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Video of Iranian suicide drone hitting the US Navy base in Bahrain.
This is Modern Warfare.
t.me/DharamDeshNewsFunn
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Qatar - Live Missile Attack video... Actually this missile was intercepted by the Air Defence system and came down.
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इसी बीच एक और खबर आई है.
मॉरीशस ने मालदीव के साथ राजनयिक संबंध स्थगित कर दिए, जो चागोस द्वीपसमूह को लेकर क्षेत्रीय विवाद के कारण हुआ।
मुख्य कारण - यह स्थगन मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू द्वारा 2022 में पूर्ववर्ती की चागोस पर मॉरीशस की संप्रभुता की मान्यता को उलटने और ब्रिटेन-मॉरीशस समझौते पर आपत्ति के कारण हुआ।
पृष्ठभूमि
चागोस द्वीपसमूह, जिसमें रणनीतिक डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डा शामिल है, विवादित रहा है; 2019 में ICJ ने मॉरीशस के पक्ष में निर्णय दिया था, जिससे ब्रिटेन का समझौता हुआ,
लेकिन मालदीव का दावा है कि इससे उनकी समुद्री सीमाएं और विशेष आर्थिक क्षेत्र प्रभावित होते हैं।
5 फरवरी 2026: मुइज्जू ने 2022 का पत्र वापस लिया और राज्य संबोधन में मालदीव का मजबूत दावा दोहराया।
मालदीव ने ब्रिटेन को 8 नवंबर 2024 और 18 जनवरी 2026 को पत्र भेजे, समझौते को अस्वीकार किया।
मॉरीशस कैबिनेट ने बैठक के बाद तत्काल स्थगन का निर्णय लिया।
t.me/DharamDeshNewsFunn
मॉरीशस ने मालदीव के साथ राजनयिक संबंध स्थगित कर दिए, जो चागोस द्वीपसमूह को लेकर क्षेत्रीय विवाद के कारण हुआ।
मुख्य कारण - यह स्थगन मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू द्वारा 2022 में पूर्ववर्ती की चागोस पर मॉरीशस की संप्रभुता की मान्यता को उलटने और ब्रिटेन-मॉरीशस समझौते पर आपत्ति के कारण हुआ।
पृष्ठभूमि
चागोस द्वीपसमूह, जिसमें रणनीतिक डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डा शामिल है, विवादित रहा है; 2019 में ICJ ने मॉरीशस के पक्ष में निर्णय दिया था, जिससे ब्रिटेन का समझौता हुआ,
लेकिन मालदीव का दावा है कि इससे उनकी समुद्री सीमाएं और विशेष आर्थिक क्षेत्र प्रभावित होते हैं।
5 फरवरी 2026: मुइज्जू ने 2022 का पत्र वापस लिया और राज्य संबोधन में मालदीव का मजबूत दावा दोहराया।
मालदीव ने ब्रिटेन को 8 नवंबर 2024 और 18 जनवरी 2026 को पत्र भेजे, समझौते को अस्वीकार किया।
मॉरीशस कैबिनेट ने बैठक के बाद तत्काल स्थगन का निर्णय लिया।
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आज शनिवार के समाचारपत्रों से पता चला कि न्यू ज़ीलैंड की पूर्व प्रधानमंत्री जासिंडा आरडर्न सपरिवार ऑस्ट्रेलिया पलायन कर गयी है। आरडर्न ने स्वयं इसकी पुष्टि की है।
आरडर्न वर्ष 2017 एवं 2023 के दौरान न्यू ज़ीलैंड की प्रधानमंत्री थी एवं संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने नवजात शिशु को लेकर आयी थी। अपनी नीतियों एवं विचारो के कारण वैश्विक वामपंथ की देवी थी (देवी इसलिए लिखा कि अन्य पंथो में महिला को ईश्वर का स्टेटस नहीं दिया जाता है; अतः समाचारपत्र पुरुष सम्बन्धी विशेषणों- जैसे कि मसीहा - का प्रयोग करते है)।
लेकिन उनकी कट्टर वामपंथी नीतियों के कारण न्यू ज़ीलैंड की अर्थव्यवस्था बैठ गयी, हाउसिंग क्राइसिस (घर की अनुपलब्धता) एवं बेरोजगारी बढ़ गयी। आरडर्न से जब प्रशासन नहीं संभल पाया तो उन्होंने त्यागपत्र दे दिया; अर्थात, चुनाव का सामना ही नहीं किया।
परिणाम यह निकला कि लगभग 50 लाख की जनसँख्या वाले न्यू ज़ीलैंड से पिछले वर्ष 66,300 नागरिक कहीं और पलायन कर गए। आरडर्न के सत्ता छोड़ने के बाद अब तक यह संख्या 2 लाख पार कर गयी है।
भारत में भी जितने पॉलिटिशियन अडानी-अम्बानी-जोमाटो-ब्लिंकइट-टाटा-महिंद्रा-वेदांत इत्यादि को कोसते है, वह सभी स्थिति बिगड़ने पर एक पल में विदेश भाग जाएंगे।
राघव चड्ढा, महुआ, राहुल, अखिलेश इत्यादि एवं सभी वामपंथियों का एक पैर ब्रिटेन या किसी अन्य पश्चिमी राष्ट्र में टिका हुआ है। आश्चर्य कि यह लोग कभी चीन, वेनेज़ुएला या नार्थ कोरिया में अपनी शॉपिंग एवं चिकित्सा क्यों नहीं करवाते है, घर क्यों नहीं लेते है?
एक बात की गारंटी हैं कि चाहे जो हो जाए, नरेंद्र मोदी, योगी जी, मायावती इत्यादि भारत में ही रहेंगे और मार्गदर्शन करते रहेंगे। उनके पास ले-देकर केवल एक ही राष्ट्र है - भारत - और हम-आप उनका परिवार है।
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🤔1
ईरान ने अब दुबई पर हमला कर दिया है...... अभी नुकसान कितना हुआ है कह नहीं सकते.... लेकिन यह साफ है कि इरान के पास ठीक ठाक मिसाइल हैं.
वहीं Middle East मे deploy किये गए अमेरिकी एयर Defence Systems आशा के अनुरूप काम नहीं कर पा रहे हैं.
क्यूंकि Middle East के सभी अमेरिकी Bases पर अटैक हुए हैं.. और अच्छा खासा नुकसान हुआ है... और उन सब जगह अमेरिकी एयर डिफेंस System ही तैनात थे.
GCC के सभी देश Primary तौर पर अमेरिकी एयर Defence systems... जैसी Thaad और Patriot ही इस्तेमाल करते हैं... सेकेंडरी layer पर यूरोप, साउथ कोरिया, और इजराइल के Systems इस्तेमाल किये जाते हैं.
पिछले साल हुई लड़ाई मे भी यही देखने को मिला था. जहां इरान ने इजराइल समेत कई देशों मे अच्छा खासा नुकसान कर दिया था.
यहाँ से युद्ध जितना लम्बा चलेगा... GCC देशों को नुकसान उतना ही बढ़ता जाएगा. ईरान तो खैर कफ़न बाँध पर बैठा है.... उन्हें नुकसान से कोई फर्क नहीं पड़ता.
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