किस वर्ष लाॅर्ड लिटन ने भाषायी आधार पर प्रेस की स्वतंत्रता को प्रतिबंधित कर दिया ?
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13%
1872 ई.
11%
1875 ई.
65%
1878 ई.
7%
1880 ई.
4%
1882 ई.
❤6
निम्नलिखित में से किस वायसराय के काल में भारतीयों को " राय बहादुर " और " खान बहादुर " की उपाधियाँ प्रदान करना आरम्भ हुआ ?
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11%
लाॅर्ड मेयो
27%
लाॅर्ड रिपन
40%
लाॅर्ड लिटन
16%
लाॅर्ड डफरिन
6%
लाॅर्ड हार्डिंग
🙏3❤2
वह कौन प्रथम मुगल शासक था जिसने अकाल के समय किसी प्रकार की सुविधा की व्यवस्था की?
(a) अकबर
(b) जहाँगीर
(c) शाहजहाँ
(d) औरंगजेब
(a) अकबर
(b) जहाँगीर
(c) शाहजहाँ
(d) औरंगजेब
🔥1
निम्न में से " ए नेशन इन मेकिंग " किसकी कृति है ?
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15%
अरविंदो घोष
27%
गोपाल कृष्ण गोखले
17%
जवाहर लाल नेहरू
6%
महात्मा गांधी
34%
सुरेन्द्रनाथ बनर्जी
❤6
निम्न में से ताराबाई शिंदे की " स्त्री - पुरूष तुलना " 1882 पुस्तक मूलत: किस भाषा में प्रकाशित हुई ?
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6%
तमिल
71%
मराठी
13%
उर्दू
8%
संस्कृत
2%
अंग्रेजी
❤5👍1
मजदूरों की कार्यचालन स्थितियों को सुधारने के लिए प्रथम फैक्ट्री अधिनियम कब पारित किया गया ?
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61%
1881 ई.
13%
1884 ई.
19%
1886 ई.
4%
1889 ई.
3%
1892 ई.
❤3👍2
बम्बई में " स्वदेशी वस्तु प्रचारिणी सभा " (1905 ) की स्थापना किसके नेतृत्व में हुई ?
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12%
लाला लाजपत राय
7%
जवाहर लाल नेहरू
33%
आनंद मोहन बोस
36%
बाल गंगाधर तिलक
13%
सतीशचंद्र मुखर्जी
❤5
सत्यार्थ प्रकाश के किस अध्याय में कुरान की कुछ आयतों की समीक्षा की गई है ?
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11%
10 वें
39%
14 वें
37%
18 वें
9%
20 वें
3%
24 वें
❤5
पुरातत्व: अतीत की पहेली को सुलझाने का विज्ञान
पुरातत्व (Archaeology), यूनानी भाषा के दो शब्दों 'Archaios' (पुरातन) और 'Logos' (ज्ञान) से मिलकर बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ है 'पुरातन ज्ञान'। यह वह वैज्ञानिक अध्ययन है जो मानव सभ्यता और संस्कृति के भूतल में दबे अतीत को वैज्ञानिक ढंग से खोजकर, उसका विश्लेषण करके इतिहास प्रस्तुत करता है। पुरातत्वविद्, जिसे 'आर्कियोलॉजिस्ट' भी कहते हैं, धरती के गर्भ में छिपी हुई सामग्रियों—जैसे अभिलेख, सिक्के, स्मारक, भवन, मूर्तियां, औजार, बर्तन, और जीवाश्म—की खुदाई और अध्ययन कर प्राचीन काल के लोगों के भौतिक जीवन, रीति-रिवाजों और सामाजिक संरचना का ज्ञान प्राप्त करते हैं।
पुरातत्व का महत्व
पुरातत्व का महत्व कई मायनों में अतुलनीय है:
* अज्ञात इतिहास का अनावरण: यह उन मानव अतीत के पहलुओं को उजागर करता है जिनके बारे में कोई लिखित जानकारी उपलब्ध नहीं है, विशेष रूप से प्रागैतिहासिक काल (Prehistoric period) के लिए जब लेखन कला का विकास नहीं हुआ था। लौह युग या पाषाण युग का इतिहास पुरातत्व पर ही निर्भर करता है।
* लिखित इतिहास की पुष्टि: यह ऐतिहासिक काल के लिखित साक्ष्यों (जैसे ग्रंथों) को भौतिक सामग्री प्रदान करता है, जिससे लिखित इतिहास की पुष्टि होती है और एक अधिक वास्तविक तथा प्रामाणिक इतिहास का सृजन होता है।
* सांस्कृतिक विकास को समझना: पुरातात्विक अवशेषों के माध्यम से विभिन्न 'पुरातात्विक संस्कृतियों' (Archaeological Cultures) को परिभाषित किया जाता है। ये अवशेष हमें मानव संस्कृति में आए क्रमिक परिवर्तनों, नवाचारों, और तकनीकी विकास को समझने में मदद करते हैं।
* मानव व्यवहार का सूक्ष्म ज्ञान: लिखित साक्ष्यों में अक्सर सामान्य लोगों की गतिविधियाँ गौण होती हैं, लेकिन पुरातत्व के माध्यम से दैनिक जीवन में प्रयुक्त वस्तुओं का ज्ञान होता है, जिससे हमें मानव अतीत के सूक्ष्म विषयों और आम जनजीवन को समझने में सहायता मिलती है।
पुरातत्व के स्रोत
पुरातत्व के अध्ययन में मुख्य रूप से निम्नलिखित पुरातात्विक स्रोतों का उपयोग किया जाता है:
* अभिलेख (Inscriptions): ये स्तम्भों, शिलाओं, ताम्रपत्रों, मुद्राओं, और गुफाओं में खुदे हुए मिलते हैं। ये किसी कालखंड की राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक जानकारी का महत्वपूर्ण स्रोत होते हैं।
* स्मारक और भवन (Monuments and Buildings): प्राचीन भवन, किले, मंदिर, स्तूप आदि किसी सभ्यता की वास्तुकला, कला और धार्मिक विश्वासों को दर्शाते हैं।
* मूर्तियां और चित्रकला (Sculptures and Paintings): ये कलात्मक कृतियाँ किसी समाज के सौंदर्य बोध, देवी-देवताओं और पहनावे की जानकारी देती हैं।
* सिक्के (Coins): ये शासकों के नाम, शासनकाल, आर्थिक स्थिति और धातु विज्ञान के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देते हैं।
* उत्खनन से प्राप्त पुरावस्तुएँ (Excavated Artifacts): इनमें मिट्टी के बर्तन, औजार, गहने, हथियार और अन्य घरेलू सामान शामिल हैं, जो प्राचीन लोगों के रहन-सहन और तकनीक की जानकारी देते हैं।
अध्ययन की विधियाँ
पुरातत्व के अध्ययन में कई वैज्ञानिक विधियों का प्रयोग किया जाता है:
* उत्खनन (Excavation): यह सबसे महत्वपूर्ण विधि है जिसमें व्यवस्थित तरीके से भूमि की खुदाई कर प्राचीन अवशेषों को निकाला जाता है।
* काल निर्धारण (Dating): अवशेषों की आयु जानने के लिए कार्बन-14 विधि (Carbon-14 Dating) और अन्य वैज्ञानिक तरीकों का उपयोग किया जाता है।
* सर्वेक्षण (Survey): उत्खनन से पहले संभावित पुरातात्विक स्थलों की पहचान के लिए भूगर्भीय राडार (Ground Penetrating Radar) और हवाई फोटोग्राफी जैसी तकनीकें इस्तेमाल होती हैं।
पुरातत्व केवल खुदाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानव विज्ञान, इतिहास, भूविज्ञान, रसायन विज्ञान और सांख्यिकी जैसे कई अन्य विषयों पर भी निर्भर करता है, जिससे यह एक अंतर-अनुशासनात्मक विज्ञान (Inter-disciplinary Science) बन जाता है। भारत में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) इस क्षेत्र में प्रमुख संस्था है।
संक्षेप में, पुरातत्व एक ऐसी रोमांचक खिड़की है जो हमें हमारे पूर्वजों के जीवन और उनकी महान उपलब्धियों को समझने का अवसर प्रदान करती है, और यह सुनिश्चित करती है कि अतीत की कहानियाँ समय के साथ लुप्त न हो जाएँ।
पुरातत्व (Archaeology), यूनानी भाषा के दो शब्दों 'Archaios' (पुरातन) और 'Logos' (ज्ञान) से मिलकर बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ है 'पुरातन ज्ञान'। यह वह वैज्ञानिक अध्ययन है जो मानव सभ्यता और संस्कृति के भूतल में दबे अतीत को वैज्ञानिक ढंग से खोजकर, उसका विश्लेषण करके इतिहास प्रस्तुत करता है। पुरातत्वविद्, जिसे 'आर्कियोलॉजिस्ट' भी कहते हैं, धरती के गर्भ में छिपी हुई सामग्रियों—जैसे अभिलेख, सिक्के, स्मारक, भवन, मूर्तियां, औजार, बर्तन, और जीवाश्म—की खुदाई और अध्ययन कर प्राचीन काल के लोगों के भौतिक जीवन, रीति-रिवाजों और सामाजिक संरचना का ज्ञान प्राप्त करते हैं।
पुरातत्व का महत्व
पुरातत्व का महत्व कई मायनों में अतुलनीय है:
* अज्ञात इतिहास का अनावरण: यह उन मानव अतीत के पहलुओं को उजागर करता है जिनके बारे में कोई लिखित जानकारी उपलब्ध नहीं है, विशेष रूप से प्रागैतिहासिक काल (Prehistoric period) के लिए जब लेखन कला का विकास नहीं हुआ था। लौह युग या पाषाण युग का इतिहास पुरातत्व पर ही निर्भर करता है।
* लिखित इतिहास की पुष्टि: यह ऐतिहासिक काल के लिखित साक्ष्यों (जैसे ग्रंथों) को भौतिक सामग्री प्रदान करता है, जिससे लिखित इतिहास की पुष्टि होती है और एक अधिक वास्तविक तथा प्रामाणिक इतिहास का सृजन होता है।
* सांस्कृतिक विकास को समझना: पुरातात्विक अवशेषों के माध्यम से विभिन्न 'पुरातात्विक संस्कृतियों' (Archaeological Cultures) को परिभाषित किया जाता है। ये अवशेष हमें मानव संस्कृति में आए क्रमिक परिवर्तनों, नवाचारों, और तकनीकी विकास को समझने में मदद करते हैं।
* मानव व्यवहार का सूक्ष्म ज्ञान: लिखित साक्ष्यों में अक्सर सामान्य लोगों की गतिविधियाँ गौण होती हैं, लेकिन पुरातत्व के माध्यम से दैनिक जीवन में प्रयुक्त वस्तुओं का ज्ञान होता है, जिससे हमें मानव अतीत के सूक्ष्म विषयों और आम जनजीवन को समझने में सहायता मिलती है।
पुरातत्व के स्रोत
पुरातत्व के अध्ययन में मुख्य रूप से निम्नलिखित पुरातात्विक स्रोतों का उपयोग किया जाता है:
* अभिलेख (Inscriptions): ये स्तम्भों, शिलाओं, ताम्रपत्रों, मुद्राओं, और गुफाओं में खुदे हुए मिलते हैं। ये किसी कालखंड की राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक जानकारी का महत्वपूर्ण स्रोत होते हैं।
* स्मारक और भवन (Monuments and Buildings): प्राचीन भवन, किले, मंदिर, स्तूप आदि किसी सभ्यता की वास्तुकला, कला और धार्मिक विश्वासों को दर्शाते हैं।
* मूर्तियां और चित्रकला (Sculptures and Paintings): ये कलात्मक कृतियाँ किसी समाज के सौंदर्य बोध, देवी-देवताओं और पहनावे की जानकारी देती हैं।
* सिक्के (Coins): ये शासकों के नाम, शासनकाल, आर्थिक स्थिति और धातु विज्ञान के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देते हैं।
* उत्खनन से प्राप्त पुरावस्तुएँ (Excavated Artifacts): इनमें मिट्टी के बर्तन, औजार, गहने, हथियार और अन्य घरेलू सामान शामिल हैं, जो प्राचीन लोगों के रहन-सहन और तकनीक की जानकारी देते हैं।
अध्ययन की विधियाँ
पुरातत्व के अध्ययन में कई वैज्ञानिक विधियों का प्रयोग किया जाता है:
* उत्खनन (Excavation): यह सबसे महत्वपूर्ण विधि है जिसमें व्यवस्थित तरीके से भूमि की खुदाई कर प्राचीन अवशेषों को निकाला जाता है।
* काल निर्धारण (Dating): अवशेषों की आयु जानने के लिए कार्बन-14 विधि (Carbon-14 Dating) और अन्य वैज्ञानिक तरीकों का उपयोग किया जाता है।
* सर्वेक्षण (Survey): उत्खनन से पहले संभावित पुरातात्विक स्थलों की पहचान के लिए भूगर्भीय राडार (Ground Penetrating Radar) और हवाई फोटोग्राफी जैसी तकनीकें इस्तेमाल होती हैं।
पुरातत्व केवल खुदाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानव विज्ञान, इतिहास, भूविज्ञान, रसायन विज्ञान और सांख्यिकी जैसे कई अन्य विषयों पर भी निर्भर करता है, जिससे यह एक अंतर-अनुशासनात्मक विज्ञान (Inter-disciplinary Science) बन जाता है। भारत में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) इस क्षेत्र में प्रमुख संस्था है।
संक्षेप में, पुरातत्व एक ऐसी रोमांचक खिड़की है जो हमें हमारे पूर्वजों के जीवन और उनकी महान उपलब्धियों को समझने का अवसर प्रदान करती है, और यह सुनिश्चित करती है कि अतीत की कहानियाँ समय के साथ लुप्त न हो जाएँ।
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𝐇𝐢𝐬𝐭𝐨𝐫𝐲 𝐒𝐭𝐮𝐝𝐲 𝐓𝐢𝐦𝐞 ᵁᵍᶜ ⁿᵉᵗ ᴿᵖˢᶜ ᶠⁱʳˢᵗ ᴳʳᵃᵈᵉ pinned «पुरातत्व: अतीत की पहेली को सुलझाने का विज्ञान पुरातत्व (Archaeology), यूनानी भाषा के दो शब्दों 'Archaios' (पुरातन) और 'Logos' (ज्ञान) से मिलकर बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ है 'पुरातन ज्ञान'। यह वह वैज्ञानिक अध्ययन है जो मानव सभ्यता और संस्कृति के भूतल में दबे…»
निम्न में से " बंदी जीवन " किस क्रांतिकारी की रचना है ?
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11%
सरदार भगत सिंह
8%
सूर्यसेन
19%
खुदीराम बोस
55%
शचींद्रनाथ सान्याल
7%
जतिन दास
❤2👍2