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Proviginel result 2025
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Ugc net answer kay
जून 2026 की answer key जारी हो चुकी है
अगर किसी ने अभी तक chek नहीं की है तो
Windo kal tk ही open hai
https://examinationservices.nic.in/ExamSys26Part2/Root/CandidateLogin.aspx?enc=Ei4cajBkK1gZSfgr53ImFV/yIzhTZHBze3wooSg9Djgija2T1vzGc16BomrI4u26
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history_net_june_2026 provisional.pdf
1.2 MB
UGC NET HISTORY JUNE 2026 solved paper
सभी उत्तर NTA द्वारा 16 अगस्त 2026 को जारी प्रोविजनल आंसर की पर आधारित है
सभी उत्तर NTA द्वारा 16 अगस्त 2026 को जारी प्रोविजनल आंसर की पर आधारित है
वेल्लोर सिपाही विद्रोह (10 जुलाई 1806) के समय मद्रास (चेन्नई) के गवर्नर लॉर्ड विलियम बेंटिंक (Lord William Bentinck) थे।
इस विद्रोह के दौरान सेना के नए नियमों (जैसे धार्मिक चिह्नों पर रोक और विशेष पगड़ी/टोपी पहनना) के कारण विवाद हुआ था। विद्रोह के बाद विलियम बेंटिंक और मद्रास के कमांडर-इन-चीफ सर जॉन क्रेडॉक दोनों को वापस बुला लिया गया था। (नोट: इस समय भारत के गवर्नर-जनरल सर जॉर्ज बार्लो थे, जिसके कारण कई बार परीक्षाओं में गवर्नर-जनरल और मद्रास के गवर्नर को लेकर भ्रम होता है)
इस विद्रोह के दौरान सेना के नए नियमों (जैसे धार्मिक चिह्नों पर रोक और विशेष पगड़ी/टोपी पहनना) के कारण विवाद हुआ था। विद्रोह के बाद विलियम बेंटिंक और मद्रास के कमांडर-इन-चीफ सर जॉन क्रेडॉक दोनों को वापस बुला लिया गया था। (नोट: इस समय भारत के गवर्नर-जनरल सर जॉर्ज बार्लो थे, जिसके कारण कई बार परीक्षाओं में गवर्नर-जनरल और मद्रास के गवर्नर को लेकर भ्रम होता है)
❤3👌1
श्राद्ध हमें याद दिलाता है कि हमारी यात्रा का आरंभ
हमसे नहीं हुआ।
हमसे पूर्व भी कुछ लोग इस धरा पर थे—
कुछ अपनी यात्रा पूरी कर चले गए,
कुछ को असमय जाना पड़ा।
पर हम उनकी कहानी का अंत नहीं,
बल्कि अगला अध्याय हैं।
देखा जाए तो यह शृंखला यूँ ही चलती रहेगी—
समय के साथ पीढ़ियाँ बदलती रहेंगी,
पर स्मृतियों का यह सिलसिला कभी समाप्त नहीं होगा।
और ‘हम थे, हम हैं, हम रहेंगे’—
यह भ्रम भी पीढ़ी-दर-पीढ़ी पलता रहेगा।
हमसे नहीं हुआ।
हमसे पूर्व भी कुछ लोग इस धरा पर थे—
कुछ अपनी यात्रा पूरी कर चले गए,
कुछ को असमय जाना पड़ा।
पर हम उनकी कहानी का अंत नहीं,
बल्कि अगला अध्याय हैं।
देखा जाए तो यह शृंखला यूँ ही चलती रहेगी—
समय के साथ पीढ़ियाँ बदलती रहेंगी,
पर स्मृतियों का यह सिलसिला कभी समाप्त नहीं होगा।
और ‘हम थे, हम हैं, हम रहेंगे’—
यह भ्रम भी पीढ़ी-दर-पीढ़ी पलता रहेगा।
❤14
दो तथ्य स्पस्ट होते है कुम्हार कोई नवीन जाती या शुद्र जाति नही है इनका निकास राजपूत एवम ब्रह्माण वर्ग से ही हुआ है... इसका एक प्रमाण ये है कि क्योंकि इनके गोत्र राजपूत वर्ग से मिलते है
दुसरा तथ्य ये है की प्राचीन काल मे जाति कर्म का आधार थी जो की बाद मे जन्म का आधार बनी......
अंत मे यही कहूँगा कोई जाती छोटी बड़ी नही है सबसे महत्वपूर्ण है इंसान और उसके कर्म.....
दुसरा तथ्य ये है की प्राचीन काल मे जाति कर्म का आधार थी जो की बाद मे जन्म का आधार बनी......
अंत मे यही कहूँगा कोई जाती छोटी बड़ी नही है सबसे महत्वपूर्ण है इंसान और उसके कर्म.....
🔥5
“हम सभी को एक दिन इस सुंदर दुनिया से रुख़सत होना है।
मगर क्या किसी के जाने का वक़्त तय नहीं होता?
क्या उम्र की कोई सीमा तय नहीं होती?
शायद होती है… बस हमें उसका इल्म नहीं होता।
ख़ैर, वक़्त भी तय था और उम्र भी—
तभी तो एक दिन वक़्त का समापन हुआ,
और उम्र का अंत।
इंसान चला जाता है,
मगर उसकी यादें, उसके शब्द और उसका काम इस दुनिया में कुछ देर और ज़िंदा रहते हैं।”
ओम पुरी ,इरफ़ान खान , सिंगर Kk के बाद आपका इस तरह जाना काफी दुःख दाई रहा
नाना पाटेकर जी को सादर नमन
🙏🙏🙏🙏🙏🙏
मगर क्या किसी के जाने का वक़्त तय नहीं होता?
क्या उम्र की कोई सीमा तय नहीं होती?
शायद होती है… बस हमें उसका इल्म नहीं होता।
ख़ैर, वक़्त भी तय था और उम्र भी—
तभी तो एक दिन वक़्त का समापन हुआ,
और उम्र का अंत।
इंसान चला जाता है,
मगर उसकी यादें, उसके शब्द और उसका काम इस दुनिया में कुछ देर और ज़िंदा रहते हैं।”
ओम पुरी ,इरफ़ान खान , सिंगर Kk के बाद आपका इस तरह जाना काफी दुःख दाई रहा
नाना पाटेकर जी को सादर नमन
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आधुनिक भारत की इस पुस्तक में लेखक (शेखर बंधोपाध्याय) ने निष्पक्ष इतिहास लेखन का ढोंग काफी अच्छे से रचा है , प्रारंभ के 3 अध्यायों में उसने बड़े ही रणनीतिक रूप पाठक को अच्छी तरह अपने पक्ष में करने का प्रयास किया है ताकि पाठक उसे मानसिक रूप से शुद्ध निष्पक्ष लेखक होने का सर्टिफिकेट दे देवे और जब पाठक उसे निष्पक्ष मानने लगे तब चौथे अध्याय में उसने अपना असली रूप कुछ हद तक दिखाया है ,जिसे पाठक मुश्किल से ही पहचान पाएगा , संदर्भित पुस्तक में अगर सीधी बात करूं तो रचनाकार ने अंग्रेजी साम्राज्यवाद पर काफी हल्का हाथ रखा है ओर भारतीय परंपरा ओर धर्म पर तीखे हमले किये है ओर हर तरह से नीचा दिखाने का कोई अवसर नहीं छोड़ा है वहीं मुस्लिम ओर ईसाई धर्म पर भी ऐसे कोई कटाक्ष नहीं किए है वरन उनके सिर्फ अच्छे कार्यों का ही पुस्तक में वर्णन किया है , ये में इसलिए तार्किक रूप से पकड़ने में सक्षम हुआ ,जब में खुद को नास्तिक मानता हु अगर यही हथकंडा मुस्लिम/ईसाइयों के विरुद्ध भी अपनाता तो भी शायद एक नास्तिक ही इसे पकड़ने में सक्षम रहता l धार्मिक चश्मा पहनकर लेखक का नजरिया पकड़ना नामुमकिन सा है l
❤5
𝐇𝐢𝐬𝐭𝐨𝐫𝐲 𝐒𝐭𝐮𝐝𝐲 𝐓𝐢𝐦𝐞 ᵁᵍᶜ ⁿᵉᵗ ᴿᵖˢᶜ ᶠⁱʳˢᵗ ᴳʳᵃᵈᵉ
आधुनिक भारत की इस पुस्तक में लेखक (शेखर बंधोपाध्याय) ने निष्पक्ष इतिहास लेखन का ढोंग काफी अच्छे से रचा है , प्रारंभ के 3 अध्यायों में उसने बड़े ही रणनीतिक रूप पाठक को अच्छी तरह अपने पक्ष में करने का प्रयास किया है ताकि पाठक उसे मानसिक रूप से शुद्ध निष्पक्ष…
यह पुस्तक को धार्मिक दृष्टि से दिया गया रिव्यू है , इसके अन्य पक्षों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए , लेखक विक्टोरिया यूनिवर्सिटी , वेलिंग्टन (ब्रिटेन ) का एसोसिएट प्रोफेसर है तो उनसे यही अपेक्षित है l
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