✅विषय: राज्य समाचार / कर्नाटक
विजयनगर कर्नाटक का 31 वाँ जिला बना।
कर्नाटक सरकार ने कर्नाटक भूमि राजस्व अधिनियम, 1964 के तहत बल्लारी जिले के क्षेत्रों को काटकर विजयनगर जिले का गठन किया है।
विजयनगर जिला छह तालुकों से युक्त होगा और होसपेट इसका प्रशासनिक मुख्यालय होगा।
सितंबर 2019 में बीएस येदियुरप्पा द्वारा एक नया विजयनगर जिला बनाने का अभियान शुरू किया गया था।
राज्य मंत्रिमंडल ने 18 नवंबर 2020 को विजयनगर जिले के गठन को मंजूरी दी थी।
विजयनगर जिला: यह हम्पी और विरुपाक्ष मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। यह कर्नाटक के उत्तर-पूर्वी भाग में स्थित है।
कर्नाटक:
यह दक्षिण भारत का सबसे बड़ा राज्य है।
यह महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल के साथ अपनी सीमा साझा करता है।
वर्तमान में, इसमें 31 जिले हैं।
मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा हैं और राज्यपाल वजुभाई वाला हैं।
कर्नाटक विधायिका द्विसदनीय विधायिका है।
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विजयनगर कर्नाटक का 31 वाँ जिला बना।
कर्नाटक सरकार ने कर्नाटक भूमि राजस्व अधिनियम, 1964 के तहत बल्लारी जिले के क्षेत्रों को काटकर विजयनगर जिले का गठन किया है।
विजयनगर जिला छह तालुकों से युक्त होगा और होसपेट इसका प्रशासनिक मुख्यालय होगा।
सितंबर 2019 में बीएस येदियुरप्पा द्वारा एक नया विजयनगर जिला बनाने का अभियान शुरू किया गया था।
राज्य मंत्रिमंडल ने 18 नवंबर 2020 को विजयनगर जिले के गठन को मंजूरी दी थी।
विजयनगर जिला: यह हम्पी और विरुपाक्ष मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। यह कर्नाटक के उत्तर-पूर्वी भाग में स्थित है।
कर्नाटक:
यह दक्षिण भारत का सबसे बड़ा राज्य है।
यह महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल के साथ अपनी सीमा साझा करता है।
वर्तमान में, इसमें 31 जिले हैं।
मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा हैं और राज्यपाल वजुभाई वाला हैं।
कर्नाटक विधायिका द्विसदनीय विधायिका है।
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कैलाश पर्वत श्रेणी
(Kailash Range)
संदर्भ:
वर्ष 1962 के चीनी आक्रमण के दौरान, कैलाश पर्वत श्रेणी (Kailash Range) एक युद्ध क्षेत्र बन गयी थी, और इसमें रेजांग ला (Rezang La) और गुरुंग हिल (Gurung Hill) की प्रमुख लड़ाईयां लड़ी गई थी।
वर्ष 2020 में, भारतीय सैनिकों ने, चीनियों को आश्चर्यचकित करते हुए, एक ऑपरेशन में ‘कैलाश रिज’ पर अपना अधिकार सुरक्षित कर लिया।
कैलाश रेंज के बारे में:
पैंगोंग त्सो झील के उत्तरी छोर पर काराकोरम पर्वत श्रेणी की समाप्ति होती है। उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पूर्व की दिशा में 60 किमी से अधिक दूरी तक फ़ैली हुई है।
इस पर्वत श्रेणी में 4,000-5,500 मीटर की ऊंचाई की कई उबड़-खाबड़ और खंडित पहाड़ियां पायी जाती हैं।
इसकी प्रमुख विशेषताओं में हेलमेट टॉप, गुरुंग हिल, स्पैंग्गुर गैप, मग्गर हिल, मुखपरी, रेजांग ला और रेचिन ला शामिल हैं।
यह कटक, चूशुल घाटी पर प्रभुत्व रखती है, जोकि एक महत्वपूर्ण संचार केंद्र है।
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(Kailash Range)
संदर्भ:
वर्ष 1962 के चीनी आक्रमण के दौरान, कैलाश पर्वत श्रेणी (Kailash Range) एक युद्ध क्षेत्र बन गयी थी, और इसमें रेजांग ला (Rezang La) और गुरुंग हिल (Gurung Hill) की प्रमुख लड़ाईयां लड़ी गई थी।
वर्ष 2020 में, भारतीय सैनिकों ने, चीनियों को आश्चर्यचकित करते हुए, एक ऑपरेशन में ‘कैलाश रिज’ पर अपना अधिकार सुरक्षित कर लिया।
कैलाश रेंज के बारे में:
पैंगोंग त्सो झील के उत्तरी छोर पर काराकोरम पर्वत श्रेणी की समाप्ति होती है। उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पूर्व की दिशा में 60 किमी से अधिक दूरी तक फ़ैली हुई है।
इस पर्वत श्रेणी में 4,000-5,500 मीटर की ऊंचाई की कई उबड़-खाबड़ और खंडित पहाड़ियां पायी जाती हैं।
इसकी प्रमुख विशेषताओं में हेलमेट टॉप, गुरुंग हिल, स्पैंग्गुर गैप, मग्गर हिल, मुखपरी, रेजांग ला और रेचिन ला शामिल हैं।
यह कटक, चूशुल घाटी पर प्रभुत्व रखती है, जोकि एक महत्वपूर्ण संचार केंद्र है।
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✅ डिजिटल कृषि : कृषि में राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना (NeGPA)
कृषि में राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना (National e-Governance Plan in Agriculture-NeGPA) एक केंद्र प्रायोजित योजना है। यह योजना शुरू में 2010-11 में 7 राज्यों में शुरू की गई थी। हाल ही में, इस योजना को 31 मार्च, 2021 तक बढ़ाया गया था।
▪️ मुख्य बिंदु:
• सूचना और संचार प्रौद्योगिकी का उपयोग करके भारत में तेजी से विकास को प्राप्त करने के उद्देश्य से यह योजना शुरू की गई थी।
• यह किसानों को कृषि संबंधी सूचनाओं को समय पर पहुंचाने में मदद करती है।
• वर्ष 2014-15 में, सभी शेष राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों को कवर करने के लिए योजना का विस्तार किया गया।
▪️ योजना का चरण- II
इस चरण के तहत, राज्यों को निम्नलिखित गतिविधियों के लिए धनराशि जारी की गई थी :
1. हार्डवेयर स्थापित करने के लिए कार्यालयों की साइट तैयार करना
2. कंप्यूटर प्रशिक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना
सिस्टम सॉफ्टवेयर की खरीद, स्थापना और लेखांकन।
3. बिजली व्यवस्था को बैक-अप।
4. राज्य परियोजना प्रबंधन इकाई (SPMU) की स्थापना
5. अनुबंध के आधार पर जनशक्ति की तैनाती
▪️ योजना के तहत हालिया घटनाएँ:
• कृषि क्षेत्र में आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के लिए 2020-2021 में NeGPA दिशानिर्देशों में संशोधन किया गया था।
• इसके अलावा, किसानों से संबंधित आंकड़ों तक पहुँचने में एक परिवर्तन लाने के लिए यूनिफाइड फार्मर्स सर्विस प्लेटफ़ॉर्म (UFSP) जैसी पहल शुरू की गई।
▪️ एकीकृत किसान सेवा मंच (Unified Farmer Service Platform – UFSP) :
UFSP कोर इन्फ्रास्ट्रक्चर, एप्लीकेशन, टूल और डाटा का संयोजन है। यह प्लेटफार्म कृषि क्षेत्र में विभिन्न सार्वजनिक और निजी आईटी प्रणालियों के निर्बाध अंतर-संचालन में मदद करता है।
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कृषि में राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना (National e-Governance Plan in Agriculture-NeGPA) एक केंद्र प्रायोजित योजना है। यह योजना शुरू में 2010-11 में 7 राज्यों में शुरू की गई थी। हाल ही में, इस योजना को 31 मार्च, 2021 तक बढ़ाया गया था।
▪️ मुख्य बिंदु:
• सूचना और संचार प्रौद्योगिकी का उपयोग करके भारत में तेजी से विकास को प्राप्त करने के उद्देश्य से यह योजना शुरू की गई थी।
• यह किसानों को कृषि संबंधी सूचनाओं को समय पर पहुंचाने में मदद करती है।
• वर्ष 2014-15 में, सभी शेष राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों को कवर करने के लिए योजना का विस्तार किया गया।
▪️ योजना का चरण- II
इस चरण के तहत, राज्यों को निम्नलिखित गतिविधियों के लिए धनराशि जारी की गई थी :
1. हार्डवेयर स्थापित करने के लिए कार्यालयों की साइट तैयार करना
2. कंप्यूटर प्रशिक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना
सिस्टम सॉफ्टवेयर की खरीद, स्थापना और लेखांकन।
3. बिजली व्यवस्था को बैक-अप।
4. राज्य परियोजना प्रबंधन इकाई (SPMU) की स्थापना
5. अनुबंध के आधार पर जनशक्ति की तैनाती
▪️ योजना के तहत हालिया घटनाएँ:
• कृषि क्षेत्र में आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के लिए 2020-2021 में NeGPA दिशानिर्देशों में संशोधन किया गया था।
• इसके अलावा, किसानों से संबंधित आंकड़ों तक पहुँचने में एक परिवर्तन लाने के लिए यूनिफाइड फार्मर्स सर्विस प्लेटफ़ॉर्म (UFSP) जैसी पहल शुरू की गई।
▪️ एकीकृत किसान सेवा मंच (Unified Farmer Service Platform – UFSP) :
UFSP कोर इन्फ्रास्ट्रक्चर, एप्लीकेशन, टूल और डाटा का संयोजन है। यह प्लेटफार्म कृषि क्षेत्र में विभिन्न सार्वजनिक और निजी आईटी प्रणालियों के निर्बाध अंतर-संचालन में मदद करता है।
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✅ दिशा रवि मामला: कार्यकर्ताओं को जांच के घेरे में लेन वाला ‘टूलकिट’ क्या होता है?
संदर्भ:
कायकर्ता दिशा रवि, एक टूलकिट (toolkit) को संपादित करने और वैश्विक स्तर पर चर्चित जलवायु परिवर्तन-विरोधी एक किशोर प्रचारक ग्रेटा थनबर्ग (Greta Thunberg) के साथ साझा करने के आरोप में दिल्ली पुलिस की हिरासत में हैं।
इसके अलावा, कुछ अन्य लोगों को भी, नए कृषि कानूनों पर किसान संगठनों के विरोध प्रदर्शन के संबंध में खालिस्तान समर्थक एक संगठन पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन (पीएफजे) के साथ समन्वय करने के लिए आरोपित किया गया है।
‘टूलकिट’ क्या होती है?
टूलकिट (toolkit), सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के समय में किसी आंदोलन या अभियान को जारी रखने के लिए एक उपयोगी उपकरण बन गया है।
यह किसी मुद्दे के बारे में समझाने वाला एक दस्तावेज होता है, और यह, अभियान से जुड़े हुए व्यक्तियों अथवा अभियान को तेज करने के लिए अन्य लोगों को जोड़ने हेतु एक मार्गदर्शक के रूप में कार्य करता है।
इसमें, अभियान या आंदोलन को आगे बढ़ाने हेतु, “क्या कब और कैसे किया जाना चाहिए”, इस बारे में रोडमैप उपलब्ध रहता है।
वर्तमान प्रकरण:
वर्तमान मामले में, 5 फरवरी को ग्रेटा थनबर्ग ने अनजाने में एक गूगल दस्तावेज़ ‘टूलकिट’ को साझा कर दिया था, जिससे इस ‘टूलकिट’ का आकस्मिक खुलासा हो गया। हालांकि, ग्रेटा ने बाद में इस ट्वीट को डिलीट कर दिया था, लेकिन तब तक यह सुर्ख़ियों में आ चुका था।
इस ‘टूलकिट’ में संसद द्वारा वर्ष 2020 में पारित कृषि कानूनों पर, मोदी सरकार के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर जारी “किसानों के विरोध को समझाने” का प्रयास किया गया था।
जांच के उपरांत, दिल्ली पुलिस ने पाया कि कुछ खालिस्तानी-समर्थक तत्व देश के खिलाफ असहमति का माहौल पैदा करने में शामिल थे।
दिशा रवि को दस्तावेज तैयार करने और साझा करने के लिए एक “प्रमुख साजिशकर्ता” होने का आरोप लगाया गया है।
‘खालिस्तान-आंदोलन’ क्या है?
खालिस्तान आंदोलन, 1980 के दशक के दौरान मुख्य रूप से पंजाब में आतंकवाद को बढ़ावा देने हेतु पाकिस्तान द्वारा समर्थित एक अलगाववादी अभियान था। हाल के दिनों में, भारत में बगैर किसी व्यावहारिक मांग अथवा आकर्षण के, पाकिस्तान और कनाडा स्थित समूहों द्वारा इस अभियान को पुनर्जीवित करने के प्रयास किए गए हैं।
स्रोत: द हिंदू
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संदर्भ:
कायकर्ता दिशा रवि, एक टूलकिट (toolkit) को संपादित करने और वैश्विक स्तर पर चर्चित जलवायु परिवर्तन-विरोधी एक किशोर प्रचारक ग्रेटा थनबर्ग (Greta Thunberg) के साथ साझा करने के आरोप में दिल्ली पुलिस की हिरासत में हैं।
इसके अलावा, कुछ अन्य लोगों को भी, नए कृषि कानूनों पर किसान संगठनों के विरोध प्रदर्शन के संबंध में खालिस्तान समर्थक एक संगठन पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन (पीएफजे) के साथ समन्वय करने के लिए आरोपित किया गया है।
‘टूलकिट’ क्या होती है?
टूलकिट (toolkit), सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के समय में किसी आंदोलन या अभियान को जारी रखने के लिए एक उपयोगी उपकरण बन गया है।
यह किसी मुद्दे के बारे में समझाने वाला एक दस्तावेज होता है, और यह, अभियान से जुड़े हुए व्यक्तियों अथवा अभियान को तेज करने के लिए अन्य लोगों को जोड़ने हेतु एक मार्गदर्शक के रूप में कार्य करता है।
इसमें, अभियान या आंदोलन को आगे बढ़ाने हेतु, “क्या कब और कैसे किया जाना चाहिए”, इस बारे में रोडमैप उपलब्ध रहता है।
वर्तमान प्रकरण:
वर्तमान मामले में, 5 फरवरी को ग्रेटा थनबर्ग ने अनजाने में एक गूगल दस्तावेज़ ‘टूलकिट’ को साझा कर दिया था, जिससे इस ‘टूलकिट’ का आकस्मिक खुलासा हो गया। हालांकि, ग्रेटा ने बाद में इस ट्वीट को डिलीट कर दिया था, लेकिन तब तक यह सुर्ख़ियों में आ चुका था।
इस ‘टूलकिट’ में संसद द्वारा वर्ष 2020 में पारित कृषि कानूनों पर, मोदी सरकार के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर जारी “किसानों के विरोध को समझाने” का प्रयास किया गया था।
जांच के उपरांत, दिल्ली पुलिस ने पाया कि कुछ खालिस्तानी-समर्थक तत्व देश के खिलाफ असहमति का माहौल पैदा करने में शामिल थे।
दिशा रवि को दस्तावेज तैयार करने और साझा करने के लिए एक “प्रमुख साजिशकर्ता” होने का आरोप लगाया गया है।
‘खालिस्तान-आंदोलन’ क्या है?
खालिस्तान आंदोलन, 1980 के दशक के दौरान मुख्य रूप से पंजाब में आतंकवाद को बढ़ावा देने हेतु पाकिस्तान द्वारा समर्थित एक अलगाववादी अभियान था। हाल के दिनों में, भारत में बगैर किसी व्यावहारिक मांग अथवा आकर्षण के, पाकिस्तान और कनाडा स्थित समूहों द्वारा इस अभियान को पुनर्जीवित करने के प्रयास किए गए हैं।
स्रोत: द हिंदू
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✅ कोयला दहन एवं प्रदूषण:
कोयले का निर्माण:
ये अत्यधिक ताप और दबाव के कारण हज़ारों वर्षों में निर्मित भूमिगत कोयले की कार्बन युक्त काली चट्टानें हैं जो जलने पर ऊर्जा का उत्पादन करती हैं।
वायु प्रदूषण:
जब कोयले को जलाया जाता है, तो यह कई वायुवाहित विषाक्त पदार्थों और प्रदूषकों का उत्सर्जन करता है।
इनमें पारा, सीसा, सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, पार्टिकुलेट और अन्य विभिन्न भारी धातुएँ शामिल हैं।
इन सभी प्रदूषकों के कारण होने वाले वायु प्रदूषण से अनेक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ जैसे- अस्थमा, साँस लेने में कठिनाई, मस्तिष्क क्षति, हृदय संबंधी समस्याएँ, कैंसर, तंत्रिका संबंधी विकार और समय से पहले मृत्यु तक हो सकती है।
जल प्रदूषण:
कोयला आधारित विद्युत संयंत्र हर वर्ष लगभग 100 मिलियन टन से अधिक ‘कोल एश’ का उत्पादन करते हैं।
इस कचरे का आधा से अधिक हिस्सा तालाबों, झीलों, लैंडफिल और अन्य स्थलों में निर्गत होता है, जहाँ समय के साथ यह जलमार्ग और पेयजल आपूर्ति को दूषित कर सकता है।
जल प्रदूषण के लिये ज़िम्मेदार अन्य कारकों में कोयला खदानों से एसिड रॉक जल निकासी, ‘माउंटेन स्टॉप माइनिंग’ द्वारा पहाड़ों और घाटियों का विनाश एवं कोयला संयंत्रों के स्थानीय जल आपूर्ति पर बहुत अधिक निर्भर होने के कारण पेयजल संबंधी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।
जलवायु परिवर्तन:
ग्लोबल वार्मिंग के लिये कोयला एक बड़ा उत्तरदायी कारक है।
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कोयले का निर्माण:
ये अत्यधिक ताप और दबाव के कारण हज़ारों वर्षों में निर्मित भूमिगत कोयले की कार्बन युक्त काली चट्टानें हैं जो जलने पर ऊर्जा का उत्पादन करती हैं।
वायु प्रदूषण:
जब कोयले को जलाया जाता है, तो यह कई वायुवाहित विषाक्त पदार्थों और प्रदूषकों का उत्सर्जन करता है।
इनमें पारा, सीसा, सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, पार्टिकुलेट और अन्य विभिन्न भारी धातुएँ शामिल हैं।
इन सभी प्रदूषकों के कारण होने वाले वायु प्रदूषण से अनेक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ जैसे- अस्थमा, साँस लेने में कठिनाई, मस्तिष्क क्षति, हृदय संबंधी समस्याएँ, कैंसर, तंत्रिका संबंधी विकार और समय से पहले मृत्यु तक हो सकती है।
जल प्रदूषण:
कोयला आधारित विद्युत संयंत्र हर वर्ष लगभग 100 मिलियन टन से अधिक ‘कोल एश’ का उत्पादन करते हैं।
इस कचरे का आधा से अधिक हिस्सा तालाबों, झीलों, लैंडफिल और अन्य स्थलों में निर्गत होता है, जहाँ समय के साथ यह जलमार्ग और पेयजल आपूर्ति को दूषित कर सकता है।
जल प्रदूषण के लिये ज़िम्मेदार अन्य कारकों में कोयला खदानों से एसिड रॉक जल निकासी, ‘माउंटेन स्टॉप माइनिंग’ द्वारा पहाड़ों और घाटियों का विनाश एवं कोयला संयंत्रों के स्थानीय जल आपूर्ति पर बहुत अधिक निर्भर होने के कारण पेयजल संबंधी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।
जलवायु परिवर्तन:
ग्लोबल वार्मिंग के लिये कोयला एक बड़ा उत्तरदायी कारक है।
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LIST OF BRICS SUMMIT
1st Brics summit 2009 : Russia
4th Brics summit 2012 : India
8th Brics summit 2016 : India
11th Brics summit 2019 : Brazil
12th Brics summit 2020 : Russia
13th Brics summit 2021 : India
BRICS DEVELOPMENT BANK (New Development Bank)
● Founded : 2015
● HQ : Shanghai, China
● President : Marcos Prado Troyjo (Brazil)
● Vice President : Anil Kishora ( Indian)
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1st Brics summit 2009 : Russia
4th Brics summit 2012 : India
8th Brics summit 2016 : India
11th Brics summit 2019 : Brazil
12th Brics summit 2020 : Russia
13th Brics summit 2021 : India
BRICS DEVELOPMENT BANK (New Development Bank)
● Founded : 2015
● HQ : Shanghai, China
● President : Marcos Prado Troyjo (Brazil)
● Vice President : Anil Kishora ( Indian)
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Q.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किस राज्य में 'महाबाहु-ब्रह्मपुत्र' योजना का शुभारंभ किया?
a. बिहार
b. राजस्थान
c. असम
d. गुजरात
.c. असम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 फरवरी 2021 के दिन असम में कई परियोजनाओं को हरी इंडी दिखाई. इस दौरान प्रधानमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से महाबाहु-ब्रह्मपुत्र योजना का शुभारंभ किया और दो पुलों (धुबरी फूलबारी पुल और मजुली पुल) की आधारशिला रखी. धुबरी फूलबारी पुल को लेकर पीएम मोदी ने कहा कि असम और मेघालय के बीच की दूरी सड़क मार्ग से लगभग 250 किलोमीटर है. भविष्य में, यह केवल 19-20 किलोमीटर होगा.
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a. बिहार
b. राजस्थान
c. असम
d. गुजरात
.c. असम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 फरवरी 2021 के दिन असम में कई परियोजनाओं को हरी इंडी दिखाई. इस दौरान प्रधानमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से महाबाहु-ब्रह्मपुत्र योजना का शुभारंभ किया और दो पुलों (धुबरी फूलबारी पुल और मजुली पुल) की आधारशिला रखी. धुबरी फूलबारी पुल को लेकर पीएम मोदी ने कहा कि असम और मेघालय के बीच की दूरी सड़क मार्ग से लगभग 250 किलोमीटर है. भविष्य में, यह केवल 19-20 किलोमीटर होगा.
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Q.अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने किस ग्रह पर जीवन की खोज के लिए पर्सिवरेंस (Perseverance) रोवर की सफलतापूर्वक लैंडिंग कराई है?
a. मंगल ग्रह
b. बुध ग्रह
c. शनि ग्रह
d. चन्द्रमा ग्रह
a. मंगल ग्रह
अमेरिकी स्पेस एजेंसी (NASA) का अंतरिक्ष यान भारतीय समय के मुताबिक 18 फरवरी 2021 को रात 2 बजकर 25 मिनट पर मंगल ग्रह के जेजेरो क्रेटर पर सफलतापूर्वक लैंड कर चुका है. धरती से टेकऑफ करने के सात महीने बाद यह मंगल ग्रह पर पहुंचा है. इसी के साथ अमेरिका मंगल ग्रह पर सबसे ज्यादा रोवर भेजने वाला विश्व का पहला देश बन गया है.
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a. मंगल ग्रह
b. बुध ग्रह
c. शनि ग्रह
d. चन्द्रमा ग्रह
a. मंगल ग्रह
अमेरिकी स्पेस एजेंसी (NASA) का अंतरिक्ष यान भारतीय समय के मुताबिक 18 फरवरी 2021 को रात 2 बजकर 25 मिनट पर मंगल ग्रह के जेजेरो क्रेटर पर सफलतापूर्वक लैंड कर चुका है. धरती से टेकऑफ करने के सात महीने बाद यह मंगल ग्रह पर पहुंचा है. इसी के साथ अमेरिका मंगल ग्रह पर सबसे ज्यादा रोवर भेजने वाला विश्व का पहला देश बन गया है.
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मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक 2020 के प्रमुख प्रावधान:
[(Madhya Pradesh Dharmik Swatantrata (Freedom of Religion) Bill 2020]
प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य राज्य में अंतरधार्मिक विवाहों (inter-faith marriages) को विनियमित करना है।
मूल धर्म में पुन:परिवर्तन को इस क़ानून के दायरे से बाहर रखा गया है।
इसके तहत ‘विवाह अथवा अन्य बलात माध्यमों से धर्मांतरण’ कराने पर 10 साल तक का कारावास और 1 लाख रुपए तक का जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
इस विधेयक में, गलत-बयानी/ बहकाने, प्रलोभन, धमकी, अनुचित दबाव, बल-पूर्वक, विवाह और किसी अन्य धोखाधड़ी के माध्यम से धर्मांतरण का प्रयास करने अथवा धर्म-परिवर्तन करने पर रोक लगाने हेतु प्रावधान किये गए हैं।
धर्मांतरण के लिए किसी व्यक्ति को प्रेरित करने अथवा साजिश करने को भी प्रतिबंधित किया गया है।
इसके तहत, बलपूर्वक धर्मांतरण और विवाह एक संज्ञेय अपराध होगा और गैर-जमानती होगा।
‘विवाह और धर्मांतरण’ पर उच्चतम न्यायालय की राय:
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने अपने कई निर्णयों में माना है कि जीवन साथी का चयन करने हेतु किसी वयस्क के पूर्ण अधिकार पर राज्य और अदालत अथवा धर्म का कोई क्षेत्राधिकार नहीं है।
लिली थॉमस और सरला मुद्गल दोनों मामलों में भारत के उच्चतम न्यायालय ने पुष्टि की है कि वास्तविक आस्था के बिना और कुछ कानूनी लाभ उठाने के उद्देश्य से किए गए धर्म परिवर्तन का कोई आधार नहीं है।
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[(Madhya Pradesh Dharmik Swatantrata (Freedom of Religion) Bill 2020]
प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य राज्य में अंतरधार्मिक विवाहों (inter-faith marriages) को विनियमित करना है।
मूल धर्म में पुन:परिवर्तन को इस क़ानून के दायरे से बाहर रखा गया है।
इसके तहत ‘विवाह अथवा अन्य बलात माध्यमों से धर्मांतरण’ कराने पर 10 साल तक का कारावास और 1 लाख रुपए तक का जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
इस विधेयक में, गलत-बयानी/ बहकाने, प्रलोभन, धमकी, अनुचित दबाव, बल-पूर्वक, विवाह और किसी अन्य धोखाधड़ी के माध्यम से धर्मांतरण का प्रयास करने अथवा धर्म-परिवर्तन करने पर रोक लगाने हेतु प्रावधान किये गए हैं।
धर्मांतरण के लिए किसी व्यक्ति को प्रेरित करने अथवा साजिश करने को भी प्रतिबंधित किया गया है।
इसके तहत, बलपूर्वक धर्मांतरण और विवाह एक संज्ञेय अपराध होगा और गैर-जमानती होगा।
‘विवाह और धर्मांतरण’ पर उच्चतम न्यायालय की राय:
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने अपने कई निर्णयों में माना है कि जीवन साथी का चयन करने हेतु किसी वयस्क के पूर्ण अधिकार पर राज्य और अदालत अथवा धर्म का कोई क्षेत्राधिकार नहीं है।
लिली थॉमस और सरला मुद्गल दोनों मामलों में भारत के उच्चतम न्यायालय ने पुष्टि की है कि वास्तविक आस्था के बिना और कुछ कानूनी लाभ उठाने के उद्देश्य से किए गए धर्म परिवर्तन का कोई आधार नहीं है।
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✅इन्फ्लुएंजा A (H5N8) वायरस
संदर्भ:
हाल में, रूस ने कहा है, कि देश में, मनुष्यों में H5N8 एवियन फ्लू के पहले मामले का पता चला है। इससे विश्व स्वास्थ्य संगठन को सावधान हो गया है।
एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस के विभिन्न उपप्रकार होते हैं। हालांकि, H5N8, एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस का अत्यधिक संक्रामक उपप्रकार है, जोकि पक्षियों के लिए घातक होता है, तथा मनुष्यों में अभी तक इसके फैलने की सूचना नहीं पायी गई थी।
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एवियन इन्फ्लूएंजा (बर्ड फ्लू) के बारे में:
एवियन इन्फ्लूएंजा (Avian influenza-AI) पक्षियों, मनुष्यों और अन्य जानवरों को संक्रमित करने में सक्षम एक एक वायरल संक्रमण है। हालांकि इस वायरस के अधिकांश प्रकार केवल पक्षियों को संक्रमित करने तक सीमित हैं।
यह एक अत्यधिक संक्रामक बीमारी है जो खाद्य पदार्थो के रूप में उपयोग होने वाले पक्षियों (मुर्गियों, टर्की, बटेर, गिनी फाउल, आदि) सहित पालतू पक्षियों और जंगली पक्षियों की कई प्रजातियों को प्रभावित करती है।
कभी-कभी यह वायरस मानव सहित अन्य स्तनधारियों को भी संक्रमित कर सकता है।
‘इन्फ्लूएंजा ए’ वायरस को दो प्रकार के प्रोटीन हेमाग्लगुटिनिन (Hemagglutinin- HA) और न्यूरोमिनिडेस (Neuraminidase- NA) के आधार पर उप-प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है।
इन्फ्लुएंजा ए (H5N8) विषाणु:
पेरिस स्थित वर्ल्ड आर्गेनाईजेशन फॉर एनिमल हेल्थ के अनुसार, H5N8 एवियन इन्फ्लूएंजा पक्षियों का एक रोग है।
यह टाइप “ए” इन्फ्लूएंजा वायरस (Type “A” influenza viruses) के कारण फैलता है।
इस वायरस से पालतू पक्षी, जंगली प्रवासी पक्षी, जल-मुर्गाबी, घरेलू मुर्गियों की कई प्रजातियां जैसे मुर्गियां, टर्की, बटेर, गिनी फाउल, बतख आदि प्रभावित हो सकते हैं।
इस वायरस का प्रसरण:
अब तक मनुष्यों में H5N8 विषाणु संक्रमण के मामले नहीं पाए गए है। आम जनता के लिए इसके संक्रमण का जोखिम काफी कम है।
अभी तक, मुर्गी के मांस या अंडे के सेवन से मनुष्यों में वायरस पहुचने संबंधी कोई प्रमाण नहीं मिले हैं।
किंतु नियंत्रण और निवारण कार्यों के दौरान बीमार / मृत पक्षियों और दूषित पदार्थो के प्रबंधन करते समय आवश्यक सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
उचित ढंग से पके हुए पोल्ट्री उत्पादों को खाने के लिए सुरक्षित माना जाता है।
नियंत्रण उपाय:
जानवरों में वायरस संक्रमण का पता चलने पर, सामान्यतः संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए इनको मारना (Culling) शुरू किया जाता है।
जानवरों की हत्या करने के अलावा, मारे गए सभी जानवरों तथा अन्य संबंधित उत्पादों का सुरक्षित निपटान भी महत्वपूर्ण होता है।
अधिकारियों द्वारा संक्रमित परिसरों को सख्ती से परिशोधन कराया जाना और दूषित वाहनों और कर्मियों को संगरोध (Quarantine) किया जाना आवश्यक है।
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संदर्भ:
हाल में, रूस ने कहा है, कि देश में, मनुष्यों में H5N8 एवियन फ्लू के पहले मामले का पता चला है। इससे विश्व स्वास्थ्य संगठन को सावधान हो गया है।
एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस के विभिन्न उपप्रकार होते हैं। हालांकि, H5N8, एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस का अत्यधिक संक्रामक उपप्रकार है, जोकि पक्षियों के लिए घातक होता है, तथा मनुष्यों में अभी तक इसके फैलने की सूचना नहीं पायी गई थी।
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एवियन इन्फ्लूएंजा (बर्ड फ्लू) के बारे में:
एवियन इन्फ्लूएंजा (Avian influenza-AI) पक्षियों, मनुष्यों और अन्य जानवरों को संक्रमित करने में सक्षम एक एक वायरल संक्रमण है। हालांकि इस वायरस के अधिकांश प्रकार केवल पक्षियों को संक्रमित करने तक सीमित हैं।
यह एक अत्यधिक संक्रामक बीमारी है जो खाद्य पदार्थो के रूप में उपयोग होने वाले पक्षियों (मुर्गियों, टर्की, बटेर, गिनी फाउल, आदि) सहित पालतू पक्षियों और जंगली पक्षियों की कई प्रजातियों को प्रभावित करती है।
कभी-कभी यह वायरस मानव सहित अन्य स्तनधारियों को भी संक्रमित कर सकता है।
‘इन्फ्लूएंजा ए’ वायरस को दो प्रकार के प्रोटीन हेमाग्लगुटिनिन (Hemagglutinin- HA) और न्यूरोमिनिडेस (Neuraminidase- NA) के आधार पर उप-प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है।
इन्फ्लुएंजा ए (H5N8) विषाणु:
पेरिस स्थित वर्ल्ड आर्गेनाईजेशन फॉर एनिमल हेल्थ के अनुसार, H5N8 एवियन इन्फ्लूएंजा पक्षियों का एक रोग है।
यह टाइप “ए” इन्फ्लूएंजा वायरस (Type “A” influenza viruses) के कारण फैलता है।
इस वायरस से पालतू पक्षी, जंगली प्रवासी पक्षी, जल-मुर्गाबी, घरेलू मुर्गियों की कई प्रजातियां जैसे मुर्गियां, टर्की, बटेर, गिनी फाउल, बतख आदि प्रभावित हो सकते हैं।
इस वायरस का प्रसरण:
अब तक मनुष्यों में H5N8 विषाणु संक्रमण के मामले नहीं पाए गए है। आम जनता के लिए इसके संक्रमण का जोखिम काफी कम है।
अभी तक, मुर्गी के मांस या अंडे के सेवन से मनुष्यों में वायरस पहुचने संबंधी कोई प्रमाण नहीं मिले हैं।
किंतु नियंत्रण और निवारण कार्यों के दौरान बीमार / मृत पक्षियों और दूषित पदार्थो के प्रबंधन करते समय आवश्यक सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
उचित ढंग से पके हुए पोल्ट्री उत्पादों को खाने के लिए सुरक्षित माना जाता है।
नियंत्रण उपाय:
जानवरों में वायरस संक्रमण का पता चलने पर, सामान्यतः संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए इनको मारना (Culling) शुरू किया जाता है।
जानवरों की हत्या करने के अलावा, मारे गए सभी जानवरों तथा अन्य संबंधित उत्पादों का सुरक्षित निपटान भी महत्वपूर्ण होता है।
अधिकारियों द्वारा संक्रमित परिसरों को सख्ती से परिशोधन कराया जाना और दूषित वाहनों और कर्मियों को संगरोध (Quarantine) किया जाना आवश्यक है।
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कौन सा पुरुस्कार कब से शुरू हुआ
■ 1901➨ नोबेल पुरस्कार
■ 1929 ➨ ऑस्कर अवार्ड
■ 1954 ➨ भारत रत्न
■ 1961➨ ज्ञानपीठ पुरस्कार
■ 1995 ➨ गांधी शांति पुरस्कार
■ 1985 ➨ द्रोणाचार्य पुरस्कार
■ 1969 ➨ मैन बुकर पुरस्कार
■ 1961 ➨अर्जुन पुरस्कार
■ 1917 ➨ पुलित्जर पुरस्कार
■ 1992 ➨ व्यास सम्मान
■ 1952 ➨ कलिंग पुरस्कार
■ 1991 ➨ सरस्वती सम्मान
■ 1969 ➨ दादा साहब फाल्के
■ 1957 ➨ रेमन मैग्सेसे पुरस्कार
■ 1992 ➨ राजीव गांधी खेल रत्न
■ 1955 ➨ साहित्य अकादमी पुरस्कार
■ 1954 ➨ राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार
■ 1958 ➨ शांति स्वरूप भटनागर
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■ 1901➨ नोबेल पुरस्कार
■ 1929 ➨ ऑस्कर अवार्ड
■ 1954 ➨ भारत रत्न
■ 1961➨ ज्ञानपीठ पुरस्कार
■ 1995 ➨ गांधी शांति पुरस्कार
■ 1985 ➨ द्रोणाचार्य पुरस्कार
■ 1969 ➨ मैन बुकर पुरस्कार
■ 1961 ➨अर्जुन पुरस्कार
■ 1917 ➨ पुलित्जर पुरस्कार
■ 1992 ➨ व्यास सम्मान
■ 1952 ➨ कलिंग पुरस्कार
■ 1991 ➨ सरस्वती सम्मान
■ 1969 ➨ दादा साहब फाल्के
■ 1957 ➨ रेमन मैग्सेसे पुरस्कार
■ 1992 ➨ राजीव गांधी खेल रत्न
■ 1955 ➨ साहित्य अकादमी पुरस्कार
■ 1954 ➨ राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार
■ 1958 ➨ शांति स्वरूप भटनागर
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SUMMITS AND VENUE
1. G-20 SUMMIT:
15th Edition (2020) :
Riyadh, South Africa
16th Edition (2021) :
Italy
17th Edition (2022) :
Indonesia
18th Edition (2023) :
India
19th Edition (2024) :
Brazil
2. BRICS SUMMIT:
12th Edition (2020) :
Russia
13th Edition (2021) :
India
3. G-7 SUMMIT :
46th Edition (2020) :
United States
47th Edition (2021) :
United Kingdom
48th Edition (2022) :
Germany
49th Edition (2023) :
Japan
50th Edition (2024) :
Italy
4. ASEAN SUMMIT :
36th Edition (June 2020) :
Vietnam
37th Edition (Nov 2020):
Vietnam
38th Edition(April/May 2021):
Brunei
39th Edition (Oct/Nov 2021):
Brunei
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1. G-20 SUMMIT:
15th Edition (2020) :
Riyadh, South Africa
16th Edition (2021) :
Italy
17th Edition (2022) :
Indonesia
18th Edition (2023) :
India
19th Edition (2024) :
Brazil
2. BRICS SUMMIT:
12th Edition (2020) :
Russia
13th Edition (2021) :
India
3. G-7 SUMMIT :
46th Edition (2020) :
United States
47th Edition (2021) :
United Kingdom
48th Edition (2022) :
Germany
49th Edition (2023) :
Japan
50th Edition (2024) :
Italy
4. ASEAN SUMMIT :
36th Edition (June 2020) :
Vietnam
37th Edition (Nov 2020):
Vietnam
38th Edition(April/May 2021):
Brunei
39th Edition (Oct/Nov 2021):
Brunei
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✅किस भारतीय राज्य ने प्रसिद्ध ‘खजुराहो नृत्य महोत्सव’ की मेजबानी की जा रही है?
उत्तर – मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश के खजुराहो शहर में कई प्राचीन हिंदू और जैन मंदिर हैं। यह यूनेस्को का विश्व धरोहर स्थल भी है, 44 वर्षों के बाद मंदिर परिसर में छह दिवसीय खजुराहो नृत्य महोत्सव शुरू हुआ। पिछले 44 वर्षों से, यह महोत्सव खुले मैदानों में आयोजित किया जा रहा था
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उत्तर – मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश के खजुराहो शहर में कई प्राचीन हिंदू और जैन मंदिर हैं। यह यूनेस्को का विश्व धरोहर स्थल भी है, 44 वर्षों के बाद मंदिर परिसर में छह दिवसीय खजुराहो नृत्य महोत्सव शुरू हुआ। पिछले 44 वर्षों से, यह महोत्सव खुले मैदानों में आयोजित किया जा रहा था
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