*💫 सिंधु घाटी सभ्यता के स्थल*
*1. हड़प्पा*
▪️नदी के नाम - रावी
▪️उत्त्खनन का वर्ष - 1921
▪️उत्तखननकर्ता - दयाराम साहनी और माधोस्वरूप वत्स
▪️वर्तमान स्तिथि - पश्चिम पंजाब का मांटमोगरी जिला (पाकिस्तान)
*2. मोहनजोदड़ो*
▪️नदी के नाम - सिन्धु
▪️उत्त्खनन का वर्ष - 1922
▪️उत्तखननकर्ता - राखलदास बनर्जी
▪️वर्तमान स्थिति - सिंध प्रान्त का लरकाना जिला (पाकिस्तान)
*3. चन्हूदड़ो*
▪️नदी के नाम - सिन्धु
▪️उत्त्खनन का वर्ष - 1931
▪️उत्तखननकर्ता - गोपाल मजूमदार
▪️वर्तमान स्थिति - सिंध प्रान्त(पाकिस्तान)
*4. कालीबंगा*
▪️नदी के नाम - घग्घर
▪️उत्त्खनन का वर्ष - 1953
▪️उत्तखननकर्ता - बी.बी.लाल और बी.के. थापर
▪️वर्तमान स्थिति: राजस्थान का हनुमानगढ़ जिला (भारत)
*5. कोटदीजी*
▪️नदियों के नाम - सिन्धु
▪️उत्त्खनन का वर्ष - 1953
▪️उत्तखननकर्ता - फजल अहमद
▪️वर्तमान स्थिति - सिंध प्रान्त का खैरपुर (पाकिस्तान)
*6. रंगपुर*
▪️नदियों के नाम - मादर
▪️उत्त्खनन का वर्ष - 1953-54
▪️उत्तखननकर्ता - रंगनाथ राव
▪️वर्तमान स्थिति - गुजरात का काठियावाड क्षेत्र (भारत)
*7. रोपड़*
▪️नदियों के नाम - सतलज
▪️उत्त्खनन का वर्ष -1953-56
▪️उत्तखननकर्ता - यज्ञदत्त शर्मा
▪️वर्तमान स्थिति - पंजाब का रोपड़ जिला (भारत)
*8. लोथल*
▪️नदियों के नाम - भोगवा
▪️उत्त्खनन का वर्ष - 1955-1962
▪️उत्तखननकर्ता - रंगनाथ राव
▪️वर्तमान स्थिति - गुजरात का अहमदाबाद जिला (भारत)
*9. आलमगीरपुर*
▪️नदियों के नाम - हिंडन
▪️उत्त्खनन का वर्ष - 1958
▪️उत्तखननकर्ता - यज्ञदत्त शर्मा
▪️वर्तमान स्थिति - उत्तर प्रदेश का मेरठ जिला (भारत)
*10. बनावली*
▪️नदियों के नाम - रंगोई
▪️उत्त्खनन का वर्ष - 1974
▪️उत्तखननकर्ता - रविन्द्रनाथ विष्ट
▪️वर्तमान स्थिति -हरियाणा का हिसार जिला (भारत)
*11. धौलावीरा*
▪️उत्त्खनन का वर्ष -1990-91
▪️उत्तखननकर्ता - रविन्द्रनाथ विष्ट
▪️वर्तमान स्थिति - गुजरात का कच्छ जिला (भारत)
*1. हड़प्पा*
▪️नदी के नाम - रावी
▪️उत्त्खनन का वर्ष - 1921
▪️उत्तखननकर्ता - दयाराम साहनी और माधोस्वरूप वत्स
▪️वर्तमान स्तिथि - पश्चिम पंजाब का मांटमोगरी जिला (पाकिस्तान)
*2. मोहनजोदड़ो*
▪️नदी के नाम - सिन्धु
▪️उत्त्खनन का वर्ष - 1922
▪️उत्तखननकर्ता - राखलदास बनर्जी
▪️वर्तमान स्थिति - सिंध प्रान्त का लरकाना जिला (पाकिस्तान)
*3. चन्हूदड़ो*
▪️नदी के नाम - सिन्धु
▪️उत्त्खनन का वर्ष - 1931
▪️उत्तखननकर्ता - गोपाल मजूमदार
▪️वर्तमान स्थिति - सिंध प्रान्त(पाकिस्तान)
*4. कालीबंगा*
▪️नदी के नाम - घग्घर
▪️उत्त्खनन का वर्ष - 1953
▪️उत्तखननकर्ता - बी.बी.लाल और बी.के. थापर
▪️वर्तमान स्थिति: राजस्थान का हनुमानगढ़ जिला (भारत)
*5. कोटदीजी*
▪️नदियों के नाम - सिन्धु
▪️उत्त्खनन का वर्ष - 1953
▪️उत्तखननकर्ता - फजल अहमद
▪️वर्तमान स्थिति - सिंध प्रान्त का खैरपुर (पाकिस्तान)
*6. रंगपुर*
▪️नदियों के नाम - मादर
▪️उत्त्खनन का वर्ष - 1953-54
▪️उत्तखननकर्ता - रंगनाथ राव
▪️वर्तमान स्थिति - गुजरात का काठियावाड क्षेत्र (भारत)
*7. रोपड़*
▪️नदियों के नाम - सतलज
▪️उत्त्खनन का वर्ष -1953-56
▪️उत्तखननकर्ता - यज्ञदत्त शर्मा
▪️वर्तमान स्थिति - पंजाब का रोपड़ जिला (भारत)
*8. लोथल*
▪️नदियों के नाम - भोगवा
▪️उत्त्खनन का वर्ष - 1955-1962
▪️उत्तखननकर्ता - रंगनाथ राव
▪️वर्तमान स्थिति - गुजरात का अहमदाबाद जिला (भारत)
*9. आलमगीरपुर*
▪️नदियों के नाम - हिंडन
▪️उत्त्खनन का वर्ष - 1958
▪️उत्तखननकर्ता - यज्ञदत्त शर्मा
▪️वर्तमान स्थिति - उत्तर प्रदेश का मेरठ जिला (भारत)
*10. बनावली*
▪️नदियों के नाम - रंगोई
▪️उत्त्खनन का वर्ष - 1974
▪️उत्तखननकर्ता - रविन्द्रनाथ विष्ट
▪️वर्तमान स्थिति -हरियाणा का हिसार जिला (भारत)
*11. धौलावीरा*
▪️उत्त्खनन का वर्ष -1990-91
▪️उत्तखननकर्ता - रविन्द्रनाथ विष्ट
▪️वर्तमान स्थिति - गुजरात का कच्छ जिला (भारत)
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🔴मोल्दोवा आधिकारिक तौर पर अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) का 107वाँ सदस्य बन गया है, जिसकी पुष्टि भारत के विदेश मंत्रालय ने की है। पेरिस में COP21 (2015) के दौरान भारत और फ्रांस द्वारा संयुक्त रूप से शुरू किया गया ISA, 124 देशों का एक वैश्विक गठबंधन है जिसका उद्देश्य सौर ऊर्जा को अपनाने को बढ़ावा देना, पहुँच में सुधार लाना और वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन का समर्थन करना है।
❤1
प्रश्न: संविधान (130वाँ संशोधन) विधेयक, 2025 क्या है?
> ➡️ इस विधेयक में प्रस्ताव है कि कोई भी मंत्री जो 5 वर्ष या उससे अधिक कारावास की सजा वाले आरोपों में लगातार 30 दिन जेल में बिताता है, उसका पद स्वतः ही समाप्त हो जाएगा।
*प्रश्न: संविधान के किस अनुच्छेद में संशोधन किया जा रहा है?*
> ➡️ अनुच्छेद 75, जो मंत्रिपरिषद (प्रधानमंत्री सहित) की नियुक्ति, कार्यकाल और जिम्मेदारियों से संबंधित है।
> ➡️ यह पहली बार है जब संसद स्पष्ट रूप से गिरफ्तारी पर मंत्रियों को स्वतः हटाने की शर्तें निर्धारित करने का प्रयास कर रही है।
*प्रश्न: यदि मंत्री जेल से रिहा हो जाता है तो क्या होगा?*
> ➡️ यह विधेयक पुनर्नियुक्ति की अनुमति देता है।
> ➡️ रिहा होने के बाद, उसी व्यक्ति को राष्ट्रपति द्वारा नियमित प्रावधानों के तहत फिर से मंत्री या यहाँ तक कि मुख्यमंत्री भी नियुक्त किया जा सकता है।
> ➡️ अतः, अयोग्यता अस्थायी है।
*प्रश्न: विधेयक पेश होने पर विपक्ष ने विरोध क्यों किया?*
> ➡️ लोकसभा में ज़ोरदार विरोध प्रदर्शन हुए। कांग्रेस सांसद के. सी. वेणुगोपाल ने याद दिलाया कि अमित शाह को 2010 में सोहराबुद्दीन शेख मामले में गिरफ्तार किया गया था। शाह ने जवाब दिया कि गिरफ्तारी से पहले ही उन्होंने गुजरात के गृह मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
*प्रश्न: यह विधेयक विवादास्पद क्यों है?*
विपक्ष की चिंताएँ:
1️⃣ दोषसिद्धि नहीं, बल्कि गिरफ्तारी पर सज़ा → "दोषी सिद्ध होने तक निर्दोष" के सिद्धांत को कमज़ोर करता है।
2️⃣ दुरुपयोग की गुंजाइश → केंद्र सरकार के अधीन सीबीआई और ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसियाँ राज्य सरकारों को अस्थिर करने के लिए विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार कर सकती हैं।
3️⃣ मौजूदा कानून में पहले से ही जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (आरपीए) के तहत दोषी ठहराए गए विधायकों को अयोग्य ठहराने का प्रावधान है। यह विधेयक इस सीमा को घटाकर केवल गिरफ्तारी तक सीमित कर देता है।
4️⃣ शक्तियों का पृथक्करण → एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी ने तर्क दिया कि इससे जाँच एजेंसियाँ "न्यायाधीश और जल्लाद" दोनों बन जाती हैं।
5️⃣ संघवाद की चिंताएँ → पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे आपातकाल से भी बदतर बताया: "लोकतंत्र और संघवाद के लिए मृत्युघण्टा।"
*प्रश्न: सरकार का औचित्य क्या है?*
➡️ उद्देश्यों और कारणों के विवरण के अनुसार:
गंभीर आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे मंत्री संवैधानिक नैतिकता को विफल कर सकते हैं, सुशासन को कमजोर कर सकते हैं और जनता के विश्वास को कम कर सकते हैं।
इसलिए, गंभीर अपराधों के लिए हिरासत में रहते हुए उन्हें पद पर बने रहने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
*प्रश्न: संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) क्या है?*
➡️ दोनों सदनों के सदस्यों वाली एक विशेष संसदीय समिति, जिसका गठन किसी विशिष्ट विधेयक या मुद्दे की जाँच के लिए किया जाता है।
1️⃣ अपना कार्य पूरा होने के बाद भंग हो जाती है।
2️⃣सिफारिशें प्रेरक होती हैं, बाध्यकारी नहीं।
*➡️ इस विधेयक के लिए:*
1️⃣31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति (लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति द्वारा चुने गए सदस्य) का गठन किया जाएगा।
2️⃣गृह मंत्री अमित शाह ने समिति से संसद के अगले सत्र से पहले रिपोर्ट देने का अनुरोध किया है।
*प्रश्न: यह बहस क्या दर्शाती है?*
➡️ सिद्धांतों का टकराव:
1️⃣शासन में जवाबदेही और नैतिकता → गंभीर आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे मंत्रियों को पद पर नहीं रहना चाहिए।
2️⃣लोकतंत्र और अधिकार → गिरफ़्तारी ≠ अपराध। एजेंसियों द्वारा दुरुपयोग राजनीतिक प्रतिशोध को जन्म दे सकता है, विपक्षी सरकारों को कमज़ोर कर सकता है और संघीय संतुलन को बिगाड़ सकता है।
*प्रश्न: आगे क्या हो सकता है?*
➡️ संयुक्त संसदीय समिति परामर्श करेगी और अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
➡️ यदि यह संशोधन पारित हो जाता है, तो यह एक नया संवैधानिक मानदंड स्थापित करेगा, जहां गिरफ्तारी से ही किसी मंत्री को अपना पद गँवाना पड़ सकता है, जो भारत के मौजूदा निर्दोषता के ढांचे से एक बड़ा बदलाव होगा।
> ➡️ इस विधेयक में प्रस्ताव है कि कोई भी मंत्री जो 5 वर्ष या उससे अधिक कारावास की सजा वाले आरोपों में लगातार 30 दिन जेल में बिताता है, उसका पद स्वतः ही समाप्त हो जाएगा।
*प्रश्न: संविधान के किस अनुच्छेद में संशोधन किया जा रहा है?*
> ➡️ अनुच्छेद 75, जो मंत्रिपरिषद (प्रधानमंत्री सहित) की नियुक्ति, कार्यकाल और जिम्मेदारियों से संबंधित है।
> ➡️ यह पहली बार है जब संसद स्पष्ट रूप से गिरफ्तारी पर मंत्रियों को स्वतः हटाने की शर्तें निर्धारित करने का प्रयास कर रही है।
*प्रश्न: यदि मंत्री जेल से रिहा हो जाता है तो क्या होगा?*
> ➡️ यह विधेयक पुनर्नियुक्ति की अनुमति देता है।
> ➡️ रिहा होने के बाद, उसी व्यक्ति को राष्ट्रपति द्वारा नियमित प्रावधानों के तहत फिर से मंत्री या यहाँ तक कि मुख्यमंत्री भी नियुक्त किया जा सकता है।
> ➡️ अतः, अयोग्यता अस्थायी है।
*प्रश्न: विधेयक पेश होने पर विपक्ष ने विरोध क्यों किया?*
> ➡️ लोकसभा में ज़ोरदार विरोध प्रदर्शन हुए। कांग्रेस सांसद के. सी. वेणुगोपाल ने याद दिलाया कि अमित शाह को 2010 में सोहराबुद्दीन शेख मामले में गिरफ्तार किया गया था। शाह ने जवाब दिया कि गिरफ्तारी से पहले ही उन्होंने गुजरात के गृह मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
*प्रश्न: यह विधेयक विवादास्पद क्यों है?*
विपक्ष की चिंताएँ:
1️⃣ दोषसिद्धि नहीं, बल्कि गिरफ्तारी पर सज़ा → "दोषी सिद्ध होने तक निर्दोष" के सिद्धांत को कमज़ोर करता है।
2️⃣ दुरुपयोग की गुंजाइश → केंद्र सरकार के अधीन सीबीआई और ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसियाँ राज्य सरकारों को अस्थिर करने के लिए विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार कर सकती हैं।
3️⃣ मौजूदा कानून में पहले से ही जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (आरपीए) के तहत दोषी ठहराए गए विधायकों को अयोग्य ठहराने का प्रावधान है। यह विधेयक इस सीमा को घटाकर केवल गिरफ्तारी तक सीमित कर देता है।
4️⃣ शक्तियों का पृथक्करण → एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी ने तर्क दिया कि इससे जाँच एजेंसियाँ "न्यायाधीश और जल्लाद" दोनों बन जाती हैं।
5️⃣ संघवाद की चिंताएँ → पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे आपातकाल से भी बदतर बताया: "लोकतंत्र और संघवाद के लिए मृत्युघण्टा।"
*प्रश्न: सरकार का औचित्य क्या है?*
➡️ उद्देश्यों और कारणों के विवरण के अनुसार:
गंभीर आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे मंत्री संवैधानिक नैतिकता को विफल कर सकते हैं, सुशासन को कमजोर कर सकते हैं और जनता के विश्वास को कम कर सकते हैं।
इसलिए, गंभीर अपराधों के लिए हिरासत में रहते हुए उन्हें पद पर बने रहने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
*प्रश्न: संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) क्या है?*
➡️ दोनों सदनों के सदस्यों वाली एक विशेष संसदीय समिति, जिसका गठन किसी विशिष्ट विधेयक या मुद्दे की जाँच के लिए किया जाता है।
1️⃣ अपना कार्य पूरा होने के बाद भंग हो जाती है।
2️⃣सिफारिशें प्रेरक होती हैं, बाध्यकारी नहीं।
*➡️ इस विधेयक के लिए:*
1️⃣31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति (लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति द्वारा चुने गए सदस्य) का गठन किया जाएगा।
2️⃣गृह मंत्री अमित शाह ने समिति से संसद के अगले सत्र से पहले रिपोर्ट देने का अनुरोध किया है।
*प्रश्न: यह बहस क्या दर्शाती है?*
➡️ सिद्धांतों का टकराव:
1️⃣शासन में जवाबदेही और नैतिकता → गंभीर आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे मंत्रियों को पद पर नहीं रहना चाहिए।
2️⃣लोकतंत्र और अधिकार → गिरफ़्तारी ≠ अपराध। एजेंसियों द्वारा दुरुपयोग राजनीतिक प्रतिशोध को जन्म दे सकता है, विपक्षी सरकारों को कमज़ोर कर सकता है और संघीय संतुलन को बिगाड़ सकता है।
*प्रश्न: आगे क्या हो सकता है?*
➡️ संयुक्त संसदीय समिति परामर्श करेगी और अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
➡️ यदि यह संशोधन पारित हो जाता है, तो यह एक नया संवैधानिक मानदंड स्थापित करेगा, जहां गिरफ्तारी से ही किसी मंत्री को अपना पद गँवाना पड़ सकता है, जो भारत के मौजूदा निर्दोषता के ढांचे से एक बड़ा बदलाव होगा।
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