“एक बार विदाई दे मां, घूरे आसी...”
(माँ, मुझे एक बार विदा करो, मैं फिर वापस आऊँगा...)
मात्र 18 साल की उम्र में जब आम युवा अपने भविष्य के सपने देखता है, तब खुदीराम बोस ने भारत माता की आज़ादी के लिए फांसी का फंदा चुन लिया।
आज उनके बलिदान दिवस पर उनका जीवन हमें यह सीख देता है कि युवाओं को किसी भी प्रकार के अन्याय के सामने झुकना नहीं चाहिए, बल्कि पूरी ताकत से लड़ना चाहिए। उनका यह अमर बलिदान देश के हर नागरिक के दिल में राष्ट्रप्रेम की ज्योति जलाए रखेगा।
(माँ, मुझे एक बार विदा करो, मैं फिर वापस आऊँगा...)
मात्र 18 साल की उम्र में जब आम युवा अपने भविष्य के सपने देखता है, तब खुदीराम बोस ने भारत माता की आज़ादी के लिए फांसी का फंदा चुन लिया।
आज उनके बलिदान दिवस पर उनका जीवन हमें यह सीख देता है कि युवाओं को किसी भी प्रकार के अन्याय के सामने झुकना नहीं चाहिए, बल्कि पूरी ताकत से लड़ना चाहिए। उनका यह अमर बलिदान देश के हर नागरिक के दिल में राष्ट्रप्रेम की ज्योति जलाए रखेगा।
अमर शहीद खुदीराम बोस को भावभीनी श्रद्धांजलि! 🇮🇳🕊️
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