मैं बूढ़ा होता चला जा रहा हूँ,
पर मृत्यु के आने में अभी वक्त है।
भविष्य के काम के गट्ठर को
बगल में फेंक कर,
बिना कोई अहम ख्वाहिश लिए
मैं एक छोटा कदम,
कविता की तरफ़ बढ़ाता हूँ।
मैं कविता के ज़रिए
बचे रह जाना नहीं चाहता हूँ,
मैं बचाना चाहता हूँ,
इस, अभी को,
इस, लगातार सरसरी सी बैचेनी को,
तुमको ...
मैं तुम्हें बचाना चाहता हूँ..
कविता में 'कविता' शब्द को
बार बार लिखकर मैं
अपनी कविता बचाना चाहता हूँ।
~मानव कौल
#mrg #oldpost @KevalHindi 🦚
पर मृत्यु के आने में अभी वक्त है।
भविष्य के काम के गट्ठर को
बगल में फेंक कर,
बिना कोई अहम ख्वाहिश लिए
मैं एक छोटा कदम,
कविता की तरफ़ बढ़ाता हूँ।
मैं कविता के ज़रिए
बचे रह जाना नहीं चाहता हूँ,
मैं बचाना चाहता हूँ,
इस, अभी को,
इस, लगातार सरसरी सी बैचेनी को,
तुमको ...
मैं तुम्हें बचाना चाहता हूँ..
कविता में 'कविता' शब्द को
बार बार लिखकर मैं
अपनी कविता बचाना चाहता हूँ।
~मानव कौल
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