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ये हैं शीतल देवी..... हमारी Gen Z की सबसे बड़ी प्रतीक..... सबसे बड़ी प्रेरणास्त्रोत 🙏
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⚠️महत्वपूर्ण: पहले UPSC अंतिम परिणाम से पहले अपनी उत्तर कुंजी कभी प्रदर्शित नहीं करता था। अभ्यर्थी केवल कोचिंग कुंजियों से तुलना करके ही आपत्ति कर सकते थे, लेकिन अब UPSC एक अनंतिम उत्तर कुंजी प्रकाशित करता है। अभ्यर्थी प्रमाण के साथ आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। विशेषज्ञ फिर कुंजी की समीक्षा करते हैं और उसे अंतिम रूप देते हैं... यह अच्छा है क्योंकि इससे पारदर्शिता बढ़ती है... लेकिन इसमें एक जोखिम भी हो सकता है - अगर केवल कुछ ही छात्र आपत्तियाँ उठाते हैं, तो UPSC यह मान सकता है कि "बहुमत" उसके संस्करण से सहमत है, भले ही वह सटीक न हो।.
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नेहरू की विनम्रता और गरिमा पर:
1. जब सरदार पटेल का निधन हुआ, तो नेहरू ने राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद से अनुरोध किया था कि वे उनके अंतिम संस्कार में शामिल न हों। उन्होंने यहाँ तक कहा कि जो नौकरशाह अंतिम संस्कार में जाएँ, वे अपने निजी खर्च से जाएँ। लेकिन राजेंद्र प्रसाद ने नेहरू की बात पर ध्यान नहीं दिया और वे दाह-संस्कार में पहुँचे।
2. जब 1963 में राजेंद्र प्रसाद का निधन हुआ, तो जवाहरलाल नेहरू ने राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन को पत्र लिखकर यह बताया कि वे पटना में होने वाले राजेंद्र प्रसाद के अंतिम संस्कार में नहीं जा पाएँगे। उन्होंने राधाकृष्णन से भी वहाँ न जाने की सलाह दी। लेकिन डॉ. राधाकृष्णन ने उनकी बात नहीं मानी और पटना गए।
3. लेडी एडविना माउंटबैटन की 1960 में मृत्यु हुई और उन्हें समुद्र में दफनाया गया। नेहरू ने भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस त्रिशूल को आदेश दिया कि वह एचएमएस वेकफुल के साथ चले और उनके लिए समुद्र में पुष्पचक्र अर्पित करे।
संदर्भ बिंदु 1 और 2:
1. Pilgrimage to Freedom — के.एम. मुंशी
2. Rajendra Babu Patron Ke Aaine Mein Part I — तारा सिन्हा
1. जब सरदार पटेल का निधन हुआ, तो नेहरू ने राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद से अनुरोध किया था कि वे उनके अंतिम संस्कार में शामिल न हों। उन्होंने यहाँ तक कहा कि जो नौकरशाह अंतिम संस्कार में जाएँ, वे अपने निजी खर्च से जाएँ। लेकिन राजेंद्र प्रसाद ने नेहरू की बात पर ध्यान नहीं दिया और वे दाह-संस्कार में पहुँचे।
2. जब 1963 में राजेंद्र प्रसाद का निधन हुआ, तो जवाहरलाल नेहरू ने राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन को पत्र लिखकर यह बताया कि वे पटना में होने वाले राजेंद्र प्रसाद के अंतिम संस्कार में नहीं जा पाएँगे। उन्होंने राधाकृष्णन से भी वहाँ न जाने की सलाह दी। लेकिन डॉ. राधाकृष्णन ने उनकी बात नहीं मानी और पटना गए।
3. लेडी एडविना माउंटबैटन की 1960 में मृत्यु हुई और उन्हें समुद्र में दफनाया गया। नेहरू ने भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस त्रिशूल को आदेश दिया कि वह एचएमएस वेकफुल के साथ चले और उनके लिए समुद्र में पुष्पचक्र अर्पित करे।
संदर्भ बिंदु 1 और 2:
1. Pilgrimage to Freedom — के.एम. मुंशी
2. Rajendra Babu Patron Ke Aaine Mein Part I — तारा सिन्हा
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बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (#BRO) ने एक बार फिर इतिहास रचते हुए मिशन हिमांक के तहत दुनिया की सबसे ऊँची मोटरबेल सड़क का निर्माण किया है, जो पूर्वी लद्दाख में मिंगला पास पर है, जो समुद्र तल से 19,400 फीट की ऊँचाई पर स्थित है, और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास है।
#ProjectHimank #MigLaPass #Ladakh #NationBuilding
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यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) ने 5 से 17 वर्ष के बच्चों के आधार बायोमेट्रिक अपडेट्स के लिए शुल्क माफ़ कर दिया है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि इस आयु वर्ग के लिए अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट (MBU) शुल्क की माफी 1 अक्टूबर से प्रभावी हो गई है और यह एक साल तक लागू रहेगी। इस फैसले से देशभर में लगभग छह करोड़ बच्चों को लाभ मिलने की उम्मीद है। #UIDAI
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दिन हो गये हैं दोपहर में ली गई नींद को। दोपहर की नींद से पहले खाये गये दाल चावल को। दाल चावल के साथ आम के अचार को खाए हुए। मट्ठे में जीरे का तड़का मार के, अघा के ज़ोर से डकार लिए हुए। घड़ी देखे बिना दोपहर में सोये हुए। दिन हो गये हैं अब।
ये सिर्फ़ संयोग नहीं एक समय सारिणी है, जिसके विरुद्ध जाकर नौकरी और पढ़ाई की जा रही है। बड़े होने का ढोंग है और छोटे ना हो पाने की उदासी। मन का ना कर पाने की पीड़ा और मन का हो जाने का अपराध बोध। अंग्रेज़ी में गिल्ट।
ग़ज़ब चक्रव्यूह में फँस गये हैं। रोज़ लगता है बस कल से सब ठीक हो जाएगा। नहीं भी लगे तो मान लेते हैं। मान लेना ही आसान पड़ता है। सो जाना ही आसान लगता है। मगर ना करवट का कोण समझ आता है ना कदमों की दिशा। त्रिशंकु हो गये हैं। खिन्न हो गये हैं।
शराब में मज़हब ढूँढ लिया है और एकांत में मक़सद। सुरंग के दोनों तरफ़ अंधेरा है, बस गुप्प अंधेरा और कभी दाल चावल खा लो अकेले में तो आत्मग्लानि अलग से। दोपहर की नींद से शाम को उठने के बाद एक कप चाय, घर के चार लोग और बेतुकी चार बातें, सिवाय इसके कुछ छह नहीं, कुछ माँगा भी नहीं।
दोस्तों से ज़्यादा शनिवार से दोस्ती हो गई है, दुश्मनों से ज़्यादा रविवार से।
दो कतरा ज़िंदगी की बड़ी क़ीमत चुकाई गई है। इसका बदला लेना होगा। ज़िंदा रहना होगा।
-Murahee
ये सिर्फ़ संयोग नहीं एक समय सारिणी है, जिसके विरुद्ध जाकर नौकरी और पढ़ाई की जा रही है। बड़े होने का ढोंग है और छोटे ना हो पाने की उदासी। मन का ना कर पाने की पीड़ा और मन का हो जाने का अपराध बोध। अंग्रेज़ी में गिल्ट।
ग़ज़ब चक्रव्यूह में फँस गये हैं। रोज़ लगता है बस कल से सब ठीक हो जाएगा। नहीं भी लगे तो मान लेते हैं। मान लेना ही आसान पड़ता है। सो जाना ही आसान लगता है। मगर ना करवट का कोण समझ आता है ना कदमों की दिशा। त्रिशंकु हो गये हैं। खिन्न हो गये हैं।
शराब में मज़हब ढूँढ लिया है और एकांत में मक़सद। सुरंग के दोनों तरफ़ अंधेरा है, बस गुप्प अंधेरा और कभी दाल चावल खा लो अकेले में तो आत्मग्लानि अलग से। दोपहर की नींद से शाम को उठने के बाद एक कप चाय, घर के चार लोग और बेतुकी चार बातें, सिवाय इसके कुछ छह नहीं, कुछ माँगा भी नहीं।
दोस्तों से ज़्यादा शनिवार से दोस्ती हो गई है, दुश्मनों से ज़्यादा रविवार से।
दो कतरा ज़िंदगी की बड़ी क़ीमत चुकाई गई है। इसका बदला लेना होगा। ज़िंदा रहना होगा।
-Murahee
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आज की शर्मनाक घटना के बाद मुख्य न्यायाधीश...
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UPSC हिंदी माध्यम 🦚
Nobel prize 🏆 घोषणा की जाय
उनकी खोजों ने दिखाया कि हमारा इम्यून सिस्टम कैसे शांत रहता है और अपने ही शरीर के खिलाफ हमला करने से बचता है (ऑटोइम्युनिटी)। उन्होंने रेगुलेटरी टी कोशिकाओं (Tregs) और FOXP3 प्रोटीन की भूमिका को पहचाना, जो इम्यून "बागी" कोशिकाओं को नियंत्रण में रखने के लिए ज़िम्मेदार हैं। यह रिसर्च नई थेरपीज़ के द्वार खोलती है, जो कैंसर, ऑटोइम्यून डिज़ीज़, और ट्रांसप्लांट रिएक्शन के खिलाफ ज्यादा सटीक हो सकती हैं।
मूलत: इससे पहले माना जाता था कि इम्यून टोलरेंस सिर्फ थायमस ग्रंथि (मध्य केन्द्र) में ही होता है, पर अब ये दिख गया है कि "दिशापत्र" (periphery) भी इसमें अहम भूमिका निभाता है।
मूलत: इससे पहले माना जाता था कि इम्यून टोलरेंस सिर्फ थायमस ग्रंथि (मध्य केन्द्र) में ही होता है, पर अब ये दिख गया है कि "दिशापत्र" (periphery) भी इसमें अहम भूमिका निभाता है।
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