*"साधारण मनुष्य को *जिन भोगों में* 'सुख' प्रतीत होता है, उन भोगों को *विवेकशील मनुष्य* 'दुःखरूप' ही समझता है। इसलिये वह उन भोगों में *रमण नहीं करता,* उनके 'अधीन' *नहीं* होता। *विवेकी मनुष्य को* इस बात का *ज्ञान* रहता है कि संसार के समस्त *दुःख, सन्ताप, पाप, नरक* आदि 'संयोग-जन्य' सुख की इच्छा पर ही आधारित हैं। अपने इस ज्ञान को *महत्त्व देने से ही* वह *बुद्धिमान्* है। परन्तु जिसने यह जान लिया है कि 'भोग' *दुःखप्रद हैं,* फिर भी भोगों की कामना करता है, और उनमें ही रमण करता है, वह वास्तव में अपने ज्ञान को पूर्णरूप से महत्त्व न देने के कारण 'बुद्धिमान्' *कहलाने का* अधिकारी *नहीं* है। अपने ज्ञान को महत्त्व देने वाला बुद्धिमान् मनुष्य भोगों की कामना और *उनमें रमण कर ही 'नहीं' सकता।*
👍4
हमारा जीवन इस प्रकार हो कि हम पूर्ण आयु प्राप्त करें। हमारी अकाल मृत्यु न हो इस लिए हम संयमित जीवन जिएं।
मनुष्य के शरीर और मन में शक्तियों का अकूत भंडार भरा पडा है। उनको नष्ट होने से बचाया जा सके और उस बचत का सदुपयोग किया जा सके तो अभीष्ट दिशा में आशाजनक सफलताएं प्राप्त की जा सकती हैं। इस तथ्य को न समझकर हम अपनी बहुमूल्य शक्तियों का निरर्थक अपव्यय करते रहते हैं और ईश्वर प्रदत्त शक्ति भंडार को खोकर खोखला , रूग्ण, अशक्त और असफल जीवन जीते हुए मौत के दिन गिना करते हैं।
शरीर और मन अपने अपने आहरों द्वारा शक्तियों का निरंतर उत्पादन करते रहते हैं और हमारा सामर्थ्य भंडार निरंतर बढता रहता है। इस उत्पादन को यदि अपव्यय से बचाकर रचनात्मक दिशा में प्रयुक्त किया जा सके तो निःसंदेह किसी भी क्षेत्र में आशाजनक प्रगति की जा सकती है। संयम का अर्थ है शक्तियों के अपव्यय को रोकना। यह अपव्यय अधिकतर हमारी इंद्रियों द्वारा ही होता है। इनमें सबसे प्रमुख हैं जीभ और जनेंद्रियां।
जीभ के द्वारा हम निरर्थक बकवास, निंदा, चुगली, शेखी तथा गप्पें हांकने में अपनी शक्तियों का नाश करते हैं। यदि जीभ को असत्य व कटु न बोलने के संयम से बांध दिया जाए तो हमारी वाणी आश्चर्यजनक रूप से प्रभावशाली हो सकती है। उसे आशीर्वाद व वरदान देने की भी क्षमता प्राप्त हो जाएगी। मौन को तप माना गया है। तपस्वियों जैसा मौन रहना तो हर एक के लिए संभव नहीं है पर अनर्गल बकवास पर तो नियंत्रण रखा ही जा सकता है। उतना ही नपा तुला बोलें जो अपने तथा दूसरों के लिए आवश्यक एवं हितकारी हो।
जीभ का दूसरा असंयम है स्वाद के लिए भोजन। इसी के कारण हम अवांछनीय, अभक्ष्य पदार्थ खाते रहते हैं। स्वाद की उत्तेजना में हम खा तो अधिक जाते हैं पर वह पचता नहीं। अपच से शरीर में जो सड़न पैदा होती है वह पाचन तंत्र को कमजोर करती है और दुर्बलता को जन्म देती है। यही अंततः शरीर के विभिन्न अंगो में पहुंचकर विभिन्न रोगों को उत्पन्न करती है। 'स्वाद से स्वास्थ्य आवश्यक है' यह तथ्य हम भूल जाते हैं और उसका दुष्परिणाम भुगतते हैं।
जननेन्द्रिय का संयम तो सबसे महत्वपूर्ण है। इसका असंयम शरीर के सार तत्व को नष्ट कर देता है। इस सार तत्व से ही शरीर में ओजस, चेहरे पर चमक, वाणी में प्रभाव, आंखों में ज्योति, मस्तिष्क में मेधा और स्वभाव में साहस का प्रवाह होता है। इस सार तत्व का जितना भी अपव्यय होता है, मनुष्य शारीरिक व मानसिक दृष्टि से उतना ही दुर्बल होता जाता है। कामुक व्यक्ति न निरोग रह सकता है और न दीर्घ जीवन का आनंद उठा सकता है।
संयम अर्थात शक्तियों का संचय। असंयम अर्थात सामर्थ्य की बरबादी इसीलिए बरबादी से मनुष्य दिवालिया हो जाता है और जो थोडा थोडा बचाता रहता है वह बूंद बूंद से ही अपना घडा भर लेता है।
मनुष्य के शरीर और मन में शक्तियों का अकूत भंडार भरा पडा है। उनको नष्ट होने से बचाया जा सके और उस बचत का सदुपयोग किया जा सके तो अभीष्ट दिशा में आशाजनक सफलताएं प्राप्त की जा सकती हैं। इस तथ्य को न समझकर हम अपनी बहुमूल्य शक्तियों का निरर्थक अपव्यय करते रहते हैं और ईश्वर प्रदत्त शक्ति भंडार को खोकर खोखला , रूग्ण, अशक्त और असफल जीवन जीते हुए मौत के दिन गिना करते हैं।
शरीर और मन अपने अपने आहरों द्वारा शक्तियों का निरंतर उत्पादन करते रहते हैं और हमारा सामर्थ्य भंडार निरंतर बढता रहता है। इस उत्पादन को यदि अपव्यय से बचाकर रचनात्मक दिशा में प्रयुक्त किया जा सके तो निःसंदेह किसी भी क्षेत्र में आशाजनक प्रगति की जा सकती है। संयम का अर्थ है शक्तियों के अपव्यय को रोकना। यह अपव्यय अधिकतर हमारी इंद्रियों द्वारा ही होता है। इनमें सबसे प्रमुख हैं जीभ और जनेंद्रियां।
जीभ के द्वारा हम निरर्थक बकवास, निंदा, चुगली, शेखी तथा गप्पें हांकने में अपनी शक्तियों का नाश करते हैं। यदि जीभ को असत्य व कटु न बोलने के संयम से बांध दिया जाए तो हमारी वाणी आश्चर्यजनक रूप से प्रभावशाली हो सकती है। उसे आशीर्वाद व वरदान देने की भी क्षमता प्राप्त हो जाएगी। मौन को तप माना गया है। तपस्वियों जैसा मौन रहना तो हर एक के लिए संभव नहीं है पर अनर्गल बकवास पर तो नियंत्रण रखा ही जा सकता है। उतना ही नपा तुला बोलें जो अपने तथा दूसरों के लिए आवश्यक एवं हितकारी हो।
जीभ का दूसरा असंयम है स्वाद के लिए भोजन। इसी के कारण हम अवांछनीय, अभक्ष्य पदार्थ खाते रहते हैं। स्वाद की उत्तेजना में हम खा तो अधिक जाते हैं पर वह पचता नहीं। अपच से शरीर में जो सड़न पैदा होती है वह पाचन तंत्र को कमजोर करती है और दुर्बलता को जन्म देती है। यही अंततः शरीर के विभिन्न अंगो में पहुंचकर विभिन्न रोगों को उत्पन्न करती है। 'स्वाद से स्वास्थ्य आवश्यक है' यह तथ्य हम भूल जाते हैं और उसका दुष्परिणाम भुगतते हैं।
जननेन्द्रिय का संयम तो सबसे महत्वपूर्ण है। इसका असंयम शरीर के सार तत्व को नष्ट कर देता है। इस सार तत्व से ही शरीर में ओजस, चेहरे पर चमक, वाणी में प्रभाव, आंखों में ज्योति, मस्तिष्क में मेधा और स्वभाव में साहस का प्रवाह होता है। इस सार तत्व का जितना भी अपव्यय होता है, मनुष्य शारीरिक व मानसिक दृष्टि से उतना ही दुर्बल होता जाता है। कामुक व्यक्ति न निरोग रह सकता है और न दीर्घ जीवन का आनंद उठा सकता है।
संयम अर्थात शक्तियों का संचय। असंयम अर्थात सामर्थ्य की बरबादी इसीलिए बरबादी से मनुष्य दिवालिया हो जाता है और जो थोडा थोडा बचाता रहता है वह बूंद बूंद से ही अपना घडा भर लेता है।
👍6❤1
*🌹सपनों की व्याख्या: सपने में दिखें शनि देव या शनि मंदिर तो क्या है*
*सपने में शनिदेव: स्वप्न शास्त्र के अनुसार सपने व्यक्ति को भविष्य से जुड़े संकेत देते हैं। सपनों का मन से काफी गहरा नाता होता है। कई सपने ऐसे होते हैं जिन्हें देखने के बाद हम भूल जाते हैं जबकि कुछ सपने हमारे मन मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव छोड़ते हैं। हर सपने का अलग अर्थ होता है। आइए जानते हैं अगर सपने में आज शनि देव या शनि मंदिर के दर्शन करते हैं उसका क्या मतलब होता है। ऐसा सपना आपके लिए कितना शुभ और अशुभ साबित होता है। जानें, सपने में शनिदेव को देखना शुभ या अशुभ*
*1. सपने में शनि देव की तस्वीर देखना*
स्वप्न शास्त्र के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति सपने में शनि देव की तस्वीर देखते है तो उसे जल्द ही कोई शुभ समाचार सुनने को मिल सकता है। इतना ही नहीं आपको नौकरी के नए अवसर भी प्राप्त हो सकते हैं। साथ ही शनि देव की तस्वीर सपने में देखना इस बात का भी संकेत है कि जल्द ही आपके परिवार में कोई नन्हा मेहमान आने वाला है।
*2. सपने में शनिदेव का आशीर्वाद पाना*
यदि आप सपने में शनिदेव द्वारा खुद को आशीर्वाद प्राप्त करते देखते हैं तो समझ लीजिए की आपके सभी कष्ट समाप्त होने वाला हैं। यदि कोई मनुष्य रोग से ग्रसित है तो ऐसा सपना देखने पर उसे रोग से मुक्ति मिल सकता है। साथ ही व्यापार में धन लाभ के संकेत भी देते मिलते हैं। नौकरी में प्रमोशन होने के चांस भी रहते हैं।
*3. सपने में शनि देव की मूर्ति को देखना*
यदि कोई व्यक्ति सपने में शनि भगवान की मूर्ति देखता है तो यह इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में आपको सुख मिल सकता है साथ ही ऐसा सपना ये भी दर्शाता है कि व्यक्ति को दुखों का सामना भी करना पड़ सकता है। दरअसल, ये आपके ग्रह नक्षत्र पर है। यदि आपकी कुंडली में शनि नकारात्मक स्थिति में है तो आपको उल्टा ही फल मिलेगा। जबकि सकारात्मक स्थिति में व्यक्ति को कोई शुभ सूचना मिल सकती है। यदि किसी पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है तो व्यक्ति को मिलाजुला फल प्राप्त होगा।
*4. सपने में दिखाई दे शनि मंदिर*
किसी व्यक्ति को अगर सपने में शनि मंदिर दिखाई देता है तो ये बेहद ही शुभ संकेत है। ऐसा सपना इस बात की तरफ इशारा करता है कि आने वाले समय में उसके ऊपर शनि महाराज की खूब कृपा बरसने वाली है। साथ ही व्यक्ति को बड़ा धन लाभ भी हो सकता है।
*सपने में शनिदेव: स्वप्न शास्त्र के अनुसार सपने व्यक्ति को भविष्य से जुड़े संकेत देते हैं। सपनों का मन से काफी गहरा नाता होता है। कई सपने ऐसे होते हैं जिन्हें देखने के बाद हम भूल जाते हैं जबकि कुछ सपने हमारे मन मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव छोड़ते हैं। हर सपने का अलग अर्थ होता है। आइए जानते हैं अगर सपने में आज शनि देव या शनि मंदिर के दर्शन करते हैं उसका क्या मतलब होता है। ऐसा सपना आपके लिए कितना शुभ और अशुभ साबित होता है। जानें, सपने में शनिदेव को देखना शुभ या अशुभ*
*1. सपने में शनि देव की तस्वीर देखना*
स्वप्न शास्त्र के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति सपने में शनि देव की तस्वीर देखते है तो उसे जल्द ही कोई शुभ समाचार सुनने को मिल सकता है। इतना ही नहीं आपको नौकरी के नए अवसर भी प्राप्त हो सकते हैं। साथ ही शनि देव की तस्वीर सपने में देखना इस बात का भी संकेत है कि जल्द ही आपके परिवार में कोई नन्हा मेहमान आने वाला है।
*2. सपने में शनिदेव का आशीर्वाद पाना*
यदि आप सपने में शनिदेव द्वारा खुद को आशीर्वाद प्राप्त करते देखते हैं तो समझ लीजिए की आपके सभी कष्ट समाप्त होने वाला हैं। यदि कोई मनुष्य रोग से ग्रसित है तो ऐसा सपना देखने पर उसे रोग से मुक्ति मिल सकता है। साथ ही व्यापार में धन लाभ के संकेत भी देते मिलते हैं। नौकरी में प्रमोशन होने के चांस भी रहते हैं।
*3. सपने में शनि देव की मूर्ति को देखना*
यदि कोई व्यक्ति सपने में शनि भगवान की मूर्ति देखता है तो यह इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में आपको सुख मिल सकता है साथ ही ऐसा सपना ये भी दर्शाता है कि व्यक्ति को दुखों का सामना भी करना पड़ सकता है। दरअसल, ये आपके ग्रह नक्षत्र पर है। यदि आपकी कुंडली में शनि नकारात्मक स्थिति में है तो आपको उल्टा ही फल मिलेगा। जबकि सकारात्मक स्थिति में व्यक्ति को कोई शुभ सूचना मिल सकती है। यदि किसी पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है तो व्यक्ति को मिलाजुला फल प्राप्त होगा।
*4. सपने में दिखाई दे शनि मंदिर*
किसी व्यक्ति को अगर सपने में शनि मंदिर दिखाई देता है तो ये बेहद ही शुभ संकेत है। ऐसा सपना इस बात की तरफ इशारा करता है कि आने वाले समय में उसके ऊपर शनि महाराज की खूब कृपा बरसने वाली है। साथ ही व्यक्ति को बड़ा धन लाभ भी हो सकता है।
👍4
*🕉️बसंत पंचमी कब है 2024 में?*
*प्रतिवर्ष बसंत पंचमी का पर्व हिंदू कैलेंडर के अनुसार माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। इस दिन माता सरस्वती का प्रकटोतसव मनाते हैं। मां सरस्वती की पूजा के साथ ही कलम दवात की पूजा भी करते हैं। रोमन कैलेंडर के अनुसार इस बार बसंत पंचमी का पर्व 14 फरवरी 2024 बुधवार के दिन है। इसी दिन तक्षक पूजा भी होगी और कामदेव पूजा भी होगी।*
*बसंत पंचमी तिथि 2024:-*
*पंचमी तिथि प्रारम्भ-* 13 फरवरी 2024 को दोपहर 02:41 से प्रारंभ।
*पंचमी तिथि समाप्त-* 14 फरवरी 2024 को दोपहर 12:09 तक।
*वसन्त पंचमी मुहूर्त-*
*卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐*
*वसन्त पंचमी सरस्वती पूजा मुहूर्त-* 14 फरवरी 2024 बुधवार के दिन सुबह 07:01 से दोपहर 12:35 के बीच।
*अमृत काल मुहूर्त-* सुबह 08:30 से सुबह 09:59 तक।
*गोधूलि मुहूर्त-* शाम 06:08 से 06:33 तक।
*रवि योग-* सुबह 10:43 से अगले दिन सुबह 07:00 तक।
*🪔वसंत पंचमी की खास बातें:-*
*卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐*
वसंत पंचमी से बसंत ऋतु का प्रारंभ होता है।
भगावन श्रीकृष्ण ने श्रीमद्भागवत गीता में कहा है- ''मैं ऋतुओं में वसंत हूं।
वसंत ऋतु के आगमन पर वृक्षों से पुराने पत्ते झड़ जाते हैं और नए पत्ते आना प्रारंभ होते हैं।
इस दिन कामदेव की पूजा भी की जाती है क्योंकि कामदेव जी को भगवान शिव ने अपने तीसरे नेत्र से भस्म कर दिया था और बाद में रति को दिए वरदान के तहत कामदेव ने श्रीकृष्ण के पुत्र प्रद्युम्न के रूप में जन्म लिया था।
वसंत पंचमी के दिन ही रामचंद्र जी शबरी का आश्रम में गए थे।
बसंत पंचमी हमें गुरु रामसिंह कूका के बलिदान की भी याद दिलाती है।
*🌸ऊँ_श्रीमहासरस्वत्यै_नम:🪷*
*प्रतिवर्ष बसंत पंचमी का पर्व हिंदू कैलेंडर के अनुसार माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। इस दिन माता सरस्वती का प्रकटोतसव मनाते हैं। मां सरस्वती की पूजा के साथ ही कलम दवात की पूजा भी करते हैं। रोमन कैलेंडर के अनुसार इस बार बसंत पंचमी का पर्व 14 फरवरी 2024 बुधवार के दिन है। इसी दिन तक्षक पूजा भी होगी और कामदेव पूजा भी होगी।*
*बसंत पंचमी तिथि 2024:-*
*पंचमी तिथि प्रारम्भ-* 13 फरवरी 2024 को दोपहर 02:41 से प्रारंभ।
*पंचमी तिथि समाप्त-* 14 फरवरी 2024 को दोपहर 12:09 तक।
*वसन्त पंचमी मुहूर्त-*
*卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐*
*वसन्त पंचमी सरस्वती पूजा मुहूर्त-* 14 फरवरी 2024 बुधवार के दिन सुबह 07:01 से दोपहर 12:35 के बीच।
*अमृत काल मुहूर्त-* सुबह 08:30 से सुबह 09:59 तक।
*गोधूलि मुहूर्त-* शाम 06:08 से 06:33 तक।
*रवि योग-* सुबह 10:43 से अगले दिन सुबह 07:00 तक।
*🪔वसंत पंचमी की खास बातें:-*
*卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐*
वसंत पंचमी से बसंत ऋतु का प्रारंभ होता है।
भगावन श्रीकृष्ण ने श्रीमद्भागवत गीता में कहा है- ''मैं ऋतुओं में वसंत हूं।
वसंत ऋतु के आगमन पर वृक्षों से पुराने पत्ते झड़ जाते हैं और नए पत्ते आना प्रारंभ होते हैं।
इस दिन कामदेव की पूजा भी की जाती है क्योंकि कामदेव जी को भगवान शिव ने अपने तीसरे नेत्र से भस्म कर दिया था और बाद में रति को दिए वरदान के तहत कामदेव ने श्रीकृष्ण के पुत्र प्रद्युम्न के रूप में जन्म लिया था।
वसंत पंचमी के दिन ही रामचंद्र जी शबरी का आश्रम में गए थे।
बसंत पंचमी हमें गुरु रामसिंह कूका के बलिदान की भी याद दिलाती है।
*🌸ऊँ_श्रीमहासरस्वत्यै_नम:🪷*
👍7🥰2
*आगे की तिथियाँ*
माघ शुक्ला तृतीया
माघ गुप्त नवरात्रि
सोमवार, 12 फरवरी 2024
माघ शुक्ला चतुर्थी
कुम्भ संक्रांति, विनायक चतुर्थी, माघ गुप्त नवरात्रि
मंगलवार, 13 फरवरी 2024
माघ शुक्ला पञ्चमी
वसंत पंचमी, तक्षक पूजा, माघ गुप्त नवरात्रि
बुधवार, 14 फरवरी 2024
माघ शुक्ला षष्ठी
माघ गुप्त नवरात्रि
गुरुवार, 15 फरवरी 2024
माघ शुक्ला सप्तमी
नर्मदा जयन्ती, रथ सप्तमी, भीष्म अष्टमी, देवनारायण जयंती, माघ गुप्त नवरात्रि
शुक्रवार, 16 फरवरी 2024
माघ शुक्ला अष्टमी
अष्टमी व्रत, माघ गुप्त नवरात्रि
शनिवार, 17 फरवरी 2024
माघ शुक्ला नवमी
माघ गुप्त नवरात्रि
रविवार, 18 फरवरी 2024
माघ शुक्ला दशमी
सोमवार, 19 फरवरी 2024
माघ शुक्ला एकादशी
जया एकादशी
मंगलवार, 20 फरवरी 2024
माघ शुक्ला तृतीया
माघ गुप्त नवरात्रि
सोमवार, 12 फरवरी 2024
माघ शुक्ला चतुर्थी
कुम्भ संक्रांति, विनायक चतुर्थी, माघ गुप्त नवरात्रि
मंगलवार, 13 फरवरी 2024
माघ शुक्ला पञ्चमी
वसंत पंचमी, तक्षक पूजा, माघ गुप्त नवरात्रि
बुधवार, 14 फरवरी 2024
माघ शुक्ला षष्ठी
माघ गुप्त नवरात्रि
गुरुवार, 15 फरवरी 2024
माघ शुक्ला सप्तमी
नर्मदा जयन्ती, रथ सप्तमी, भीष्म अष्टमी, देवनारायण जयंती, माघ गुप्त नवरात्रि
शुक्रवार, 16 फरवरी 2024
माघ शुक्ला अष्टमी
अष्टमी व्रत, माघ गुप्त नवरात्रि
शनिवार, 17 फरवरी 2024
माघ शुक्ला नवमी
माघ गुप्त नवरात्रि
रविवार, 18 फरवरी 2024
माघ शुक्ला दशमी
सोमवार, 19 फरवरी 2024
माघ शुक्ला एकादशी
जया एकादशी
मंगलवार, 20 फरवरी 2024
👍5