नालंदा की बावन बूटी साड़ी एवं फैब्रिक, गया की पत्थरकट्टी स्टोन क्राफ्ट और भोजपुर की पिढ़िया पेंटिंग को मिला जीआई टैग
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MPPSC 2026-27 BATCH
https://trjwj.courses.store/606297?utm_source%3Dother%26utm_medium%3Dtutor-course-referral%26utm_campaign%3Dcourse-overview-webapp
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संजा गीत का उदाहरण
नीली पीली मोटर दरवाजे में खड़ी
आज मेरी संजा ससुराल चली
मम्मी भी रोये पापा भी रोये
रो रो के नदिया बहा चली
आज मेरी संजा ससुराल चली।
नीली पीली मोटर दरवाजे में खड़ी
आज मेरी संजा ससुराल चली
मम्मी भी रोये पापा भी रोये
रो रो के नदिया बहा चली
आज मेरी संजा ससुराल चली।
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हीड़ गायन
क्षेत्र - संपूर्ण मालवा अंचल में किया जाता है।
अवसर - श्रावण माह में, गोवर्धन पूजा के अवसर पर।
विषयवस्तु - मौलिक रूप से अहीरों का गायन है। ग्यारस माता की कथा तथा कृषि संस्कृति का सूक्ष्म वर्णन
शैली - प्रतिस्पर्धात्मक गायन शैली ।
वाद्य यंत्र - ढोलक , मंजीरा
समुदाय - स्त्री तथा पुरुष दोनों द्वारा गाया जाता है।
विशेष श्रावण के महीने में बाग-बगीचों में झूले लगाए जाते हैं तथा गांवों में होड़ गायन की प्रतिस्पद्धां शुरू होती है। हीड़ गायन ऊँचे स्वर में होता है, जिसमें आलाप भी लिए जाते हैं।
उदाहरण
बातों को कर लो बंद, कथा ग्यारस की सुन लो जी,
बिना पुत्र का बाप, खेतों में रोवेजी। मेरे हका हुआ है खेत, पुत्र बिना कौन जोतेजी।।
क्षेत्र - संपूर्ण मालवा अंचल में किया जाता है।
अवसर - श्रावण माह में, गोवर्धन पूजा के अवसर पर।
विषयवस्तु - मौलिक रूप से अहीरों का गायन है। ग्यारस माता की कथा तथा कृषि संस्कृति का सूक्ष्म वर्णन
शैली - प्रतिस्पर्धात्मक गायन शैली ।
वाद्य यंत्र - ढोलक , मंजीरा
समुदाय - स्त्री तथा पुरुष दोनों द्वारा गाया जाता है।
विशेष श्रावण के महीने में बाग-बगीचों में झूले लगाए जाते हैं तथा गांवों में होड़ गायन की प्रतिस्पद्धां शुरू होती है। हीड़ गायन ऊँचे स्वर में होता है, जिसमें आलाप भी लिए जाते हैं।
उदाहरण
बातों को कर लो बंद, कथा ग्यारस की सुन लो जी,
बिना पुत्र का बाप, खेतों में रोवेजी। मेरे हका हुआ है खेत, पुत्र बिना कौन जोतेजी।।
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• दृढ़ता ➔ Resilience (रिज़िलिएन्स)
• कुशलता ➔ Efficiency (इफिशिएन्सी)
• निष्कर्ष ➔ Conclusion (कन्क्लूज़न)
• नवाचार ➔ Innovation (इनोवेशन)
• लचीलापन ➔ Flexibility (फ्लेक्सिबिलिटी)
• महत्व ➔ Importance (इम्पोर्टेन्स)
• प्रेरक शक्ति ➔ Momentum (मोमेंटम)
• परिशुद्धता ➔ Exactitude (एग्ज़ैक्टिट्यूड)
• दूरदर्शिता ➔ Foresight (फोरसाइट)
• स्वीकार्यता ➔ Acceptability (एक्सेप्टेबिलिटी)
• सहभागिता ➔ Engagement (एंगेजमेंट)
• सहनशीलता ➔ Tolerance (टॉलरेंस)
• दृढ़ विश्वास ➔ Conviction (कन्विक्शन)
• विवेक ➔ Discernment (डिसर्नमेंट)
• प्रामाणिकता ➔ Credibility (क्रेडिबिलिटी)
• निरंतरता ➔ Consistency (कन्सिस्टेंसी)
• समावेश ➔ Incorporation (इनकॉर्पोरेशन)
• विस्तार ➔ Elaboration (इलैबोरेशन)
• संरक्षण ➔ Preservation (प्रिज़र्वेशन)
• अनुकूलन ➔ Accommodation (अकॉमोडेशन)
• सुदृढ़ीकरण ➔ Reinforcement (रीइन्फोर्समेंट)
• आत्मनिर्भरता ➔ Self-sufficiency (सेल्फ-सफिशिएन्सी)
• संतुलन ➔ Equilibrium (इक्विलिब्रियम)
• उत्पादकता ➔ Output (आउटपुट)
• उत्कृष्ट प्रदर्शन ➔ Excellence (एक्सलेंस)
• कुशलता ➔ Efficiency (इफिशिएन्सी)
• निष्कर्ष ➔ Conclusion (कन्क्लूज़न)
• नवाचार ➔ Innovation (इनोवेशन)
• लचीलापन ➔ Flexibility (फ्लेक्सिबिलिटी)
• महत्व ➔ Importance (इम्पोर्टेन्स)
• प्रेरक शक्ति ➔ Momentum (मोमेंटम)
• परिशुद्धता ➔ Exactitude (एग्ज़ैक्टिट्यूड)
• दूरदर्शिता ➔ Foresight (फोरसाइट)
• स्वीकार्यता ➔ Acceptability (एक्सेप्टेबिलिटी)
• सहभागिता ➔ Engagement (एंगेजमेंट)
• सहनशीलता ➔ Tolerance (टॉलरेंस)
• दृढ़ विश्वास ➔ Conviction (कन्विक्शन)
• विवेक ➔ Discernment (डिसर्नमेंट)
• प्रामाणिकता ➔ Credibility (क्रेडिबिलिटी)
• निरंतरता ➔ Consistency (कन्सिस्टेंसी)
• समावेश ➔ Incorporation (इनकॉर्पोरेशन)
• विस्तार ➔ Elaboration (इलैबोरेशन)
• संरक्षण ➔ Preservation (प्रिज़र्वेशन)
• अनुकूलन ➔ Accommodation (अकॉमोडेशन)
• सुदृढ़ीकरण ➔ Reinforcement (रीइन्फोर्समेंट)
• आत्मनिर्भरता ➔ Self-sufficiency (सेल्फ-सफिशिएन्सी)
• संतुलन ➔ Equilibrium (इक्विलिब्रियम)
• उत्पादकता ➔ Output (आउटपुट)
• उत्कृष्ट प्रदर्शन ➔ Excellence (एक्सलेंस)
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हास्य रस के दो प्रकार हैं-
आत्मस्थ हास्य रस
परस्थ हास्य रस
आत्मस्थ हास्य रस-
जब किसी व्यक्ति या विषय की विचित्र वेशभूषा, वाणी, आकृति तथा चेष्टा आदि को देखने मात्र से जो हास्य उत्पन्न होता है उसे आत्मस्थ हास्य रस कहते हैं।
परस्थ हास्य रस-
जब किसी व्यक्ति या विषय की विचित्र वेशभूषा, वाणी, आकृति तथा चेष्टा आदि को देखकर जब कोई हँसता है, तो उस हँसते हुए व्यक्ति को देखकर जो हास्य प्रकट होता है उसे परस्थ हास्य रस कहते है।
आत्मस्थ हास्य रस
परस्थ हास्य रस
आत्मस्थ हास्य रस-
जब किसी व्यक्ति या विषय की विचित्र वेशभूषा, वाणी, आकृति तथा चेष्टा आदि को देखने मात्र से जो हास्य उत्पन्न होता है उसे आत्मस्थ हास्य रस कहते हैं।
परस्थ हास्य रस-
जब किसी व्यक्ति या विषय की विचित्र वेशभूषा, वाणी, आकृति तथा चेष्टा आदि को देखकर जब कोई हँसता है, तो उस हँसते हुए व्यक्ति को देखकर जो हास्य प्रकट होता है उसे परस्थ हास्य रस कहते है।
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आचार्य केशवदास ने चार प्रकार के हास के प्रकार-
मन्दहास,
कलहास,
अतिहास एवं
परिहास
अन्य साहित्यशास्त्रियों के द्वारा छ: प्रकार का हास बताये है –
स्मित
हसित,
विहसित
उपहसित,
अपहसित
अतिहसित
मन्दहास,
कलहास,
अतिहास एवं
परिहास
अन्य साहित्यशास्त्रियों के द्वारा छ: प्रकार का हास बताये है –
स्मित
हसित,
विहसित
उपहसित,
अपहसित
अतिहसित
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बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।
चढ़ चेतक पर तलवार उठा,
करता था भूतल पानी को
राणा प्रताप सर काट काट,
करता था सफल जवानी को।
करता था भूतल पानी को
राणा प्रताप सर काट काट,
करता था सफल जवानी को।
जब किसी काव्य को सुनने पर या किसी असामान्य घटना को देखने और सुनने पर मन में स्थित क्रोध का भाव उत्पन्न हो तो वहां रौद्र रस होता है.
या
फिर किसी शत्रु केआचरण को देखकर या किसी दुराचारी के अत्याचार को देखने के बाद जो मन में क्रोध का भाव उत्पन्न होता है वही रौद्र रस कहलाता है .
रौद्र रस में विभिन्न क्रियाएं उत्पन्न होती हैं जैसे आंखों का लाल होना, होठों का फड़फड़ाना, दांत पीसना त्योरी चढ़ाना, बाहे तन जाना, शरीर का कांपने लग जाना, शस्त्र उठा लेना, जोर-जोर से चिल्लाना, गर्जना आदि सभी अनुभव रौद्र रस में उत्पन्न होते हैं.
या
फिर किसी शत्रु केआचरण को देखकर या किसी दुराचारी के अत्याचार को देखने के बाद जो मन में क्रोध का भाव उत्पन्न होता है वही रौद्र रस कहलाता है .
रौद्र रस में विभिन्न क्रियाएं उत्पन्न होती हैं जैसे आंखों का लाल होना, होठों का फड़फड़ाना, दांत पीसना त्योरी चढ़ाना, बाहे तन जाना, शरीर का कांपने लग जाना, शस्त्र उठा लेना, जोर-जोर से चिल्लाना, गर्जना आदि सभी अनुभव रौद्र रस में उत्पन्न होते हैं.
ई-पाठशाला भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय और एनसीईआरटी (NCERT) की एक डिजिटल पहल है, जिसे नवंबर 2015 में शुरू किया गया था। यह छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों को ई-पुस्तकें, ऑडियो, वीडियो और पत्रिकाएं मुफ्त में उपलब्ध कराती है।
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उन्नत भारत अभियान (UBA) भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की एक राष्ट्रीय पहल है, जिसे 11 नवंबर 2014 को शुरू किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण विकास प्रक्रियाओं में बदलाव लाना और उच्च शिक्षण संस्थानों (HEI) को कम से कम पांच गाँवों से जोड़ना है, ताकि वे अपने ज्ञान और तकनीक का उपयोग करके गाँवों का सतत विकास कर सकें।
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 का उद्देश्य भारत की शिक्षा व्यवस्था को समावेशी, गुणवत्तापूर्ण, लचीला, बहुविषयक एवं रोजगारोन्मुख बनाना है। इसका लक्ष्य 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप ज्ञान, कौशल और नवाचार से युक्त नागरिक तैयार करना है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का विजन
1. सर्वसमावेशी एवं समान शिक्षा – प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर उपलब्ध कराना।
2. समग्र विकास (Holistic Development) – केवल परीक्षा आधारित शिक्षा के बजाय बौद्धिक, सामाजिक, नैतिक एवं शारीरिक विकास पर बल।
3. बहुविषयक शिक्षा (Multidisciplinary Education) – विषयों के बीच लचीलापन एवं छात्र की रुचि के अनुसार अध्ययन।
4. मातृभाषा में शिक्षा – कक्षा 5 (जहाँ संभव हो कक्षा 8 तक) मातृभाषा/स्थानीय भाषा में शिक्षण को प्रोत्साहन।
5. कौशल एवं व्यावसायिक शिक्षा – प्रारंभिक स्तर से कौशल विकास एवं रोजगारपरक शिक्षा पर बल।
6. प्रौद्योगिकी का उपयोग – डिजिटल शिक्षा, ऑनलाइन शिक्षण एवं नवाचार को बढ़ावा।
7. शोध एवं नवाचार – उच्च शिक्षा में अनुसंधान संस्कृति को विकसित करने हेतु National Research Foundation (NRF) की स्थापना का प्रावधान।
निष्कर्ष:
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का विजन "ज्ञान-आधारित, आत्मनिर्भर एवं वैश्विक प्रतिस्पर्धी भारत" का निर्माण करना है। यह नीति विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की प्राप्ति में महत्वपूर्ण आधार प्रदान करती है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का विजन
1. सर्वसमावेशी एवं समान शिक्षा – प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर उपलब्ध कराना।
2. समग्र विकास (Holistic Development) – केवल परीक्षा आधारित शिक्षा के बजाय बौद्धिक, सामाजिक, नैतिक एवं शारीरिक विकास पर बल।
3. बहुविषयक शिक्षा (Multidisciplinary Education) – विषयों के बीच लचीलापन एवं छात्र की रुचि के अनुसार अध्ययन।
4. मातृभाषा में शिक्षा – कक्षा 5 (जहाँ संभव हो कक्षा 8 तक) मातृभाषा/स्थानीय भाषा में शिक्षण को प्रोत्साहन।
5. कौशल एवं व्यावसायिक शिक्षा – प्रारंभिक स्तर से कौशल विकास एवं रोजगारपरक शिक्षा पर बल।
6. प्रौद्योगिकी का उपयोग – डिजिटल शिक्षा, ऑनलाइन शिक्षण एवं नवाचार को बढ़ावा।
7. शोध एवं नवाचार – उच्च शिक्षा में अनुसंधान संस्कृति को विकसित करने हेतु National Research Foundation (NRF) की स्थापना का प्रावधान।
निष्कर्ष:
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का विजन "ज्ञान-आधारित, आत्मनिर्भर एवं वैश्विक प्रतिस्पर्धी भारत" का निर्माण करना है। यह नीति विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की प्राप्ति में महत्वपूर्ण आधार प्रदान करती है।
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 का उद्देश्य भारत की स्कूली शिक्षा प्रणाली को समावेशी, गुणवत्तापूर्ण, लचीला एवं कौशल-आधारित बनाना है। यह नीति स्कूली शिक्षा में लंबे समय से मौजूद समस्याओं की पहचान कर उनके समाधान हेतु व्यापक प्रावधान प्रस्तुत करती है।
स्कूली शिक्षा में व्याप्त प्रमुख मुद्दे
रटंत (Rote Learning) प्रणाली – अवधारणात्मक समझ एवं रचनात्मकता का अभाव।
उच्च ड्रॉपआउट दर – विशेषकर बालिकाओं एवं सामाजिक-आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों में।
सीखने के निम्न स्तर (Learning Outcomes) – प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ने, लिखने एवं गणना की कमजोर क्षमता।
शिक्षकों का अपर्याप्त प्रशिक्षण – आधुनिक शिक्षण विधियों एवं तकनीक का सीमित उपयोग।
विषयों में लचीलापन का अभाव – विज्ञान, कला एवं वाणिज्य के बीच कठोर विभाजन।
व्यावसायिक एवं कौशल शिक्षा की कमी – रोजगारोन्मुख शिक्षा का अभाव।
परीक्षा-केंद्रित शिक्षा व्यवस्था – अंक प्राप्ति पर अधिक जोर।
डिजिटल असमानता – ग्रामीण एवं वंचित क्षेत्रों में डिजिटल संसाधनों की कमी।
समावेशी शिक्षा की चुनौतियाँ – दिव्यांग एवं वंचित वर्गों की सीमित भागीदारी।
प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा (ECCE) का अभाव – आधारभूत शिक्षा कमजोर होना।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के समाधान संबंधी प्रावधान
1. 5+3+3+4 पाठ्यक्रम संरचना
3–18 वर्ष आयु के बच्चों के विकासात्मक चरणों के अनुरूप शिक्षा।
ECCE को औपचारिक शिक्षा से जोड़ना।
2. Foundational Literacy and Numeracy (FLN)
कक्षा 3 तक प्रत्येक बच्चे में पढ़ने, लिखने एवं गणना की मूलभूत क्षमता विकसित करना।
निपुण भारत मिशन (NIPUN Bharat) के माध्यम से क्रियान्वयन।
3. मातृभाषा/स्थानीय भाषा में शिक्षा
कक्षा 5 तक (जहाँ संभव हो कक्षा 8 तक) मातृभाषा में शिक्षण को प्रोत्साहन।
4. समग्र एवं अनुभवात्मक शिक्षा
रटंत शिक्षा के स्थान पर Experiential Learning, Critical Thinking, Problem Solving पर बल।
5. परीक्षा सुधार
बोर्ड परीक्षाओं को कम तनावपूर्ण एवं योग्यता आधारित बनाना।
PARAKH जैसी राष्ट्रीय मूल्यांकन संस्था की स्थापना।
6. विषयों में लचीलापन
कला, विज्ञान एवं वाणिज्य के बीच विभाजन समाप्त।
छात्रों को रुचि के अनुसार विषय चुनने की स्वतंत्रता।
7. व्यावसायिक शिक्षा
कक्षा 6 से कौशल शिक्षा एवं इंटर्नशिप।
स्थानीय उद्योगों एवं शिल्प से जुड़ाव।
8. शिक्षक शिक्षा एवं प्रशिक्षण
4 वर्षीय समेकित B.Ed. कार्यक्रम।
निरंतर व्यावसायिक विकास (CPD) पर बल।
9. डिजिटल शिक्षा
DIKSHA, SWAYAM एवं ऑनलाइन शिक्षण प्लेटफॉर्म का विस्तार।
डिजिटल अवसंरचना को मजबूत करना।
10. समावेशी शिक्षा
सामाजिक एवं आर्थिक रूप से वंचित समूहों (SEDGs) के लिए विशेष सहायता।
दिव्यांग छात्रों हेतु सुलभ एवं समावेशी शिक्षण व्यवस्था।
आलोचनात्मक दृष्टि (Challenges)
राज्यों में प्रभावी क्रियान्वयन की चुनौती।
पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता।
डिजिटल विभाजन एवं शिक्षक प्रशिक्षण में असमानता।
मातृभाषा में गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री की उपलब्धता।
निष्कर्ष
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 स्कूली शिक्षा की कमियों को दूर करने हेतु समग्र, लचीली, कौशल-आधारित एवं छात्र-केंद्रित शिक्षा प्रणाली का प्रस्ताव करती है। यदि इसके प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाए, तो यह राष्ट्रीय विकास, मानव पूंजी निर्माण तथा विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
स्कूली शिक्षा में व्याप्त प्रमुख मुद्दे
रटंत (Rote Learning) प्रणाली – अवधारणात्मक समझ एवं रचनात्मकता का अभाव।
उच्च ड्रॉपआउट दर – विशेषकर बालिकाओं एवं सामाजिक-आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों में।
सीखने के निम्न स्तर (Learning Outcomes) – प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ने, लिखने एवं गणना की कमजोर क्षमता।
शिक्षकों का अपर्याप्त प्रशिक्षण – आधुनिक शिक्षण विधियों एवं तकनीक का सीमित उपयोग।
विषयों में लचीलापन का अभाव – विज्ञान, कला एवं वाणिज्य के बीच कठोर विभाजन।
व्यावसायिक एवं कौशल शिक्षा की कमी – रोजगारोन्मुख शिक्षा का अभाव।
परीक्षा-केंद्रित शिक्षा व्यवस्था – अंक प्राप्ति पर अधिक जोर।
डिजिटल असमानता – ग्रामीण एवं वंचित क्षेत्रों में डिजिटल संसाधनों की कमी।
समावेशी शिक्षा की चुनौतियाँ – दिव्यांग एवं वंचित वर्गों की सीमित भागीदारी।
प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा (ECCE) का अभाव – आधारभूत शिक्षा कमजोर होना।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के समाधान संबंधी प्रावधान
1. 5+3+3+4 पाठ्यक्रम संरचना
3–18 वर्ष आयु के बच्चों के विकासात्मक चरणों के अनुरूप शिक्षा।
ECCE को औपचारिक शिक्षा से जोड़ना।
2. Foundational Literacy and Numeracy (FLN)
कक्षा 3 तक प्रत्येक बच्चे में पढ़ने, लिखने एवं गणना की मूलभूत क्षमता विकसित करना।
निपुण भारत मिशन (NIPUN Bharat) के माध्यम से क्रियान्वयन।
3. मातृभाषा/स्थानीय भाषा में शिक्षा
कक्षा 5 तक (जहाँ संभव हो कक्षा 8 तक) मातृभाषा में शिक्षण को प्रोत्साहन।
4. समग्र एवं अनुभवात्मक शिक्षा
रटंत शिक्षा के स्थान पर Experiential Learning, Critical Thinking, Problem Solving पर बल।
5. परीक्षा सुधार
बोर्ड परीक्षाओं को कम तनावपूर्ण एवं योग्यता आधारित बनाना।
PARAKH जैसी राष्ट्रीय मूल्यांकन संस्था की स्थापना।
6. विषयों में लचीलापन
कला, विज्ञान एवं वाणिज्य के बीच विभाजन समाप्त।
छात्रों को रुचि के अनुसार विषय चुनने की स्वतंत्रता।
7. व्यावसायिक शिक्षा
कक्षा 6 से कौशल शिक्षा एवं इंटर्नशिप।
स्थानीय उद्योगों एवं शिल्प से जुड़ाव।
8. शिक्षक शिक्षा एवं प्रशिक्षण
4 वर्षीय समेकित B.Ed. कार्यक्रम।
निरंतर व्यावसायिक विकास (CPD) पर बल।
9. डिजिटल शिक्षा
DIKSHA, SWAYAM एवं ऑनलाइन शिक्षण प्लेटफॉर्म का विस्तार।
डिजिटल अवसंरचना को मजबूत करना।
10. समावेशी शिक्षा
सामाजिक एवं आर्थिक रूप से वंचित समूहों (SEDGs) के लिए विशेष सहायता।
दिव्यांग छात्रों हेतु सुलभ एवं समावेशी शिक्षण व्यवस्था।
आलोचनात्मक दृष्टि (Challenges)
राज्यों में प्रभावी क्रियान्वयन की चुनौती।
पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता।
डिजिटल विभाजन एवं शिक्षक प्रशिक्षण में असमानता।
मातृभाषा में गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री की उपलब्धता।
निष्कर्ष
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 स्कूली शिक्षा की कमियों को दूर करने हेतु समग्र, लचीली, कौशल-आधारित एवं छात्र-केंद्रित शिक्षा प्रणाली का प्रस्ताव करती है। यदि इसके प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाए, तो यह राष्ट्रीय विकास, मानव पूंजी निर्माण तथा विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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