notice_10042026.pdf
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SSC Guidelines regarding Challenge / Objection Management System
उत्तर प्रदेश परीक्षा | शिक्षक भर्ती UPSSSC PET लेखपाल VDO | UPSC
notice_10042026.pdf
कर्मचारी चयन आयोग (SSC) द्वारा 10 अप्रैल, 2026 को जारी नए दिशा-निर्देशों का संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित है:
## उत्तर कुंजी चुनौती प्रणाली (Objection Management System)
* आयोग परीक्षा के बाद 'अनंतिम उत्तर कुंजी' (Tentative Answer Keys) जारी करता है, जिस पर उम्मीदवार अपनी आपत्तियां दर्ज कर सकते हैं।
* विषय विशेषज्ञों (SMEs) की समीक्षा के बाद ही 'अंतिम उत्तर कुंजी' तैयार की जाती है।
## विभिन्न स्थितियों में अंक निर्धारण के नियम
आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनौतियों के बाद निम्नलिखित कदम उठाए जाएंगे:
* गलत या अस्पष्ट प्रश्न: यदि कोई प्रश्न अस्पष्ट है, उसमें त्रुटि है, या कोई भी विकल्प सही नहीं है, तो उस प्रश्न को रद्द (discard) कर दिया जाएगा। इसके अंक सभी उम्मीदवारों को दिए जाएंगे, चाहे उन्होंने प्रश्न हल किया हो या नहीं।
* एक से अधिक सही विकल्प: यदि किसी प्रश्न के एक से अधिक विकल्प सही हैं, तो उन सभी उम्मीदवारों को पूरे अंक मिलेंगे जिन्होंने किसी भी सही विकल्प को चुना है। गलत विकल्प चुनने पर नेगेटिव मार्किंग होगी और हल न करने पर शून्य अंक मिलेंगे।
* पाठ्यक्रम से बाहर के प्रश्न: यद्यपि इसकी संभावना कम है, लेकिन यदि विशेषज्ञ इसे स्वीकार करते हैं, तो प्रश्न रद्द कर दिया जाएगा और सभी को अंक दिए जाएंगे।
* अनुवाद की त्रुटियां: यदि किसी विशिष्ट भाषा (जैसे पंजाबी) के अनुवाद में त्रुटि है, तो प्रश्न केवल उसी भाषा के उम्मीदवारों के लिए रद्द या संशोधित किया जाएगा। अंग्रेजी या अन्य भाषाओं में सही होने पर उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
## उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण सलाह
* तार्किक आपत्तियां: केवल वही आपत्तियां स्वीकार की जाएंगी जो प्रश्न के अर्थ या स्पष्टता को प्रभावित करती हैं। छोटी-मोटी तकनीकी त्रुटियों या "जबरदस्ती के तर्क" (contrived logic) के आधार पर दी गई चुनौतियों को खारिज कर दिया जाएगा।
* चुनौतियों की संख्या: किसी प्रश्न पर कितनी अधिक आपत्तियां आई हैं, इससे निर्णय नहीं बदलता; केवल आपत्ति की गुणवत्ता और मेरिट मायने रखती है।
## लागू होने की तिथि
* ये नियम 2026 की श्रृंखला से होने वाली सभी वस्तुनिष्ठ (Objective) परीक्षाओं और आगामी विभागीय परीक्षाओं पर लागू होंगे।
## उत्तर कुंजी चुनौती प्रणाली (Objection Management System)
* आयोग परीक्षा के बाद 'अनंतिम उत्तर कुंजी' (Tentative Answer Keys) जारी करता है, जिस पर उम्मीदवार अपनी आपत्तियां दर्ज कर सकते हैं।
* विषय विशेषज्ञों (SMEs) की समीक्षा के बाद ही 'अंतिम उत्तर कुंजी' तैयार की जाती है।
## विभिन्न स्थितियों में अंक निर्धारण के नियम
आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनौतियों के बाद निम्नलिखित कदम उठाए जाएंगे:
* गलत या अस्पष्ट प्रश्न: यदि कोई प्रश्न अस्पष्ट है, उसमें त्रुटि है, या कोई भी विकल्प सही नहीं है, तो उस प्रश्न को रद्द (discard) कर दिया जाएगा। इसके अंक सभी उम्मीदवारों को दिए जाएंगे, चाहे उन्होंने प्रश्न हल किया हो या नहीं।
* एक से अधिक सही विकल्प: यदि किसी प्रश्न के एक से अधिक विकल्प सही हैं, तो उन सभी उम्मीदवारों को पूरे अंक मिलेंगे जिन्होंने किसी भी सही विकल्प को चुना है। गलत विकल्प चुनने पर नेगेटिव मार्किंग होगी और हल न करने पर शून्य अंक मिलेंगे।
* पाठ्यक्रम से बाहर के प्रश्न: यद्यपि इसकी संभावना कम है, लेकिन यदि विशेषज्ञ इसे स्वीकार करते हैं, तो प्रश्न रद्द कर दिया जाएगा और सभी को अंक दिए जाएंगे।
* अनुवाद की त्रुटियां: यदि किसी विशिष्ट भाषा (जैसे पंजाबी) के अनुवाद में त्रुटि है, तो प्रश्न केवल उसी भाषा के उम्मीदवारों के लिए रद्द या संशोधित किया जाएगा। अंग्रेजी या अन्य भाषाओं में सही होने पर उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
## उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण सलाह
* तार्किक आपत्तियां: केवल वही आपत्तियां स्वीकार की जाएंगी जो प्रश्न के अर्थ या स्पष्टता को प्रभावित करती हैं। छोटी-मोटी तकनीकी त्रुटियों या "जबरदस्ती के तर्क" (contrived logic) के आधार पर दी गई चुनौतियों को खारिज कर दिया जाएगा।
* चुनौतियों की संख्या: किसी प्रश्न पर कितनी अधिक आपत्तियां आई हैं, इससे निर्णय नहीं बदलता; केवल आपत्ति की गुणवत्ता और मेरिट मायने रखती है।
## लागू होने की तिथि
* ये नियम 2026 की श्रृंखला से होने वाली सभी वस्तुनिष्ठ (Objective) परीक्षाओं और आगामी विभागीय परीक्षाओं पर लागू होंगे।
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उत्तर प्रदेश परीक्षा | शिक्षक भर्ती UPSSSC PET लेखपाल VDO | UPSC
वैसे इसकी कोई जरूरत थी नहीं, कोई कुछ कर थोड़ी न पाता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था ज्यूडिशियरी में करप्शन है ही नहीं।
जस्टिस यशवंत वर्मा ने इंपीचमेंट से पहले इसीलिए इस्तीफा दिया है ताकि पेंशन चालू रहे
>नाम जस्टिस यशवंत वर्मा
>पहले दिल्ली हाईकोर्ट ,अब यूपी हाई कोर्ट में
>घर से जले हुए नोटों की गड्डियां मिली
>पहले मामले को दबाने की कोशिश हुई
>लेकिन सोशल मीडिया ने उसे नाकाम कर दिया
>फिर कार्यवाही हुई , इंपीचमेंट होने वाला था
>लेकिन उससे पहले जज साहब ने इस्तीफा दे दिया
>इंपीचमेंट से पहले इस्तीफा देने से उनके पोस्ट रिटायरमेंट बेनिफिट्स चालू रहेंगे
>इससे पहल भी दो जजों ने इसी रास्ते का इस्तेमाल किया
>अब देश की जनता एक भ्रष्टाचारी के पोस्ट रिटायरमेंट बेनिफिट्स के लिए टैक्स देगी
>इसके खिलाफ हम सबको आवाज उठानी चाहिए।
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