केरल के #कूडलमनिक्यम मंदिर से कई प्राचीन मूर्तियां, शालीग्राम और सिक्के पाए गए है ।
इसी बुधवार 10 जून 2020 को तीर्थकुलम (पवित्र तालाब) की सफाई के दौरान पाया गया है, यह तालाब 3.5 एकड़ के क्षेत्र में फैला हुआ है ।
यह मंदिर केरल के त्रिशूर जिले के इरिंजलाक्कुडा क्षेत्र में स्थित है ।
कुडलमनिक्यम मंदिर लगभग 5,000 वर्ष पुराना है, एक शिलालेख के अनुसार जिसमें राजा स्थानु रवि वर्मा का भी उल्लेख है, और 854 ईस्वी की तारीख है । भगवान श्री राम के भाई भरत, मंदिर के पीठासीन देवता है जिन्हे "संगमेश्वर" (संगम का भगवान) भी बुलाया जाता है
कुलीपिनी महर्षि के प्राचीन यज्ञ शाला से पता चलता है कि ऋषि ने मंदिर के अंदर यज्ञ किया था । कुलीपिनी महर्षि उस क्षेत्र में रहते थे और ध्यान साधना करते थे, जो कभी घना जंगल हुआ करता था ।
इतिहासकार डॉ केसावन वेलुथत ने मूर्तियों को निम्नलिखित के रूप में पहचाना है
-- देवी और भुदेवी के साथ भगवान विष्णु,
-- नृत्य मुद्रा में कृष्ण, और
-- सोमस्कंधा
इस खोज में कई शालीग्राम, शिवलिंग, मंत्र पीठ, यंत्र पीठ और योनी पीठ, एवम पुराने सिक्के आदि शामिल हैं,
आगे के फैसले के लिए मंदिर पुजारी ने आज शुक्रवार को मीटिंग निर्धारित की है।
सनातन धर्म की सुंदरता और प्रामाणिकता प्राचीन मंदिरों और संबंधित चीजों की इन सभी खोजों से मजबूत हो रही है । जो हमारे आधुनिक इतिहासकारों द्वारा शायद जानबूझकर छुपाया गया।
आपको क्या लगता है? कमैंट्स में जरूर बताये।अगर आप इस संदर्भ में कुछ जानकारी रखते हो तो अवश्य बताये।
🙏साभार🙏
इसी बुधवार 10 जून 2020 को तीर्थकुलम (पवित्र तालाब) की सफाई के दौरान पाया गया है, यह तालाब 3.5 एकड़ के क्षेत्र में फैला हुआ है ।
यह मंदिर केरल के त्रिशूर जिले के इरिंजलाक्कुडा क्षेत्र में स्थित है ।
कुडलमनिक्यम मंदिर लगभग 5,000 वर्ष पुराना है, एक शिलालेख के अनुसार जिसमें राजा स्थानु रवि वर्मा का भी उल्लेख है, और 854 ईस्वी की तारीख है । भगवान श्री राम के भाई भरत, मंदिर के पीठासीन देवता है जिन्हे "संगमेश्वर" (संगम का भगवान) भी बुलाया जाता है
कुलीपिनी महर्षि के प्राचीन यज्ञ शाला से पता चलता है कि ऋषि ने मंदिर के अंदर यज्ञ किया था । कुलीपिनी महर्षि उस क्षेत्र में रहते थे और ध्यान साधना करते थे, जो कभी घना जंगल हुआ करता था ।
इतिहासकार डॉ केसावन वेलुथत ने मूर्तियों को निम्नलिखित के रूप में पहचाना है
-- देवी और भुदेवी के साथ भगवान विष्णु,
-- नृत्य मुद्रा में कृष्ण, और
-- सोमस्कंधा
इस खोज में कई शालीग्राम, शिवलिंग, मंत्र पीठ, यंत्र पीठ और योनी पीठ, एवम पुराने सिक्के आदि शामिल हैं,
आगे के फैसले के लिए मंदिर पुजारी ने आज शुक्रवार को मीटिंग निर्धारित की है।
सनातन धर्म की सुंदरता और प्रामाणिकता प्राचीन मंदिरों और संबंधित चीजों की इन सभी खोजों से मजबूत हो रही है । जो हमारे आधुनिक इतिहासकारों द्वारा शायद जानबूझकर छुपाया गया।
आपको क्या लगता है? कमैंट्स में जरूर बताये।अगर आप इस संदर्भ में कुछ जानकारी रखते हो तो अवश्य बताये।
🙏साभार🙏
ये निर्माण आपको मानने पर मजबूर कर देंगे कि ताजमहल तो केवल सुंदर है लेकिन असली आश्चर्य तो हमारे मंदिर हमारे इमारत ही हैं..।
पत्थर पर नक्काशी करके बनाई गई इस जाली की तस्वीर जैसलमेर के एक बेहद पुरानी हवेली की है
17 वी सदी में इस जाली को इस तरह से बनाया गया था कि अंदर बैठी महिलाएं बाहर सब कुछ देख सकती थी लेकिन बाहर से अंदर बैठी महिलाओं को कोई नहीं देख सकता था।
पत्थर पर नक्काशी करके बनाई गई इस जाली की तस्वीर जैसलमेर के एक बेहद पुरानी हवेली की है
17 वी सदी में इस जाली को इस तरह से बनाया गया था कि अंदर बैठी महिलाएं बाहर सब कुछ देख सकती थी लेकिन बाहर से अंदर बैठी महिलाओं को कोई नहीं देख सकता था।
झूठी इस्लामी स्थापत्य कला बहुत पढ़ ली, अब सनातन धर्म की गौरवमयी कलाकारी देखो....🙏
8वीं सदी में दक्षिण भारत के "पल्लव वंश" के सूर्यवंशी क्षत्रियों द्वारा निर्मित यह मंदिर एक.... बेहद रहस्यमयी मंदिर है...🚩
यह गुफा एक ही पत्थर को काटकर बनाई गई है, ऊपर जो मंदिर है, वह भी उसी पहाड़ का हिस्सा है !
यह कैसे किया गया ?? इसका तो हमारे पास क्या...पूरी दुनिया के पास नहीं है !
पता नहीं, कैसे ज्ञानी और ध्यानी थें हमारे पूर्वज, जो वह कार्य कर गए, जिसकी कल्पना भी शायद हम नही कर सकतें...
यह केवल खुद तक सीमित मत रखना, अपने बच्चों को जरूर बताना...की हमारा भारत और उसकी सांस्कृतिक विरासत कितनी महान है, उसके बाद उनके मन में सनातन धर्म को लेकर कभी सवाल खड़े नही होंगे !
जिसको अपनी महान विरासत का स्मरण हो, उसका धर्मपरिवर्तन कोई नहीं करवा सकता...🚩
ओल्क्कन्ननेश्वर मंदिर, महाबलिपुरम तमिलनाडु
8वीं सदी में दक्षिण भारत के "पल्लव वंश" के सूर्यवंशी क्षत्रियों द्वारा निर्मित यह मंदिर एक.... बेहद रहस्यमयी मंदिर है...🚩
यह गुफा एक ही पत्थर को काटकर बनाई गई है, ऊपर जो मंदिर है, वह भी उसी पहाड़ का हिस्सा है !
यह कैसे किया गया ?? इसका तो हमारे पास क्या...पूरी दुनिया के पास नहीं है !
पता नहीं, कैसे ज्ञानी और ध्यानी थें हमारे पूर्वज, जो वह कार्य कर गए, जिसकी कल्पना भी शायद हम नही कर सकतें...
यह केवल खुद तक सीमित मत रखना, अपने बच्चों को जरूर बताना...की हमारा भारत और उसकी सांस्कृतिक विरासत कितनी महान है, उसके बाद उनके मन में सनातन धर्म को लेकर कभी सवाल खड़े नही होंगे !
जिसको अपनी महान विरासत का स्मरण हो, उसका धर्मपरिवर्तन कोई नहीं करवा सकता...🚩
ओल्क्कन्ननेश्वर मंदिर, महाबलिपुरम तमिलनाडु