हङप्पाई संदर्भ में निम्नलिखित में से किन स्थलों पर बेलनाकार प्रस्तर ड्रिल प्राप्त हुई है ? [ NET --2024 ]
A.) चन्हूदङो B.) हङप्पा C.) मोहनजोदङो D.) धौलावीरा E.) कालीबंगा
A.) चन्हूदङो B.) हङप्पा C.) मोहनजोदङो D.) धौलावीरा E.) कालीबंगा
Anonymous Quiz
8%
1.) केवल A , B और E
30%
2.) केवल B , C और E
48%
3.) केवल A , B , C और D
13%
4.) केवल A , C और E
🙏2👏1🏆1
9 वीं सदी में चन्देल तथा कलचुरी द्वारा जीते गए क्षेत्रों की पहचान कीजिए ? [ NET -- 2024 ]
A.) कर्नाटा B.) गौङ C.) राढ़ D.) अंग E.) वंग
A.) कर्नाटा B.) गौङ C.) राढ़ D.) अंग E.) वंग
Anonymous Quiz
16%
1.) केवल A , B , C , D
34%
2.) केवल B , C , D , E
25%
3.) केवल A , C , D , E
24%
4.) केवल A , B , C , D , E
👌2🙏1💯1
भारतीय इतिहास – आरम्भ से आज़ादी तक (PSP-History)
अगर आप प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC, RPSC, REET, Patwar, Police, SSC आदि) की तैयारी कर रहे हैं और भारतीय इतिहास के लिए एक विश्वसनीय, संक्षिप्त और परीक्षा-उपयोगी पुस्तक ढूंढ रहे हैं, तो पप्पू सिंह प्रजापत द्वारा लिखित यह पुस्तक आपके लिए एक संपूर्ण समाधान है।
⭐ इस पुस्तक की विशेषताएँ
प्राचीन काल से 1947 तक भारतीय इतिहास का क्रमबद्ध और स्पष्ट वर्णन
NCERT (6th–12th, Old + New) का वैज्ञानिक और सटीक समावेश
तथ्य, तिथियाँ और अवधारणाएँ परीक्षा-केन्द्रित शैली में
नवीनतम परीक्षा पैटर्न के अनुसार विषयों की प्रस्तुति
इतिहास से अधिकतम प्रश्न आने वाले टॉपिक्स पर विशेष फोकस
“आजादी के बाद भारत (1947–2000)” पर अलग से उपयोगी अध्याय
✍️ लेखन शैली
लेखकों की भाषा सरल, प्रभावी और सीधे मुद्दे पर है, जिससे विषय जल्दी समझ में आता है और लंबे समय तक याद रहता है। जटिल ऐतिहासिक घटनाओं को भी आसान शब्दों में समझाया गया है।
🎯 किसके लिए उपयोगी
प्रथम बार इतिहास पढ़ने वाले विद्यार्थी
रिवीजन और फैक्ट-बेस्ड तैयारी चाहने वाले अभ्यर्थी
राज्य व केंद्र स्तरीय सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के उम्मीदवार
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तथ्य, तिथियाँ और अवधारणाएँ परीक्षा-केन्द्रित शैली में
नवीनतम परीक्षा पैटर्न के अनुसार विषयों की प्रस्तुति
इतिहास से अधिकतम प्रश्न आने वाले टॉपिक्स पर विशेष फोकस
“आजादी के बाद भारत (1947–2000)” पर अलग से उपयोगी अध्याय
✍️ लेखन शैली
लेखकों की भाषा सरल, प्रभावी और सीधे मुद्दे पर है, जिससे विषय जल्दी समझ में आता है और लंबे समय तक याद रहता है। जटिल ऐतिहासिक घटनाओं को भी आसान शब्दों में समझाया गया है।
🎯 किसके लिए उपयोगी
प्रथम बार इतिहास पढ़ने वाले विद्यार्थी
रिवीजन और फैक्ट-बेस्ड तैयारी चाहने वाले अभ्यर्थी
राज्य व केंद्र स्तरीय सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के उम्मीदवार
❤9
विमकड फैसिस (विमकड फैसिस) के सिंहासन पर बैठे राजमणिक की विशाल मूर्ति कहाँ से प्राप्त हुई?
👉 इस विशाल प्रतिमा को मथुरा के इटोकरी स्थल से प्राप्त किया गया है।
यह मूर्ति कुषाण काल से संबंधित है और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है।
📌 सारांश:
मथुरा संग्रहालय में प्रदर्शित कला और मूर्तियों में फैसिस के सिंहासन पर विराजमान राजमणिक की विशाल मूर्ति भी शामिल है।
यह प्रतिमा इटोकरी (मथुरा) से खोजी गई थी।
👉 इस विशाल प्रतिमा को मथुरा के इटोकरी स्थल से प्राप्त किया गया है।
यह मूर्ति कुषाण काल से संबंधित है और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है।
📌 सारांश:
मथुरा संग्रहालय में प्रदर्शित कला और मूर्तियों में फैसिस के सिंहासन पर विराजमान राजमणिक की विशाल मूर्ति भी शामिल है।
यह प्रतिमा इटोकरी (मथुरा) से खोजी गई थी।
हेरोडोटस (Herodotus)
हेरोडोटस को “इतिहास का जनक (Father of History)” कहा जाता है।
उनका जन्म लगभग 484 ई.पू. में हैलीकार्नासस (एशिया माइनर) में हुआ था।
उनकी प्रसिद्ध कृति Histories है।
इस ग्रंथ में उन्होंने यूनान-ईरान (ग्रीको-पर्शियन) युद्धों का विस्तृत वर्णन किया है।
हेरोडोटस ने इतिहास लेखन में यात्राओं, मौखिक कथाओं और प्रत्यक्ष निरीक्षण का प्रयोग किया।
वे घटनाओं के साथ-साथ भूगोल, समाज, संस्कृति और परंपराओं का भी वर्णन करते हैं।
उनके लेखन में कथात्मक शैली अधिक है, इसलिए कभी-कभी किंवदंतियाँ भी मिलती हैं।
इसके बावजूद, उन्होंने इतिहास को व्यवस्थित रूप से लिखने की परंपरा की शुरुआत की।
हेरोडोटस को “इतिहास का जनक (Father of History)” कहा जाता है।
उनका जन्म लगभग 484 ई.पू. में हैलीकार्नासस (एशिया माइनर) में हुआ था।
उनकी प्रसिद्ध कृति Histories है।
इस ग्रंथ में उन्होंने यूनान-ईरान (ग्रीको-पर्शियन) युद्धों का विस्तृत वर्णन किया है।
हेरोडोटस ने इतिहास लेखन में यात्राओं, मौखिक कथाओं और प्रत्यक्ष निरीक्षण का प्रयोग किया।
वे घटनाओं के साथ-साथ भूगोल, समाज, संस्कृति और परंपराओं का भी वर्णन करते हैं।
उनके लेखन में कथात्मक शैली अधिक है, इसलिए कभी-कभी किंवदंतियाँ भी मिलती हैं।
इसके बावजूद, उन्होंने इतिहास को व्यवस्थित रूप से लिखने की परंपरा की शुरुआत की।
❤7
प्रबोध चन्द्रोदय (Prabodha Chandrodaya)
प्रबोध चन्द्रोदय एक प्रसिद्ध संस्कृत नाटक (रूपक) है।
इसके रचयिता कृष्णमिश्र (Krishnamishra) हैं।
इसकी रचना लगभग 11वीं शताब्दी में मानी जाती है।
यह नाटक रूपकात्मक (Allegorical) शैली में लिखा गया है।
इसमें ज्ञान (प्रबोध) को चन्द्रमा के उदय के रूप में दिखाया गया है।
नाटक में पात्र अमूर्त हैं, जैसे—
विवेक (बुद्धि)
अविद्या (अज्ञान)
मोह
काम
ज्ञान
इसका मुख्य उद्देश्य वेदांत दर्शन और आत्मिक ज्ञान का प्रचार करना है।
यह ग्रंथ संस्कृत साहित्य और दर्शन—दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
प्रबोध चन्द्रोदय एक प्रसिद्ध संस्कृत नाटक (रूपक) है।
इसके रचयिता कृष्णमिश्र (Krishnamishra) हैं।
इसकी रचना लगभग 11वीं शताब्दी में मानी जाती है।
यह नाटक रूपकात्मक (Allegorical) शैली में लिखा गया है।
इसमें ज्ञान (प्रबोध) को चन्द्रमा के उदय के रूप में दिखाया गया है।
नाटक में पात्र अमूर्त हैं, जैसे—
विवेक (बुद्धि)
अविद्या (अज्ञान)
मोह
काम
ज्ञान
इसका मुख्य उद्देश्य वेदांत दर्शन और आत्मिक ज्ञान का प्रचार करना है।
यह ग्रंथ संस्कृत साहित्य और दर्शन—दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
❤5
काव्य मीमांसा (Kāvya Mīmāṃsā)
काव्य मीमांसा एक महत्वपूर्ण संस्कृत काव्यशास्त्र ग्रंथ है।
इसके रचयिता राजशेखर (Rājaśekhara) हैं।
इसकी रचना लगभग 10वीं शताब्दी ई. में मानी जाती है।
यह ग्रंथ कवि और काव्य-निर्माण की प्रक्रिया पर केंद्रित है।
इसमें कवि-प्रतिभा (काव्य-प्रतिभा), शिक्षा, अभ्यास, और अनुभव पर बल दिया गया है।
राजशेखर ने काव्य-सृजन में प्रतिभा और अभ्यास—दोनों को आवश्यक माना है।
इस ग्रंथ में कवि के गुण-दोष, काव्य-भाषा, और काव्य-परंपरा की चर्चा मिलती है।
काव्य मीमांसा को काव्यशास्त्र का एक मौलिक और सैद्धांतिक ग्रंथ माना जाता है।
काव्य मीमांसा एक महत्वपूर्ण संस्कृत काव्यशास्त्र ग्रंथ है।
इसके रचयिता राजशेखर (Rājaśekhara) हैं।
इसकी रचना लगभग 10वीं शताब्दी ई. में मानी जाती है।
यह ग्रंथ कवि और काव्य-निर्माण की प्रक्रिया पर केंद्रित है।
इसमें कवि-प्रतिभा (काव्य-प्रतिभा), शिक्षा, अभ्यास, और अनुभव पर बल दिया गया है।
राजशेखर ने काव्य-सृजन में प्रतिभा और अभ्यास—दोनों को आवश्यक माना है।
इस ग्रंथ में कवि के गुण-दोष, काव्य-भाषा, और काव्य-परंपरा की चर्चा मिलती है।
काव्य मीमांसा को काव्यशास्त्र का एक मौलिक और सैद्धांतिक ग्रंथ माना जाता है।
👍4
निम्नलिखित में से किस ग्रंथ में तत्कालीन प्रशासन में भ्रष्टाचार पर प्रकाश पङता है ?
Anonymous Quiz
45%
मृच्छकटिकम
25%
मालविकाग्निमित्र
9%
रत्नावली
12%
कर्पूरमंजरी
9%
स्वप्नवासवदत्ता
❤6
निम्नलिखित में से किसने सीलोन के बौद्ध राजा मेघवर्मन को बोधगया में विहार बनाने की अनुमति थी ? [ RPSC -- 2016 ]
Anonymous Quiz
15%
चन्द्रगुप्त द्वितीय
16%
स्कन्दगुप्त
43%
समुद्रगुप्त
19%
कुमारगुप्त
6%
बुद्धगुप्त
❤7
Assistant Professor GK टिक वाला पेपर.pdf
24 MB
🧶 असिस्टेंट प्रोफेसर एग्जाम 🤩
- RPSC द्वारा आज जारी उत्तर कुंजी की सहायता से सॉल्वड प्रश्न पत्र: राजस्थान का सामान्य ज्ञान 🥰
https://t.me/Historystudytime
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https://t.me/Historystudytime
👍4
किस बौद्ध ग्रंथ के अनुसार बुद्ध के समय उत्तर भारत में 60 नगर थे ?
Anonymous Quiz
21%
दीघ निकाय
24%
दीपवंश
31%
अशोकावदान
13%
बावेरू जातक
10%
ब्रहाजाल सुत्त
❤6
निम्नलिखित में से कौन -- सी दण्डि की एक रचना है जिसमें पल्लव शासक सिंहविष्णु के काल की घटनाओं की जानकारी मिलती है ?
Anonymous Quiz
5%
लोक विभाग
47%
अवन्तिसुन्दरीकथा
25%
नन्दिक्कलम्बकम
15%
विद्धशालभंजिका
8%
नवसहसाँकचरित
🏆5❤1😍1
सातवाहन शासक हाल के समय संस्कृत व्याकरण ग्रंथ " कातंत्र " की रचना करने वाला विद्वान कौन था ?
Anonymous Quiz
28%
सर्ववमन
33%
गुणाढ्य
28%
कृष्णमिश्र
8%
शोड्ढल
3%
सुबन्धु
❤4💯2
निम्न में से " कायस्थ " शब्द का उल्लेख सर्वप्रथम किस स्मृति में मिलता है ?
Anonymous Quiz
9%
नारद स्मृति
21%
पराशर स्मृति
55%
याज्ञवल्क्य स्मृति
12%
मनु स्मृति
2%
विष्णु स्मृति
👌4❤1
आचार्य अतीश (Atisha Dipankara Shrijnana)
संक्षेप में जानकारी:
पूरा नाम: अतीश दीपंकर श्रीज्ञान
काल: 11वीं शताब्दी
पद: विक्रमशीला महाविहार के प्रधान आचार्य
योगदान: बौद्ध दर्शन के महान विद्वान; तिब्बत में बौद्ध धर्म के पुनरुत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका
प्रसिद्ध ग्रंथ: बोधिपथ प्रदीप
संक्षेप में जानकारी:
पूरा नाम: अतीश दीपंकर श्रीज्ञान
काल: 11वीं शताब्दी
पद: विक्रमशीला महाविहार के प्रधान आचार्य
योगदान: बौद्ध दर्शन के महान विद्वान; तिब्बत में बौद्ध धर्म के पुनरुत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका
प्रसिद्ध ग्रंथ: बोधिपथ प्रदीप
❤7
बौद्ध धर्म का “लघु विश्वकोश”
👉 अभिधर्मकोश (Abhidharmakośa) को कहा जाता है।
इसके लेखक वासुबंधु (Vasubandhu) थे।
यह बौद्ध दर्शन की शिक्षाओं का संक्षिप्त और व्यवस्थित ग्रंथ है,
इसलिए इसे बौद्ध धर्म का लघु विश्वकोश कहा जाता है।
👉 अभिधर्मकोश (Abhidharmakośa) को कहा जाता है।
इसके लेखक वासुबंधु (Vasubandhu) थे।
यह बौद्ध दर्शन की शिक्षाओं का संक्षिप्त और व्यवस्थित ग्रंथ है,
इसलिए इसे बौद्ध धर्म का लघु विश्वकोश कहा जाता है।