" नासदीय सूक्त " निम्नलिखित किस वेद से संबंधित है ? [ RPSC -- 2022 ]
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49%
ऋग्वेद
14%
सामवेद
26%
यजुर्वेद
10%
अथर्ववेद
1%
इनमें से कोई नहीं
❤3🙏3
" भू - संपत्ति के बंटवारे " का उल्लेख निम्न में से किसमें प्रथम बार प्राप्त होता है ?
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24%
शतपथ ब्राह्मण
34%
बृहस्पति स्मृति
18%
अथर्ववेद
22%
छान्दोग्य उपनिषद
2%
भागवत पुराण
👌4
ऋग्वेद के किस सूक्त में जैन तीर्थकरों के नाम मिलते है ?
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23%
नासदीय सूक्त
11%
नदी सूक्त
20%
मण्डूक सूक्त
33%
केशी सूक्त
13%
पुरूषसूक्त
🙏4
निम्नलिखित में से कौन - सा वैदिक देवता " वृत्रहन्ता " के रूप में ज्ञात है ? [ RPSC -- 2018 ]
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11%
वरूण
23%
रूद्र
52%
इन्द्र
11%
विष्णु
4%
अग्नि
🙏4
जैन धर्म के अनुसार कौन - सा ज्ञान " परोक्ष ज्ञान " के अन्तर्गत आता है ?
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9%
मति
12%
अवधि
50%
कैवल्य
21%
मन: पर्याय
7%
आगम
❤3🤗2
शक - कुषाण काल में स्वर्ण तथा रजत मुद्राओं की विनिमय दर क्या थी ?
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25%
1 : 14
33%
1 : 38
22%
8 : 16
6%
9 : 15
13%
16 : 32
🏆4
किस अभिलेख में " परिषद " शब्द का उल्लेख मिलता है ?
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22%
बिलसद अभिलेख
17%
मथुरा अभिलेख
36%
करमदंडा अभिलेख
18%
जूनागढ़ अभिलेख
7%
मनकुंवर अभिलेख
❤5
हालिया अमेरिकी रिपोर्ट के अनुसार, चीन अब अरुणाचल प्रदेश को अपने "Core Interests" (मुख्य हितों) में मानता है।
खतरा क्या है? इसका अर्थ है कि चीन के लिए अरुणाचल अब 'गैर-समझौतावादी' (non-negotiable) है और वह इसे पाने के लिए युद्ध तक कर सकता है। यह एक बड़ा रणनीतिक बदलाव है, क्योंकि चीन ने अब इसे सीधे अपनी "संप्रभुता" से जोड़कर बेहद आक्रामक रुख अपना लिया है।
नीचे पूर्व राजदूत अशोक के. कांथा का विश्लेषण दिया गया है।
इतिहास: चीन गलत क्यों है? चीन दावा करता है कि उसने मैकमोहन रेखा को खारिज कर दिया था, लेकिन तथ्य कुछ और ही साबित करते हैं। 1914 के शिमला सम्मेलन में, तिब्बत एक स्वतंत्र देश था और उसने कानूनी रूप से संधि पर हस्ताक्षर किए थे। यहाँ तक कि चीनी प्रतिनिधि ने भी मसौदे पर हस्ताक्षर (initial) किए थे। उन्होंने अंतिम हस्ताक्षर केवल 'आंतरिक-बाहरी तिब्बत' के बीच सीमा विवाद के कारण रोके थे, न कि भारत-तिब्बत सीमा के कारण"
LAC" का जाल वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) कोई फिक्स लाइन नहीं है; चीन इसका इस्तेमाल एक चाल की तरह करता है। 1959 में, उन्होंने "वास्तविक नियंत्रण" के आधार पर एक रेखा का प्रस्ताव रखा ताकि अक्साई चिन पर अपने अवैध कब्जे को वैध बना सकें, जिसे नेहरू ने खारिज कर दिया। 1956 से, चीन अपनी दावा रेखा को लगातार पश्चिम (भारत) की ओर खिसकाता रहा है। भारत "वॉटरशेड सिद्धांत" (सबसे ऊंची चोटियों) का पालन करता है, जबकि चीन पुराने नक्शों का उपयोग करके चोटियों के दक्षिण में स्थित भूमि का दावा करता है।टूटे वादे: "रणनीतिक अस्पष्टता" (Strategic Ambiguity) भारत ने शांति बनाए रखने और नक्शे साझा करने के लिए 1993 और 1996 के समझौतों पर हस्ताक्षर किए। हालाँकि, 2002 में, चीन ने लद्दाख के नक्शे साझा करने से इनकार कर दिया। यह जानबूझकर अपनाई गई "रणनीतिक अस्पष्टता" है—सीमा को अपरिभाषित रखने से उन्हें तकनीकी रूप से किसी "फिक्स लाइन" को पार किए बिना भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ करने की अनुमति मिलती है।
पैकेज डील" और 2005 की जीत 1980 के दशक में, चीन ने एक "पैकेज डील" (अरुणाचल में यथास्थिति स्वीकारने के बदले लद्दाख में दावे) की पेशकश की थी, लेकिन बाद में वे इससे पीछे हट गए। 2005 में, भारत ने "बसी हुई आबादी" (Settled Populations) के नियम को समझौते में शामिल करवाकर एक बड़ी जीत हासिल की। यह नियम कहता है कि सीमा बसे हुए क्षेत्रों को बाधित नहीं कर सकती, जो कानूनी रूप से तवांग और अरुणाचल के अन्य आबादी वाले हिस्सों को चीनी दावों से सुरक्षित करता है।
ग्रे ज़ोन वारफेयर": एक नया खतरा चीन ने अपनी रणनीति को बातचीत से हटाकर "ग्रे ज़ोन ऑपरेशंस" में बदल दिया है। ये ऐसे आक्रामक कदम हैं जिन्हें वास्तविक युद्ध (War) की सीमा से ठीक नीचे रहते हुए भारत को नुकसान पहुँचाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसमें "सलामी स्लाइसिंग" जैसी युक्तियाँ शामिल हैं—जैसे लद्दाख में "बफर जोन" को धीरे-धीरे हथियाने के लिए चरागाह क्षेत्रों को अवरुद्ध करना, और नामका चू जैसे भूमि के छोटे टुकड़ों पर अवैध नियंत्रण बनाए रखना। इसके अलावा, बीजिंग अपने झूठे दावों को जताने के लिए मनोवैज्ञानिक युद्ध का उपयोग करता है, जैसे अरुणाचल में स्थानों का नाम बदलना (इसे "जांगनान" कहना) और वहां के भारतीय यात्रियों को परेशान करना।☘☘
खतरा क्या है? इसका अर्थ है कि चीन के लिए अरुणाचल अब 'गैर-समझौतावादी' (non-negotiable) है और वह इसे पाने के लिए युद्ध तक कर सकता है। यह एक बड़ा रणनीतिक बदलाव है, क्योंकि चीन ने अब इसे सीधे अपनी "संप्रभुता" से जोड़कर बेहद आक्रामक रुख अपना लिया है।
नीचे पूर्व राजदूत अशोक के. कांथा का विश्लेषण दिया गया है।
इतिहास: चीन गलत क्यों है? चीन दावा करता है कि उसने मैकमोहन रेखा को खारिज कर दिया था, लेकिन तथ्य कुछ और ही साबित करते हैं। 1914 के शिमला सम्मेलन में, तिब्बत एक स्वतंत्र देश था और उसने कानूनी रूप से संधि पर हस्ताक्षर किए थे। यहाँ तक कि चीनी प्रतिनिधि ने भी मसौदे पर हस्ताक्षर (initial) किए थे। उन्होंने अंतिम हस्ताक्षर केवल 'आंतरिक-बाहरी तिब्बत' के बीच सीमा विवाद के कारण रोके थे, न कि भारत-तिब्बत सीमा के कारण"
LAC" का जाल वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) कोई फिक्स लाइन नहीं है; चीन इसका इस्तेमाल एक चाल की तरह करता है। 1959 में, उन्होंने "वास्तविक नियंत्रण" के आधार पर एक रेखा का प्रस्ताव रखा ताकि अक्साई चिन पर अपने अवैध कब्जे को वैध बना सकें, जिसे नेहरू ने खारिज कर दिया। 1956 से, चीन अपनी दावा रेखा को लगातार पश्चिम (भारत) की ओर खिसकाता रहा है। भारत "वॉटरशेड सिद्धांत" (सबसे ऊंची चोटियों) का पालन करता है, जबकि चीन पुराने नक्शों का उपयोग करके चोटियों के दक्षिण में स्थित भूमि का दावा करता है।टूटे वादे: "रणनीतिक अस्पष्टता" (Strategic Ambiguity) भारत ने शांति बनाए रखने और नक्शे साझा करने के लिए 1993 और 1996 के समझौतों पर हस्ताक्षर किए। हालाँकि, 2002 में, चीन ने लद्दाख के नक्शे साझा करने से इनकार कर दिया। यह जानबूझकर अपनाई गई "रणनीतिक अस्पष्टता" है—सीमा को अपरिभाषित रखने से उन्हें तकनीकी रूप से किसी "फिक्स लाइन" को पार किए बिना भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ करने की अनुमति मिलती है।
पैकेज डील" और 2005 की जीत 1980 के दशक में, चीन ने एक "पैकेज डील" (अरुणाचल में यथास्थिति स्वीकारने के बदले लद्दाख में दावे) की पेशकश की थी, लेकिन बाद में वे इससे पीछे हट गए। 2005 में, भारत ने "बसी हुई आबादी" (Settled Populations) के नियम को समझौते में शामिल करवाकर एक बड़ी जीत हासिल की। यह नियम कहता है कि सीमा बसे हुए क्षेत्रों को बाधित नहीं कर सकती, जो कानूनी रूप से तवांग और अरुणाचल के अन्य आबादी वाले हिस्सों को चीनी दावों से सुरक्षित करता है।
ग्रे ज़ोन वारफेयर": एक नया खतरा चीन ने अपनी रणनीति को बातचीत से हटाकर "ग्रे ज़ोन ऑपरेशंस" में बदल दिया है। ये ऐसे आक्रामक कदम हैं जिन्हें वास्तविक युद्ध (War) की सीमा से ठीक नीचे रहते हुए भारत को नुकसान पहुँचाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसमें "सलामी स्लाइसिंग" जैसी युक्तियाँ शामिल हैं—जैसे लद्दाख में "बफर जोन" को धीरे-धीरे हथियाने के लिए चरागाह क्षेत्रों को अवरुद्ध करना, और नामका चू जैसे भूमि के छोटे टुकड़ों पर अवैध नियंत्रण बनाए रखना। इसके अलावा, बीजिंग अपने झूठे दावों को जताने के लिए मनोवैज्ञानिक युद्ध का उपयोग करता है, जैसे अरुणाचल में स्थानों का नाम बदलना (इसे "जांगनान" कहना) और वहां के भारतीय यात्रियों को परेशान करना।☘☘
🙏4❤1
1935 के अधिनियम धारा 203 के तहत संघीय न्यायालय का स्थान होगा ?
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40%
कोलकाता
23%
मद्रास
12%
मुंबई
26%
दिल्ली
👏3❤1
1857 की क्रांति में चिनहाट का युद्ध कब हुआ था?
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11%
30 मई
31%
30 जून
42%
30 जुलाई
14%
30 सितंबर
1%
इनमें से कोई नहीं
👌3❤2
निम्न में से " सत्यमेव जयते " शब्द किस उपनिषद् से लिया गया है ?
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5%
बृहदारण्यक उपनिषद
9%
छान्दोग्योपनिषद
82%
मुण्डकोपनिषद
3%
तैत्तिरीय उपनिषद
1%
कठ उपनिषद
👌4
महावीर स्वामी ने " चतुर्विध संघ " की स्थापना कहाँ की थी ? [ RPSC -- 2018 ]
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8%
पाटलीपुत्र
33%
वैशाली
30%
श्रावस्ती
14%
वल्लभी
15%
पावा
👌5
सुभाष चंद्र बोस किस वर्ष जेल में रहते हुए कलकत्ता के मेयर चुने गए ?
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9%
1920
33%
1925
31%
1930
18%
1935
9%
1940
🙏4❤1
भारतीय राष्ट्रीय क्रांग्रेस में सम्मिलित होने के लिए सुभाष चन्द्र बोस को किसने प्रेरित किया ?
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43%
सी. आर. दास और एम.के. गांधी
18%
जवाहर लाल नेहरू और जयप्रकाश नारायण
14%
राजेंद्र प्रसाद और राजगोपालाचारी
20%
गोपाल कृष्ण गोखले और बाल गंगाधर तिलक
5%
विनोबा भावे और भूलाभाई देसाई
👌2🙏1💯1🏆1