गुरुकुल इतिहास सूरतगढ़ History for Rpsc 🇮🇳
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Among the four main forms of existence of life recognized in Jainism, which one of the following is not included?

(a) Deva (gods)

(b) Yaksha (demi-gods)

(c) Manushya (humans)

(d) Tiryancha (animals and plants)
जैन धर्म में मान्य जीवन के चार मुख्य रूपों में से निम्नलिखित में से कौन सा शामिल नहीं है?

(क) देव (देवता)

(ख) यक्ष (अर्ध-देवता)

(ग) मनुष्य (मानव)

(घ) तिर्यंच (जानवर और पौधे)
The Hallisalasya painting in the Bagh Caves represents:

(a) A joyous folk dance.

(b) Buddha in a meditative pose

(c) The depiction of Shiva and Parvati on Kailasha

(d) Samudramanthan (Churning of the Ocean)



बाघ गुफाओं में हल्लीसक चित्र निम्नलिखित का प्रतिनिधित्व करता है:

(क) एक खुशमिजाज लोक नृत्य।

(ख) ध्यान की मुद्रा में बौद्ध

(ग) कैलाश पर शिव और पार्वती का चित्रण

(घ) समुद्रमंथन (समुद्र का मथन)
Consider the following statements about the archaeological findings in Harappan towns:

There is wide occurrence of spindle-whorls in the houses but absence of spinning wheels.

I. Weights and measurement scales, complete with graduations have been discovered.

II. There are houses built in large part with baked bricks, around relatively spacious courtyards, with their own wells, bathing platforms, and large rooms.

Which of the following inferences can be drawn from the above statements?

Statement I suggests that spinning was a laborious activity done at home.

Statement II suggests the extent of the scientific knowledge that the Harappans possessed.

Statement III suggests the emergence of a common property system.

Select the answer using the code given below:

(a) 1 and 2 only

(b) 2 and 3 only

(c) 1 and 3 only

(d) 1, 2 and 3


हड़प्पा नगरों की पुरातात्त्विक खोजों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
I. घरों में तकली के चक्र (Spindle Whorls) बड़ी संख्या में मिले हैं, लेकिन चरखे (Spinning Wheel) नहीं मिले।
II. भार एवं माप की मानक इकाइयाँ तथा अंकित माप-पट्टियाँ (Graduated Measuring Scales) प्राप्त हुई हैं।
III. बड़े-बड़े पक्की ईंटों के मकान मिले हैं, जिनमें विशाल आँगन, निजी कुएँ, स्नान-मंच और बड़े कमरे हैं।
उपरोक्त कथनों से निम्नलिखित में से कौन-से निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं?

कथन I से पता चलता है कि कताई एक श्रमसाध्य घरेलू कार्य था।

कथन II हड़प्पावासियों के वैज्ञानिक ज्ञान के स्तर को दर्शाता है।

कथन III से सामूहिक (Common Property) व्यवस्था के उद्भव का संकेत मिलता है।

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
बोधि वृक्ष का इतिहास ✍✍
Forwarded from No Document No History (वृषभानुदुलारी राधा रानी ...........)
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गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वरः। गुरु साक्षात् परब्रह्म, तस्मै श्री गुरवे नमः!"

गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनायें 🥰🙏
Forwarded from No Document No History (वृषभानुदुलारी राधा रानी ...........)
Topic:- *बौद्ध धर्म:-*

*निर्वाण व महापरिनिर्वाण*
वैसे दोनों का तात्पर्य मृत्यु को प्राप्त करने से है लेकिन बौद्ध धर्म में दोनों के भिन्न अर्थ है।

बौद्ध धर्म में निर्वाण का तात्पर्य मोक्ष यानि जीवन मरण के चक्र से मुक्ति...जिसके अन्तर्गत तृष्णा,मोह,क्रोध,रागद्वेष,अज्ञानता,अंहकार आदि सभी मानसिक क्लेशो‌ का पूर्ण अन्त करना।
इस प्रकार कोई व्यक्ति जीवित रहते हुए ज्ञान प्राप्त कर लेता है और जन्म-मरण के बन्धन से मुक्त हो जाता है तो उसे बौद्ध धर्म में निर्वाण प्राप्त होना कहा जाता है।
जैसे- महात्मा बुद्ध ने बोधगया ज्ञान प्राप्त कर निर्वाण प्राप्त किया था।


और महापरिनिर्वाण वह अवस्था है जब निर्वाण प्राप्त व्यक्ति शरीर का त्याग करता है यानि मृत्यु को प्राप्त करना महापरिनिर्वाण है।
जैसे- महात्मा बुद्ध ने कुशीनगर में देहत्याग यानि महापरिनिर्वाण प्राप्त किया था।


इसलिए बौद्ध धर्म में दोनों के प्रतीक अलग- अलग है... निर्वाण का प्रतीक पदचिन्ह और महापरिनिर्वाण का प्रतीक स्तूप है।

फिर बौद्ध धर्म में एक प्रतीक बोधिवृक्ष है,जिसका सम्बन्ध ज्ञान से है।
अब वैसे देखें तो निर्वाण भी ज्ञान ही है लेकिन दोनों में सूक्ष्म अन्तर है
बोधिवृक्ष में जो ज्ञान है वो ज्ञान प्राप्त करने की एक प्रक्रिया है और निर्वाण में ज्ञान प्राप्त होने के बाद उसका ज्ञान होना है।

जैसे प्रवज्या और उपसम्पदा में सूक्ष्म अन्तर है
गृहस्थ जीवन को छोड़कर बौद्ध संघ में आने से दोनों का सम्बन्ध है लेकिन अन्तर यह है कि प्रवज्या से गृहस्थ जीवन छोङकर भिक्षु जीवन की शुरुआत तो हो जाती है लेकिन पूर्ण भिक्षु या बौद्ध संघ में प्रवेश उपसम्पदा में होता है।
Forwarded from No Document No History (वृषभानुदुलारी राधा रानी ...........)
Topic:- *जैन धर्म तीर्थंकर:-*

▶️ 24 तीर्थंकर व इनके सभी के अलग-अलग प्रतीक हैं ...
जब यह टाॅपिक पढ़ते हैं तो सभी तीर्थंकरों के प्रतीक पढ़ें जाते हैं..सभी याद रहे या नहीं लेकिन प्रैक्टिस सेट या पिछली भर्तियों में आए पेपर देखते हैं तो समझ आता है कि मुख्य तीर्थंकरों के प्रतीक तो याद होने ही चाहिए इसके अलावा आजकल इनके क्रमानुसार के प्रश्न भी आते हैं
विशेष रूप से प्रारम्भ के 2-3 और लास्ट के 19 से 24 के तीर्थंकरों से बहुत बार प्रश्न पूछे गए हैं।

▶️ मिलते-जुलते नाम वाले तीर्थंकर-
*नमिनाथ व नेमिनाथ*
नमिनाथ 21 वा तीर्थंकर है जबकि नेमिनाथ 22 वा तीर्थंकर है तथा इसी नेमिनाथ को ही अरिष्टनेमि भी कहा गया है।

*सुपार्श्व या सुपार्श्वनाथ 7 वां तीर्थंकर और पार्श्वनाथ 23 वां तीर्थंकर*
Forwarded from No Document No History (वृषभानुदुलारी राधा रानी ...........)
▶️ मगध के शासक अजातशत्रु के पद्मावती नाम से एक पुत्री थी जिसका विवाह वत्स के राजा उदयन के साथ किया था।
और मगध के शासक अजातशत्रु की एक पत्नी का नाम भी पद्मावती था जिससे उदायिन या उदयभद्र नामक पुत्र हुआ था जो अजातशत्रु के बाद मगध का शासक बना था।

▶️ उदयन व उदायिन:-
वत्स महाजनपद का शासक उदयन हुआ है
और मगध का शासक उदायिन या उदयभद्र हुआ है जिसने पाटलिपुत्र नगर की स्थापना करके उसे मगध की राजधानी बनाई थी।
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Forwarded from Gurukul History Education (History PYQs) (Narvada Dubey)
हिक्की का बंगाल गजट, जिसे "कलकत्ता जनरल एडवरटाइजर" भी कहा जाता है,
Forwarded from Gurukul History Education (History PYQs) (Narvada Dubey)
निम्नलिखित में से कौन सा युग्म सुमेलित नहीं है? 🤔

(उत्तराधिकारी राज्य) 🏰 (संस्थापक) 👑

(1) हैदराबाद. बुरहान-उल-मुल्क 📜

(2) अवध. सआदत खाँ 🏛️

(3) बंगाल. मुर्शिद कुली खाँ 🌊

(4) फर्रुखाबाद. मुहम्मद खाँ बंगश 🔥
Forwarded from Gurukul History Education (History PYQs) (Narvada Dubey)
व्याख्या - हैदराबाद में स्वतंत्र राज्य की स्थापना निज़ाम उल मुल्क ने की थी। 'बुरहान उल मुल्क सादत खां' उपाधि है, जिसने अवध में स्वतंत्र सता की स्थापना की।
"पौराणिक नरसंहार" की अवधारणा को सिंधु घाटी सभ्यता के पतन के संबंध में लोकप्रिय बनाया गया था ,
जो एक हिंसक आक्रमण के विचार को चुनौती देता था, और इस अवधारणा से सबसे अधिक जुड़ा नाम जॉर्ज एफ. डेल्स है ।
डेल्स ने हिंसक नरसंहार के सिद्धांत का आलोचनात्मक विश्लेषण किया और इसे "पौराणिक नरसंहार" कहा, तथा यह प्रस्तावित किया कि यह गिरावट किसी एक विनाशकारी घटना के कारण नहीं थी, बल्कि पर्यावरणीय परिवर्तनों जैसे कारकों के संयोजन के कारण थी
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