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यह तप नहीं, तपस्या है,
यह लक्ष्य नहीं, साधना है।
यह पढ़ाई नहीं, आत्म-विकास है,
और UPSC – सिर्फ एक परीक्षा नहीं,
बल्कि खुद को साबित करने की पराकाष्ठा है।✨
यह लक्ष्य नहीं, साधना है।
यह पढ़ाई नहीं, आत्म-विकास है,
और UPSC – सिर्फ एक परीक्षा नहीं,
बल्कि खुद को साबित करने की पराकाष्ठा है।✨
❤151👍15💯11👏3🔥2🎉2🥰1
जब जिंदगी में सबकुछ बुरा हो रहा हो, कोई
उम्मीद की किरण नजर नहीं आ
रही हो तो, आपको कुछ नया सीखना होगा. कुछ
पुरानी आदतों को छोड़ना होगा, कुछ रिश्तों को तोड़ना होगा, कुछ
नए रिश्ते जोड़ने होंगे, रास्ते बदलने होंगे, नई राह बनानी
होगी, अपनी कमजोरियों को ताकत बनाना होगा, खुद
को खुद ही प्रेरित करना होगा।
🌺😇📚😎🙏
𝐉𝐨𝐢𝐧📚👇
꧁☆*@iasipsmotivation*☆꧂
उम्मीद की किरण नजर नहीं आ
रही हो तो, आपको कुछ नया सीखना होगा. कुछ
पुरानी आदतों को छोड़ना होगा, कुछ रिश्तों को तोड़ना होगा, कुछ
नए रिश्ते जोड़ने होंगे, रास्ते बदलने होंगे, नई राह बनानी
होगी, अपनी कमजोरियों को ताकत बनाना होगा, खुद
को खुद ही प्रेरित करना होगा।
आपका दिन मंगलमय हो।..... 🌺😇📚😎🙏
𝐉𝐨𝐢𝐧📚👇
꧁☆*@iasipsmotivation*☆꧂
❤132🔥19💯13👏5👍3
कलयुग के मनुष्य कैसे होंगे? कलयुग के लोग कैसे होंगे? कलयुग की स्त्रियां कैसी होंगी? वह सारा वर्णन इस अध्याय में किया गया है तो आज इस लेख में हम आपको वह बताते हैं।
घोर कलयुग आने पर मनुष्य पुण्य कर्म से दूर रहेंगे। दुराचार में फंस जाएंगे और सब के सब सत्य भाषण से मुंह फेर लेंगे। दूसरों की निंदा में तत्पर होंगे। कलयुग में लोग पराए धन को हड़पने की इच्छा करेंगे। उनका मन पराई स्त्रियों में आसक्त होगा और वे दूसरे प्राणियों की हिंसा करेंगे। अपने शरीर को ही आत्मा समझेंगे। नास्तिक, मुर्ख और पशु बुद्धि रखने वाले होंगे। माता-पिता से द्वेष करेंगे। ब्राह्मण लोभ रूपी ग्राह के ग्रास बन जाएंगे। वेद बेचकर जीविका चलाएंगे। धन का उपार्जन करने के लिए ही विद्या का अभ्यास करेंगे और मद से मोहित रहेंगे। ब्राह्मण अपनी ही जाति के कर्म को छोड़ देगा। ब्राह्मण दूसरों को ठगने वाला होगा। तीनों काल के संध्या उपासना से दूर रहेगा और उससे ब्रह्म ज्ञान का कोई भी कुछ भी पता नहीं होगा।
समस्त क्षत्रिय अपने धर्म का त्याग कर देंगे। कुसंगी, पापी और व्यभिचारी हो जाएंगे। उनमें वीरता का अभाव होगा। वह शूद्रों सा बर्ताव करेंगे। और उनका चित्त काम का किंकर बना रहेगा। वैश्य संस्कार से भ्रष्ट हो जाएंगे। स्वधर्म त्यागी होंगे। धन उपार्जन परायण तथा नापतोल में अपनी धूर्तता का परिचय देने वाले होंगे। इसी तरह शुद्र ब्राह्मणों के आचार्य में तत्पर हो जाएंगे। उनकी आकृति उज्जवल होगी। वह अपना कर्म धर्म छोड़कर उज्जवल वेशभूषा से विस्मित होकर घूमेंगे। वे स्वभाव से अपने धर्म का त्याग कर देंगे और उनके विचार धर्म के प्रतिकूल होंगे। कुटिल और ब्राह्मणों के निंदक होंगे। यदि धनी भी हो गए तो कुमार्ग में उनका धन लगेगा। अगर विद्वान हुए तो वाद-विवाद करने वाले होंगे। अपने को कुलीन मानकर चारों वर्णों के साथ वैवाहिक संबंध स्थापित करेंगे। समस्त गणों को अपने संपर्क से भ्रष्ट करेंगे।
कलयुग की स्त्रियां अपने सदाचार से भ्रष्ट होगी और पति का अपमान करने वाले होगी। अपने सास और ससुर से द्रोह करेगी। किसी का कहा नहीं मानेगी। मलिन भोजन करेगी। कुत्सित हाव भाव में तत्पर होगी। उसका शील स्वभाव बहुत बुरा होगा और वह अपने पति की सेवा से सदा ही विमुख रहेगी। सूत जी ! इस तरह जिनकी बुद्धि नष्ट हो गई है जिन्होंने अपने धर्म का त्याग कर दिया है। ऐसे लोगों को पृथ्वी लोक और परलोक दोनों में उत्तम गति कैसे प्राप्त होगी? इसी चिंता से हमारा मन सदा व्याकुल रहता है। परोपकार के समान दूसरा कोई धर्म नहीं है अतः इस छोटे से उपाय से इन सब के पापों का तत्काल नाश हो जाए उसे इस समय कृपा पूर्वक बतलाइए क्योंकि आप समस्त सिद्धांतों के ज्ञाता है। मुनियों की यह बात सुनकर सूतजी ने मन ही मन भगवान शंकर का स्मरण किया और उन सारे ऋषियों को शिव पुराण सुनाने का निश्चय किया।
🌹 श्री शिवाय नमस्तुभ्यं 🙏
घोर कलयुग आने पर मनुष्य पुण्य कर्म से दूर रहेंगे। दुराचार में फंस जाएंगे और सब के सब सत्य भाषण से मुंह फेर लेंगे। दूसरों की निंदा में तत्पर होंगे। कलयुग में लोग पराए धन को हड़पने की इच्छा करेंगे। उनका मन पराई स्त्रियों में आसक्त होगा और वे दूसरे प्राणियों की हिंसा करेंगे। अपने शरीर को ही आत्मा समझेंगे। नास्तिक, मुर्ख और पशु बुद्धि रखने वाले होंगे। माता-पिता से द्वेष करेंगे। ब्राह्मण लोभ रूपी ग्राह के ग्रास बन जाएंगे। वेद बेचकर जीविका चलाएंगे। धन का उपार्जन करने के लिए ही विद्या का अभ्यास करेंगे और मद से मोहित रहेंगे। ब्राह्मण अपनी ही जाति के कर्म को छोड़ देगा। ब्राह्मण दूसरों को ठगने वाला होगा। तीनों काल के संध्या उपासना से दूर रहेगा और उससे ब्रह्म ज्ञान का कोई भी कुछ भी पता नहीं होगा।
समस्त क्षत्रिय अपने धर्म का त्याग कर देंगे। कुसंगी, पापी और व्यभिचारी हो जाएंगे। उनमें वीरता का अभाव होगा। वह शूद्रों सा बर्ताव करेंगे। और उनका चित्त काम का किंकर बना रहेगा। वैश्य संस्कार से भ्रष्ट हो जाएंगे। स्वधर्म त्यागी होंगे। धन उपार्जन परायण तथा नापतोल में अपनी धूर्तता का परिचय देने वाले होंगे। इसी तरह शुद्र ब्राह्मणों के आचार्य में तत्पर हो जाएंगे। उनकी आकृति उज्जवल होगी। वह अपना कर्म धर्म छोड़कर उज्जवल वेशभूषा से विस्मित होकर घूमेंगे। वे स्वभाव से अपने धर्म का त्याग कर देंगे और उनके विचार धर्म के प्रतिकूल होंगे। कुटिल और ब्राह्मणों के निंदक होंगे। यदि धनी भी हो गए तो कुमार्ग में उनका धन लगेगा। अगर विद्वान हुए तो वाद-विवाद करने वाले होंगे। अपने को कुलीन मानकर चारों वर्णों के साथ वैवाहिक संबंध स्थापित करेंगे। समस्त गणों को अपने संपर्क से भ्रष्ट करेंगे।
कलयुग की स्त्रियां अपने सदाचार से भ्रष्ट होगी और पति का अपमान करने वाले होगी। अपने सास और ससुर से द्रोह करेगी। किसी का कहा नहीं मानेगी। मलिन भोजन करेगी। कुत्सित हाव भाव में तत्पर होगी। उसका शील स्वभाव बहुत बुरा होगा और वह अपने पति की सेवा से सदा ही विमुख रहेगी। सूत जी ! इस तरह जिनकी बुद्धि नष्ट हो गई है जिन्होंने अपने धर्म का त्याग कर दिया है। ऐसे लोगों को पृथ्वी लोक और परलोक दोनों में उत्तम गति कैसे प्राप्त होगी? इसी चिंता से हमारा मन सदा व्याकुल रहता है। परोपकार के समान दूसरा कोई धर्म नहीं है अतः इस छोटे से उपाय से इन सब के पापों का तत्काल नाश हो जाए उसे इस समय कृपा पूर्वक बतलाइए क्योंकि आप समस्त सिद्धांतों के ज्ञाता है। मुनियों की यह बात सुनकर सूतजी ने मन ही मन भगवान शंकर का स्मरण किया और उन सारे ऋषियों को शिव पुराण सुनाने का निश्चय किया।
🌹 श्री शिवाय नमस्तुभ्यं 🙏
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कौन सो संकट मोर गरीब को जो तुम से नहीं जात है टारो 🥹❤️
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संस्कार दिए बिना 'सुविधाएँ' देना
पतन का कारण है,
बच्चे को सुविधाएँ न दो
तो थोड़ी देर रोयेगा,
लेकिन 'संस्कार' न दो
तो पूरी ज़िन्दगी रोना पड़ेगा! ❤️
पतन का कारण है,
बच्चे को सुविधाएँ न दो
तो थोड़ी देर रोयेगा,
लेकिन 'संस्कार' न दो
तो पूरी ज़िन्दगी रोना पड़ेगा! ❤️
💯136❤36👍13🔥3
जो नियति नहीं है उसे कर दिखाने की ताकत हर किसी में होती है,
बस दृढ़ संकल्प ही मायने रखता है...!!
सुप्रभात 😊 ❤️
बस दृढ़ संकल्प ही मायने रखता है...!!
सुप्रभात 😊 ❤️
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