मेरी तकदीर में सुबह नहीं..शाम लिखा है,
हर लफ्ज़ ग़ज़ल का तुम्हारे नाम लिखा है,
लोग बस दाद देंगे,मगर तुम गौर से पढ़ना,
लफ़्ज़ों के लिबास में तुम्हे पैगाम लिखा है।।
~❤️
हर लफ्ज़ ग़ज़ल का तुम्हारे नाम लिखा है,
लोग बस दाद देंगे,मगर तुम गौर से पढ़ना,
लफ़्ज़ों के लिबास में तुम्हे पैगाम लिखा है।।
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🔥5👌1🕊1
फिर आंधियों से टकराने की तमन्ना है..
रवैया फिर से हो गया है बगावती मेरा..!
~⭐ 🩷
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~
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❤6😍2🔥1🥰1
CURIOUS INKK & INSIGHTS 💭
Gud morning all have an amazing and productive day....❤️ Keep hustling keep growing keep muskurana 💖 ~Mubahila Quadri 💕
Your personal discipline challenge 🚀 { December 2025}
1️⃣ The Rule of Zero
🎯 Goal: Reset your baseline
• Zero distractions – no reels, no scrolling, no browsing
• Zero “fake work” – only real outcome tasks
• Zero new commitments – you’re in detox mode
• Fix your *sleep* first
🧽 Think of it like cleaning your room before building a rocket.
2️⃣ The Identity Switch
🎯 Goal: Become a person who executes
• Choose your 12-month identity: Builder? Athlete? Creator?
• Write down the traits of that identity
• Act like that person now – even if it feels unnatural
3️⃣ The 2-Hour Morning Sprint
🎯 Goal: Build momentum every morning
1. Wake up
2. Drink water
3. Get sunlight
4. Sit & work (no phone!)
💥 2 hours of *impact work that moves your life forward.
→ Do this before checking your phone.
4️⃣ The Output Promise
🎯 Goal: Become someone who finishes
• Publish something weekly
• Share in public – Threads, YouTube etc.
• Improve 1% every time
• Don’t aim for perfect – aim for consistent
5️⃣ The Fuel System
🎯 Goal: Stay sharp & energised
• 20–30 min daily exercise
• 2–3L water
• Clean, energy-friendly meals
• No late-night dopamine
• Replace scrolling with audiobooks/podcasts
🧑💻Treat yourself like a startup.
After 30 Days:
✅ Clearer mind
✅ Faster learning
✅ Consistent execution
✅ More confidence
✅ No more self-negotiation
🎯 These days is enough to create a version of you who doesn’t need motivation anymore.
~Mubahila Quadri 💕
❤2🔥1
Forwarded from CURIOUS INKK & INSIGHTS 💭 (мυвαнιℓα Qυαdri 💕)
Sab apne se lgte hain...
Sirf baton se...🍁🍂
Sirf baton se...🍁🍂
❤4
❝ 2𝟬2❺_! ❞
चंद यादें
सुर्ख लम्हे...
फिसलती जिंदगी
और जाता हुआ नवंबर...𓍯𓂃𓏧♡
चंद यादें
सुर्ख लम्हे...
फिसलती जिंदगी
और जाता हुआ नवंबर...𓍯𓂃𓏧♡
❤4😍2🔥1
Forwarded from CURIOUS INKK & INSIGHTS 💭 (мυвαнιℓα Qυαdri 💕)
Reminder 🎗️
📍Today's to-do
Make ur gratitude list🥀✨
❤2
लौट रहे हैं अपने उसी अंदाज में...
अब हम बताएँगे ज़िद्दी लोग कैसे होते है...!!
अब हम बताएँगे ज़िद्दी लोग कैसे होते है...!!
❤3
वैदेही से सवाल कर बैठे, अपने सब करतब व्यर्थ गये,
रावण से जीत ले आये, एक धोबी से हार गये।
📿💔
रावण से जीत ले आये, एक धोबी से हार गये।
📿💔
🥰2❤1
कुछ स्त्रियाँ गंगा होती हैं...
कुछ स्त्रियाँ केवल शरीर नहीं होतीं, वे नदी होती हैं, गंगा होती हैं। वे जीवन के प्रवाह की तरह सतत बहती हैं, अपने भीतर प्रेम, त्याग और सहनशीलता की अथाह गहराई समेटे। वे अपने प्रियजनों के सुख-दुःख का जलधार बनती हैं—कभी शांत, कभी वेगवान, कभी कोमल तो कभी प्रचंड। वे ठहरती नहीं, वे सागर से मिलने की चाह भी नहीं रखतीं। वे बहती हैं, केवल बहती हैं, और इसी में उनका सम्पूर्ण अस्तित्व सिमट जाता है।
जब किसी पुरुष का जीवन कठिनाइयों से घिर जाता है, जब उसे अपने ही संघर्षों की आग में जलना पड़ता है, तब वही स्त्री उसके लिए ठंडी छाँव बन जाती है। उसकी गोद में सिर रखते ही सारे बोझ उतरने लगते हैं, जैसे कोई तपता हुआ सूरज बादलों की गोद में समा जाए। उसकी हथेलियाँ आश्वासन का स्पर्श बन जाती हैं, उसके शब्द अमृत-धारा। वह कुछ कहती नहीं, पर उसकी मौन उपस्थिति ही घावों पर मलहम बन जाती है।
कभी वह माँ होती है, जो अपनी संतान के हर दर्द को खुद पर ले लेती है। कभी वह प्रेमिका होती है, जो अपने प्रिय की आँखों में उदासी नहीं देख सकती और अपनी हँसी से उसका मन बहलाने की कोशिश करती है। कभी वह पत्नी होती है, जो अपने साथी के सपनों को खुद से अधिक महत्व देती है और उसके हर संघर्ष में चुपचाप खड़ी रहती है। कभी वह बेटी होती है, जो पिता की चिंताओं को मुस्कान में छुपा लेती है।
स्त्रियाँ प्रेम में जलती हैं, पर राख नहीं होतीं। वे आँसू पीती हैं, पर मुस्कुराहट बिखेरती हैं। वे खुद को मिटाकर अपनों को संवारती हैं। वे नदी की तरह त्यागमयी हैं—जो सबको जल देती है, पर खुद कभी प्यास की शिकायत नहीं करती। वे तीर्थ हैं—जहाँ आकर हर कोई पापमुक्त हो जाता है, मगर स्वयं कभी मुक्ति नहीं पातीं।
कुछ स्त्रियाँ गंगा होती हैं…
उनमें डूबकर उनके प्रिय पुरुष अपने विकारों से मुक्त हो जाते हैं, अपने बोझ हल्के कर लेते हैं, और निर्मल होकर लौटते हैं।
लेकिन वे स्त्रियाँ? वे बहती रहती हैं… सतत, निःस्वार्थ, निस्सीम… बिना किसी शिकायत, बिना किसी विराम ....🌸
कुछ स्त्रियाँ केवल शरीर नहीं होतीं, वे नदी होती हैं, गंगा होती हैं। वे जीवन के प्रवाह की तरह सतत बहती हैं, अपने भीतर प्रेम, त्याग और सहनशीलता की अथाह गहराई समेटे। वे अपने प्रियजनों के सुख-दुःख का जलधार बनती हैं—कभी शांत, कभी वेगवान, कभी कोमल तो कभी प्रचंड। वे ठहरती नहीं, वे सागर से मिलने की चाह भी नहीं रखतीं। वे बहती हैं, केवल बहती हैं, और इसी में उनका सम्पूर्ण अस्तित्व सिमट जाता है।
जब किसी पुरुष का जीवन कठिनाइयों से घिर जाता है, जब उसे अपने ही संघर्षों की आग में जलना पड़ता है, तब वही स्त्री उसके लिए ठंडी छाँव बन जाती है। उसकी गोद में सिर रखते ही सारे बोझ उतरने लगते हैं, जैसे कोई तपता हुआ सूरज बादलों की गोद में समा जाए। उसकी हथेलियाँ आश्वासन का स्पर्श बन जाती हैं, उसके शब्द अमृत-धारा। वह कुछ कहती नहीं, पर उसकी मौन उपस्थिति ही घावों पर मलहम बन जाती है।
कभी वह माँ होती है, जो अपनी संतान के हर दर्द को खुद पर ले लेती है। कभी वह प्रेमिका होती है, जो अपने प्रिय की आँखों में उदासी नहीं देख सकती और अपनी हँसी से उसका मन बहलाने की कोशिश करती है। कभी वह पत्नी होती है, जो अपने साथी के सपनों को खुद से अधिक महत्व देती है और उसके हर संघर्ष में चुपचाप खड़ी रहती है। कभी वह बेटी होती है, जो पिता की चिंताओं को मुस्कान में छुपा लेती है।
स्त्रियाँ प्रेम में जलती हैं, पर राख नहीं होतीं। वे आँसू पीती हैं, पर मुस्कुराहट बिखेरती हैं। वे खुद को मिटाकर अपनों को संवारती हैं। वे नदी की तरह त्यागमयी हैं—जो सबको जल देती है, पर खुद कभी प्यास की शिकायत नहीं करती। वे तीर्थ हैं—जहाँ आकर हर कोई पापमुक्त हो जाता है, मगर स्वयं कभी मुक्ति नहीं पातीं।
कुछ स्त्रियाँ गंगा होती हैं…
उनमें डूबकर उनके प्रिय पुरुष अपने विकारों से मुक्त हो जाते हैं, अपने बोझ हल्के कर लेते हैं, और निर्मल होकर लौटते हैं।
लेकिन वे स्त्रियाँ? वे बहती रहती हैं… सतत, निःस्वार्थ, निस्सीम… बिना किसी शिकायत, बिना किसी विराम ....🌸
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प्रिय लड़कियों,
तुम अपने विवाहित प्रेमी के जीवन में सिर्फ उस क्षण तक “प्रेमिका” हो..जब तक ये राज़ खुल नहीं जाता।
राज़ खुलते ही तुम प्रेमिका से यकायक “गलती” में तब्दील हो जाओगी।
…
अपनी उसी पत्नी के सामने, जिसके “दुर्गुण” वो कई बार गिना चुका है..बार-बार कहेगा कि उससे “गलती” हो गई। और, अब वो ये गलती कभी नहीं दोहराएगा।
इस तरह क्षण भर में तुम्हारा वजूद प्रिया से त्रुटि में बदल जाएगा।
…
और ज़्यादातर मामलों में..पत्नी तमाम झगड़ों, नाराज़गी और कुछ अबोले के बाद अपने पति को माफ़ भी कर देगी। क्योंकि ये सबसे सुविधाजनक रास्ता है। या, उनके लिए अपने पति के बिना जीना मुमकिन ही नहीं। या, उनके पास कोई आर्थिक सामाजिक पारिवारिक संबल नहीं। या, बच्चों को पालने की मजबूरी है।
ऐसे तमाम कारण हो सकते हैं और आखिरकार उन्हें भी अपने चुनाव का अधिकार है।
और फिर वो पुरुष अचानक बेहद समर्पित और पालतू पति में बदल जाएगा। क्योंकि अब उसे अपनी वफ़ादारी सिद्ध करनी है।
इसलिए लड़कियों…पढ़ो-लिखो, नौकरी करो, घूमो-फिरो, मन का काम करो और शादी की तरह प्रेम को भी चॉइस ही रखो तो बेहतर।
सबसे ज़रूरी है..अपनी मेंटल हेल्थ दुरुस्त रखना।
और, शादीशुदा पुरुषों से गज भर की दूरी भली।
….
( पोस्ट जेंडर न्यूट्रल बिल्कुल नहीं है और जो स्त्रियों के बारे में कुछ ऐसे ही विचार व्यक्त करना चाहते हैं, बेशक करें। अपवाद नियम नहीं होते हैं।)
तुम अपने विवाहित प्रेमी के जीवन में सिर्फ उस क्षण तक “प्रेमिका” हो..जब तक ये राज़ खुल नहीं जाता।
राज़ खुलते ही तुम प्रेमिका से यकायक “गलती” में तब्दील हो जाओगी।
…
अपनी उसी पत्नी के सामने, जिसके “दुर्गुण” वो कई बार गिना चुका है..बार-बार कहेगा कि उससे “गलती” हो गई। और, अब वो ये गलती कभी नहीं दोहराएगा।
इस तरह क्षण भर में तुम्हारा वजूद प्रिया से त्रुटि में बदल जाएगा।
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और ज़्यादातर मामलों में..पत्नी तमाम झगड़ों, नाराज़गी और कुछ अबोले के बाद अपने पति को माफ़ भी कर देगी। क्योंकि ये सबसे सुविधाजनक रास्ता है। या, उनके लिए अपने पति के बिना जीना मुमकिन ही नहीं। या, उनके पास कोई आर्थिक सामाजिक पारिवारिक संबल नहीं। या, बच्चों को पालने की मजबूरी है।
ऐसे तमाम कारण हो सकते हैं और आखिरकार उन्हें भी अपने चुनाव का अधिकार है।
और फिर वो पुरुष अचानक बेहद समर्पित और पालतू पति में बदल जाएगा। क्योंकि अब उसे अपनी वफ़ादारी सिद्ध करनी है।
इसलिए लड़कियों…पढ़ो-लिखो, नौकरी करो, घूमो-फिरो, मन का काम करो और शादी की तरह प्रेम को भी चॉइस ही रखो तो बेहतर।
सबसे ज़रूरी है..अपनी मेंटल हेल्थ दुरुस्त रखना।
और, शादीशुदा पुरुषों से गज भर की दूरी भली।
….
( पोस्ट जेंडर न्यूट्रल बिल्कुल नहीं है और जो स्त्रियों के बारे में कुछ ऐसे ही विचार व्यक्त करना चाहते हैं, बेशक करें। अपवाद नियम नहीं होते हैं।)
❤6🔥3❤🔥2👌1
Don't look for pretty face...💯
It will turn old one day,
don't look for soft skin,
it will wrinkle one day but look for a loyal heart that will miss you every day and love you forever...🩷🌸
It will turn old one day,
don't look for soft skin,
it will wrinkle one day but look for a loyal heart that will miss you every day and love you forever...🩷🌸
🥰6👌3
उफ्फ़ ये सर्द दिसंबर
और तेरी गरम बाहें...♡❀
इन फ़ासलों से कहों की
करीबियों में तब्दील हो....👩🏼❤️👨🏻✨
और तेरी गरम बाहें...♡❀
इन फ़ासलों से कहों की
करीबियों में तब्दील हो....👩🏼❤️👨🏻✨
❤6😍1
तुम्हारी तस्वीर खींची थी मैंने___
अब तुम्हारी तस्वीर खींचती हैं मुझे ___!!! 🖤
अब तुम्हारी तस्वीर खींचती हैं मुझे ___!!! 🖤
❤4
𓍯𓂃𓏧♡
स्त्री ख़ुद डूबने को तैयार रहती हैं ,
अगर समंदर उसकी पसंद का हो तो..♡♡♡
𓍯𓂃𓏧♡
स्त्री ख़ुद डूबने को तैयार रहती हैं ,
अगर समंदर उसकी पसंद का हो तो..♡♡♡
𓍯𓂃𓏧♡
❤7😍2
मुखतसर सी ज़िंदगी के भी अज़ीब फंसाने हैं,
यहाँ तीर भी चलाने हैं और परिन्दें भी बचाने हैं!
~🏹 🦜
यहाँ तीर भी चलाने हैं और परिन्दें भी बचाने हैं!
~
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👌4❤2😍2
🌼♡🌼 ────୨ৎ────ᥫ᭡ 🌼♡🌼
तुम्हें मोहब्बत है मुझसे मैं जानती हूँ मगर⋆⋆⋆⋆
इश्क़ ये मुझको भी हो ये जरूरी तो नहीं⋆⋆⋆⋆
तुम अपनी वसहत मे उठा लो शहर सर पे लेकिन⋆⋆⋆⋆
मैं भी दर्द मैं कहराऊं ये जरूरी तो नहीं⋆⋆⋆⋆
लाजमी हैं की तेरा इश्क़ डराए मुझको पर⋆⋆⋆⋆
मैं डर ही जाऊं ये ज़रूरी तो नहीं....
तुम मंदिर में, शिवालय में पटक लो माथा
मुक्ति मिल ही जाए ये ज़रूरी तो नहीं....!!
🌼♡🌼 ────୨ৎ────ᥫ᭡ 🌼♡🌼
तुम्हें मोहब्बत है मुझसे मैं जानती हूँ मगर⋆⋆⋆⋆
इश्क़ ये मुझको भी हो ये जरूरी तो नहीं⋆⋆⋆⋆
तुम अपनी वसहत मे उठा लो शहर सर पे लेकिन⋆⋆⋆⋆
मैं भी दर्द मैं कहराऊं ये जरूरी तो नहीं⋆⋆⋆⋆
लाजमी हैं की तेरा इश्क़ डराए मुझको पर⋆⋆⋆⋆
मैं डर ही जाऊं ये ज़रूरी तो नहीं....
तुम मंदिर में, शिवालय में पटक लो माथा
मुक्ति मिल ही जाए ये ज़रूरी तो नहीं....!!
🌼♡🌼 ────୨ৎ────ᥫ᭡ 🌼♡🌼
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