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माता-पिता वीडियो बना रहे थे तभी एक बच्चा लहरों में बहते-बहते बचा; एक राहगीर ने तुरंत उसकी मदद के लिए हाथ बढ़ाया।.
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पोज और फिल्टर से भरी इस डिजिटल दुनिया में, यह बेहद मासूम और खूबसूरत है।
😍6❤2
UPSC हिंदी माध्यम 🦚
https://www.thehindu.com/sci-tech/technology/eight-web-security-keys-of-firm-used-by-govt-and-psus-leaked/article71606342.ece
ईमुद्रा की सुरक्षा समस्या, आईटी की तकनीकी शब्दावली के बिना समझाई गई
कल्पना कीजिए कि एक एजेंसी वेबसाइटों को पहचान पत्र जारी करती है। आपका ब्राउज़र इन पहचान पत्रों पर भरोसा करके यह जांचता है कि आप असली वेबसाइट से जुड़ रहे हैं या नहीं।
ईमुद्रा ऐसी ही एक सेवा प्रदान करती है।
गलती क्या हुई?
इसके आठ प्रमाणपत्र जारी करने वाले "डिजिटल स्टैम्प" में गुप्त कुंजी थीं जिन्हें आसानी से पता लगाया जा सकता था।
कितनी आसानी से? एक कुंजी मात्र 4 थी। अन्य में 56 और 115 शामिल थे।
ये कुंजी विशाल, यादृच्छिक रूप से चुनी गई संख्याएँ होनी चाहिए थीं जिनका अनुमान लगाना लगभग असंभव हो।
कल्पना कीजिए कि एक पहचान पत्र एजेंसी अपने आधिकारिक स्टैम्प को "4" पर सेट किए गए संयोजन ताले से सुरक्षित रखती है।
यह महत्वपूर्ण क्यों है?
जिन लोगों को ये कुंजी मिल जाती हैं, वे नकली वेबसाइट पहचान पत्र बना सकते हैं।
यदि वे आपके इंटरनेट कनेक्शन को भी इंटरसेप्ट कर लेते हैं, तो ये कार्ड उन्हें एक असली वेबसाइट का रूप धारण करने और आपके द्वारा साझा की गई जानकारी को पढ़ने या बदलने में मदद कर सकते हैं।
क्या किया गया है?
17 अक्टूबर को रिपोर्ट मिलने के कुछ ही घंटों के भीतर क्रोम और फ़ायरफ़ॉक्स ने प्रभावित प्रमाणपत्रों को ब्लॉक कर दिया। अन्य सॉफ़्टवेयर को अलग से अपडेट करने की आवश्यकता हो सकती है क्योंकि ब्राउज़र सुरक्षा प्रणाली स्वचालित रूप से सभी ऐप्स को कवर नहीं करती है।
क्या ग्राहक डेटा निश्चित रूप से चोरी हो गया है?
केवल इस खामी से यह साबित नहीं होता। ईमुद्रा का कहना है कि उसने प्रभावित जारीकर्ताओं का उपयोग करके कोई भी ग्राहक प्रमाणपत्र जारी नहीं किया था और उन्हें रद्द कर दिया है। हालांकि, हमलावर कमजोर कुंजियों का उपयोग करके स्वतंत्र रूप से जाली प्रमाणपत्र बना सकते हैं।
एक ऐसी कंपनी के लिए जिसका व्यवसाय दूसरों के डिजिटल स्टैम्प पर विश्वास पर निर्भर करता है, यह उसकी सुरक्षा जांच पर गंभीर सवाल खड़े करता है और उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाता है।
कल्पना कीजिए कि एक एजेंसी वेबसाइटों को पहचान पत्र जारी करती है। आपका ब्राउज़र इन पहचान पत्रों पर भरोसा करके यह जांचता है कि आप असली वेबसाइट से जुड़ रहे हैं या नहीं।
ईमुद्रा ऐसी ही एक सेवा प्रदान करती है।
गलती क्या हुई?
इसके आठ प्रमाणपत्र जारी करने वाले "डिजिटल स्टैम्प" में गुप्त कुंजी थीं जिन्हें आसानी से पता लगाया जा सकता था।
कितनी आसानी से? एक कुंजी मात्र 4 थी। अन्य में 56 और 115 शामिल थे।
ये कुंजी विशाल, यादृच्छिक रूप से चुनी गई संख्याएँ होनी चाहिए थीं जिनका अनुमान लगाना लगभग असंभव हो।
कल्पना कीजिए कि एक पहचान पत्र एजेंसी अपने आधिकारिक स्टैम्प को "4" पर सेट किए गए संयोजन ताले से सुरक्षित रखती है।
यह महत्वपूर्ण क्यों है?
जिन लोगों को ये कुंजी मिल जाती हैं, वे नकली वेबसाइट पहचान पत्र बना सकते हैं।
यदि वे आपके इंटरनेट कनेक्शन को भी इंटरसेप्ट कर लेते हैं, तो ये कार्ड उन्हें एक असली वेबसाइट का रूप धारण करने और आपके द्वारा साझा की गई जानकारी को पढ़ने या बदलने में मदद कर सकते हैं।
क्या किया गया है?
17 अक्टूबर को रिपोर्ट मिलने के कुछ ही घंटों के भीतर क्रोम और फ़ायरफ़ॉक्स ने प्रभावित प्रमाणपत्रों को ब्लॉक कर दिया। अन्य सॉफ़्टवेयर को अलग से अपडेट करने की आवश्यकता हो सकती है क्योंकि ब्राउज़र सुरक्षा प्रणाली स्वचालित रूप से सभी ऐप्स को कवर नहीं करती है।
क्या ग्राहक डेटा निश्चित रूप से चोरी हो गया है?
केवल इस खामी से यह साबित नहीं होता। ईमुद्रा का कहना है कि उसने प्रभावित जारीकर्ताओं का उपयोग करके कोई भी ग्राहक प्रमाणपत्र जारी नहीं किया था और उन्हें रद्द कर दिया है। हालांकि, हमलावर कमजोर कुंजियों का उपयोग करके स्वतंत्र रूप से जाली प्रमाणपत्र बना सकते हैं।
एक ऐसी कंपनी के लिए जिसका व्यवसाय दूसरों के डिजिटल स्टैम्प पर विश्वास पर निर्भर करता है, यह उसकी सुरक्षा जांच पर गंभीर सवाल खड़े करता है और उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाता है।
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संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार
जब यूरोप में विरोध प्रदर्शन होते हैं
हेडलाइन: बातचीत
एक महीने बाद बयान
हिरासत का कोई जिक्र नहीं (हजारों लोग हिरासत में)
पुलिस कार्रवाई: आनुपातिक
जब भारत में विरोध प्रदर्शन होते हैं
हेडलाइन: चिंता
उसी दिन बयान
हिरासत पर चिंता
पुलिस कार्रवाई: संयम
जब यूरोप में विरोध प्रदर्शन होते हैं
हेडलाइन: बातचीत
एक महीने बाद बयान
हिरासत का कोई जिक्र नहीं (हजारों लोग हिरासत में)
पुलिस कार्रवाई: आनुपातिक
जब भारत में विरोध प्रदर्शन होते हैं
हेडलाइन: चिंता
उसी दिन बयान
हिरासत पर चिंता
पुलिस कार्रवाई: संयम
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सऊदी अरब में अमेरिकी दूतावास के कर्मचारियों और उनके परिवारों को देश छोड़ने का आदेश दिया गया है, साथ ही संयुक्त अरब अमीरात, जॉर्डन, कतर और बहरीन में दूतावास के कर्मचारियों के परिवारों को भी देश छोड़ने का आदेश दिया गया है।
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छिप-छिप अश्रु बहाने वालों, मोती व्यर्थ बहाने वालों
कुछ सपनों के मर जाने से, जीवन नहीं मरा करता है।
सपना क्या है, नयन सेज पर
सोया हुआ आँख का पानी
और टूटना है उसका ज्यों
जागे कच्ची नींद जवानी
गीली उमर बनाने वालों, डूबे बिना नहाने वालो
कुछ पानी के बह जाने से, सावन नहीं मरा करता है।
माला बिखर गई तो क्या है
खुद ही हल हो गई समस्या
आँसू गर नीलाम हुए तो
समझो पूरी हुई तपस्या
रूठे दिवस मनाने वालो , फटी कमीज़ सिलाने वालो
कुछ दीपों के बुझ जाने से, आँगन नहीं मरा करता है।
खोता कुछ भी नहीं यहाँ पर
केवल जिल्द बदलती पोथी
जैसे रात उतार चाँदनी
पहने सुबह धूप की धोती
वस्त्र बदलकर आने वालो ! चाल बदलकर जाने वालो !
चन्द खिलौनों के खोने से बचपन नहीं मरा करता है।
लाखों बार गगरियाँ फूटीं,
शिकन न आई पनघट पर,
लाखों बार किश्तियाँ डूबीं,
चहल-पहल वो ही है तट पर,
तम की उमर बढ़ाने वालो ! लौ की आयु घटाने वालो !
लाख करे पतझर कोशिश पर उपवन नहीं मरा करता है।
लूट लिया माली ने उपवन,
लुटी न लेकिन गन्ध फूल की,
तूफानों तक ने छेड़ा पर,
खिड़की बन्द न हुई धूल की,
नफरत गले लगाने वालो ! सब पर धूल उड़ाने वालो !
कुछ मुखड़ों की नाराज़ी से दर्पन नहीं मरा करता है!
-गोपालदास नीरज
कुछ सपनों के मर जाने से, जीवन नहीं मरा करता है।
सपना क्या है, नयन सेज पर
सोया हुआ आँख का पानी
और टूटना है उसका ज्यों
जागे कच्ची नींद जवानी
गीली उमर बनाने वालों, डूबे बिना नहाने वालो
कुछ पानी के बह जाने से, सावन नहीं मरा करता है।
माला बिखर गई तो क्या है
खुद ही हल हो गई समस्या
आँसू गर नीलाम हुए तो
समझो पूरी हुई तपस्या
रूठे दिवस मनाने वालो , फटी कमीज़ सिलाने वालो
कुछ दीपों के बुझ जाने से, आँगन नहीं मरा करता है।
खोता कुछ भी नहीं यहाँ पर
केवल जिल्द बदलती पोथी
जैसे रात उतार चाँदनी
पहने सुबह धूप की धोती
वस्त्र बदलकर आने वालो ! चाल बदलकर जाने वालो !
चन्द खिलौनों के खोने से बचपन नहीं मरा करता है।
लाखों बार गगरियाँ फूटीं,
शिकन न आई पनघट पर,
लाखों बार किश्तियाँ डूबीं,
चहल-पहल वो ही है तट पर,
तम की उमर बढ़ाने वालो ! लौ की आयु घटाने वालो !
लाख करे पतझर कोशिश पर उपवन नहीं मरा करता है।
लूट लिया माली ने उपवन,
लुटी न लेकिन गन्ध फूल की,
तूफानों तक ने छेड़ा पर,
खिड़की बन्द न हुई धूल की,
नफरत गले लगाने वालो ! सब पर धूल उड़ाने वालो !
कुछ मुखड़ों की नाराज़ी से दर्पन नहीं मरा करता है!
-गोपालदास नीरज
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अपना पैसा उन चीजों पर खर्च करें जो पैसे से खरीदी जा सकती हैं। अपना समय उन चीजों पर खर्च करें जो पैसे से नहीं खरीदी जा सकतीं।
— Haruki Murakami
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Kohli touched immortality in cricket, 4 years ago today ❤️
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