📚संसदीय विशेषाधिकार’ क्या होते हैं?
संसदीय विशेषाधिकार (Parliamentary Privileges), संसद सदस्यों को, व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से, प्राप्त कुछ अधिकार और उन्मुक्तियां होते हैं, ताकि वे “अपने कार्यों का प्रभावी ढंग से निर्वहन” कर सकें।
◆संविधान के अनुच्छेद 105 में स्पष्ट रूप से दो विशेषाधिकारों का उल्लेख किया गया है। ये हैं: संसद में वाक्-स्वतंत्रता और इसकी कार्यवाही के प्रकाशन का अधिकार।
◆संविधान में विनिर्दिष्ट विशेषाधिकारों के अतिरिक्त, सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 में सदन या उसकी समिति की बैठक के दौरान तथा इसके आरंभ होने से चालीस दिन पूर्व और इसकी समाप्ति के चालीस दिन पश्चात सिविल प्रक्रिया के अंतर्गत सदस्यों की गिरफ्तारी और उन्हें निरुद्ध किए जाने से स्वतंत्रता का उपबंध किया गया है।
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संसदीय विशेषाधिकार (Parliamentary Privileges), संसद सदस्यों को, व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से, प्राप्त कुछ अधिकार और उन्मुक्तियां होते हैं, ताकि वे “अपने कार्यों का प्रभावी ढंग से निर्वहन” कर सकें।
◆संविधान के अनुच्छेद 105 में स्पष्ट रूप से दो विशेषाधिकारों का उल्लेख किया गया है। ये हैं: संसद में वाक्-स्वतंत्रता और इसकी कार्यवाही के प्रकाशन का अधिकार।
◆संविधान में विनिर्दिष्ट विशेषाधिकारों के अतिरिक्त, सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 में सदन या उसकी समिति की बैठक के दौरान तथा इसके आरंभ होने से चालीस दिन पूर्व और इसकी समाप्ति के चालीस दिन पश्चात सिविल प्रक्रिया के अंतर्गत सदस्यों की गिरफ्तारी और उन्हें निरुद्ध किए जाने से स्वतंत्रता का उपबंध किया गया है।
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📚भगत सिंह पर मुकदमा और फांसी:
◆भगत सिंह के लिए 23 मार्च 1931 को राजगुरु और सुखदेव के साथ लाहौर सेंट्रल जेल में फांसी दी गयी थी।
◆भगत सिंह और बी.के. दत्त ने ‘बहरों के कानो तक अपनी आवाज पहुचाने’ के लिए ‘सेंट्रल असेंबली’ में एक ‘जोखिम-रहित’ बम फेका था और अपनी गिरफ्तारी दी थी।
◆8 अप्रैल, 1929 को दिल्ली में सेंट्रल असेंबली से भगत सिंह को गिरफ्तार किया गया था, इसके बाद जेल में बिताया गया समय, उनके जीवन का सर्वाधिक महत्वपूर्ण भाग है।
◆इन लोगों पर पहला मुकद्दमा ‘दिल्ली बम’ मामले में चलाया गया, जिसमे दोनों को दोषी ठहराया गया और मृत्युदंड की सजा सुने गई।
◆भगत सिंह पर सॉन्डर्स की हत्या से जुड़े लाहौर षड्यंत्र मामले में भी मुकदमा चलाया गया था।
◆वह जेल में कैदियों को राजनीतिक बंदी का दर्जे देने की मांग को लेकर हुई भूख हड़ताल में भी शामिल थे।
‘भगत सिंह’ के बारे में:
भगत सिंह का जन्म 28 सितम्बर 1907 को हुआ था।
●गांधी जी का प्रभाव: प्रारंभ में, उन्होंने महात्मा गांधी और असहयोग आंदोलन का समर्थन किया। किंतु गांधी जी द्वारा, चौरी चौरा की घटना के मद्देनजर, आंदोलन वापस लिए जाने पर भगत सिंह ने क्रांतिकारी राष्ट्रवाद की ओर रुख कर लिया।
●राजनीतिक विचारधारा: उनके लिए आजादी का अर्थ अंग्रेजों को देश से बाहर खदेड़ने तक ही सीमित नहीं था; इसके बजाय वह गरीबी, अस्पृश्यता, सांप्रदायिक झगड़ों और हर तरह के भेदभाव और शोषण से आजादी चाहते थे।
◆भगत सिंह वर्ष 1923 में, लाला लाजपत राय और भाई परमानंद द्वारा स्थापित किए गए नेशनल कॉलेज, लाहौर में भर्ती हो गए।
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◆भगत सिंह के लिए 23 मार्च 1931 को राजगुरु और सुखदेव के साथ लाहौर सेंट्रल जेल में फांसी दी गयी थी।
◆भगत सिंह और बी.के. दत्त ने ‘बहरों के कानो तक अपनी आवाज पहुचाने’ के लिए ‘सेंट्रल असेंबली’ में एक ‘जोखिम-रहित’ बम फेका था और अपनी गिरफ्तारी दी थी।
◆8 अप्रैल, 1929 को दिल्ली में सेंट्रल असेंबली से भगत सिंह को गिरफ्तार किया गया था, इसके बाद जेल में बिताया गया समय, उनके जीवन का सर्वाधिक महत्वपूर्ण भाग है।
◆इन लोगों पर पहला मुकद्दमा ‘दिल्ली बम’ मामले में चलाया गया, जिसमे दोनों को दोषी ठहराया गया और मृत्युदंड की सजा सुने गई।
◆भगत सिंह पर सॉन्डर्स की हत्या से जुड़े लाहौर षड्यंत्र मामले में भी मुकदमा चलाया गया था।
◆वह जेल में कैदियों को राजनीतिक बंदी का दर्जे देने की मांग को लेकर हुई भूख हड़ताल में भी शामिल थे।
‘भगत सिंह’ के बारे में:
भगत सिंह का जन्म 28 सितम्बर 1907 को हुआ था।
●गांधी जी का प्रभाव: प्रारंभ में, उन्होंने महात्मा गांधी और असहयोग आंदोलन का समर्थन किया। किंतु गांधी जी द्वारा, चौरी चौरा की घटना के मद्देनजर, आंदोलन वापस लिए जाने पर भगत सिंह ने क्रांतिकारी राष्ट्रवाद की ओर रुख कर लिया।
●राजनीतिक विचारधारा: उनके लिए आजादी का अर्थ अंग्रेजों को देश से बाहर खदेड़ने तक ही सीमित नहीं था; इसके बजाय वह गरीबी, अस्पृश्यता, सांप्रदायिक झगड़ों और हर तरह के भेदभाव और शोषण से आजादी चाहते थे।
◆भगत सिंह वर्ष 1923 में, लाला लाजपत राय और भाई परमानंद द्वारा स्थापित किए गए नेशनल कॉलेज, लाहौर में भर्ती हो गए।
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✅ अकादमिक क्रेडिट बैंक’ (ABC)
(Academic Bank of Credit)
संदर्भ:
◆केंद्र सरकार द्वारा शीघ्र ही ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति’ (National Education Policy – NEP) 2020 के तहत प्रस्तावित ‘अकादमिक क्रेडिट बैंक’ (Academic Bank of Credit- ABC) शरू की जाएगी।
‘अकादमिक क्रेडिट बैंक’ (ABC) क्या है?
◆‘एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट’ को ‘विश्वविद्यालय अनुदान आयोग’ (UGC) द्वारा स्थापित किया जाएगा।
इसके तहत, छात्रों के लिए किसी पाठ्यक्रम में प्रवेश करने और उसे पूरा करने के कई विकल्प दिए जाएंगे।
‘अकादमिक क्रेडिट बैंक’ के तहत, छात्रों के लिए किसी डिग्री या पाठ्यक्रम को छोड़ने और संबंधित प्रमाण पत्र प्राप्त करने का विकल्प दिया जाएगा। एक निश्चित समय के पश्चात, छात्र, अपनी अधूरी छोड़ी हुई पढाई को उसी स्तर से पुनः शुरू कर सकते हैं।
●इसके द्वारा छात्रों को किसी डिग्री को पूरा करते समय या किसी पाठ्यक्रम को छोड़ने के दौरान संस्थान बदलने की सुविधा भी प्रदान की जाएगी।
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(Academic Bank of Credit)
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◆केंद्र सरकार द्वारा शीघ्र ही ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति’ (National Education Policy – NEP) 2020 के तहत प्रस्तावित ‘अकादमिक क्रेडिट बैंक’ (Academic Bank of Credit- ABC) शरू की जाएगी।
‘अकादमिक क्रेडिट बैंक’ (ABC) क्या है?
◆‘एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट’ को ‘विश्वविद्यालय अनुदान आयोग’ (UGC) द्वारा स्थापित किया जाएगा।
इसके तहत, छात्रों के लिए किसी पाठ्यक्रम में प्रवेश करने और उसे पूरा करने के कई विकल्प दिए जाएंगे।
‘अकादमिक क्रेडिट बैंक’ के तहत, छात्रों के लिए किसी डिग्री या पाठ्यक्रम को छोड़ने और संबंधित प्रमाण पत्र प्राप्त करने का विकल्प दिया जाएगा। एक निश्चित समय के पश्चात, छात्र, अपनी अधूरी छोड़ी हुई पढाई को उसी स्तर से पुनः शुरू कर सकते हैं।
●इसके द्वारा छात्रों को किसी डिग्री को पूरा करते समय या किसी पाठ्यक्रम को छोड़ने के दौरान संस्थान बदलने की सुविधा भी प्रदान की जाएगी।
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✅राजा मिर्च
(Raja Mircha)
●नागालैंड की इस मिर्च को ‘भूत जोलोकिया’ (Bhoot Jolokia) और ‘घोस्ट पेपर’ / ‘भूतिया मिर्च’ भी कहा जाता है।
●इसे 2008 में जीआई सर्टिफिकेशन मिला था।
●नागा ‘राजा मिर्च’ को विश्व की सबसे तीखी मिर्च माना गया है और यह ‘स्कोविल हीट यूनिट्स’ (SHUs) के आधार पर दुनिया की सबसे तीखी मिर्च की सूची में शीर्ष पांच में लगातार बनी हुई है।
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●नागालैंड की इस मिर्च को ‘भूत जोलोकिया’ (Bhoot Jolokia) और ‘घोस्ट पेपर’ / ‘भूतिया मिर्च’ भी कहा जाता है।
●इसे 2008 में जीआई सर्टिफिकेशन मिला था।
●नागा ‘राजा मिर्च’ को विश्व की सबसे तीखी मिर्च माना गया है और यह ‘स्कोविल हीट यूनिट्स’ (SHUs) के आधार पर दुनिया की सबसे तीखी मिर्च की सूची में शीर्ष पांच में लगातार बनी हुई है।
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✅ सैन्याभ्यास इंद्र-2021
इंद्र-2021 (INDRA 2021), भारत-रूस के मध्य ‘संयुक्त सैन्य अभ्यास’ है।
संयुक्त सैन्याभ्यास का यह 12वां संस्करण रूस के वोल्गोग्राड में आयोजित किया जाएगा।
इस सैन्याभ्यास में ‘अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी समूहों के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई’ संबंधी संयुक्त राष्ट्र के अधिदेश के अनुरूप दोनों देशों की सेनायें आतंक-रोधी सैन्याभ्यास करेंगी।
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इंद्र-2021 (INDRA 2021), भारत-रूस के मध्य ‘संयुक्त सैन्य अभ्यास’ है।
संयुक्त सैन्याभ्यास का यह 12वां संस्करण रूस के वोल्गोग्राड में आयोजित किया जाएगा।
इस सैन्याभ्यास में ‘अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी समूहों के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई’ संबंधी संयुक्त राष्ट्र के अधिदेश के अनुरूप दोनों देशों की सेनायें आतंक-रोधी सैन्याभ्यास करेंगी।
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✅ ओडिशा के ‘पुरी’ शहर में ‘नल से शुद्ध पीने का पानी’ की सुविधा
हाल ही में, ओडिशा सरकार ने ‘पुरी’ को ‘नल से शुद्ध पीने का पानी’ की सुविधा प्रदान करने वाला देश का पहला ऐसा शहर घोषित किया है।
‘पुरी’ शहर में नल से आने वाला पूरी तरह से शुद्ध और सुरक्षित है, जिसका इस्तेमाल, बिना किसी फिल्टर के या बगैर उबाले, सीधे ही पीने और खाना पकाने के लिए किया जा सकता है।
‘ड्रिंक फ्रॉम टैप-सुजल मिशन’ के तहत पुरी के निवासी पीने के लिए सीधे नल से पानी ले सकेंगे। इस पानी के भंडारण या फ़िल्टर करने की कोई आवश्यकता नहीं है। नल का पानी चौबीसों घंटे उपलब्ध रहेगा।
लाभ: राज्य सरकार के इस कदम से, शहर में 3 करोड़ प्लास्टिक की पानी की बोतलों का उपयोग समाप्त हो जाएगा। अर्थात, अब शहर लगभग 400 टन प्लास्टिक कचरे से मुक्त हो जाएगा।
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हाल ही में, ओडिशा सरकार ने ‘पुरी’ को ‘नल से शुद्ध पीने का पानी’ की सुविधा प्रदान करने वाला देश का पहला ऐसा शहर घोषित किया है।
‘पुरी’ शहर में नल से आने वाला पूरी तरह से शुद्ध और सुरक्षित है, जिसका इस्तेमाल, बिना किसी फिल्टर के या बगैर उबाले, सीधे ही पीने और खाना पकाने के लिए किया जा सकता है।
‘ड्रिंक फ्रॉम टैप-सुजल मिशन’ के तहत पुरी के निवासी पीने के लिए सीधे नल से पानी ले सकेंगे। इस पानी के भंडारण या फ़िल्टर करने की कोई आवश्यकता नहीं है। नल का पानी चौबीसों घंटे उपलब्ध रहेगा।
लाभ: राज्य सरकार के इस कदम से, शहर में 3 करोड़ प्लास्टिक की पानी की बोतलों का उपयोग समाप्त हो जाएगा। अर्थात, अब शहर लगभग 400 टन प्लास्टिक कचरे से मुक्त हो जाएगा।
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✅सुजल मिशन’:
‘सुजल मिशन’ पिछले साल 13 अक्टूबर को शुरू किया गया था, इसका उद्देश्य राज्य के 15 से अधिक शहरी क्षेत्रों में 15 लाख से अधिक लोगों के लिए पीने के पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करना था।
इस मिशन में ‘शिकायत निवारण’ हेतु आईवीआरएस सहित 24/7 हेल्पलाइन केंद्र, एक मोबाइल जल परीक्षण प्रयोगशाला और जल आपूर्ति शिकायतों के त्वरित निवारण हेतु एक त्वरित प्रतिक्रिया टीम शामिल की गयी हैं।
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‘सुजल मिशन’ पिछले साल 13 अक्टूबर को शुरू किया गया था, इसका उद्देश्य राज्य के 15 से अधिक शहरी क्षेत्रों में 15 लाख से अधिक लोगों के लिए पीने के पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करना था।
इस मिशन में ‘शिकायत निवारण’ हेतु आईवीआरएस सहित 24/7 हेल्पलाइन केंद्र, एक मोबाइल जल परीक्षण प्रयोगशाला और जल आपूर्ति शिकायतों के त्वरित निवारण हेतु एक त्वरित प्रतिक्रिया टीम शामिल की गयी हैं।
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