मां पार्वती का वाहन गोधा (गोह)
जब मां पार्वती हिमालय की पुत्री 'उमा' के रूप में भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या करती हैं, तब शिल्पशास्त्रों (जैसे—रूपमण्डन और अपराजितपृच्छा) में उनका वाहन 'गोधा' (गोह) बताया गया है
अक्षसूत्रं तथा पद्मं कमण्डलुधरा शुभा। गोधासनसमासीना पार्वती परिकीर्तिता॥" रूपमण्डन
अर्थात्: जो देवी अपने हाथों में अक्षमाला (जपमाला), पद्म (कमल), और कमण्डलु धारण करती हैं तथा जो 'गोधा के आसन' (गोधासन) पर विराजमान हैं, उन्हें 'पार्वती' कहा जाता है।
जब मां पार्वती हिमालय की पुत्री 'उमा' के रूप में भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या करती हैं, तब शिल्पशास्त्रों (जैसे—रूपमण्डन और अपराजितपृच्छा) में उनका वाहन 'गोधा' (गोह) बताया गया है
अक्षसूत्रं तथा पद्मं कमण्डलुधरा शुभा। गोधासनसमासीना पार्वती परिकीर्तिता॥" रूपमण्डन
अर्थात्: जो देवी अपने हाथों में अक्षमाला (जपमाला), पद्म (कमल), और कमण्डलु धारण करती हैं तथा जो 'गोधा के आसन' (गोधासन) पर विराजमान हैं, उन्हें 'पार्वती' कहा जाता है।
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