ऐतिहासिक मंदिर और उनकी कथा
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हमारी संस्कृति हमारा अभिमान

*इस चैनल मे हमारे मंदिरों की कथा के आडियो विडियो और हमारी सभ्यता से जुड़ी जगह का प्रसारण किया जाता है*

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*प्राचीन चंपा नगरी।( कांग प्रांत वियतनाम में स्थित)*
*भद्रेश्वर स्वामी( महादेव) भगवान को समर्पित ये मंदिर धर्मा महाराज ने ४ और ५ शताब्दी में बनाया था।*
*धर्मा महाराज श्री भद्रवर्मन्न*

*Image👇🏻👆🏻*
कोई भी आधुनिक इंजीनियरिंग हमारे प्राचीन वास्तुकला का मुकाबला नहीं कर सकती ।

इस प्रतिमा के जांघ को देखिए । आप मांसपेशियों को छेदने और बाहर आने वाले खंजर को स्पष्ट देख सकते हैं! पूर्णतः प्राकृतिक दृश्य की तरह दिखने वाली ऐसी नक्काशियाँ केवल भारत में ही पायी जाती हैं ।

(श्रीरंगम मंदिर, तमिलनाडु)
*🕉️🐚🔱⛳जब दुनियाँ पत्थरों को घिसकर आग जलाना सीख रही थी तब हमारे पूर्वज पहाड़ो को तोड़कर महादेव को अपनी अदम्य भक्ति का सबूत दे रहे थे ।*

*(शिव मंदिर, थिरुमायम फोर्ट, तमिलनाडु)*⬇️
#नागकुआँ_मन्दिर_बनारस

वाराणसी के इस पोखरे (तालाब) के अन्दर एक कुआँ है और उस कुएँ के अन्दर है बहुत ही प्राचीन शिवलिंग ।

साल में बस नागपंचमी के दिन ही यहा पर शिवलिंग के दर्शन मिलते हैं।

शिव की इस नगरी से जाता है नाग लोक का रास्ता, तस्वीर देखकर रह जायेंगे दंग...

वाराणसी शिव की इस नगरी से ही नागलोक जाने का रास्ता है। नागकुंड में एक कुआं छिपा हुआ है जहां से ही नागलोक जाने का रास्ता है। नागपंचमी पर यहां दर्शन करने से कालसर्प योग से मुक्ति मिलती है। अपने तरह के अनोखे इस मंदिर में बुधवार को सुबह से ही दर्शन करने वालों की लाइन लगी है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिव की नगरी काशी से ही नागलोक जाने का रास्ता है। बनारस के जैतपुरा स्थित नागकुंड की प्राचीनता किसी से छिपी नहीं है। नागकुंड के अंदर ही एक कुआं है जहां से नागलोक जाने का रास्ता है। कुआं के अंदर प्राचीन शिवलिंग भी स्थापित है जो साल भर पानी में डूबा रहता है और नागपंचमी के पहले कुंड का पानी निकाल कर शिवलिंग का श्रृंगार किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं की माने तो यहां पर आज भी नाग निवास करते हैं। नागकुंड स्थित कुएं का वर्णन धर्म शास्त्र में भी किया गया है।

कालसर्प योग से मुक्ति के लिए बेहद खास है नागकुंड, महर्षि पतंजलि के तप से हुआ था निर्माण
देश में तीन ही ऐसे कुंड हैं जहां पर दर्शन करने से कालसर्प योग से मुक्ति मिलती है। जैतपुरा का कुंड ही मुख्य नागकुंड है। बताया जाता है कि महर्षि पतंजलि ने अपने तप से इस कुंड का निर्माण कराया था। महर्षि पतंजलि द्वारा स्थापित एक शिवलिंग भी है। नागपंचमी के पहले कुंड का जल निकाल कर सफाई की जाती है फिर शिवलिंग की पूजा की जाती है इसके बाद नागकुंड फिर से पानी से भर जाता है। इसी नागकुंड से होकर नागलोक जाने का रस्ता भी है।

सुबह से ही दर्शन करने वालों की लगी है कतार
नागकुंड में दर्शन करने वालों की सुबह से ही कतार लगी हुई है। यहां पर दूर-दराज से लोग दर्शन करने आते हैं। नागकुंड का दर्शन करने से ही कालसर्प योग से मुक्ति मिलती है इसके अतिरिक्त जीवन में आने वाली सारी बाधाएं खत्म हो जाती है। बनारस में नागकुंड का विशेष स्थान है जिस नगरी में स्वयं महादेव विराजमन रहते हैं वहां का नागकुंड अनोखा फल देने वाला होता है।
28450 वर्ष पुरानी भगवान विष्णु के कल्पविग्रह मूर्ति के पीछे का रहस्य.......

यह बात सन 1959 की है जब चीन ने तिब्बत पर आक्रमण कर दिया था। उस समय वहां कई बौद्ध भिक्षुओं को पकड़कर जेल में डाल दिया गया था।

परंतु वहां के एक बौद्ध हाम्पा साधु ने, जो कि हम्पा रक्षक साधु होते हैं, उन्होंने कुछ गुप्त चारों के सहयोग से एक छोटी सी भगवान विष्णु जी की मूर्ति को अमेरिका के एक गुप्तचर संस्था में भिजवा दिया था।

मूर्ति के बारे में बात करें तो इसकी लंबाई 5.3 सेंटीमीटर और चौड़ाई 4.7 सेंटीमीटर है।

इस मूर्ति का नाम कल्प विग्रह है या फिर यह कहे कि इसका नामकरण कल्प विग्रह नाम से किया गया है।

सीआईए ने जब इस मूर्ति को कार्बन डेटिंग हेतु कैलिफोर्निया विकिरण प्रयोगशाला में भेजा, तब वहां पर इन्हें जो बात पता चली उससे सभी अवाक रह गए।

इस मूर्ति की आयु 28450 वर्ष पुरानी है। ऐसा माना जाता है कि कितने वर्ष पहले न तो कोई भाषा थी, ना तो कोई तकनीक थी, ना ही किसी को धातु का विशेष ज्ञान था, तो यह कैसे संभव है कि किसी ने कांसे की श्री मूर्ति बनाई होगी?

इस मूर्ति के भीतर कुछ धातुओं को ऐसे सटीक मात्रा में मिलाया गया है, जिसके कारण यदि आप ताम्र जल पात्र में कुछ देर तक इसे रख दें तो जल भी अवशोषित हो जाता है और आपको आयुष देता है।
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*पूरे विश्व की सबसे उत्तम काल गणना हमारे महापुरुषों ऋषीयों के पास थी इससे उत्तम समय की गणना कोई नही कर सकता ओर science ने भी स्वीकार किया है पृथ्वी की आयु 4 अरब वर्ष है ओर 2 अरब वर्ष बीत गए मतलब हमारे आर्य पूर्वज बहुत ही पढे लिखे थे । सच में हम विश्व गुरु थे स्वयं को पहचानो भारतीय संस्कृति पर गर्व करो।*

*🚩जयरामजी की🚩*