◆ ‘ग्रेगर मेंडल’ (Gregor Mendel) का विज्ञान में योगदान:
वंशानुक्रम के सिद्धांत (Principles of Inheritance): ‘मटर के पौधे के प्रजनन’ के साथ प्रयोग करके, मेंडल ने वंशानुक्रम के तीन सिद्धांत विकसित किए जो आनुवंशिक लक्षणों के संचरण का वर्णन करते हैं। इससे पहले ‘जीन’ की उपस्थिति के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।
आज तक, वंशानुगतता या वंशानुक्रम (Inheritance) की सबसे बुनियादी घटनाओं की व्याख्या करने के लिए वैज्ञानिकों द्वारा ‘मेंडल’ के सिद्धांतों का उपयोग किया जाता है।
जीव विज्ञान की नींव: चार्ल्स डार्विन द्वारा प्रतिपादित ‘विकासवादी सिद्धांत’ के साथ मेंडल के सिद्धांत ने जीव विज्ञान की नींव रखी।
कई मानव रोगों का इलाज: ‘ग्रेगर मेंडल’ ने मानव रोग अनुसंधान में सहायक चिकित्सीय पद्धतियाँ विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।
@Gk_trick
वंशानुक्रम के सिद्धांत (Principles of Inheritance): ‘मटर के पौधे के प्रजनन’ के साथ प्रयोग करके, मेंडल ने वंशानुक्रम के तीन सिद्धांत विकसित किए जो आनुवंशिक लक्षणों के संचरण का वर्णन करते हैं। इससे पहले ‘जीन’ की उपस्थिति के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।
आज तक, वंशानुगतता या वंशानुक्रम (Inheritance) की सबसे बुनियादी घटनाओं की व्याख्या करने के लिए वैज्ञानिकों द्वारा ‘मेंडल’ के सिद्धांतों का उपयोग किया जाता है।
जीव विज्ञान की नींव: चार्ल्स डार्विन द्वारा प्रतिपादित ‘विकासवादी सिद्धांत’ के साथ मेंडल के सिद्धांत ने जीव विज्ञान की नींव रखी।
कई मानव रोगों का इलाज: ‘ग्रेगर मेंडल’ ने मानव रोग अनुसंधान में सहायक चिकित्सीय पद्धतियाँ विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।
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प्रश्न. 26 जनवरी, 1950 को भारत की वास्तविक संवैधानिक स्थिति क्या थी? (2021)
(a) एक लोकतांत्रिक गणराज्य
(b) एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य
(c) एक संप्रभु धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य
(d) एक संप्रभु समाजवादी धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य
उत्तर: B
व्याख्या:
26 नवंबर, 1949 को संविधान सभा ने अपना संविधान अपनाया, अधिनियमित किया और नागरिकों को संविधान प्रदान किया।
26 जनवरी, 1950 को भारत की संवैधानिक स्थिति एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य की थी क्योंकि समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष शब्द 42वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा प्रस्तावना में जोड़े गए थे।
वर्तमान में भारतीय संविधान की प्रस्तावना भारत को एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में परिभाषित करती है।
(a) एक लोकतांत्रिक गणराज्य
(b) एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य
(c) एक संप्रभु धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य
(d) एक संप्रभु समाजवादी धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य
उत्तर: B
व्याख्या:
26 नवंबर, 1949 को संविधान सभा ने अपना संविधान अपनाया, अधिनियमित किया और नागरिकों को संविधान प्रदान किया।
26 जनवरी, 1950 को भारत की संवैधानिक स्थिति एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य की थी क्योंकि समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष शब्द 42वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा प्रस्तावना में जोड़े गए थे।
वर्तमान में भारतीय संविधान की प्रस्तावना भारत को एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में परिभाषित करती है।
आर्कटिक
आर्कटिक एक ध्रुवीय क्षेत्र है जो पृथ्वी के सबसे उत्तरी भाग में स्थित है।
आर्कटिक क्षेत्र के भीतर की भूमि में मौसम के अनुसार बर्फ के अलग-अलग आवरण होते हैं।
आर्कटिक के अंतर्गत आर्कटिक महासागर, निकटवर्ती समुद्र और अलास्का (संयुक्त राज्य अमेरिका), कनाडा, फिनलैंड, ग्रीनलैंड (डेनमार्क), आइसलैंड, नॉर्वे, रूस तथा स्वीडन को शामिल किया जाता है।
आर्कटिक एक ध्रुवीय क्षेत्र है जो पृथ्वी के सबसे उत्तरी भाग में स्थित है।
आर्कटिक क्षेत्र के भीतर की भूमि में मौसम के अनुसार बर्फ के अलग-अलग आवरण होते हैं।
आर्कटिक के अंतर्गत आर्कटिक महासागर, निकटवर्ती समुद्र और अलास्का (संयुक्त राज्य अमेरिका), कनाडा, फिनलैंड, ग्रीनलैंड (डेनमार्क), आइसलैंड, नॉर्वे, रूस तथा स्वीडन को शामिल किया जाता है।
✅भारत की श्वेत क्रांति:
परिचय.
◆ऑपरेशन फ्लड 13 जनवरी, 1970 को लॉन्च किया गया था। यह विश्व का सबसे बड़ा डेयरी विकास कार्यक्रम था।
30 वर्षों के भीतर ऑपरेशन फ्लड ने भारत में प्रति व्यक्ति दूध उत्पादन को दोगुना करने में मदद की, जिससे डेयरी फार्मिंग भारत का सबसे बड़ा आत्मनिर्भर ग्रामीण रोज़गार उत्पन्न करने वाला क्षेत्र बन गया।
◆ऑपरेशन फ्लड ने किसानों को उनके द्वारा उत्पन्न संसाधनों पर सीधा नियंत्रण प्रदान किया, जिससे उन्हें अपने स्वयं के विकास को निर्देशित करने में मदद मिली। इससे न केवल बड़े पैमाने पर उत्पादन हुआ, बल्कि इसे अब ‘श्वेत क्रांति’ (White Revolution) के रूप में भी जाना जाता है।
●चरण:
चरण I (1970-1980): इस चरण को विश्व खाद्य कार्यक्रम के माध्यम से यूरोपीय संघ द्वारा दान किये गए बटर आयल और स्किम्ड मिल्क पाउडर की बिक्री से प्राप्त धन से वित्तपोषित किया गया था।
चरण II (1981 से 1985): इस चरण के दौरान दुग्धशालाओं की संख्या 18 से बढ़कर 136 हो गई, दूध की दुकानों का विस्तार लगभग 290 शहरी बाज़ारों में किया गया, एक आत्मनिर्भर प्रणाली स्थापित की गई जिसमें 43,000 ग्राम सहकारी समितियों के 42,50,000 दूध उत्पादक शामिल थे।
◆चरण III (1985-1996): इस चरण में डेयरी सहकारी समितियों का विस्तार कर उन्हें सक्षम बनाया गया और कार्यक्रम को अंतिम रूप प्रदान किया गया
। इसने दूध की बढ़ती मात्रा की खरीद और बाज़ार के लिये आवश्यक बुनियादी ढांँचे को भी मज़बूत किया।
उद्देश्य:
दूध उत्पादन को बढ़ाना।
ग्रामीण आय में वृद्धि।
उपभोक्ताओं के लिये उचित मूल्य।
महत्त्व:
इसने डेयरी किसानों को स्वयं के विकास के लिये निर्देशित करने में मदद की, उनके संसाधनों पर उन्हें नियंत्रण प्रदान किया।
इसने भारत को वर्ष 2016-17 में दुनिया में दूध का सबसे बड़ा उत्पादक बनने में मदद की है।
वर्तमान में भारत 22% वैश्विक उत्पादन के साथ दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक है
परिचय.
◆ऑपरेशन फ्लड 13 जनवरी, 1970 को लॉन्च किया गया था। यह विश्व का सबसे बड़ा डेयरी विकास कार्यक्रम था।
30 वर्षों के भीतर ऑपरेशन फ्लड ने भारत में प्रति व्यक्ति दूध उत्पादन को दोगुना करने में मदद की, जिससे डेयरी फार्मिंग भारत का सबसे बड़ा आत्मनिर्भर ग्रामीण रोज़गार उत्पन्न करने वाला क्षेत्र बन गया।
◆ऑपरेशन फ्लड ने किसानों को उनके द्वारा उत्पन्न संसाधनों पर सीधा नियंत्रण प्रदान किया, जिससे उन्हें अपने स्वयं के विकास को निर्देशित करने में मदद मिली। इससे न केवल बड़े पैमाने पर उत्पादन हुआ, बल्कि इसे अब ‘श्वेत क्रांति’ (White Revolution) के रूप में भी जाना जाता है।
●चरण:
चरण I (1970-1980): इस चरण को विश्व खाद्य कार्यक्रम के माध्यम से यूरोपीय संघ द्वारा दान किये गए बटर आयल और स्किम्ड मिल्क पाउडर की बिक्री से प्राप्त धन से वित्तपोषित किया गया था।
चरण II (1981 से 1985): इस चरण के दौरान दुग्धशालाओं की संख्या 18 से बढ़कर 136 हो गई, दूध की दुकानों का विस्तार लगभग 290 शहरी बाज़ारों में किया गया, एक आत्मनिर्भर प्रणाली स्थापित की गई जिसमें 43,000 ग्राम सहकारी समितियों के 42,50,000 दूध उत्पादक शामिल थे।
◆चरण III (1985-1996): इस चरण में डेयरी सहकारी समितियों का विस्तार कर उन्हें सक्षम बनाया गया और कार्यक्रम को अंतिम रूप प्रदान किया गया
। इसने दूध की बढ़ती मात्रा की खरीद और बाज़ार के लिये आवश्यक बुनियादी ढांँचे को भी मज़बूत किया।
उद्देश्य:
दूध उत्पादन को बढ़ाना।
ग्रामीण आय में वृद्धि।
उपभोक्ताओं के लिये उचित मूल्य।
महत्त्व:
इसने डेयरी किसानों को स्वयं के विकास के लिये निर्देशित करने में मदद की, उनके संसाधनों पर उन्हें नियंत्रण प्रदान किया।
इसने भारत को वर्ष 2016-17 में दुनिया में दूध का सबसे बड़ा उत्पादक बनने में मदद की है।
वर्तमान में भारत 22% वैश्विक उत्पादन के साथ दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक है