Forwarded from No Document No History (वृषभानुदुलारी राधा रानी ...........)
बात दरअसल तबकी है जब प्रथम विश्वयुद्ध समाप्त हो चुका था. गांधीजी शारीरिक रूप से बहुत कमजोर हो चुके थे. उनकी बबासीर ने अलग ही तबाही मचा रखी थी. जब चीजें हालात से बाहर हो गयी तो गांधीजी अपने बवासीर के ऑपरेशन के लिए मुंबई जो उस समय बॉम्बे के नाम से जाना जाता था वहां पहुंचे. वहां वो डॉक्टर दलाल से मिले. डॉ दलाल ने साफ़ शब्दों में कह दिया कि जब तक आप दूध का सेवन नहीं करते, तब तक मैं आपके स्वास्थ्य को ठीक नहीं कर सकता. लेकिन गांधीजी ने मना कर दिया. उन्होंने कहा कि मैंने शपथ ले रखी है कि मैं कभी भी गाय या भैंस के दूध का सेवन नहीं करूँगा.
इसका स्पष्टीकरण देते हुए उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि गाय और भैंस से दूध निकालने में बर्बरता की जाती है. उस समय एक प्रथा प्रचलित थी जिसे "फूँका" कहते थे जिसमे गाय या भैंस की योनि में हवा फूंकते थे जिससे वो ज्यादा दूध दे.
फिर कस्तूरबा गाँधी ने बकरी के दूध का सुझाव दिया और कहा कि इससे तो आपको कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए. गाधीजी चुप रहे. डॉ दलाल ने भी कस्तूरबा का समर्थन किया और इस प्रकार गांधीजी ने बकरी का दूध पीना स्वीकार किया. फिर उनके बवासीर का सफल ऑपरेशन हुआ और उनके स्वास्थ्य में सुधार हुआ.
अब समस्या थी गांधीजी को रोजाना बकरी का दूध देने की तो इसके लिए बकरी पालना जरुरी था. फिर गांधीजी के लिए बकरी लायी गयी.
गांधीजी के बकरी के बारे में दिलचस्प तथ्य:
गांधीजी की बकरी का नाम निर्मला था और वो जहाँ भी जाते उसे साथ ले के जाते थे ताकि उनको बकरी का ताज़ा दूध पीने को मिल सके.
कहाँ ये भी जाता है कि गांधीजी की बकरी काजू और बादाम खाती थी और उसके और उसके मेंटेनेंस का खर्चा इतना ज्यादा था कि एक बार सरोजिनी नायडू ने कहा था कि "गांधीजी की बकरी देश के लिए बहुत महंगी पड़ रही है "
दरअसल गांधीजी के पास दो बकरियाँ थी एक काली और एक सफ़ेद.
दो बकरी को पालने का एक कारण ये भी हो सकता है कि गांधीजी रंगभेद को नहीं मानते थे. लेकिन अब काली वाली बकरी का नाम निर्मला था या सफ़ेद वाली का ये मुझे नहीं मालूम
इसका स्पष्टीकरण देते हुए उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि गाय और भैंस से दूध निकालने में बर्बरता की जाती है. उस समय एक प्रथा प्रचलित थी जिसे "फूँका" कहते थे जिसमे गाय या भैंस की योनि में हवा फूंकते थे जिससे वो ज्यादा दूध दे.
फिर कस्तूरबा गाँधी ने बकरी के दूध का सुझाव दिया और कहा कि इससे तो आपको कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए. गाधीजी चुप रहे. डॉ दलाल ने भी कस्तूरबा का समर्थन किया और इस प्रकार गांधीजी ने बकरी का दूध पीना स्वीकार किया. फिर उनके बवासीर का सफल ऑपरेशन हुआ और उनके स्वास्थ्य में सुधार हुआ.
अब समस्या थी गांधीजी को रोजाना बकरी का दूध देने की तो इसके लिए बकरी पालना जरुरी था. फिर गांधीजी के लिए बकरी लायी गयी.
गांधीजी के बकरी के बारे में दिलचस्प तथ्य:
गांधीजी की बकरी का नाम निर्मला था और वो जहाँ भी जाते उसे साथ ले के जाते थे ताकि उनको बकरी का ताज़ा दूध पीने को मिल सके.
कहाँ ये भी जाता है कि गांधीजी की बकरी काजू और बादाम खाती थी और उसके और उसके मेंटेनेंस का खर्चा इतना ज्यादा था कि एक बार सरोजिनी नायडू ने कहा था कि "गांधीजी की बकरी देश के लिए बहुत महंगी पड़ रही है "
दरअसल गांधीजी के पास दो बकरियाँ थी एक काली और एक सफ़ेद.
दो बकरी को पालने का एक कारण ये भी हो सकता है कि गांधीजी रंगभेद को नहीं मानते थे. लेकिन अब काली वाली बकरी का नाम निर्मला था या सफ़ेद वाली का ये मुझे नहीं मालूम
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▪️ गन्ने की नई किस्म 'बिस्मिल' को पांच राज्यों में उगाने की मंजूरी
• गन्ने की किस्म 'बिस्मिल' को चार अन्य राज्यों :- हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और राजस्थान में उगाने की मंजूरी।
• विकसित - उत्तरप्रदेश गन्ना अनुसंधान केंद्र द्वारा
• लाल सड़न रोग बचाव में सक्षम
• अन्य नाम - कोशा 17231
• नाम - स्वतंत्रता सेनानी राम प्रसाद बिस्मिल(काकोरी कांड के नायक) के नाम पर
Important Paper 1st Gk
• गन्ने की किस्म 'बिस्मिल' को चार अन्य राज्यों :- हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और राजस्थान में उगाने की मंजूरी।
• विकसित - उत्तरप्रदेश गन्ना अनुसंधान केंद्र द्वारा
• लाल सड़न रोग बचाव में सक्षम
• अन्य नाम - कोशा 17231
• नाम - स्वतंत्रता सेनानी राम प्रसाद बिस्मिल(काकोरी कांड के नायक) के नाम पर
Important Paper 1st Gk
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Forwarded from Gurukul History Education (History PYQs) (N D)
मृदभाँड-सभ्यताएँ
मृदभाँडों के आधार पर भारत में सभ्यता के विकास क्रम की जानकारी प्राप्त होती है। इतिहासकारों के अनुसार मृदभाँड-सभ्यताएँ निम्नलिखित हैं-
मृदभाँडों के आधार पर भारत में सभ्यता के विकास क्रम की जानकारी प्राप्त होती है। इतिहासकारों के अनुसार मृदभाँड-सभ्यताएँ निम्नलिखित हैं-
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इंदिरा गांधी ने जब अमेरिका की धमकी को नजरअंदाज कर दिया
बांग्लादेश का निर्माण -
जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा के नेतृत्व में भारतीय सेना ने मुक्तिवाहिनी के साथ मिलकर पूरे पूर्वी बंगाल को पार करते हुए इसकी राजधानी ढाका में पाकिस्तानी छावनी को घेर लिया। सोवियत संघ ने संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत के पक्ष में अपने वीटो का प्रयोग किया। ब्रिटेन और फ्रांस दोनों देश तटस्थ रहे। अमेरिका ने भारत को आक्रमणकारी देश घोषित कर उसकी सभी आर्थिक मदद बंद कर दी साथ ही अपने युद्धपोत सातवें बेड़े को बंगाल की खाड़ी के लिए रवाना किया परंतु इंदिरा गांधी ने अमेरिका की धमकी को नजरअंदाज कर दिया। जनरल ए के नियाजी के नेतृत्व में 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकों को 16 दिसंबर 1971 के दिन आत्मसमर्पण करने के लिए भारतीय सेना ने मजबूर कर दिया। ढाका के आत्मसमर्पण के ठीक बाद भारत सरकार ने युद्ध विराम की घोषणा कर दी जिसे पाकिस्तान ने तुरंत स्वीकार कर लिया।
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बुद्ध के अनुयायियों में सर्वाधिक संख्या किनकी थी
Anonymous Quiz
18%
ब्राह्मण
37%
क्षत्रिय
26%
वैश्य
20%
शूद्र
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गुरुकुल इतिहास सूरतगढ़ History for Rpsc 🇮🇳 pinned «बुद्ध के अनुयायियों में सर्वाधिक संख्या किनकी थी»
निम्न में से कौन सी दिशा बौद्ध धर्म की पवित्रतम दिशा है
Anonymous Quiz
29%
पूर्व
33%
पश्चिम
22%
उत्तर
17%
दक्षिण
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चराग़ सब के बुझते हैं, हवा किसी की नहीं
लीग मैचों में ज़िम्बाब्वे और श्रीलंका से हारकर ऑस्ट्रेलिया वर्ल्ड कप से बाहर
सफलता के दिनों में अहंकार और असफल होने पर हीनता के भाव से भर जाना अपरिपक्वता की निशानी है। सफलता ख़ुशी देती है लेकिन इस समय में भी अपने असफल दोस्तों की भावनाओं का ख्याल रखना आपकी संवेदनशीलता का प्रमाण है। वहीं असफलता जीवन का अंत नहीं है बल्कि ज़्यादा मजबूत होकर वापस लौटने की चुनौती है जिसे स्वीकार करना आपके शौर्य का प्रमाण है।
सफल दिनों में :
कटें नहीं - जुड़े रहें।
असफल दिनों में :
डरें नहीं - डटे रहें।
लीग मैचों में ज़िम्बाब्वे और श्रीलंका से हारकर ऑस्ट्रेलिया वर्ल्ड कप से बाहर
सफलता के दिनों में अहंकार और असफल होने पर हीनता के भाव से भर जाना अपरिपक्वता की निशानी है। सफलता ख़ुशी देती है लेकिन इस समय में भी अपने असफल दोस्तों की भावनाओं का ख्याल रखना आपकी संवेदनशीलता का प्रमाण है। वहीं असफलता जीवन का अंत नहीं है बल्कि ज़्यादा मजबूत होकर वापस लौटने की चुनौती है जिसे स्वीकार करना आपके शौर्य का प्रमाण है।
सफल दिनों में :
कटें नहीं - जुड़े रहें।
असफल दिनों में :
डरें नहीं - डटे रहें।
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देश की प्रथम 'बर्ड राइडर रॉक पेंटिंग'
गरदड़ा (बूँदी) जहाँ देश की प्रथम 'बर्ड राइडर रॉक पेंटिंग' मिली है.
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पुरातात्त्विक स्त्रोतों का महत्त्व (Singnificance of Archaeological Sources)
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भाब्रू शिलालेख (बैराठ-कलकत्ता शिलालेख)
खोज - कैप्टन बर्ट ने 1837 में बीजक पहाड़ी से खोजा। वर्तमान में एशियाटिक सोसायटी ऑफ बंगाल, कलकत्ता संग्रहालय में सुरक्षित है
लिपि/भाषा - ब्राह्मी लिपि, प्राकृत भाषा।
यह अशोक के बौद्ध मतानुयायी होने का सबसे पुख्ता प्रमाण है।
अशोक को 'मगध का राजा' (मगधराजे) बताया गया है तथा 'बुद्ध, धम्म, संघ' (त्रिरत्न) के प्रति आस्था प्रकट की गई है।
इसमें बौद्ध धर्म के 7 महत्वपूर्ण ग्रंथों की सूची भी दी गई है।
यह अशोक का सबसे लम्बा लघु शिलालेख है।
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प्रमुख साहित्यिक रचनाएँ (Important Literary Creations)