💓सुकूँन 🍁
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सुक़ून चाहिए ,यहाँ आइए !! ❣️

स्वस्थ रहे !

मस्त रहे !

व्यस्त रहे!

पढ़ते रहे!

🌻🌻
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यादों में तुम, बातों में तुम,
हर ख़्वाब में बस तुम्हारा ही ज़िक्र रहा… 🌸🎀
तुमने ख़ामोशी को प्यार की हद लिख दिया,
हमने उसी ख़ामोशी में अपना पूरा इश्क़ पढ़ लिया… ❤️‍🩹✨

जो बातें लफ़्ज़ों में कभी कह न सके,
वो आँखों ने हर बार बयां की हैं… 🥹🌙
तुमने जो अधूरे ख़्वाब और वादे लिखे,
हमने उनमें भी अपनी पूरी दुनिया सजाई है… 💗🌸

काग़ज़ छोटा पड़ गया तुम्हारा प्यार लिखते-लिखते,
हम तो आज भी तुम्हें दिल के पन्नों पर लिखते हैं… 🎀🫶🏻
और अगर कोई पूछे इश्क़ की आख़िरी हद क्या है,
तो हम बस इतना कहेंगे—
जहाँ तुम्हारी ख़ामोशी ख़त्म हो,
वहीं से हमारा प्यार शुरू होता है… ❤️‍🩹🌷
❤3❤‍🔥1
हसरतें कुछ और हैं, वक़्त की चाहतें कुछ और,
हमने माँगा था सुकूँ, ज़िंदगी की आहटें कुछ और।

जिसे अपना समझकर उम्र भर सँजोते रहे,
वक़्त ने लिख दीं मगर उसकी इबारतें कुछ और।

हम सफ़र में थे कि मंज़िल ही बदलती गई,
रास्ते कुछ और थे, उसकी दिशाएँ कुछ और।

ख़्वाब आँखों में थे, तक़दीर की ख़ामोशी में,
हम समझते रहे कहानी, मगर हक़ीक़तें कुछ और।


🌹🦋🦋
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❤3
होंठो पर शिक़ायत का क़ाफिला है,

और आँखों में गले लगाने की तलब!

~🩷❤
❤3
चूम के तेरे रुख़सार को
ये हवाएँ जब चलतीं हैं,

डूब जाता है फिर वो शहर नशे में
ये जिस शहर से भी गुजरती हैं!

~💕💕
❤2🥰1❤‍🔥1
फंसी रही तुम्हारे हलक मे माफी,
हर बार जुबां ने गुरुर का साथ दिया ....✨
❤1❤‍🔥1
🦋💗🖤



फिर यूँ हुआ की हसरतें पैरों में गिर गई ,

फिर हमने उन्हें रौंदकर किस्सा खत्म कर दिया 💔

🌸💛⭐️❤
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❤3❤‍🔥1⚡1
🦋💗🖤



जाकर तुम नदी के किनारे अपने हाथों में पानी उठा लेना ,

जितना उठ गया वो चाहत तुम्हारी और जो ना उठे वो मोहब्बत हमारी..💙🧡

🌸💛⭐️❤
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❤5😍2❤‍🔥2👌1
अब बने है पत्थर के तो हेरत कैसी,
   जब मोम थे तो जलाये बहुत गए....।। 🌹

#heer_writes
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❤3
काश वो बस इतना सोचती ,

में ये नहीं कर सकती यार वो बहुत रोयेगा..!!



🌸💛⭐️❤
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❤2👌2❤‍🔥1😍1
💓सुकूँन 🍁 pinned «काश वो बस इतना सोचती , में ये नहीं कर सकती यार वो बहुत रोयेगा..!! 🌸💛⭐️❤»
जब तुम पर गुजरेगी तब जानोगे ,

महबूब से लगी उम्मीदें इंसान का कलेजा फाड़ देती है...!!
💌💙🦋
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❤‍🔥3❤2
अगर कोई पूछे—
तुम्हारे लिए मैं कौन हूँ?
कह देना,
एक खाली जगह हूँ,
जिसे कोई और भर नहीं पाया।


वो आधी चाय,
जो बातों में ठंडी हो गई;
वो नींद,
जो मेरी आवाज़ के बिना आई नहीं।

न रिश्ता लिख सका हमें,
न वक़्त मिटा पाया।
मैं तुम्हारी ज़िंदगी का
बस वो अनकहा हिस्सा हूँ—
जो मिला भी नहीं पूरा,
और खोया भी नहीं कभी।
❤4😍1
एक दिन समझ आता है,
उनकी हर हिदायत के पीछे
एक छोटा-सा डर छिपा था।


कहीं मेरा बेटा परेशान तो नहीं है?
कहीं उसे किसी चीज़ की जरूरत तो नहीं?
कहीं वह मुझसे दूर तो नहीं हो रहा?

शायद हमारी पीढ़ी ने
पिता से प्यार करना तो सीखा,
लेकिन पिता की मोहब्बत पढ़ना
बहुत देर से सीखा।

और कुछ रिश्तों की सबसे बड़ी त्रासदी यही है...की,

हम उन्हें समझने लगते हैं,
जब उन्हें हमारी ज़रूरत पहले से कहीं ज्यादा होती है।

— अमन
❤3🥰2
कितनी दुकानें घूम के आख़िर फूल ख़रीदे हैं,
पहली बार किसी के ख़ातिर फूल ख़रीदे हैं,

पहली बार उनसे मिला जाना है आज हमें,
क्या दूँ? क्या दूँ? सोच के,
आज फूल ख़रीदे हैं,

ग़ज़ल सुना कर टाल दिया था सब महबूबों को,
लेकिन हमने आपके ख़ातिर फूल ख़रीदे हैं,

कौन ही लड़की होगी जिसको फूल पसंद नहीं होंगे,
इसी ख़याल से आख़िर, फूल ख़रीदे हैं,

मुरझा जाएँगे ये कुछ दिनों में यूँ ही पड़े पड़े,
फिर भी ये फूल ख़रीदे हैं?
❤5🥰1🙏1
Forwarded from MOHABBAT 🤍
हमें कुछ यूं सताया जा रहा है
तेरा आशिक़ बुलाया जा रहा है

किताबों में छुपा कर फूल मेरा
सहेली को दिखाया जा रहा है

हमारा नाम लिखकर डायरी में
फिर उसपे दिल बनाया जा रहा है

महफ़िल में नज़रे क्या मिली उनसे
गुलों को पास लाया जा रहा है

हमारे बीच के बेन्चों का अंतर
इशारों से मिटाया जा रहा है

उधर जुल्फें घुमाना उंगलियों में
इधर पेन को घुमाया जा रहा है

नई डीपी लगाई जा रही है
नया स्टेटस लगाया जा रहा है

लगाकर फूल को उन गेसुओं में
रकीबो को जलाया जा रहा है

सितारे तोड़ कर कितने ना जाने
उन्हें अपना बनाया जा रहा है

इधर बारात लेकर आए है हम
उधर उनको सजाया जा रहा है !!



🤍
❤5
तुम मेरे होंठों की पसंदीदा ख़ामोशी हो,
बाँहों का सबसे महफ़ूज़ पता।
तुम्हें थामूँ, तो वक़्त ठहर जाए,
तुम संग सोऊँ, तो रात घर लगे।

मेरी हँसी में तुम्हारी शरारत है,
मेरे क़दमों में तुम्हारा रक़्स।
ख़्वाब तुम्हारे साथ ही अच्छे लगते हैं,
और बातें… जैसे कभी ख़त्म न होने वाली शाम।

डूबता सूरज भी कुछ देर रुकता है,
जब हम दोनों उसे साथ देखते हैं।

तुम मेरे सबसे पसंदीदा इंसान हो—
आज भी, हमेशा भी…
और हमेशा के बाद भी।


🥀🕊🖤
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