संथाली भाषा में भारत का संविधान
हाल ही में, भारत के संविधान का संथाली भाषा की ओल चिकी लिपि में औपचारिक प्रकाशन किया गया है।
इसका उद्देश्य आदिवासी समुदायों, विशेषकर संथाली समाज के बीच संवैधानिक जागरूकता और लोकतांत्रिक भागीदारी को बढ़ावा देना है।
यह पहल लोगों को उनकी मातृभाषा में अधिकारों, कर्तव्यों और संवैधानिक मूल्यों को समझने में मदद करती है।
संथाली भाषा को 92वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 2003 के तहत आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था।
संथाली भारत की प्राचीन जीवित भाषाओं में से एक है और यह झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और बिहार में व्यापक रूप से बोली जाती है।
वर्ष 2025 में ओल चिकी लिपि के शताब्दी वर्ष के अवसर पर संविधान का यह प्रकाशन ऐतिहासिक महत्व रखता है।
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