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भारत को आज़ादी एक ही रास्ते से नहीं मिली, बल्कि कई रास्तों पर चलने के साहस से मिली। नेताजी सुभाष चंद्र बोस को नमन।
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता |
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना ||
विद्या और कला की देवी माँ सरस्वती के चरणों में सादर नमन। 🙏✨
आप सभी को वसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं! 🌼📖
माँ शारदा आपके जीवन को ज्ञान, कला और सद्बुद्धि के प्रकाश से आलोकित करें। 💛
विद्या रूपी धन हम सभी के जीवन में सुख और समृद्धि लाए। 🔱✍️
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना ||
विद्या और कला की देवी माँ सरस्वती के चरणों में सादर नमन। 🙏✨
आप सभी को वसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं! 🌼📖
माँ शारदा आपके जीवन को ज्ञान, कला और सद्बुद्धि के प्रकाश से आलोकित करें। 💛
विद्या रूपी धन हम सभी के जीवन में सुख और समृद्धि लाए। 🔱✍️
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⬇️ तमाशा लोक नाट्य ⬇️
⇛ तमाशा लोक नाट्य मूल रूप से महाराष्ट्र का लोक नाट्य है।
⇛ जयपुर के राजा सवाई प्रताप सिंह के शासन काल में तमाशा लोक नाट्य जयपुर में लोकप्रिय हुआ था।
⇛ तमाशा लोक नाट्य के लिए बंशीधर भट्ट को महाराष्ट्र से जयपुर बुलाया गया था।
⇛ तमाशा लोक नाट्य का आयोजन एक खुले मैदान में किया जाता है जिसे अखाड़ा कहते हैं।
⇛ जयपुर की प्रसिद्ध नृत्यांगना 'गौहर जान' तमाशा लोक नाट्य में भाग लेती है।
⇛ मुख्य कहानियां - निम्नलिखित कहानियों पर तमाशा लोक नाट्य किया जाता है -
(i) होली के दिन जोगी-जोगण तमाशा किया जाता है।
(ii) होली के अगले दिन हीर-राँझा का तमाशा किया जाता है।
(iii) शीतलाष्टमी के दिन जूठन मियां का तमाशा किया जाता है। (जुठ्ठन मियां का तमाशा)
(iv) चैत्र अमावस्या के दिन गोपीचन्द-भर्तृहरि का तमाशा किया जाता है।
⇛ तमाशा लोक नाट्य के मुख्य कलाकार निम्नलिखित है -
(i) वासुदेव भट्ट
(ii) फूलजी भट्ट
(iii) गोपीजी भट्ट
⇛ तमाशा लोक नाट्य मूल रूप से महाराष्ट्र का लोक नाट्य है।
⇛ जयपुर के राजा सवाई प्रताप सिंह के शासन काल में तमाशा लोक नाट्य जयपुर में लोकप्रिय हुआ था।
⇛ तमाशा लोक नाट्य के लिए बंशीधर भट्ट को महाराष्ट्र से जयपुर बुलाया गया था।
⇛ तमाशा लोक नाट्य का आयोजन एक खुले मैदान में किया जाता है जिसे अखाड़ा कहते हैं।
⇛ जयपुर की प्रसिद्ध नृत्यांगना 'गौहर जान' तमाशा लोक नाट्य में भाग लेती है।
⇛ मुख्य कहानियां - निम्नलिखित कहानियों पर तमाशा लोक नाट्य किया जाता है -
(i) होली के दिन जोगी-जोगण तमाशा किया जाता है।
(ii) होली के अगले दिन हीर-राँझा का तमाशा किया जाता है।
(iii) शीतलाष्टमी के दिन जूठन मियां का तमाशा किया जाता है। (जुठ्ठन मियां का तमाशा)
(iv) चैत्र अमावस्या के दिन गोपीचन्द-भर्तृहरि का तमाशा किया जाता है।
⇛ तमाशा लोक नाट्य के मुख्य कलाकार निम्नलिखित है -
(i) वासुदेव भट्ट
(ii) फूलजी भट्ट
(iii) गोपीजी भट्ट
➟ नौटंकी लोक नाट्य
➵ नौटंकी लोक नाट्य राजस्थान के भरतपुर क्षेत्र में लोकप्रिय है।
➵ भरतपुर में नौटंकी लोक नाट्य हाथरस शैली में प्रस्तुत किया जाता है।
➵ नौटंकी लोक नाट्य में 9 प्रकार के वाद्य यंत्रों का प्रयोग किया जाता है। जैसे-
⇀ नगाड़ा
⇀ सांरगी
⇀ शहनाई
⇀ डफली
➵ प्रवर्तक- भूरीलाल जी
➵ नौटंकी लोक नाट्य की शुरुआत भूरीलाल जी के द्वारा की गई थी।
➵ नौटंकी लोक नाट्य के मुख्य कलाकार निम्नलिखित है।
⇀ गिरिराज प्रसाद ⇀ नत्थाराम
➵ गिरिराज प्रसाद तथा नत्थाराम ने नौटंकी लोक नाट्य को आगे बढ़ाया था।
➵ निम्नलिखित कहानियों पर नौटंकी लोक नाट्य होता है।
⇀ अमरसिंह राठौड़
⇀ आल्हा-उदल
⇀ सत्यवान-सावित्री
⇀ हरिश्चन्द्र-तारामती
➵ नौटंकी लोक नाट्य राजस्थान के भरतपुर क्षेत्र में लोकप्रिय है।
➵ भरतपुर में नौटंकी लोक नाट्य हाथरस शैली में प्रस्तुत किया जाता है।
➵ नौटंकी लोक नाट्य में 9 प्रकार के वाद्य यंत्रों का प्रयोग किया जाता है। जैसे-
⇀ नगाड़ा
⇀ सांरगी
⇀ शहनाई
⇀ डफली
➵ प्रवर्तक- भूरीलाल जी
➵ नौटंकी लोक नाट्य की शुरुआत भूरीलाल जी के द्वारा की गई थी।
➵ नौटंकी लोक नाट्य के मुख्य कलाकार निम्नलिखित है।
⇀ गिरिराज प्रसाद ⇀ नत्थाराम
➵ गिरिराज प्रसाद तथा नत्थाराम ने नौटंकी लोक नाट्य को आगे बढ़ाया था।
➵ निम्नलिखित कहानियों पर नौटंकी लोक नाट्य होता है।
⇀ अमरसिंह राठौड़
⇀ आल्हा-उदल
⇀ सत्यवान-सावित्री
⇀ हरिश्चन्द्र-तारामती
⬇️ गवरी लोक नाट्य ⬇️
↳ गवरी लोक नाट्य राजस्थान का प्राचीनतम लोक नाट्य है।
↳ गवरी लोक नाट्य को "मेरू लोक नाट्य" भी कहा जाता है।
↳ गवरी लोक नाट्य मेवाड़ में भील पुरुषों के द्वारा किया जाता है।
↳ गवरी लोक नाट्य रक्षाबन्धन (श्रावण पूर्णिमा) के अगले दिन से शुरु होता है तथा 40 दिनों तक चलता है। अर्थात् भाद्रपद कृष्ण एकम् के दिन से शुरू होकर 40 दिनों तक चलता है।
↳ गवरी लोक नाट्य शिव-भस्मासुर की कहानी पर आधारित है।
↳ गवरी या राई = पार्वती
↳ राईबुड़िया = शिव
↳ सूत्रधार = कुटकुडिया
↳ हास्य कलाकार = झटपटिया
↳ अन्य कलाकार = खेल्ये
↳ गवरी लोक नाट्य में पार्वती को गवरी या राई कहा जाता है।
↳ गवरी लोक नाट्य में शिव को राईबुड़िया कहा जाता है।
↳ गवरी लोक नाट्य के सूत्रधार को कुटकुडिया कहा जाता है।
↳ गवरी लोक नाट्य के हास्य कलाकार को झटपटिया कहा जाता है।
↳ गवरी लोक नाट्य के अन्य कलाकारों को खेल्ये कहा जाता है।
↳ गवरी लोक नाट्य में विभिन्न कहानियों को आपस में जोड़ने के लिए नृत्य किया जाता है जिसे "गवरी की घाई" कहा जाता है।
↳ भानू भारती का "पशु गायत्री नाटक" गवरी लोक नाट्य पर आधारित है।
↳ गवरी लोक नाट्य राजस्थान का प्राचीनतम लोक नाट्य है।
↳ गवरी लोक नाट्य को "मेरू लोक नाट्य" भी कहा जाता है।
↳ गवरी लोक नाट्य मेवाड़ में भील पुरुषों के द्वारा किया जाता है।
↳ गवरी लोक नाट्य रक्षाबन्धन (श्रावण पूर्णिमा) के अगले दिन से शुरु होता है तथा 40 दिनों तक चलता है। अर्थात् भाद्रपद कृष्ण एकम् के दिन से शुरू होकर 40 दिनों तक चलता है।
↳ गवरी लोक नाट्य शिव-भस्मासुर की कहानी पर आधारित है।
↳ गवरी या राई = पार्वती
↳ राईबुड़िया = शिव
↳ सूत्रधार = कुटकुडिया
↳ हास्य कलाकार = झटपटिया
↳ अन्य कलाकार = खेल्ये
↳ गवरी लोक नाट्य में पार्वती को गवरी या राई कहा जाता है।
↳ गवरी लोक नाट्य में शिव को राईबुड़िया कहा जाता है।
↳ गवरी लोक नाट्य के सूत्रधार को कुटकुडिया कहा जाता है।
↳ गवरी लोक नाट्य के हास्य कलाकार को झटपटिया कहा जाता है।
↳ गवरी लोक नाट्य के अन्य कलाकारों को खेल्ये कहा जाता है।
↳ गवरी लोक नाट्य में विभिन्न कहानियों को आपस में जोड़ने के लिए नृत्य किया जाता है जिसे "गवरी की घाई" कहा जाता है।
↳ भानू भारती का "पशु गायत्री नाटक" गवरी लोक नाट्य पर आधारित है।