🚔वीर सावरकर के बारे में:
विनायक दामोदर सावरकर (Veer Savarkar) का जन्म 28 मई, 1883 को महाराष्ट्र के नासिक जिले में भागुर शहर में हुआ था।
राष्ट्रवाद और सामाजिक सुधार:
इन्होने, ‘मित्र मेला’ नामक एक युवाओं के संगठन का गठन किया था। इस संगठन की स्थापना राष्ट्रीय और क्रांतिकारी विचार उत्पन्न करने के लिए की गयी थी।
वह विदेशी वस्तुओं के विरोधी थे और ‘स्वदेशी’ के विचार का समर्थन करते थे।
उन्होंने नास्तिकता और तार्किकता का समर्थन किया और रूढ़िवादी हिंदू विचारों का खंडन किया। वास्तव में, उन्होंने गाय की पूजा को भी अंधविश्वास कह कर खारिज कर दिया।
विनायक सावरकर , वर्ष 1937 से 1943 के दौरान हिंदू महासभा के अध्यक्ष रहे।
22 अक्टूबर 1939 को कांग्रेस मंत्रालयों द्वारा त्यागपत्र दिए जाने के बाद, इनके नेतृत्व में हिंदू महासभा ने मुस्लिम लीग के साथ मिलकर सिंध, बंगाल और पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत (NWFP) प्रांतों में सरकार बनाने के लिए सहयोग किया।
सावरकर ने, पुणे में, “अभिनव भारत समाज” नामक संगठन की स्थापना की।
इन्होने, लोकमान्य तिलक की स्वराज पार्टी की सदस्यता भी ग्रहण की।
इन्होंने ‘फ्री इंडिया सोसाइटी’ की स्थापना की। इस सोसायटी के द्वारा त्योहारों, स्वतंत्रता आंदोलन संबंधी प्रमुख घटनाओं सहित भारतीय कैलेंडर की महत्वपूर्ण तिथियों को मनाया जाता था और यह भारतीय स्वतंत्रता के संदर्भ में विमर्श को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित थी।
वह भारत को अंग्रेजों से मुक्त करने के लिए हथियारों का इस्तेमाल करने पर यकीन और समर्थन करते थे और इन्होने इंग्लैंड में, हथियारों से लैस भारतीयों का एक नेटवर्क भी तैयार किया।
महत्वपूर्ण कार्य:
पुस्तक- भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास।
मॉर्ले-मिंटो सुधार के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह।
‘हिंदुत्व’ नामक पुस्तक में दो-राष्ट्र सिद्धांत।
@Gk_trick
विनायक दामोदर सावरकर (Veer Savarkar) का जन्म 28 मई, 1883 को महाराष्ट्र के नासिक जिले में भागुर शहर में हुआ था।
राष्ट्रवाद और सामाजिक सुधार:
इन्होने, ‘मित्र मेला’ नामक एक युवाओं के संगठन का गठन किया था। इस संगठन की स्थापना राष्ट्रीय और क्रांतिकारी विचार उत्पन्न करने के लिए की गयी थी।
वह विदेशी वस्तुओं के विरोधी थे और ‘स्वदेशी’ के विचार का समर्थन करते थे।
उन्होंने नास्तिकता और तार्किकता का समर्थन किया और रूढ़िवादी हिंदू विचारों का खंडन किया। वास्तव में, उन्होंने गाय की पूजा को भी अंधविश्वास कह कर खारिज कर दिया।
विनायक सावरकर , वर्ष 1937 से 1943 के दौरान हिंदू महासभा के अध्यक्ष रहे।
22 अक्टूबर 1939 को कांग्रेस मंत्रालयों द्वारा त्यागपत्र दिए जाने के बाद, इनके नेतृत्व में हिंदू महासभा ने मुस्लिम लीग के साथ मिलकर सिंध, बंगाल और पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत (NWFP) प्रांतों में सरकार बनाने के लिए सहयोग किया।
सावरकर ने, पुणे में, “अभिनव भारत समाज” नामक संगठन की स्थापना की।
इन्होने, लोकमान्य तिलक की स्वराज पार्टी की सदस्यता भी ग्रहण की।
इन्होंने ‘फ्री इंडिया सोसाइटी’ की स्थापना की। इस सोसायटी के द्वारा त्योहारों, स्वतंत्रता आंदोलन संबंधी प्रमुख घटनाओं सहित भारतीय कैलेंडर की महत्वपूर्ण तिथियों को मनाया जाता था और यह भारतीय स्वतंत्रता के संदर्भ में विमर्श को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित थी।
वह भारत को अंग्रेजों से मुक्त करने के लिए हथियारों का इस्तेमाल करने पर यकीन और समर्थन करते थे और इन्होने इंग्लैंड में, हथियारों से लैस भारतीयों का एक नेटवर्क भी तैयार किया।
महत्वपूर्ण कार्य:
पुस्तक- भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास।
मॉर्ले-मिंटो सुधार के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह।
‘हिंदुत्व’ नामक पुस्तक में दो-राष्ट्र सिद्धांत।
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बारकोड’ क्या होते हैं?
‘बारकोड’ (Barcode), कंप्यूटर सिस्टम में डेटा दर्ज करने के लिए उपयोग की जाने वाली ‘समानांतर पट्टियों अथवा भिन्न-भिन्न चौड़ाई वाली रेखाओं की एक मुद्रित अनुक्रम (सीरीज) होते हैं।
‘बारकोड’ की पट्टियाँ सफेद पृष्ठभूमि पर काले रंग की होती हैं और अनुप्रयोग के आधार पर इनकी चौड़ाई और संख्या में भिन्नता होती है।
ये पट्टियाँ / शलाकाएँ (BARS), बाइनरी अंकों- शून्य और एक – का प्रतिनिधित्व करते हैं। बाइनरी संख्याएं एक डिजिटल कंप्यूटर द्वारा संसाधित ‘शून्य’ से ‘नौ अंकों’ का प्रतिनिधित्व करती हैं।
इन बारकोड को विशेष ‘ऑप्टिकल स्कैनर’ से स्कैन किया जाता है जिसे ‘बारकोड रीडर’ कहा जाता है।
इनमें से अधिकांश कोड्स में केवल दो अलग-अलग चौड़ाई के ‘बार’ का उपयोग किया जाता है, हालांकि कुछ कोड्स में ‘भिन्न प्रकार की चार चौड़ाईयों’ का उपयोग होता है।
‘क्यूआर कोड’ (QR code), बारकोड के सबसे प्रमुख उदाहरणों में से एक है।
‘बारकोड’ (Barcode), कंप्यूटर सिस्टम में डेटा दर्ज करने के लिए उपयोग की जाने वाली ‘समानांतर पट्टियों अथवा भिन्न-भिन्न चौड़ाई वाली रेखाओं की एक मुद्रित अनुक्रम (सीरीज) होते हैं।
‘बारकोड’ की पट्टियाँ सफेद पृष्ठभूमि पर काले रंग की होती हैं और अनुप्रयोग के आधार पर इनकी चौड़ाई और संख्या में भिन्नता होती है।
ये पट्टियाँ / शलाकाएँ (BARS), बाइनरी अंकों- शून्य और एक – का प्रतिनिधित्व करते हैं। बाइनरी संख्याएं एक डिजिटल कंप्यूटर द्वारा संसाधित ‘शून्य’ से ‘नौ अंकों’ का प्रतिनिधित्व करती हैं।
इन बारकोड को विशेष ‘ऑप्टिकल स्कैनर’ से स्कैन किया जाता है जिसे ‘बारकोड रीडर’ कहा जाता है।
इनमें से अधिकांश कोड्स में केवल दो अलग-अलग चौड़ाई के ‘बार’ का उपयोग किया जाता है, हालांकि कुछ कोड्स में ‘भिन्न प्रकार की चार चौड़ाईयों’ का उपयोग होता है।
‘क्यूआर कोड’ (QR code), बारकोड के सबसे प्रमुख उदाहरणों में से एक है।
तुर्किए
संयुक्त राष्ट्र ‘तुर्की’ (Turkey) द्वारा अपना नाम परिवर्तन किए जाने के औपचारिक अनुरोध पर सहमत हो गया है।
तुर्की को अब ‘तुर्किए’ (Türkiye) के नाम से जाना जाएगा।
स्थानीय स्तर पर, नागरिकों द्वारा अपने देश को ‘तुर्किये’ या ‘तुर्किए’ ही कहा जाता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके अंग्रेजी संस्करण ‘तुर्की’ को अपनाया गया था।
‘तुर्की‘ शब्द से जुड़े विवाद:
तुर्की सरकार ‘तुर्की’ शब्द के लिए ‘गूगल खोज’ करने पर आने वाले परिणामों से खुश नहीं थी।
इनमें से कुछ परिणामों में, उत्तरी अमेरिका में ‘थैंक्सगिविंग’ और ‘क्रिसमस भोजन’ के लिए परोसा जाने वाला ‘टर्की’ (Turkey) नामक बड़ा पक्षी भी मिलता है।
कैम्ब्रिज डिक्शनरी की परिभाषा के अनुसार, “टर्की” शब्द का अर्थ “कुछ ऐसा जो बुरी तरह से विफल हो जाता है” या “बेवकूफ या मूर्ख व्यक्ति” होता है।
@Gk_trick
#map
संयुक्त राष्ट्र ‘तुर्की’ (Turkey) द्वारा अपना नाम परिवर्तन किए जाने के औपचारिक अनुरोध पर सहमत हो गया है।
तुर्की को अब ‘तुर्किए’ (Türkiye) के नाम से जाना जाएगा।
स्थानीय स्तर पर, नागरिकों द्वारा अपने देश को ‘तुर्किये’ या ‘तुर्किए’ ही कहा जाता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके अंग्रेजी संस्करण ‘तुर्की’ को अपनाया गया था।
‘तुर्की‘ शब्द से जुड़े विवाद:
तुर्की सरकार ‘तुर्की’ शब्द के लिए ‘गूगल खोज’ करने पर आने वाले परिणामों से खुश नहीं थी।
इनमें से कुछ परिणामों में, उत्तरी अमेरिका में ‘थैंक्सगिविंग’ और ‘क्रिसमस भोजन’ के लिए परोसा जाने वाला ‘टर्की’ (Turkey) नामक बड़ा पक्षी भी मिलता है।
कैम्ब्रिज डिक्शनरी की परिभाषा के अनुसार, “टर्की” शब्द का अर्थ “कुछ ऐसा जो बुरी तरह से विफल हो जाता है” या “बेवकूफ या मूर्ख व्यक्ति” होता है।
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विश्व साइकिल दिवस
हर साल 3 जून को ‘विश्व साइकिल दिवस’ (World Bicycle Day) मनाया जाता है।
यह दिवस, साइकिल का उपयोग करने के लाभों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, यह दिन साइकिल की विशिष्टता, टिकाऊपन और बहुमुखी क्षमताओं पर प्रकाश डालता है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 72वें नियमित सत्र के दौरान ‘संयुक्त राष्ट्र’ द्वारा एक प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद 2018 से यह दिवस हर साल मनाया जा रहा है
@Gk_trick
#Day
हर साल 3 जून को ‘विश्व साइकिल दिवस’ (World Bicycle Day) मनाया जाता है।
यह दिवस, साइकिल का उपयोग करने के लाभों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, यह दिन साइकिल की विशिष्टता, टिकाऊपन और बहुमुखी क्षमताओं पर प्रकाश डालता है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 72वें नियमित सत्र के दौरान ‘संयुक्त राष्ट्र’ द्वारा एक प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद 2018 से यह दिवस हर साल मनाया जा रहा है
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#Day
भारत की पहला तरल-दर्पण दूरबीन
संदर्भ:
भारत का पहला तरल-दर्पण दूरबीन (लिक्विड-मिरर टेलीस्कोप)- ‘इंटरनेशनल लिक्विड मिरर टेलीस्कोप’ (International Liquid Mirror Telescope – ILMT) अब अपनी शुरुआत के चरण में प्रवेश कर चुका है और यह इस साल अक्टूबर में किसी भी समय ‘वैज्ञानिक अवलोकन’ करना शुरू कर देगा।
इंटरनेशनल लिक्विड मिरर टेलीस्कोप (ILMT) के बारे में:
‘आईएलएमटी’ (ILMT), भारत सरकार के ‘विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग’ के तहत एक स्वायत्त संस्थान है। यह उत्तराखंड के नैनीताल जिले में ‘आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेज’ (AIRES) के ‘देवस्थल वेधशाला परिसर’ में 2,450 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
यह पूरे विश्व में क्रियाशील एकमात्र ‘तरल-दर्पण दूरबीन’ (Liquid-Mirror Telescope) है।
इस टेलीस्कोप को विश्व स्तर पर, विशेष रूप से खगोलीय उद्देश्यों के लिए डिज़ाइन की गयी ‘पहली तरल-दूरबीन’ होने का अनूठा गौरव भी प्राप्त है।
यह ‘अंतरराष्ट्रीय दूरबीन सुविधा’ कनाडा, बेल्जियम और भारत के खगोलविदों के बीच सहयोगात्मक कार्य का परिणाम है।
#Imp 👇
संदर्भ:
भारत का पहला तरल-दर्पण दूरबीन (लिक्विड-मिरर टेलीस्कोप)- ‘इंटरनेशनल लिक्विड मिरर टेलीस्कोप’ (International Liquid Mirror Telescope – ILMT) अब अपनी शुरुआत के चरण में प्रवेश कर चुका है और यह इस साल अक्टूबर में किसी भी समय ‘वैज्ञानिक अवलोकन’ करना शुरू कर देगा।
इंटरनेशनल लिक्विड मिरर टेलीस्कोप (ILMT) के बारे में:
‘आईएलएमटी’ (ILMT), भारत सरकार के ‘विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग’ के तहत एक स्वायत्त संस्थान है। यह उत्तराखंड के नैनीताल जिले में ‘आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेज’ (AIRES) के ‘देवस्थल वेधशाला परिसर’ में 2,450 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
यह पूरे विश्व में क्रियाशील एकमात्र ‘तरल-दर्पण दूरबीन’ (Liquid-Mirror Telescope) है।
इस टेलीस्कोप को विश्व स्तर पर, विशेष रूप से खगोलीय उद्देश्यों के लिए डिज़ाइन की गयी ‘पहली तरल-दूरबीन’ होने का अनूठा गौरव भी प्राप्त है।
यह ‘अंतरराष्ट्रीय दूरबीन सुविधा’ कनाडा, बेल्जियम और भारत के खगोलविदों के बीच सहयोगात्मक कार्य का परिणाम है।
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इस टेलीस्कोप की विशेषताएं:
परंपरागत दूरबीनों को विशिष्ट तारकीय स्रोत पिंडो को ट्रैक करने के लिए परिचालित किया जा सकता है अर्थात घुमाया जा सकता है, जबकि ‘इंटरनेशनल लिक्विड मिरर टेलीस्कोप’ (ILMT) एक ही स्थान पर स्थिर (Stationary) रहेगा।
यह टेलीस्कोप, मूल रूप से ऊर्ध्व दिशा अपने ठीक ऊपर अंतरिक्ष में अवलोकन और इमेजिंग करेगा।
यह नए पिंडों की खोज करने की उच्च क्षमता-युक्त एक ‘सर्वेक्षण दूरबीन’ है।
परंपरागत दूरबीनों को विशिष्ट तारकीय स्रोत पिंडो को ट्रैक करने के लिए परिचालित किया जा सकता है अर्थात घुमाया जा सकता है, जबकि ‘इंटरनेशनल लिक्विड मिरर टेलीस्कोप’ (ILMT) एक ही स्थान पर स्थिर (Stationary) रहेगा।
यह टेलीस्कोप, मूल रूप से ऊर्ध्व दिशा अपने ठीक ऊपर अंतरिक्ष में अवलोकन और इमेजिंग करेगा।
यह नए पिंडों की खोज करने की उच्च क्षमता-युक्त एक ‘सर्वेक्षण दूरबीन’ है।