🚨WhatsApp Web to auto logout users every six hours under new Indian rules
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Moneycontrol
WhatsApp Web to auto logout users every six hours under new Indian rules- Moneycontrol.com
The Department of Telecommunications has issued a directive that will require platforms such as WhatsApp, Signal and Telegram to bind their services directly to the SIM card used during registration. Within 90 days, users will no longer be able to access…
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🔵 "राइट टू डिसकनेक्ट बिल" उस प्रस्तावित कानून को संदर्भित करता है जिसका उद्देश्य कर्मचारियों को कार्य-घंटों के बाहर कार्य-संबंधी इलेक्ट्रॉनिक संचार (ईमेल, कॉल, संदेश) को अनदेखा करने का कानूनी अधिकार देना है, ताकि उन्हें अनुशासनात्मक कार्रवाई के डर के बिना ऐसा करने की स्वतंत्रता हो सके।
हालांकि फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों ने इस कानून के संस्करणों को लागू किया है, हाल की चर्चाएँ भारत में राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर पेश किए गए विधेयकों पर केंद्रित हैं।
🔶 भारत में स्थिति (2025)
वर्तमान में, “राइट टू डिसकनेक्ट” भारत में निजी विधेयकों (Private Member's Bills) का विषय है, जिसका अर्थ है कि इन्हें व्यक्तिगत सांसदों द्वारा पेश किया गया है, न कि सरकार द्वारा। ऐतिहासिक रूप से, ऐसे विधेयकों के कानून बनने में कठिनाई होती है।
🔹 राष्ट्रीय विधेयक: “राइट टू डिसकनेक्ट बिल, 2025” हाल ही में लोकसभा (भारत की निचली सदन) में सांसद सुप्रिया सुले द्वारा पेश किया गया। यह उनके द्वारा 2019 में पेश किए गए समान विधेयक के बाद आता है।
🔹 केरल राज्य विधेयक: केरल राज्य ने भी "केरल राइट टू डिसकनेक्ट बिल, 2025" को एक निजी विधेयक के रूप में पेश किया है, जिसका उद्देश्य राज्य के निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को "ऑलवेज-ऑन" कार्य संस्कृति से बचाना है।
🔶 प्रस्तावित विधेयकों के मुख्य प्रावधान
भारतीय विधेयक कर्मचारियों में थकावट, तनाव और “इन्फो-ओबेसिटी” को संबोधित करने का उद्देश्य रखते हैं:
🔹 अधिकार प्रदान करना: कर्मचारियों को अपने सहमत कार्य-घंटों और छुट्टियों के बाद कार्य से संबंधित कॉल या ईमेल का जवाब देने से इनकार करने का अधिकार होगा।
🔹 कर्मचारियों की रक्षा: नियोक्ता कर्मचारियों के खिलाफ इस अधिकार का प्रयोग करने के कारण अनुशासनात्मक कार्रवाई (जैसे बर्खास्तगी या पदावनति) नहीं कर सकेंगे।
🔹 प्राधिकरण की स्थापना: विधेयक कर्मचारी कल्याण प्राधिकरण या जिला स्तर की शिकायत निवारण समिति के गठन का प्रस्ताव करता है, जो अनुपालन की निगरानी और शिकायतों का समाधान करेगी।
🔹 बातचीत को अनिवार्य बनाना: 10 से अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियों को कार्य-घंटों के बाद काम से संबंधित नीतियों पर कर्मचारी प्रतिनिधियों या यूनियनों के साथ बातचीत कर उन्हें औपचारिक रूप देना होगा।
🔹 ओवरटाइम भुगतान प्रदान करना: यदि कोई कर्मचारी सहमति से आधिकारिक घंटों के बाहर काम करता है (आपसी सहमति की शर्तों के तहत), तो उसे ओवरटाइम भुगतान दिया जाएगा।
🔹 दंड लगाना: अनुपालक नहीं रहने वाली कंपनियों पर उनके कुल कर्मचारी पारिश्रमिक का 1% तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
🔶 वैश्विक संदर्भ
भारत में यह पहल डिजिटल युग में कार्य-जीवन संतुलन पर चल रही वैश्विक चर्चा का हिस्सा है। कई देशों ने कानूनी ढांचे या दिशा-निर्देश लागू किए हैं:
🔹 फ्रांस: “एल खॉमरी” कानून, जो 2017 से प्रभावी है, ने “राइट टू डिसकनेक्ट” का वैधानिक अधिकार स्थापित किया।
🔹 ऑस्ट्रेलिया: 2024 की शुरुआत में पारित कानून कर्मचारियों को कार्य-घंटों के बाद संपर्क की उपेक्षा करने का अधिकार देता है, जब तक कि संपर्क को “अविवेकपूर्ण” न माना जाए।
🔹 अन्य देश: स्पेन, इटली, बेल्जियम, आयरलैंड और स्लोवाकिया में भी ऐसे कानून या आचार संहिता लागू हैं।
@KevalHindi 🦚 #mains
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रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण यूक्रेन पिछले 3-4 वर्षों से खबरों में रहा है.
कुछ स्थान जो हाल ही में समाचारों में रहे:
1. Pokrovsk
2. Myrnohrad
#location #pre26 @KevalHindi 🦚
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भाजपा सांसद नवीन जिंदल की बेटी की शादी में कंगना रनौत के साथ नाचती सुप्रिया सुले और महुआ मोइत्रा
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https://indianexpress.com/article/technology/artificial-intelligence/can-openai-new-indqa-benchmark-help-indic-llms-close-gap-10348131/lite/
OpenAI का IndQA बेंचमार्क भारतीय भाषाई मॉडल्स की स्थानीय भाषा, संस्कृति और संदर्भ समझने की क्षमता नापने के लिए बनाया गया है। यह बहुभाषी प्रश्नोत्तरी सेट के ज़रिए Indic LLMs के सुधार को ट्रैक करने में मदद करता है और ग्लोबल, पश्चिमी झुकाव वाले बेंचमार्क की कमियों को पूरा करने की कोशिश है।
The Indian Express
Can OpenAI’s new ‘IndQA’ benchmark help Indic LLMs close the gap?
Indic LLMs could be India's differentiator in the global AI arms race, but progress is slowed by lack of high-quality training datasets and local benchmarks.
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गुफा-सिद्धांत या“Allegory of the Cave”प्लेटो नामक यूनानी दार्शनिक का प्रसिद्ध विचार-प्रयोग है, जो बताता है कि हमारी सामान्य“हकीकत”असली सत्य का केवल एक धुंधला सा प्रतिबिंब है।
इसे प्लेटो के“Theory of Forms" या“रूपों के सिद्धांत”को समझाने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है।
कहानी क्या है?
प्लेटो के अनुसार imagine करो कि कुछ लोग बचपन से ही एक अंधेरी गुफा में जंजीरों से बंधे बैठे हैं, वे केवल सामने की दीवार देख सकते हैं।
उनके पीछे आग जल रही है और आग व कैदियों के बीच से कुछ लोग अलग‑अलग वस्तुएँ लेकर गुजरते हैं, जिनकी परछाइयाँ दीवार पर पड़ती हैं, कैदी इन्हीं परछाइयों को पूरी “दुनिया” और “सच्चाई” मान लेते हैं।
बाहर निकलने की प्रक्रिया
फिर उनमें से एक कैदी को जंजीरों से मुक्त कर बाहर की ओर ले जाया जाता है, शुरुआत में तेज रोशनी और नए दृश्य उसे तकलीफ देते हैं और वह वापस अंधेरी गुफा को ही बेहतर समझता है।
धीरे‑धीरे उसकी आँखें रोशनी की अभ्यस्त होती हैं, वह आग, असली वस्तुएँ और अंत में बाहर की दुनिया, सूरज आदि देखता है और समझता है कि गुफा की परछाइयाँ असली नहीं थीं, केवल नक़ल थीं।
दार्शनिक अर्थ (मतलब)
गुफा हमारी सीमित इंद्रिय–आधारित दुनिया का प्रतीक है, दीवार पर पड़ती परछाइयाँ वह ज्ञान हैं जो हम केवल देखने‑सुनने जैसे साधारण अनुभवों से बना लेते हैं। गुफा से बाहर की दुनिया प्लेटो के “रूपों की दुनिया” या उच्च सत्य का प्रतीक है, जहाँ बुद्धि और तर्क के सहारे गहरा ज्ञान मिलता है, और जो व्यक्ति वहां पहुँचता है वही दार्शनिक या ज्ञानी कहलाता है।
समाज और शिक्षा से संबंध
जो कैदी बाहर की दुनिया देखकर वापस गुफा में लौटकर दूसरों को सच्चाई बताने की कोशिश करता है, उसे बाकी लोग पागल या गलत मानते हैं और उसके विरोध में खड़े हो जाते हैं।
प्लेटो इस बात से यह समझाता है कि समाज अक्सर नए या गहरे सत्य को तुरंत स्वीकार नहीं करता, इसलिए वास्तविक शिक्षा वही है जो इंसान को "परछाइयों"से निकालकर सत्य की ओर ले जाए, भले ही यह प्रक्रिया शुरू में कठिन और दर्दनाक लगे।
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कोशिश कर, हल निकलेगा
आज नही तो, कल निकलेगा।
अर्जुन के तीर सा निशाना साध,
जमीन से भी जल निकलेगा ।
मेहनत कर, पौधो को पानी दे,
बंजर जमीन से भी फल निकलेगा।
ताकत जुटा, हिम्मत को आग दे,
फौलाद का भी बल निकलेगा।
जिन्दा रख, दिल में उम्मीदों को,
समन्दर से भी गंगाजल निकलेगा ।
कोशिशें जारी रख कुछ कर गुजरने की,
जो है आज थमा-थमा सा,
वो चल निकलेगा
आज नही तो, कल निकलेगा।
अर्जुन के तीर सा निशाना साध,
जमीन से भी जल निकलेगा ।
मेहनत कर, पौधो को पानी दे,
बंजर जमीन से भी फल निकलेगा।
ताकत जुटा, हिम्मत को आग दे,
फौलाद का भी बल निकलेगा।
जिन्दा रख, दिल में उम्मीदों को,
समन्दर से भी गंगाजल निकलेगा ।
कोशिशें जारी रख कुछ कर गुजरने की,
जो है आज थमा-थमा सा,
वो चल निकलेगा
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