UPSC हिंदी माध्यम 🦚
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Telegram पर एक मात्र ऐसा ग्रुप हैं जहां हिंदी माध्यम के बच्चो को सभी प्रकार कि UPSC परीक्षा से संबंधित सामग्री दी जाएगी जैसे कि - Toppers के Notes, Coaching संस्थान के Notes, Test Series, News इत्यादि l

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बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (#BRO) ने एक बार फिर इतिहास रचते हुए मिशन हिमांक के तहत दुनिया की सबसे ऊँची मोटरबेल सड़क का निर्माण किया है, जो पूर्वी लद्दाख में मिंगला पास पर है, जो समुद्र तल से 19,400 फीट की ऊँचाई पर स्थित है, और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास है।

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यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) ने 5 से 17 वर्ष के बच्चों के आधार बायोमेट्रिक अपडेट्स के लिए शुल्क माफ़ कर दिया है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि इस आयु वर्ग के लिए अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट (MBU) शुल्क की माफी 1 अक्टूबर से प्रभावी हो गई है और यह एक साल तक लागू रहेगी। इस फैसले से देशभर में लगभग छह करोड़ बच्चों को लाभ मिलने की उम्मीद है। #UIDAI

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दिन हो गये हैं दोपहर में ली गई नींद को। दोपहर की नींद से पहले खाये गये दाल चावल को। दाल चावल के साथ आम के अचार को खाए हुए। मट्ठे में जीरे का तड़का मार के, अघा के ज़ोर से डकार लिए हुए। घड़ी देखे बिना दोपहर में सोये हुए। दिन हो गये हैं अब।
ये सिर्फ़ संयोग नहीं एक समय सारिणी है, जिसके विरुद्ध जाकर नौकरी और पढ़ाई की जा रही है। बड़े होने का ढोंग है और छोटे ना हो पाने की उदासी। मन का ना कर पाने की पीड़ा और मन का हो जाने का अपराध बोध। अंग्रेज़ी में गिल्ट।
ग़ज़ब चक्रव्यूह में फँस गये हैं। रोज़ लगता है बस कल से सब ठीक हो जाएगा। नहीं भी लगे तो मान लेते हैं। मान लेना ही आसान पड़ता है। सो जाना ही आसान लगता है। मगर ना करवट का कोण समझ आता है ना कदमों की दिशा। त्रिशंकु हो गये हैं। खिन्न हो गये हैं।
शराब में मज़हब ढूँढ लिया है और एकांत में मक़सद। सुरंग के दोनों तरफ़ अंधेरा है, बस गुप्प अंधेरा और कभी दाल चावल खा लो अकेले में तो आत्मग्लानि अलग से। दोपहर की नींद से शाम को उठने के बाद एक कप चाय, घर के चार लोग और बेतुकी चार बातें, सिवाय इसके कुछ छह नहीं, कुछ माँगा भी नहीं।
दोस्तों से ज़्यादा शनिवार से दोस्ती हो गई है, दुश्मनों से ज़्यादा रविवार से।
दो कतरा ज़िंदगी की बड़ी क़ीमत चुकाई गई है। इसका बदला लेना होगा। ज़िंदा रहना होगा।

-Murahee
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Nobel prize 🏆 घोषणा की जाय
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आज की शर्मनाक घटना के बाद मुख्य न्यायाधीश...
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उनकी खोजों ने दिखाया कि हमारा इम्यून सिस्टम कैसे शांत रहता है और अपने ही शरीर के खिलाफ हमला करने से बचता है (ऑटोइम्युनिटी)। उन्होंने रेगुलेटरी टी कोशिकाओं (Tregs) और FOXP3 प्रोटीन की भूमिका को पहचाना, जो इम्यून "बागी" कोशिकाओं को नियंत्रण में रखने के लिए ज़िम्मेदार हैं। यह रिसर्च नई थेरपीज़ के द्वार खोलती है, जो कैंसर, ऑटोइम्यून डिज़ीज़, और ट्रांसप्लांट रिएक्शन के खिलाफ ज्यादा सटीक हो सकती हैं।

मूलत: इससे पहले माना जाता था कि इम्यून टोलरेंस सिर्फ थायमस ग्रंथि (मध्य केन्द्र) में ही होता है, पर अब ये दिख गया है कि "दिशापत्र" (periphery) भी इसमें अहम भूमिका निभाता है।
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रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ़ साइंसेज़ ने 2025 के भौतिकी के नोबेल पुरस्कार के लिए जॉन क्लार्क, मिशेल एच. डेवोरेट और जॉन एम. मार्टिनिस को चुना है, "एक इलेक्ट्रिक सर्किट में मैक्रोस्कोपिक क्वांटम मैकेनिकल टनलिंग और ऊर्जा क्वांटाइजेशन की खोज के लिए।"
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रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ़ साइंसेज़ ने 2025 के भौतिकी के नोबेल पुरस्कार के लिए जॉन क्लार्क, मिशेल एच. डेवोरेट और जॉन एम. मार्टिनिस को चुना है, "एक इलेक्ट्रिक सर्किट में मैक्रोस्कोपिक क्वांटम मैकेनिकल टनलिंग और ऊर्जा क्वांटाइजेशन की खोज के लिए।"
जब आप एक गेंद दीवार पर फेंकते हैं, तो आप निश्चित हो सकते हैं कि वह आपकी तरफ वापस उछलेगी। अगर अचानक वह गेंद दीवार के दूसरी तरफ प्रकट हो जाए, तो आप बेहद हैरान हो जाते। क्वांटम भौतिकी में इस घटना को टनलिंग कहते हैं, और यही वजह है कि इसे अजीब और समझ से परे माना जाता है।

2025 के नोबेल पुरस्कार विजेता जॉन क्लार्क, मिशेल एच. डेवोरेट और जॉन एम. मार्टिनिस ने प्रयोगों की एक श्रृंखला के ज़रिये दिखाया कि क्वांटम की अजीब दुनिया की विशेषताएं हाथ में पकड़ने लायक बड़े सिस्टम में भी महसूस की जा सकती हैं। उनके सुप conduction संरचना वाले इलेक्ट्रिक सिस्टम में एक स्थिति से दूसरी स्थिति में “टनल” करना संभव था, जैसे वह सीधे दीवार के पार निकल रहा हो। उन्होंने यह भी दिखाया कि सिस्टम ऊर्जा को क्वांटम यांत्रिकी के अनुसार निश्चित मात्राओं में ग्रहण और उत्सर्जित करता है।
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भारतीय रेलवे जनवरी 2026 से ऑनलाइन टिकटों के लिए मुफ्त तिथि परिवर्तन की अनुमति देगा
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Dehradun school students forced to lift sand and soil in viral video; head teacher suspended
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रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने 2025 का रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार सुसुमु किटागावा, रिचर्ड रॉबसन और ओमार एम. याघी को "मेटल–ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क्स के विकास के लिए" दिया है।
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Mount Everest visible from Bihar.
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