Forwarded from MOHABBAT 🤍 (Dr.)
मुद्दत के बाद आज उसे देख का 'मुनीर'
दिल तो धड़का मगर फिर संभल गया !!
वो हमे भूल गया हो तो अजब क्या है 'फ़राज़'
हमने भी तो मेल मुलाक़ात की कोशिश नहीं की!!
🤍
दिल तो धड़का मगर फिर संभल गया !!
वो हमे भूल गया हो तो अजब क्या है 'फ़राज़'
हमने भी तो मेल मुलाक़ात की कोशिश नहीं की!!
🤍
🥰3
Ahhan,
Mubarkan Mubahila🥀✨
fani is jhan se...🌎
Muslsl zindagi ka... 🖇️
Ek sal or km huaa...!! 💕
~Alhmdullillah...🤲🏻❣️
© ~ мυвαнιℓα💕✍🏻
#мυвαнιℓα_Qυαdri
Mubarkan Mubahila🥀✨
fani is jhan se...🌎
Muslsl zindagi ka... 🖇️
Ek sal or km huaa...!! 💕
~Alhmdullillah...🤲🏻❣️
© ~ мυвαнιℓα💕✍🏻
#мυвαнιℓα_Qυαdri
❤1
तुम सबूत ना माँगा करो मेरी मोहब्बत का , ,
बस इसी दौलत का मेरे पास कोई कागजात नहीं है ..🌸
बस इसी दौलत का मेरे पास कोई कागजात नहीं है ..🌸
❤3
🥀✨🍂
When I suddenly open my camera & look at myself ....& See nothing but an average, unloved, fool, ugly loser person
एक दिन ऐसा होगा !
होगा सुबह- सूरज उठेगा
मगर मेरा बिस्तर वैसा ही रह जाएगा
सब जागेंगे - काम को जाएंगे
मगर मेरा जिस्म पड़ा रह जाएगा
एक दिन ऐसा होगा !
जिन फूलों को साजा कर उगाया करती थी
उन्हें मेरे लिए तोड़ मुझमें सजाया जाएगा
जिन्हें शिकवा थी मुझसे
उनके द्वारा उस खुदा से शिक़ायत लगाया जाएगा
एक दिन ऐसा होगा
जब मेरे कुछ कहने को ये तरसेंगे
और मेरा दिल शांत होगा
जो बसता था इसमें, वो मेरे पास होगा
अपने आंखों को आंसुओं से ना भिंगोना
जब सादे लिवाज में मुझे नवाजा जाएगा
जब चार लोग द्वारा बदल बदल कर
मुझे कंधा दिया जाएगा
मेरी वो अधूरी सफर मेरे अपनो के द्वारा पूरा कराया जाएगा
मुझे मेरे घर सुकून से जीने दिया जाएगा
जब उस बरसात तुम्हारा तन भीगेगा
समझ जाना में पास ना हो कर भी पास हूं तुम्हारे
जब लोगों द्वारा मेरे लिए एक नया बिस्तर लगाया जाएगा
जब एक दिन ऐसा होगा ।।
🫀🫂
❤6
Forwarded from MOHABBAT 🤍 ([ उम्र ])
तुझको भी बिछड़ने का बहाना चाहिए
मुझको भी अब शायद चले जाना चाहिए
हो गया है दो दिलों में फ़ासला ऐ दोस्त
हम दोनों को अब जुदा हो जाना चाहिए
जो तेरा है रख ले तू, जो है मेरा मुझको दे
एक दूसरे का सब हमें लौटाना चाहिए
ये तय है कि अब कभी ना मिलेंगे हम
एक आख़िरी बार गले लग जाना चाहिए
और ना झेलेगा अब आँधियाँ तूफ़ान बस
ये रेत का मकान अब ढह जाना चाहिए!!
🤍
मुझको भी अब शायद चले जाना चाहिए
हो गया है दो दिलों में फ़ासला ऐ दोस्त
हम दोनों को अब जुदा हो जाना चाहिए
जो तेरा है रख ले तू, जो है मेरा मुझको दे
एक दूसरे का सब हमें लौटाना चाहिए
ये तय है कि अब कभी ना मिलेंगे हम
एक आख़िरी बार गले लग जाना चाहिए
और ना झेलेगा अब आँधियाँ तूफ़ान बस
ये रेत का मकान अब ढह जाना चाहिए!!
🤍
❤7
लाख समझाया उसको कि दुनिया शक करती है
मगर उसकी आदत नही गयी मुस्कुराकर गुजरने की ♥️
मगर उसकी आदत नही गयी मुस्कुराकर गुजरने की ♥️
😍7
Forwarded from MOHABBAT 🤍 ([ उम्र ])
मुझको मिटा रहे हो, मिटाओ ख़ुशी के साथ
फिर इसके बाद ऐसा, न करना किसी के साथ
अपनी सलीब आप ही, ढोनी पड़ी मुझे
इतना मज़ाक ठीक नहीं, आदमी के साथ
देखा है फूल पर कभी, शबनम की बूंद को?
रिश्ता है आदमी का यही, ज़िंदगी के साथ
अपनों की बेवफ़ाई का, शिकवा भी यूँ किया
पत्थरों लिपट के रोए, किसी अजनबी के साथ
होंठों पे उँगलियाँ हैं, नज़र उनकी सिमट है
मैं बात कर रहा हूँ, मगर ख़ामोशी के साथ
उलझे हुए ख़याल से, लेना ही क्या मुझे
हर शेर हो रहा है, बड़ी सादगी के साथ!!
🤍
फिर इसके बाद ऐसा, न करना किसी के साथ
अपनी सलीब आप ही, ढोनी पड़ी मुझे
इतना मज़ाक ठीक नहीं, आदमी के साथ
देखा है फूल पर कभी, शबनम की बूंद को?
रिश्ता है आदमी का यही, ज़िंदगी के साथ
अपनों की बेवफ़ाई का, शिकवा भी यूँ किया
पत्थरों लिपट के रोए, किसी अजनबी के साथ
होंठों पे उँगलियाँ हैं, नज़र उनकी सिमट है
मैं बात कर रहा हूँ, मगर ख़ामोशी के साथ
उलझे हुए ख़याल से, लेना ही क्या मुझे
हर शेर हो रहा है, बड़ी सादगी के साथ!!
🤍
😍2
🥀✨🍂
"अनकही सिसकियाँ" (Unheard Sobs)
हम वो हैं जो चूल्हे के धुएँ में अपनी सिसकियाँ छुपा लेती हैं,
जो फटी चप्पलों के साथ अपनी हसरतें सिल लेती हैं।
किसी के घर की इज़्ज़त, किसी के आँगन की बस ज़िम्मेदारी हैं,
हमें कहाँ पता कि ये 'आज़ादी' और 'इश्क' कैसी बीमारी हैं?
आँखों में काजल नहीं, बस बीती रातों की थकान रहती है,
खामोश लबों पर अनकही शिकायतों की श्मशान रहती है।
हैरान हूँ अपनी तक़दीर पर, कि हम शिकायत भी किससे करें?
हम वो कश्ती हैं जिसे किनारों ने भी ठुकरा दिया, अब हम किस दरिया में बहें?
तपती दोपहर में नंगे पाँव घर की दहलीज लांघते रहे,
अपनी ही खुशियों की भीख, हम गैरों से मांगते रहे।
ना कोई कंधा मिला रोने को, ना कोई हाथ मिला थामने को,
हम वो लाश हैं जिसे खुद ही कंधा देना पड़ा श्मशान जाने को।
#shivi..✨✍️
🥰3
🥀✨🍂
महाकाली का अंश: मणिकर्णिका की ललकार
पुरानी बेड़ियाँ तोड़कर, वो अब तूफ़ान बन निकली है,
वो कोमल फूल नहीं, जलती हुई मशाल बन निकली है।
जो कहते हैं कि मणिकर्णिका घाट पर उसे डर लगेगा,
वो भूल गए, उस श्मशान की राख से ही उसका श्रृंगार सजेगा।
ना रुकना उसे आता है, ना झुकना उसने सीखा है,
उसकी आँखों के तेज़ के आगे, सूरज भी अब फीका है।
वो जा सकती है उस दहलीज पर, जहाँ मौत का पहरा है,
उसका साहस मणिकर्णिका की गंगा से भी गहरा है।
वह लाशों के उस ढेर से भी बेखौफ होकर बात करेगी,
वो काली का स्वरूप है, अंधेरों में भी उजाला साथ रखेगी।
किसी को भी परास्त कर दे, ऐसी उसकी हस्ती है,
वो हार नहीं मानती, उसमें महादेव की बसती मस्ती है।
मिटा दो वो लकीरें, जो कहती हैं कि नारी कमज़ोर है,
आज गूँज रहा जो चारों तरफ, ये उसकी जीत का शोर है।
मणिकर्णिका घाट गवाह है, वो हर बाधा को पार करेगी,
वो आज की बेटी है, हर असंभव को भी साकार करेगी।
#shivi..✨✍️
❤2🌚1
Forwarded from #𝔪_𝔯𝔴𝔯𝔦𝔱𝔢𝔯 (Pʀᴀsʜᴀɴᴛ)
सोचते है तुमको तुमसे चुरा ले,
तुम दो इजाजत तो तुमको अपना बना ले।
-लफ़्ज-ए-प्रशान्त✍🏻
#m_rwriter
PC - Pinterest
तुम दो इजाजत तो तुमको अपना बना ले।
-लफ़्ज-ए-प्रशान्त✍🏻
#m_rwriter
PC - Pinterest
❤5
Forwarded from 𝖴𝗇𝖿𝗈𝗅𝖽𝗂𝗇𝗀 𝗐𝗈𝗋𝖽𝗌 🖤
it is a strange feeling to look back at your old self and wish you could go back with what you know now. you think about the times you stayed quiet when you should have spoken, or the times you let people misunderstand you because you didn’t have the words to explain your heart. it’s easy to be angry at that person. you see their mistakes so clearly because you have already grown past them. but you forget that back then, you were doing the best you could with what you had. you didn’t have the strength or the wisdom you have today.. you were still learning how to be you.
forgiving yourself is the hardest part because it feels like you are letting a mistake go unpunished. you keep replaying that one version of yourself, hoping that if you think about it enough, the ending might change. but holding onto that guilt doesn’t fix the past.. it only makes it harder to live in the present. you have to realise that you wouldn’t be this better, wiser person today if you hadn’t been that struggling person yesterday. instead of being ashamed of who you were, try to be kind to that younger self. they didn’t know any better yet, and they were the one who carried you all the way to who you are now.
forgiving yourself is the hardest part because it feels like you are letting a mistake go unpunished. you keep replaying that one version of yourself, hoping that if you think about it enough, the ending might change. but holding onto that guilt doesn’t fix the past.. it only makes it harder to live in the present. you have to realise that you wouldn’t be this better, wiser person today if you hadn’t been that struggling person yesterday. instead of being ashamed of who you were, try to be kind to that younger self. they didn’t know any better yet, and they were the one who carried you all the way to who you are now.
❤3
जिस्मों पर हक़ मिल जाते हैं रीति रिवाजों से
पर रूह जिसकी दीवानी हो उसे प्रेम कहते हैं
पर रूह जिसकी दीवानी हो उसे प्रेम कहते हैं
❤3