गुरुकुल इतिहास सूरतगढ़ History for Rpsc 🇮🇳
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Forwarded from Gurukul History Education (History PYQs) (Narvada Dubey)
उच्चतम न्यायालय
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सल्तनत कालीन प्रशासनिक व्यवस्था

नायब वज़ीर
'नायब वज़ीर', वज़ीर का सहयोगी होता था तथा वज़ीर की अनुपस्थिति में उसके कार्यों का निर्वहन इसके द्वारा ही किया जाता था।

मुशरिफ़-ए-मुमालिक (महालेखाकार)
प्रान्तों एवं अन्य विभाग से प्राप्त होने वाली आय एवं उसके व्यय का लेखा-जोखा रखने का दायित्व 'मुशरिफ़-ए-मुमालिक' का होता था। नाजिर इसका सहायक होता था।

मुस्तौफ़ी-ए-मुमालिक (महालेख परीक्षक)
मुशरिफ़ द्वारा तैयार किये गये लेखा-जोखा की जाँच के लिए 'मुस्तौफ़ी-ए-मुमालिक' के पद की व्यवस्था थी। कभी-कभी यह मुशरिफ़ की तरह आय-व्यय का निरीक्षण भी करता था।

ख़ज़ीन (ख़ज़ांची)
यह कोषाध्यक्ष के रूप में कार्य करता था।

दीवान-ए-वक़ूफ़
जलालुद्दीन ख़िलजी द्वारा स्थापित इस विभाग का मुख्य कार्य व्यय की काग़ज़ात की देख-भाल करना होता था।

दीवान-ए-मुस्तख़राज
वित्त विभाग से सम्बंधित इस विभाग की स्थापना अलाउद्दीन ख़िलजी ने की थी। इसका कार्य अतिरिक्त मात्रा में वसूल किये गए कर का हिसाब रखना होता था।

दीवान-ए-अमीर कोही
मुहम्मद तुग़लक़ द्वारा स्थापित इस विभाग का मुख्य कार्य मालगुज़ारी व्यवस्था की देखभाल करना एवं भूमि को खेती योग्य बनाना होता था।

उपर्युक्त समस्त विभाग 'दीवान-ए-विजारत' विभाग से नियंत्रित होते थे। दीवान-ए-विजारत, वज़ीर का कार्यालय होता था। विजारत को एक संस्था के रूप में प्रयोग करने की प्रेरणा अब्बासी ख़लिफ़ाओं ने फ़ारस से ली था। दिल्ली सल्तनत के प्रारम्भिक वज़ीरों में कुतुबुद्दीन ऐबक, ताजुद्दीन एल्दोज, नासिरुद्दीन क़बाचा आदि थे। वज़ीर का पद दिल्ली सल्तनत में फ़िरोज़शाह तुग़लक़ के समय में अपने चरमोत्कर्ष पर था। फ़िरोज़शाह तुग़लक़ के वज़ीर ख्वाजा हिसामुद्दीन ने विभिन्न सूबों का दौरा करने के पश्चात् समस्त खालसा भूमि का राजस्व छह करोड़ पचासी लाख टंका निश्चित किया था। लोदी वंश के शासन काल में यह पद महत्त्वहीन हो गया।

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Forwarded from No Document No History (वृषभानुदुलारी राधा रानी ...........)
🔮महात्मा गांधी के महिलाओं संबंधित उद्गार ➡️

🔮 "महिलाएं ईश्वर की सबसे सुंदर रचना हैं।"➡️ महात्मा गांधी।

🔮 "महिलाएं अहिंसा का पुनर्जन्म हैं।"➡️ महात्मा गांधी।

🔮 " यदि मेरा जन्म महिला के रूप में हुआ होता तो मैं पुरूषों के ढोंग के खिलाफ बगावत कर देता।"➡️
महात्मा गांधी।

🔮 किसने वैश्यावृत्ति को " नैतिक कोढ़ " की संज्ञा दी है ➡️ महात्मा गांधी।

🔮 किसने देवदासी प्रथा को " ईश्वर का अपमान " कहा था ➡️महात्मा गांधी।

🔮 किसने दहेज प्रथा को "खरीदी हुई शादी "एवं " अपमानजनक परम्परा " कहा था ➡️ महात्मा गांधी।

🔮 "यदि पुरुष एक देवता है तो महिला भी एक देवी है।"➡️ महात्मा गांधी।

🔮 "महिला पुरुषों को बनाने वाली और उनकी मूक नेतृत्वकर्ता भी होती हैं।"➡️ महात्मा गांधी।

🔮 1931 में कांग्रेस के कराची अधिवेशन में किसके मार्गदर्शन में महिलाओं को बिना लैंगिक भेदभाव के समान मताधिकार देने का प्रस्ताव पारित हुआ था ➡️ महात्मा गांधी।

🔮 "प्रकृति द्वारा बनाए गए विभेदों और आंखों से देखे जा सकने लायक अंतर को छोड़कर महिला और पुरुष के बीच मैं कोई भेद नहीं देखता हूं।"➡️ महात्मा गांधी।

🔮 "धार्मिक आस्था के मामले में महिलाएं पुरुषों से किसी भी मायने में श्रेष्ठ हैं।"➡️महात्मा गांधी।

🔮 "महिलाएं आत्म बलिदान का जीवंत रूप हैं।"➡️ महात्मा गांधी।

🔮 "मानसिक रूप से अनुकूल जीवनसाथी न मिलने पर लड़की को अविवाहित रहने का फैसला करना चाहिए लेकिन उसे आत्मनिर्भर अवश्य बनना चाहिए, चुंकि दूसरे पर निर्भर लड़की कभी भी अविवाहित नहीं रह सकती है।"➡️ महात्मा गांधी।

🔮 "अगर मुझे किसी लड़की की शादी की जिम्मेदारी दी जाती तो मैं एक भी पैसे लेकर शादी करने वाले लड़के से शादी करने के बजाय अपनी लड़की को आजीवन अविवाहित रहने देता।"➡️ महात्मा गांधी।(1929 में)

🔮 किसने 1927 में कहा था कि" जब तक महिलाओं को घर की चहारदीवारी में कैद करके रखा जाएगा मनावता का कद घटता रहेगा।"➡️ महात्मा गांधी।

K.K. Khator✍
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जयपुर को गुलाबी रंग सवाई राम सिंह द्वितीय (Maharaja Sawai Ram Singh II) ने 1876 में करवाया था।
उन्होंने इंग्लैंड के प्रिंस ऑफ वेल्स
(बाद में किंग एडवर्ड सप्तम) के स्वागत में पूरे शहर को गुलाबी (गेरुआ) रंग में रंगवाया था।
यह रंग आतिथ्य का प्रतीक माना जाता है, जिसके बाद से ही जयपुर 'पिंक सिटी' के रूप में प्रसिद्ध हुआ।
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Forwarded from Gurukul History Education (History PYQs) (Narvada Dubey)
संघ लोक सेवा आयोग
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मोहम्मद अली जिन्ना

1904 में जिन्ना ने पहली बार कांग्रेस सत्र में भाग लिया, 1906 में दादाभाई नौरोजी के सचिव ने भाषण लिखा। बंगाल विभाजन को भूल बताया, मुस्लिम लीग स्थापना की आलोचना, 1913 में लीग का भी सदस्य बना, 1921में काग्रेस को छोड़ दिया।
मुहम्मद बिन तुगलक की योजनाओं का क्रम

पांच मुख्य योजनाएं थी जिसमें 3 प्रशासनिक एवं 2 सैनिक उदेश्य से सम्बन्धित थी।

बरनी ने अनुसार इनका क्रम-
दोआब में कर वृद्धि, राजधानी परिवर्तन, सांकेतिक मुद्रा प्रचलन, खुरासान अभियान एवं कराचिल अभियान

जबकि सामान्य रूप से क्रम-
राजधानी परिवर्तन,सांकेतिक मुद्रा प्रचलन,खुरासान अभियान कराचिल अभियान एवं दोआब में कर वृद्धि

इन दोनों में प्रमुख अन्तर यह है कि बरनी के क्रम में दोआब कर वृद्धि पहले और सामान्य रूप से दोआब कर वृद्धि अन्त में है
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अलख पंख प्रतिमा

इतिहास: 15वींशताब्दी में हुआ था निर्माण : डॉ.जगत नारायण के अनुसार ऐसी प्रतिमाओं को अलल पंख यानी उड़ते हुए हाथी कहा जाता है। इनकी निर्माण शैली उच्च श्रेणी की है। पीठ पर पंख बने हैं। जो गुलाबी रंग के बलुए पत्थर से निर्मित हैं। ये इतने शक्तिशाली हैं कि अपने पंजों में हाथियों को जकड़े हैं। इनके पंजों में चार और सूंड में एक हाथी है। बाद में इनमें टूट-फूट हो गई। ये बारां के शाहबाद में राजा के बादल महल दरवाजे के बाहर लगे थे। दो दशक पूर्व इन्हें सुरक्षा की दृष्टि से कोटा लाया गया। राजा मुकुटमणि देव ने 1521 में किला और यहां का नगर बसाया था। कालांतर में यहां का नाम शाहाबाद हुआ।