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MPPSC 2026-27 BATCH
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नालंदा की बावन बूटी साड़ी एवं फैब्रिक, गया की पत्थरकट्टी स्टोन क्राफ्ट और भोजपुर की पिढ़िया पेंटिंग को मिला जीआई टैग
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संजा गीत का उदाहरण
नीली पीली मोटर दरवाजे में खड़ी
आज मेरी संजा ससुराल चली
मम्मी भी रोये पापा भी रोये
रो रो के नदिया बहा चली
आज मेरी संजा ससुराल चली।
नीली पीली मोटर दरवाजे में खड़ी
आज मेरी संजा ससुराल चली
मम्मी भी रोये पापा भी रोये
रो रो के नदिया बहा चली
आज मेरी संजा ससुराल चली।
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हीड़ गायन
क्षेत्र - संपूर्ण मालवा अंचल में किया जाता है।
अवसर - श्रावण माह में, गोवर्धन पूजा के अवसर पर।
विषयवस्तु - मौलिक रूप से अहीरों का गायन है। ग्यारस माता की कथा तथा कृषि संस्कृति का सूक्ष्म वर्णन
शैली - प्रतिस्पर्धात्मक गायन शैली ।
वाद्य यंत्र - ढोलक , मंजीरा
समुदाय - स्त्री तथा पुरुष दोनों द्वारा गाया जाता है।
विशेष श्रावण के महीने में बाग-बगीचों में झूले लगाए जाते हैं तथा गांवों में होड़ गायन की प्रतिस्पद्धां शुरू होती है। हीड़ गायन ऊँचे स्वर में होता है, जिसमें आलाप भी लिए जाते हैं।
उदाहरण
बातों को कर लो बंद, कथा ग्यारस की सुन लो जी,
बिना पुत्र का बाप, खेतों में रोवेजी। मेरे हका हुआ है खेत, पुत्र बिना कौन जोतेजी।।
क्षेत्र - संपूर्ण मालवा अंचल में किया जाता है।
अवसर - श्रावण माह में, गोवर्धन पूजा के अवसर पर।
विषयवस्तु - मौलिक रूप से अहीरों का गायन है। ग्यारस माता की कथा तथा कृषि संस्कृति का सूक्ष्म वर्णन
शैली - प्रतिस्पर्धात्मक गायन शैली ।
वाद्य यंत्र - ढोलक , मंजीरा
समुदाय - स्त्री तथा पुरुष दोनों द्वारा गाया जाता है।
विशेष श्रावण के महीने में बाग-बगीचों में झूले लगाए जाते हैं तथा गांवों में होड़ गायन की प्रतिस्पद्धां शुरू होती है। हीड़ गायन ऊँचे स्वर में होता है, जिसमें आलाप भी लिए जाते हैं।
उदाहरण
बातों को कर लो बंद, कथा ग्यारस की सुन लो जी,
बिना पुत्र का बाप, खेतों में रोवेजी। मेरे हका हुआ है खेत, पुत्र बिना कौन जोतेजी।।
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• दृढ़ता ➔ Resilience (रिज़िलिएन्स)
• कुशलता ➔ Efficiency (इफिशिएन्सी)
• निष्कर्ष ➔ Conclusion (कन्क्लूज़न)
• नवाचार ➔ Innovation (इनोवेशन)
• लचीलापन ➔ Flexibility (फ्लेक्सिबिलिटी)
• महत्व ➔ Importance (इम्पोर्टेन्स)
• प्रेरक शक्ति ➔ Momentum (मोमेंटम)
• परिशुद्धता ➔ Exactitude (एग्ज़ैक्टिट्यूड)
• दूरदर्शिता ➔ Foresight (फोरसाइट)
• स्वीकार्यता ➔ Acceptability (एक्सेप्टेबिलिटी)
• सहभागिता ➔ Engagement (एंगेजमेंट)
• सहनशीलता ➔ Tolerance (टॉलरेंस)
• दृढ़ विश्वास ➔ Conviction (कन्विक्शन)
• विवेक ➔ Discernment (डिसर्नमेंट)
• प्रामाणिकता ➔ Credibility (क्रेडिबिलिटी)
• निरंतरता ➔ Consistency (कन्सिस्टेंसी)
• समावेश ➔ Incorporation (इनकॉर्पोरेशन)
• विस्तार ➔ Elaboration (इलैबोरेशन)
• संरक्षण ➔ Preservation (प्रिज़र्वेशन)
• अनुकूलन ➔ Accommodation (अकॉमोडेशन)
• सुदृढ़ीकरण ➔ Reinforcement (रीइन्फोर्समेंट)
• आत्मनिर्भरता ➔ Self-sufficiency (सेल्फ-सफिशिएन्सी)
• संतुलन ➔ Equilibrium (इक्विलिब्रियम)
• उत्पादकता ➔ Output (आउटपुट)
• उत्कृष्ट प्रदर्शन ➔ Excellence (एक्सलेंस)
• कुशलता ➔ Efficiency (इफिशिएन्सी)
• निष्कर्ष ➔ Conclusion (कन्क्लूज़न)
• नवाचार ➔ Innovation (इनोवेशन)
• लचीलापन ➔ Flexibility (फ्लेक्सिबिलिटी)
• महत्व ➔ Importance (इम्पोर्टेन्स)
• प्रेरक शक्ति ➔ Momentum (मोमेंटम)
• परिशुद्धता ➔ Exactitude (एग्ज़ैक्टिट्यूड)
• दूरदर्शिता ➔ Foresight (फोरसाइट)
• स्वीकार्यता ➔ Acceptability (एक्सेप्टेबिलिटी)
• सहभागिता ➔ Engagement (एंगेजमेंट)
• सहनशीलता ➔ Tolerance (टॉलरेंस)
• दृढ़ विश्वास ➔ Conviction (कन्विक्शन)
• विवेक ➔ Discernment (डिसर्नमेंट)
• प्रामाणिकता ➔ Credibility (क्रेडिबिलिटी)
• निरंतरता ➔ Consistency (कन्सिस्टेंसी)
• समावेश ➔ Incorporation (इनकॉर्पोरेशन)
• विस्तार ➔ Elaboration (इलैबोरेशन)
• संरक्षण ➔ Preservation (प्रिज़र्वेशन)
• अनुकूलन ➔ Accommodation (अकॉमोडेशन)
• सुदृढ़ीकरण ➔ Reinforcement (रीइन्फोर्समेंट)
• आत्मनिर्भरता ➔ Self-sufficiency (सेल्फ-सफिशिएन्सी)
• संतुलन ➔ Equilibrium (इक्विलिब्रियम)
• उत्पादकता ➔ Output (आउटपुट)
• उत्कृष्ट प्रदर्शन ➔ Excellence (एक्सलेंस)
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हास्य रस के दो प्रकार हैं-
आत्मस्थ हास्य रस
परस्थ हास्य रस
आत्मस्थ हास्य रस-
जब किसी व्यक्ति या विषय की विचित्र वेशभूषा, वाणी, आकृति तथा चेष्टा आदि को देखने मात्र से जो हास्य उत्पन्न होता है उसे आत्मस्थ हास्य रस कहते हैं।
परस्थ हास्य रस-
जब किसी व्यक्ति या विषय की विचित्र वेशभूषा, वाणी, आकृति तथा चेष्टा आदि को देखकर जब कोई हँसता है, तो उस हँसते हुए व्यक्ति को देखकर जो हास्य प्रकट होता है उसे परस्थ हास्य रस कहते है।
आत्मस्थ हास्य रस
परस्थ हास्य रस
आत्मस्थ हास्य रस-
जब किसी व्यक्ति या विषय की विचित्र वेशभूषा, वाणी, आकृति तथा चेष्टा आदि को देखने मात्र से जो हास्य उत्पन्न होता है उसे आत्मस्थ हास्य रस कहते हैं।
परस्थ हास्य रस-
जब किसी व्यक्ति या विषय की विचित्र वेशभूषा, वाणी, आकृति तथा चेष्टा आदि को देखकर जब कोई हँसता है, तो उस हँसते हुए व्यक्ति को देखकर जो हास्य प्रकट होता है उसे परस्थ हास्य रस कहते है।
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आचार्य केशवदास ने चार प्रकार के हास के प्रकार-
मन्दहास,
कलहास,
अतिहास एवं
परिहास
अन्य साहित्यशास्त्रियों के द्वारा छ: प्रकार का हास बताये है –
स्मित
हसित,
विहसित
उपहसित,
अपहसित
अतिहसित
मन्दहास,
कलहास,
अतिहास एवं
परिहास
अन्य साहित्यशास्त्रियों के द्वारा छ: प्रकार का हास बताये है –
स्मित
हसित,
विहसित
उपहसित,
अपहसित
अतिहसित
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