप उससे पैसा वसूल नहीं कर सकते थे क्यूँकी हिन्दुस्तान में कोई ऐसा कानून ही नहीं था कि कोई दिवालिया हो गया हो तो उससे कर्ज कैसे वसूल किया जाए अब तक ऐसा ही चलता था...!!

2014 मे सरकार ने बनाया NCLT यानि National Company Law Tribunal यह बनने के बाद अब जो भी कंपनी दिवालिया होगी उसे NCLT में जाना ही पड़ेगा वहां बोली लगेगी, कंपनी नीलाम की जाएगी और पैसे वसूल करके बैंकों को दिए जायेंगे, जिससे बैंक्स का NPA बढ़ता न रहे...!!

भूषण पावर एंड स्टील और उसके मालिक संजय सिंघल की कंपनी १८ महीने पहले दिवालिया घोषित हो गई इनके ऊपर PNB बैंक का 47,000 करोड़ रुपया बकाया था नीलामी की बोली शुरू हो गई तो टाटास्टील, जिंदल और UK लिबर्टी हाउस ने बोली लगाई....!!

अब NCLT कोर्ट से फैसला आना है कि किस कंपनी की बोली स्वीकार की गई है, फिर उसी कंपनी को भूषण पावर दे दिया जायेगा और बैंक का कर्ज भी चुकता किया जायेगा...!!

इसका क्लाइमेक्स अब आया है, जब भूषण स्टील एंड पावर के मालिक ने NCLT के सामने एक ऑफर रखा है कि हम बैंकों का 47,000 करोड़ का कर्ज चुका देंगे, आप हमारी कंपनी नीलाम मत करिये...!!

अब जनता को ये सोचना है कि ऐसे कितने उद्योगपतियों ने बैंकों का पैसा खाकर और दिवालिए होकर ऐश काटी है खासतौर से पिछली एक खास परिवार की सरकारों के समय में अब उन्हें लोन चुकाना ही होगा और ये सब मोदी सरकार के बनाये क़ानून और NCLT जैसी संस्था बनाने से संभव हुआ इसीलिए मोदीजी कहते हैं कि मैंने कांग्रेस के समय के loop holes यानि गड्ढे भरे हैं तो बिल्कुल अतिश्योक्ति नहीं लगती है...!!

लगभग यही कहानी रुइया ब्रदर्स, एस्सार स्टील वालों की भी है उनका भी बैंक कर्ज चुकाने का मन नहीं था, दिवालिए हो गए। NCLT में लक्ष्मी मित्तल, मित्तल स्टील्स ने बोली लगा रखी है पर अब रुइया ब्रदर्स के पास 54000 करोड़ आ गया है और विनती कर रहे हैं कि हमारी कंपनी को हम ही खरीद लेते हैं उसे नीलाम मत करो और 54, 000 करोड़ भी हमसे ले लो...!!

अब आये हैं ये ऊँट पहाड़ के नीचे अब तक इन्होंने खुद भी खूब देश के पैसे पर ऐश की और अपने आकाओं यानि खानदानी सरकार यानी काँग्रेस को भी ऐश कराई कोई समस्या आई तो फिर उन्हें डर काहे का जब उनके सैंया भये कोतवाल लेकिन अब ये 'चौकीदार' की सरकार है, और इसके एक आह्वान पर पूरे देश भर में चौकीदारों की लम्बी लाइन खड़ी हो चुकी है ऐसे देशविरोधी तत्वों को अब डरना ही होगा...!!

अब सोचो –
देश को फिर उन लुटेरों के हवाले करना है जो दिवालिया का नाटक करके जनता का पैसा उड़ाते थे?
या सख्त कानून और जवाबदेही को साथ देना है जो बैंक बचाता है, प्लांट बचाता है, नौकरियां बचाता है?
कानून ने लुटेरों को घेर लिया है। अब कोई बच नहीं पाएगा।
ये कोई चमत्कार नहीं – ये सख्ती का नतीजा है!

निर्णय आपको करना है कि अपने देश को लुटेरों को सौंपना है या चौकीदार को सौंपना है...!!


✍️ संजय अग्रवाल

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