💓सुकूँन 🍁
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सुक़ून चाहिए ,यहाँ आइए !! ❣️

स्वस्थ रहे !

मस्त रहे !

व्यस्त रहे!

पढ़ते रहे!

🌻🌻
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वज़ह पुंछने का मौक़ा ही नहीं मिला...!

वो लहज़ा बदलते रहे हम अजनबी होते गये..!
❤3
तुम हकीकत नहीं हसरत हो,
जो मिले ख्वाब में वो दौलत हो,
किस तरह छोर दू तुम्हें "जाना"
तुम मेरी जिंदगी की आदत हो , किसलिए देखते हो "आईना" तुम
तो खुद से भी खुबसूरत हो |

दास्तां खतम होने वाली है,
कि दास्ताँ ख़तम होने वाली है,

तुम मेरी आखिरी मोहब्बत हो |
- तू मेरा ख्वाब है जिसे मैं कभी नहीं
पा सकती | ❤️‍🩹
❤1🥰1
✨ "जिंदगी की हर ठोकर ने सिखाया है..!!
कि रास्ता चाहे जैसा भी हो,
भरोसा सिर्फ अपने पैरों पर ही करना..!!" ✨

#heer_writes
❤3👌2
जब कोई इंसान किसी एक का होकर रह जाता है तो वो किसी और के साथ सम्पूर्ण कभी नही हो सकता । उसकी रूह का कुछ अंश उस एक कि रूह का हिस्सा बन जाता है, जो ता उम्र उसी के साथ रहता है भले ही वो इंसान उसके साथ रहे या ना रहें । ❣️✨️
उसने हमारे जख्मों का कुछ यूं इलाज किया,

मरहम भी लगाया तो खंजर की नोक से।।
तुम्हें पता था बस वही
जो कहा था मैंने तुमसे

पर जो था
अन - कहा
अन - बूझा
वो हमेशा रहेगा तुमसे
अन - जाना

तुम नहीं जानते
कि तुम हो अनंत विस्तार
मेरे हिस्से के आसमान का
और स्थिरता हो
मेरे पैरों के नीचे की ज़मीं की

तुम नहीं जानते
कि तुम ध्रुव तारा हो
मेरी हर अंधेरी रात का
और छांव हो
जीवन की झुलसाती दोपहरों में

तुम नहीं जानते
कि तुम मेरी हर प्यास के लिए
जल हो
और हो बांध नदी का
जब फट जाते हैं दुख के बादल

तुम नहीं जानते
कि तुम सब कुछ हो
मेरे हर कुछ नहीं के लिए

और जो तुम नहीं जानते
वो तुम्हें नहीं जानना चाहिए
क्यूंकि तुम्हारे ये जान लेने के बाद
कुछ भी जान लेना बचेगा नहीं
कहीं भी ।
#heer_writes
❤2
यह कहकर कि परिस्थितियाँ
हमें अलग करेंगी,

तुम ख़ुद अलग हो गईं
तुमने तो परिस्थितियों को

अलग करने का मौक़ा ही नहीं दिया।
बरस बीत गए

कि परिस्थितियाँ हमें मिला देंगी के रस्ते पर,

मैं खड़ा रहा।

~ Vinod kumar shukl
⚡1🕊1
मुझे शब्दों की नहीं, एहसासों की जरूरत है,
बिना कहे मेरी आँखों की भाषा पढ़ सको
"तो मेरे साथ चलो"

रिश्ते को वक्त और सब्र से सींच सको,
हर मोड़ पर भरोसे की लौ जला सको
"तो मेरे साथ चलो"

#heer_writes
❤4
!...जब लोगों को उजाला नजर आने लगता हैं...!

तब वो भूल जाते हैं की_अंधेरे में कौन साथ था...!
💯⚜️🥀🕊️___
❤1
दिल ना उम्मीद तो नहीं, नाकाम ही तो है,
लंबी है ग़म की शाम, मगर शाम ही तो है।"

~ फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
❤8
तु कर ले सितम तेरी हद जहां तक है,
मैं हंस कर सहूंगा हर गम मेरे इम्तहान जहाँ तक है

तु सोच रही है मुझे दर्द कितना हुआ,
जानी में देख रहा हूं तू बेवफ़ा कहां तक है..!!
❤5😍3
गुम है किसी के प्यार में
दिल सुबह – शाम...

सोचा है एक दिन मिलके,
कह डालू सब हाल अपने दिल के...
❤1
तमाम दिन की तलब राह देखती होगी,

जो ख़ाली हाथ चले हो तो घर नहीं जाना..!!

       -- वसीम बरेलवी
❤1
प्रेम कभी व्यक्ति से नहीं होता
व्यक्तित्व से होता है...

शुभ प्रभात 🌞🌞
❤3
दुनिया-ए-तसव्वुर हम आबाद नहीं करते,

याद आते हो तुम ख़ुद ही हम याद नहीं करते...!!
🤭🤭
❤2
विलुप्त हो रही है खिलखिलाती लड़कियां,
मौन पड़ते जा रहे है मुस्कुराने वाले लड़के,,,,,

और तुम कहते हो नया दौर बहुत तरक्की
कर चुका है.....🙂🙃
❤2😢2
सभी प्रेमिकाओ के हिस्से नहीं आये वो क्षण
जब वो बाँट सकें अपने मन की बातें अपने प्रेमियों से
और ढूंढ सकें अपनी तस्वीर उनकी आँखों में....!!

कुछ प्रेमिकाओं के हिस्से आए अव्यक्त आख्यान,
परम एकांत, और एक अंतहीन प्रतीक्षा ।❤️‍🔥
❤5🥰1
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पैसा मर्द होता हैं...🙌💯
❤4😍1
Forwarded from 𝖴𝗇𝖿𝗈𝗅𝖽𝗂𝗇𝗀 𝗐𝗈𝗋𝖽𝗌 🖤
i don’t know if they miss me the way i miss them.
maybe they do, maybe they don’t. there’s no way to check something like that, and that’s what makes it worse.

because missing someone is a closed system. it doesn’t need the other person to continue. it just runs on its own, like a machine that forgot how to stop.

sometimes i think the real problem isn’t that they’re gone. it’s that nothing in me updated after they left. the world moved forward, they moved forward, but something in my mind is still stuck at a point that no longer exists.

it’s strange how two people can share the same time and still end up with completely different versions of it. for me, it turned into something heavy, something that stayed. for them, it might have just been another phase that ended when it was supposed to.

there’s also this uncomfortable thought that maybe i was never as important as i believed i was. it’s like realising you misread something that was never meant for you.

and the worst is, even if they don’t miss me, it doesn’t change anything here. it doesn’t reduce the weight of it. it just makes it more isolated.
maybe that’s all this is. not love, not loss. just a kind of attachment that outlived its context.

and eventually, even this will fade. not because it resolves, but because everything does.
even things that felt like they would define you forever.
❤2