🚔वीर सावरकर के बारे में:
विनायक दामोदर सावरकर (Veer Savarkar) का जन्म 28 मई, 1883 को महाराष्ट्र के नासिक जिले में भागुर शहर में हुआ था।
राष्ट्रवाद और सामाजिक सुधार:
इन्होने, ‘मित्र मेला’ नामक एक युवाओं के संगठन का गठन किया था। इस संगठन की स्थापना राष्ट्रीय और क्रांतिकारी विचार उत्पन्न करने के लिए की गयी थी।
वह विदेशी वस्तुओं के विरोधी थे और ‘स्वदेशी’ के विचार का समर्थन करते थे।
उन्होंने नास्तिकता और तार्किकता का समर्थन किया और रूढ़िवादी हिंदू विचारों का खंडन किया। वास्तव में, उन्होंने गाय की पूजा को भी अंधविश्वास कह कर खारिज कर दिया।
विनायक सावरकर , वर्ष 1937 से 1943 के दौरान हिंदू महासभा के अध्यक्ष रहे।
22 अक्टूबर 1939 को कांग्रेस मंत्रालयों द्वारा त्यागपत्र दिए जाने के बाद, इनके नेतृत्व में हिंदू महासभा ने मुस्लिम लीग के साथ मिलकर सिंध, बंगाल और पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत (NWFP) प्रांतों में सरकार बनाने के लिए सहयोग किया।
सावरकर ने, पुणे में, “अभिनव भारत समाज” नामक संगठन की स्थापना की।
इन्होने, लोकमान्य तिलक की स्वराज पार्टी की सदस्यता भी ग्रहण की।
इन्होंने ‘फ्री इंडिया सोसाइटी’ की स्थापना की। इस सोसायटी के द्वारा त्योहारों, स्वतंत्रता आंदोलन संबंधी प्रमुख घटनाओं सहित भारतीय कैलेंडर की महत्वपूर्ण तिथियों को मनाया जाता था और यह भारतीय स्वतंत्रता के संदर्भ में विमर्श को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित थी।
वह भारत को अंग्रेजों से मुक्त करने के लिए हथियारों का इस्तेमाल करने पर यकीन और समर्थन करते थे और इन्होने इंग्लैंड में, हथियारों से लैस भारतीयों का एक नेटवर्क भी तैयार किया।
महत्वपूर्ण कार्य:
पुस्तक- भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास।
मॉर्ले-मिंटो सुधार के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह।
‘हिंदुत्व’ नामक पुस्तक में दो-राष्ट्र सिद्धांत।
@Gk_trick
विनायक दामोदर सावरकर (Veer Savarkar) का जन्म 28 मई, 1883 को महाराष्ट्र के नासिक जिले में भागुर शहर में हुआ था।
राष्ट्रवाद और सामाजिक सुधार:
इन्होने, ‘मित्र मेला’ नामक एक युवाओं के संगठन का गठन किया था। इस संगठन की स्थापना राष्ट्रीय और क्रांतिकारी विचार उत्पन्न करने के लिए की गयी थी।
वह विदेशी वस्तुओं के विरोधी थे और ‘स्वदेशी’ के विचार का समर्थन करते थे।
उन्होंने नास्तिकता और तार्किकता का समर्थन किया और रूढ़िवादी हिंदू विचारों का खंडन किया। वास्तव में, उन्होंने गाय की पूजा को भी अंधविश्वास कह कर खारिज कर दिया।
विनायक सावरकर , वर्ष 1937 से 1943 के दौरान हिंदू महासभा के अध्यक्ष रहे।
22 अक्टूबर 1939 को कांग्रेस मंत्रालयों द्वारा त्यागपत्र दिए जाने के बाद, इनके नेतृत्व में हिंदू महासभा ने मुस्लिम लीग के साथ मिलकर सिंध, बंगाल और पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत (NWFP) प्रांतों में सरकार बनाने के लिए सहयोग किया।
सावरकर ने, पुणे में, “अभिनव भारत समाज” नामक संगठन की स्थापना की।
इन्होने, लोकमान्य तिलक की स्वराज पार्टी की सदस्यता भी ग्रहण की।
इन्होंने ‘फ्री इंडिया सोसाइटी’ की स्थापना की। इस सोसायटी के द्वारा त्योहारों, स्वतंत्रता आंदोलन संबंधी प्रमुख घटनाओं सहित भारतीय कैलेंडर की महत्वपूर्ण तिथियों को मनाया जाता था और यह भारतीय स्वतंत्रता के संदर्भ में विमर्श को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित थी।
वह भारत को अंग्रेजों से मुक्त करने के लिए हथियारों का इस्तेमाल करने पर यकीन और समर्थन करते थे और इन्होने इंग्लैंड में, हथियारों से लैस भारतीयों का एक नेटवर्क भी तैयार किया।
महत्वपूर्ण कार्य:
पुस्तक- भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास।
मॉर्ले-मिंटो सुधार के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह।
‘हिंदुत्व’ नामक पुस्तक में दो-राष्ट्र सिद्धांत।
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बारकोड’ क्या होते हैं?
‘बारकोड’ (Barcode), कंप्यूटर सिस्टम में डेटा दर्ज करने के लिए उपयोग की जाने वाली ‘समानांतर पट्टियों अथवा भिन्न-भिन्न चौड़ाई वाली रेखाओं की एक मुद्रित अनुक्रम (सीरीज) होते हैं।
‘बारकोड’ की पट्टियाँ सफेद पृष्ठभूमि पर काले रंग की होती हैं और अनुप्रयोग के आधार पर इनकी चौड़ाई और संख्या में भिन्नता होती है।
ये पट्टियाँ / शलाकाएँ (BARS), बाइनरी अंकों- शून्य और एक – का प्रतिनिधित्व करते हैं। बाइनरी संख्याएं एक डिजिटल कंप्यूटर द्वारा संसाधित ‘शून्य’ से ‘नौ अंकों’ का प्रतिनिधित्व करती हैं।
इन बारकोड को विशेष ‘ऑप्टिकल स्कैनर’ से स्कैन किया जाता है जिसे ‘बारकोड रीडर’ कहा जाता है।
इनमें से अधिकांश कोड्स में केवल दो अलग-अलग चौड़ाई के ‘बार’ का उपयोग किया जाता है, हालांकि कुछ कोड्स में ‘भिन्न प्रकार की चार चौड़ाईयों’ का उपयोग होता है।
‘क्यूआर कोड’ (QR code), बारकोड के सबसे प्रमुख उदाहरणों में से एक है।
‘बारकोड’ (Barcode), कंप्यूटर सिस्टम में डेटा दर्ज करने के लिए उपयोग की जाने वाली ‘समानांतर पट्टियों अथवा भिन्न-भिन्न चौड़ाई वाली रेखाओं की एक मुद्रित अनुक्रम (सीरीज) होते हैं।
‘बारकोड’ की पट्टियाँ सफेद पृष्ठभूमि पर काले रंग की होती हैं और अनुप्रयोग के आधार पर इनकी चौड़ाई और संख्या में भिन्नता होती है।
ये पट्टियाँ / शलाकाएँ (BARS), बाइनरी अंकों- शून्य और एक – का प्रतिनिधित्व करते हैं। बाइनरी संख्याएं एक डिजिटल कंप्यूटर द्वारा संसाधित ‘शून्य’ से ‘नौ अंकों’ का प्रतिनिधित्व करती हैं।
इन बारकोड को विशेष ‘ऑप्टिकल स्कैनर’ से स्कैन किया जाता है जिसे ‘बारकोड रीडर’ कहा जाता है।
इनमें से अधिकांश कोड्स में केवल दो अलग-अलग चौड़ाई के ‘बार’ का उपयोग किया जाता है, हालांकि कुछ कोड्स में ‘भिन्न प्रकार की चार चौड़ाईयों’ का उपयोग होता है।
‘क्यूआर कोड’ (QR code), बारकोड के सबसे प्रमुख उदाहरणों में से एक है।
तुर्किए
संयुक्त राष्ट्र ‘तुर्की’ (Turkey) द्वारा अपना नाम परिवर्तन किए जाने के औपचारिक अनुरोध पर सहमत हो गया है।
तुर्की को अब ‘तुर्किए’ (Türkiye) के नाम से जाना जाएगा।
स्थानीय स्तर पर, नागरिकों द्वारा अपने देश को ‘तुर्किये’ या ‘तुर्किए’ ही कहा जाता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके अंग्रेजी संस्करण ‘तुर्की’ को अपनाया गया था।
‘तुर्की‘ शब्द से जुड़े विवाद:
तुर्की सरकार ‘तुर्की’ शब्द के लिए ‘गूगल खोज’ करने पर आने वाले परिणामों से खुश नहीं थी।
इनमें से कुछ परिणामों में, उत्तरी अमेरिका में ‘थैंक्सगिविंग’ और ‘क्रिसमस भोजन’ के लिए परोसा जाने वाला ‘टर्की’ (Turkey) नामक बड़ा पक्षी भी मिलता है।
कैम्ब्रिज डिक्शनरी की परिभाषा के अनुसार, “टर्की” शब्द का अर्थ “कुछ ऐसा जो बुरी तरह से विफल हो जाता है” या “बेवकूफ या मूर्ख व्यक्ति” होता है।
@Gk_trick
#map
संयुक्त राष्ट्र ‘तुर्की’ (Turkey) द्वारा अपना नाम परिवर्तन किए जाने के औपचारिक अनुरोध पर सहमत हो गया है।
तुर्की को अब ‘तुर्किए’ (Türkiye) के नाम से जाना जाएगा।
स्थानीय स्तर पर, नागरिकों द्वारा अपने देश को ‘तुर्किये’ या ‘तुर्किए’ ही कहा जाता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके अंग्रेजी संस्करण ‘तुर्की’ को अपनाया गया था।
‘तुर्की‘ शब्द से जुड़े विवाद:
तुर्की सरकार ‘तुर्की’ शब्द के लिए ‘गूगल खोज’ करने पर आने वाले परिणामों से खुश नहीं थी।
इनमें से कुछ परिणामों में, उत्तरी अमेरिका में ‘थैंक्सगिविंग’ और ‘क्रिसमस भोजन’ के लिए परोसा जाने वाला ‘टर्की’ (Turkey) नामक बड़ा पक्षी भी मिलता है।
कैम्ब्रिज डिक्शनरी की परिभाषा के अनुसार, “टर्की” शब्द का अर्थ “कुछ ऐसा जो बुरी तरह से विफल हो जाता है” या “बेवकूफ या मूर्ख व्यक्ति” होता है।
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विश्व साइकिल दिवस
हर साल 3 जून को ‘विश्व साइकिल दिवस’ (World Bicycle Day) मनाया जाता है।
यह दिवस, साइकिल का उपयोग करने के लाभों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, यह दिन साइकिल की विशिष्टता, टिकाऊपन और बहुमुखी क्षमताओं पर प्रकाश डालता है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 72वें नियमित सत्र के दौरान ‘संयुक्त राष्ट्र’ द्वारा एक प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद 2018 से यह दिवस हर साल मनाया जा रहा है
@Gk_trick
#Day
हर साल 3 जून को ‘विश्व साइकिल दिवस’ (World Bicycle Day) मनाया जाता है।
यह दिवस, साइकिल का उपयोग करने के लाभों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, यह दिन साइकिल की विशिष्टता, टिकाऊपन और बहुमुखी क्षमताओं पर प्रकाश डालता है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 72वें नियमित सत्र के दौरान ‘संयुक्त राष्ट्र’ द्वारा एक प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद 2018 से यह दिवस हर साल मनाया जा रहा है
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भारत की पहला तरल-दर्पण दूरबीन
संदर्भ:
भारत का पहला तरल-दर्पण दूरबीन (लिक्विड-मिरर टेलीस्कोप)- ‘इंटरनेशनल लिक्विड मिरर टेलीस्कोप’ (International Liquid Mirror Telescope – ILMT) अब अपनी शुरुआत के चरण में प्रवेश कर चुका है और यह इस साल अक्टूबर में किसी भी समय ‘वैज्ञानिक अवलोकन’ करना शुरू कर देगा।
इंटरनेशनल लिक्विड मिरर टेलीस्कोप (ILMT) के बारे में:
‘आईएलएमटी’ (ILMT), भारत सरकार के ‘विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग’ के तहत एक स्वायत्त संस्थान है। यह उत्तराखंड के नैनीताल जिले में ‘आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेज’ (AIRES) के ‘देवस्थल वेधशाला परिसर’ में 2,450 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
यह पूरे विश्व में क्रियाशील एकमात्र ‘तरल-दर्पण दूरबीन’ (Liquid-Mirror Telescope) है।
इस टेलीस्कोप को विश्व स्तर पर, विशेष रूप से खगोलीय उद्देश्यों के लिए डिज़ाइन की गयी ‘पहली तरल-दूरबीन’ होने का अनूठा गौरव भी प्राप्त है।
यह ‘अंतरराष्ट्रीय दूरबीन सुविधा’ कनाडा, बेल्जियम और भारत के खगोलविदों के बीच सहयोगात्मक कार्य का परिणाम है।
#Imp 👇
संदर्भ:
भारत का पहला तरल-दर्पण दूरबीन (लिक्विड-मिरर टेलीस्कोप)- ‘इंटरनेशनल लिक्विड मिरर टेलीस्कोप’ (International Liquid Mirror Telescope – ILMT) अब अपनी शुरुआत के चरण में प्रवेश कर चुका है और यह इस साल अक्टूबर में किसी भी समय ‘वैज्ञानिक अवलोकन’ करना शुरू कर देगा।
इंटरनेशनल लिक्विड मिरर टेलीस्कोप (ILMT) के बारे में:
‘आईएलएमटी’ (ILMT), भारत सरकार के ‘विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग’ के तहत एक स्वायत्त संस्थान है। यह उत्तराखंड के नैनीताल जिले में ‘आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेज’ (AIRES) के ‘देवस्थल वेधशाला परिसर’ में 2,450 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
यह पूरे विश्व में क्रियाशील एकमात्र ‘तरल-दर्पण दूरबीन’ (Liquid-Mirror Telescope) है।
इस टेलीस्कोप को विश्व स्तर पर, विशेष रूप से खगोलीय उद्देश्यों के लिए डिज़ाइन की गयी ‘पहली तरल-दूरबीन’ होने का अनूठा गौरव भी प्राप्त है।
यह ‘अंतरराष्ट्रीय दूरबीन सुविधा’ कनाडा, बेल्जियम और भारत के खगोलविदों के बीच सहयोगात्मक कार्य का परिणाम है।
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इस टेलीस्कोप की विशेषताएं:
परंपरागत दूरबीनों को विशिष्ट तारकीय स्रोत पिंडो को ट्रैक करने के लिए परिचालित किया जा सकता है अर्थात घुमाया जा सकता है, जबकि ‘इंटरनेशनल लिक्विड मिरर टेलीस्कोप’ (ILMT) एक ही स्थान पर स्थिर (Stationary) रहेगा।
यह टेलीस्कोप, मूल रूप से ऊर्ध्व दिशा अपने ठीक ऊपर अंतरिक्ष में अवलोकन और इमेजिंग करेगा।
यह नए पिंडों की खोज करने की उच्च क्षमता-युक्त एक ‘सर्वेक्षण दूरबीन’ है।
परंपरागत दूरबीनों को विशिष्ट तारकीय स्रोत पिंडो को ट्रैक करने के लिए परिचालित किया जा सकता है अर्थात घुमाया जा सकता है, जबकि ‘इंटरनेशनल लिक्विड मिरर टेलीस्कोप’ (ILMT) एक ही स्थान पर स्थिर (Stationary) रहेगा।
यह टेलीस्कोप, मूल रूप से ऊर्ध्व दिशा अपने ठीक ऊपर अंतरिक्ष में अवलोकन और इमेजिंग करेगा।
यह नए पिंडों की खोज करने की उच्च क्षमता-युक्त एक ‘सर्वेक्षण दूरबीन’ है।
✅पीएम-किसान योजना’ के बारे में:
यह भारत सरकार द्वारा 100 प्रतिशत वित्त-पोषित, एक केंद्रीय क्षेत्रक योजना (central sector scheme) है। इस योजना को दिसंबर 2018 में शुरू किया गया था।
इस योजना के तहत, पात्र लाभार्थी किसान परिवारों को 6,000 रुपए प्रति वर्ष का वित्तीय लाभ प्रदान किया जाता है, जो चार-चार महीने की अवधि में 2000 रुपए की तीन समान किश्तों में दिया जाता है।
राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन द्वारा योजना के लिए पात्र किसानों को चिह्नित किया जाता है, और चिह्नित किसानों की इस सूची को केंद्र के साथ साझा किया जाता है।
योजना का विस्तार:
इस योजना के अंतर्गत, शुरुआत में, दो हेक्टेयर तक की कृषि योग्य भूमि पर खेती करने वाले पूरे देश के सभी छोटे और सीमांत किसान परिवारों के लिए आय-सहायता प्रदान की गई थी। बाद में, 01 जून, 2019 से इस योजना का विस्तार करते हुए देश के किसान परिवारों को इसके दायरे में लाया गया तथा पूर्व निर्धारित कृषि योग्य भूमि-जोत की सीमा को हटा लिया गया।
अपवाद:
पिछले आकलन वर्ष में, आयकर दाता, डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, चार्टर्ड अकाउंटेंट आदि जैसे पेशेवर और प्रति माह न्यूनतम 10,000 रुपए प्राप्त करने वाले (एमटीएस / चतुर्थ-वर्ग / ग्रुप डी कर्मचारी को छोड़कर) संपन्न किसानों को इस योजना से बाहर रखा गया है।
@Gk_trick
#Yojana
यह भारत सरकार द्वारा 100 प्रतिशत वित्त-पोषित, एक केंद्रीय क्षेत्रक योजना (central sector scheme) है। इस योजना को दिसंबर 2018 में शुरू किया गया था।
इस योजना के तहत, पात्र लाभार्थी किसान परिवारों को 6,000 रुपए प्रति वर्ष का वित्तीय लाभ प्रदान किया जाता है, जो चार-चार महीने की अवधि में 2000 रुपए की तीन समान किश्तों में दिया जाता है।
राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन द्वारा योजना के लिए पात्र किसानों को चिह्नित किया जाता है, और चिह्नित किसानों की इस सूची को केंद्र के साथ साझा किया जाता है।
योजना का विस्तार:
इस योजना के अंतर्गत, शुरुआत में, दो हेक्टेयर तक की कृषि योग्य भूमि पर खेती करने वाले पूरे देश के सभी छोटे और सीमांत किसान परिवारों के लिए आय-सहायता प्रदान की गई थी। बाद में, 01 जून, 2019 से इस योजना का विस्तार करते हुए देश के किसान परिवारों को इसके दायरे में लाया गया तथा पूर्व निर्धारित कृषि योग्य भूमि-जोत की सीमा को हटा लिया गया।
अपवाद:
पिछले आकलन वर्ष में, आयकर दाता, डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, चार्टर्ड अकाउंटेंट आदि जैसे पेशेवर और प्रति माह न्यूनतम 10,000 रुपए प्राप्त करने वाले (एमटीएस / चतुर्थ-वर्ग / ग्रुप डी कर्मचारी को छोड़कर) संपन्न किसानों को इस योजना से बाहर रखा गया है।
@Gk_trick
#Yojana
✅‘जल जीवन मिशन’ के बारे में:
‘जल जीवन मिशन’ (Jal Jeevan Mission) के तहत वर्ष 2024 तक सभी ग्रामीण घरों में, कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन (Functional House Tap Connections- FHTC) के माध्यम से प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 55 लीटर जल की आपूर्ति की परिकल्पना की गई है।
यह अभियान, जल शक्ति मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।
इसे 2019 में लॉन्च किया गया था।
यह मिशन निम्नलिखित उद्देश्यों की प्राप्ति के बारे में सुनिश्चित करता है:
मौजूदा जल आपूर्ति प्रणालियों और जल कनेक्शनों की कार्यात्मकता।
जल गुणवत्ता निगरानी और परीक्षण के साथ-साथ संधारणीय कृषि।
संरक्षित जल का संयुक्त उपयोग।
पेयजल स्रोतों में वृद्धि।
पेयजल आपूर्ति प्रणाली, मलिन जल-उपचार (ग्रे वाटर ट्रीटमेंट) और इसका पुन: उपयोग।
इसके अंतर्गत निम्नलिखित कार्यो को शामिल किया गया है:
गुणवत्ता प्रभावित क्षेत्रों, सूखा प्रवण और रेगिस्तानी क्षेत्रों के गांवों, सांसद आदर्श ग्राम योजना (SAGY) के अंतर्गत आने वाले गांवों, आदि में कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन (FHTC) लगाए जाने को प्राथमिकता देना।
स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों, ग्राम पंचायत भवनों, स्वास्थ्य केंद्रों, कल्याण केंद्रों और सामुदायिक भवनों के लिए कार्यात्मक नल कनेक्शन की सुविधा प्रदान करना।
जल-गुणवत्ता की समस्या वाले स्थानों को प्रदूषण-मुक्त करने के लिए तकनीकी हस्तक्षेप
@Gk_trick
‘जल जीवन मिशन’ (Jal Jeevan Mission) के तहत वर्ष 2024 तक सभी ग्रामीण घरों में, कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन (Functional House Tap Connections- FHTC) के माध्यम से प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 55 लीटर जल की आपूर्ति की परिकल्पना की गई है।
यह अभियान, जल शक्ति मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।
इसे 2019 में लॉन्च किया गया था।
यह मिशन निम्नलिखित उद्देश्यों की प्राप्ति के बारे में सुनिश्चित करता है:
मौजूदा जल आपूर्ति प्रणालियों और जल कनेक्शनों की कार्यात्मकता।
जल गुणवत्ता निगरानी और परीक्षण के साथ-साथ संधारणीय कृषि।
संरक्षित जल का संयुक्त उपयोग।
पेयजल स्रोतों में वृद्धि।
पेयजल आपूर्ति प्रणाली, मलिन जल-उपचार (ग्रे वाटर ट्रीटमेंट) और इसका पुन: उपयोग।
इसके अंतर्गत निम्नलिखित कार्यो को शामिल किया गया है:
गुणवत्ता प्रभावित क्षेत्रों, सूखा प्रवण और रेगिस्तानी क्षेत्रों के गांवों, सांसद आदर्श ग्राम योजना (SAGY) के अंतर्गत आने वाले गांवों, आदि में कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन (FHTC) लगाए जाने को प्राथमिकता देना।
स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों, ग्राम पंचायत भवनों, स्वास्थ्य केंद्रों, कल्याण केंद्रों और सामुदायिक भवनों के लिए कार्यात्मक नल कनेक्शन की सुविधा प्रदान करना।
जल-गुणवत्ता की समस्या वाले स्थानों को प्रदूषण-मुक्त करने के लिए तकनीकी हस्तक्षेप
@Gk_trick
✅ राष्ट्रपति का चुनाव कैसे होता है?
परिचय:
भारतीय राष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचक मंडल प्रणाली के माध्यम से किया जाता है, जिसमें राष्ट्रीय और राज्य स्तर के सांसदों द्वारा वोट डाले जाते हैं।
चुनाव का आयोजन भारतीय चुनाव आयोग (EC) द्वारा किया जाता है।
निर्वाचक मंडल संसद के उच्च एवं निम्न सदन (राज्यसभा और लोकसभा सांसदों) के सभी निर्वाचित सदस्यों एवं राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों की विधानसभाओं (विधायकों) के निर्वाचित सदस्यों से बना होता है।
◆ संबंधित संवैधानिक प्रावधान:
अनुच्छेद 54: राष्ट्रपति का चुनाव।
अनुच्छेद 55: राष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया।
अनुच्छेद 56: राष्ट्रपति के पद का कार्यकाल।
अनुच्छेद 57: पुनर्निर्वाचन हेतु पात्रता।
अनुच्छेद 58: राष्ट्रपति के रूप में चुनाव हेतु योग्यता।
@Gk_trick
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परिचय:
भारतीय राष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचक मंडल प्रणाली के माध्यम से किया जाता है, जिसमें राष्ट्रीय और राज्य स्तर के सांसदों द्वारा वोट डाले जाते हैं।
चुनाव का आयोजन भारतीय चुनाव आयोग (EC) द्वारा किया जाता है।
निर्वाचक मंडल संसद के उच्च एवं निम्न सदन (राज्यसभा और लोकसभा सांसदों) के सभी निर्वाचित सदस्यों एवं राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों की विधानसभाओं (विधायकों) के निर्वाचित सदस्यों से बना होता है।
◆ संबंधित संवैधानिक प्रावधान:
अनुच्छेद 54: राष्ट्रपति का चुनाव।
अनुच्छेद 55: राष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया।
अनुच्छेद 56: राष्ट्रपति के पद का कार्यकाल।
अनुच्छेद 57: पुनर्निर्वाचन हेतु पात्रता।
अनुच्छेद 58: राष्ट्रपति के रूप में चुनाव हेतु योग्यता।
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◆राष्ट्रपति चुनाव प्रक्रिया
प्रक्रिया:
मतदान से पूर्व नामांकन चरण आता है, जहाँ उम्मीदवार चुनाव में खड़े होने का इरादा प्रस्तुत करता है और 50 प्रस्तावकों एवं 50 समर्थकों की हस्ताक्षरित सूची के साथ नामांकन दाखिल करता है।
ये प्रस्तावक और समर्थक राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर के निर्वाचक मंडल के सदस्यों में से कोई भी हो सकते हैं।
50 प्रस्तावकों और समर्थकों की आवश्यकता से संबंधित नियम तब लागू किया गया जब चुनाव आयोग ने 1974 में देखा कि कई ऐसे उम्मीदवारों, जिनमें से कई के जीतने की संभावना भी कम थी, द्वारा चुनाव लड़ने के लिये नामांकन दाखिल किया गया।
एक मतदाता एक से अधिक उम्मीदवारों के नामांकन का प्रस्ताव या समर्थन नहीं कर सकता है।
प्रत्येक वोट का मूल्य क्या है और इसकी गणना कैसे की जाती है?
प्रत्येक सांसद या विधायक द्वारा डाले गए वोट की गणना एक वोट के रूप में नहीं की जाती है।
राज्यसभा और लोकसभा के प्रत्येक सांसद के वोट का मूल्य 700 निश्चित है।
विधायकों के वोट का मूल्य अलग-अलग राज्यों की जनसंख्या पर निर्भर करता है।
संविधान (84वाँ संशोधन) अधिनियम 2001 के अनुसार, वर्तमान में राज्यों की जनसंख्या वर्ष 1971 की जनगणना के आँकड़ों पर आधारित है जिसमें बदलाव वर्ष 2026 के बाद की जनगणना के आँकड़े प्रकाशित होने के बाद किया जाएगा।
प्रत्येक विधायक के वोट का मूल्य राज्य की विधानसभा में विधायकों की संख्या से विभाजित करके तथा प्राप्त भागफल को 1000 से विभाजित करके निर्धारित किया जाता है।
उदाहरण के लिये उत्तर प्रदेश में प्रत्येक विधायक के लिये सबसे अधिक वोट मूल्य 208 है। महाराष्ट्र में एक विधायक का वोट मूल्य 175 है, जबकि अरुणाचल प्रदेश में यह सिर्फ 8 है।
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प्रक्रिया:
मतदान से पूर्व नामांकन चरण आता है, जहाँ उम्मीदवार चुनाव में खड़े होने का इरादा प्रस्तुत करता है और 50 प्रस्तावकों एवं 50 समर्थकों की हस्ताक्षरित सूची के साथ नामांकन दाखिल करता है।
ये प्रस्तावक और समर्थक राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर के निर्वाचक मंडल के सदस्यों में से कोई भी हो सकते हैं।
50 प्रस्तावकों और समर्थकों की आवश्यकता से संबंधित नियम तब लागू किया गया जब चुनाव आयोग ने 1974 में देखा कि कई ऐसे उम्मीदवारों, जिनमें से कई के जीतने की संभावना भी कम थी, द्वारा चुनाव लड़ने के लिये नामांकन दाखिल किया गया।
एक मतदाता एक से अधिक उम्मीदवारों के नामांकन का प्रस्ताव या समर्थन नहीं कर सकता है।
प्रत्येक वोट का मूल्य क्या है और इसकी गणना कैसे की जाती है?
प्रत्येक सांसद या विधायक द्वारा डाले गए वोट की गणना एक वोट के रूप में नहीं की जाती है।
राज्यसभा और लोकसभा के प्रत्येक सांसद के वोट का मूल्य 700 निश्चित है।
विधायकों के वोट का मूल्य अलग-अलग राज्यों की जनसंख्या पर निर्भर करता है।
संविधान (84वाँ संशोधन) अधिनियम 2001 के अनुसार, वर्तमान में राज्यों की जनसंख्या वर्ष 1971 की जनगणना के आँकड़ों पर आधारित है जिसमें बदलाव वर्ष 2026 के बाद की जनगणना के आँकड़े प्रकाशित होने के बाद किया जाएगा।
प्रत्येक विधायक के वोट का मूल्य राज्य की विधानसभा में विधायकों की संख्या से विभाजित करके तथा प्राप्त भागफल को 1000 से विभाजित करके निर्धारित किया जाता है।
उदाहरण के लिये उत्तर प्रदेश में प्रत्येक विधायक के लिये सबसे अधिक वोट मूल्य 208 है। महाराष्ट्र में एक विधायक का वोट मूल्य 175 है, जबकि अरुणाचल प्रदेश में यह सिर्फ 8 है।
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जीत सुनिश्चित करने के लिये क्या आवश्यक है?
एक मनोनीत उम्मीदवार साधारण बहुमत के आधार पर जीत हासिल नहीं करता है बल्कि वोटों के एक विशिष्ट कोटे को हासिल करने की प्रणाली के माध्यम से जीत सुनिश्चित होती है। मतगणना के दौरान चुनाव आयोग द्वारा मतपत्रों के माध्यम से निर्वाचक मंडल द्वारा डाले गए सभी वैध मतों का योग किया जाता है तथा जीत के लिये उम्मीदवार को डाले गए कुल मतों का 50% + 1 प्राप्त करना होता है।
आम चुनावों के विपरीत यहाँ मतदाता एक पार्टी के उम्मीदवार के लिये वोट करते है तथा निर्वाचक मंडल के मतदाता मतपत्र पर उम्मीदवारों के नाम वरीयता क्रम में लिखे जाते हैं।
राष्ट्रपति का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार एकल संक्रमणीय मत पद्धति द्वारा होता है तथा गुप्त मतदान की प्रक्रिया अपनाई जाती है।
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एक मनोनीत उम्मीदवार साधारण बहुमत के आधार पर जीत हासिल नहीं करता है बल्कि वोटों के एक विशिष्ट कोटे को हासिल करने की प्रणाली के माध्यम से जीत सुनिश्चित होती है। मतगणना के दौरान चुनाव आयोग द्वारा मतपत्रों के माध्यम से निर्वाचक मंडल द्वारा डाले गए सभी वैध मतों का योग किया जाता है तथा जीत के लिये उम्मीदवार को डाले गए कुल मतों का 50% + 1 प्राप्त करना होता है।
आम चुनावों के विपरीत यहाँ मतदाता एक पार्टी के उम्मीदवार के लिये वोट करते है तथा निर्वाचक मंडल के मतदाता मतपत्र पर उम्मीदवारों के नाम वरीयता क्रम में लिखे जाते हैं।
राष्ट्रपति का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार एकल संक्रमणीय मत पद्धति द्वारा होता है तथा गुप्त मतदान की प्रक्रिया अपनाई जाती है।
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