ऐतिहासिक मंदिर और उनकी कथा
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हमारी संस्कृति हमारा अभिमान

*इस चैनल मे हमारे मंदिरों की कथा के आडियो विडियो और हमारी सभ्यता से जुड़ी जगह का प्रसारण किया जाता है*

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*1000 साल पुराना रहस्यमय भगवान गणेश तीर्थस्थल, छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में एक ढोलकल पहाड़ पर, 3000 फीट की ऊँचाई पर एक घने जंगल के बीच में एक पहाड़ी के ऊपर स्थित है*

पौराणिक कथाओं में
परशुराम और भगवान गणेश के बीच जिस युद्ध का वर्णन है
*वह छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के ढोलकल पहाडिय़ों पर हुआ था।*

यहां आज भी इस बात के प्रमाण मिलते हैं।

यहां समुद्र तल से 2994 फीट ऊंची चोटी पर भगवान गणेश विराजे हुए हैं।

यह कोई नहीं जानता,
*इतनी ऊंचाई पर गणेश की प्रतिमा कैसे पहुंची।*

पुरातत्ववेत्ताओं के मुताबिक यह प्रतिमा 11 वीं सदी की है।
तब यहां नागवंशी राजाओं का शासन था।
*गणेश प्रतिमा के पेट पर नाग का चित्र अंकित है।*

इस आधार पर माना जाता है, इसकी स्थापना नागवंशी राजाओं ने की होगी।

*यह प्रतिमा पूरी तरह सुरक्षित और ललितासन में है।*

हालांकि इतनी ऊंचाई पर ले जाने या इसे बनाने के लिए कौन सी तकनीक अपनाई गई यह रहस्य है।

आर्कियोलॉजिस्ट के मुताबिक पूरे बस्तर में ऐसे प्रतिमा और कहीं नहीं है।

इसलिए यह रहस्य और भी गहरा हो जाता है कि ऐसी एक ही प्रतिमा यहां कहां से आई।

इस घटना को चिरस्थाई बनाने के लिए छिंदक नागवंशी राजाओं ने शिखर पर गणेश की प्रतिमा स्थापति की।

चूंकि परशूराम के फरसे से गणेश का दांत टूटा था, इसलिए पहाड़ी की शिखर के नीचे के गांव का नाम फरसपाल रखा गया।

बगल में कोतवाल पारा गांव है। कोतवाल मतलब रक्षक या पहरेदार।

लोग यहां गणेश को अपने क्षेत्र का रक्षक मानते हैं।


श्री गणेश चतुर्थी की अनंत शुभकामनाएं🙏🙏🙏
हमारे प्राचीन मंदिरों की दीवालों पर कुछ ऐसी नक्काशियाँ हैं जो इस बात की ओर इशारा करती हैं कि हमारे पूर्वजों के पास मिसाइल सहित अन्य विध्वंशक हथियारों की जानकारी थी ।

अमेरिका के वैज्ञानिक रॉबर्ट ओपनहाइमर ने अपनी रिसर्च में ब्रह्मास्त्र को एक परमाणु हथियार माना है, क्योंकि महाभारत में लाखों लोगों के एक साथ मारे जाने का उल्लेख है और यह एक परमाणु हथियार से ही संभव था।

ब्रह्मास्त्र एक दैवीय हथियार था। माना जाता है कि यह अचूक और सबसे भयंकर अस्त्र था। रामायण और महाभारतकाल में यह अस्त्र आज की तरह गिने चुने मॉडर्न देशों की तरह ही केवल कुछ गिने-चुने योद्धाओं के पास ही था।

यहाँ तक कि सिंधु घाटी सभ्यता में हुई रिसर्च में ऐसे कई नगर मिले हैं, जो लगभग 5000 से 7000 ईसापूर्व अस्तित्व में थे। यहां मिले नरकंकालों की स्थिति से पता चलता है कि मानो इन्हें किसी भयंकर प्रहार से मारा गया था। इसके भी सबूत मिले हैं कि यहां किसी काल में भयंकर ऊष्मा और रेडिएशन पैदा हुआ था, जैसा कि किसी परमाणु बम के विस्फोट के बाद पैदा होता है।
क्या कभी आपने सोचा है कि पुराणों में सूर्य के रथ को चलाने वाले 7 घोड़ो की बात क्यों कि गयी है ?

यह बात सच है कि विज्ञान की शिक्षा लेने वाला एक बच्चा भी इस बात से इनकार कर देगा कि सूर्य सात घोड़ो वाले किसी रथ पर सवार है, जबकि पुराणों में वर्णित जिस ज्ञान का मूर्ख और वामपंथी मजाक उड़ाते है उस ज्ञान को केवल एक बुद्धिमान ही समझ सकता है, हमारे वेद और पुराणों में अलंकारों का अत्यधिक प्रयोग हुआ है, सोचिये इन घोड़ो की संख्या 8 या 10 या और कुछ क्यों नहीं बताया गया आखिर 7 ही क्यों ? विज्ञान के अनुसार सूर्य के प्रकाश में सात रंग होते हैं इन्ही सात रंगों को ही घोड़ो की उपमा दी गयी है, रंग रूपी यहीं घोड़े समय के रथ पर सवार होकर अंतरिक्ष में आकाशगंगा की परिक्रमा करते रहते हैं
अपनी पहचान को तलाशती हमारी एक वीरान विरासत..

लेटराइट पत्थरों से बना यह तालाब दुनिया में अपनी तरह का एकमात्र तालाब है । इस तालाब में आश्चर्यजनक तरीके से तुला संक्रांति के दिन कावेरी का पानी प्रवेश करता है जिसकी वजह से यह हमेशा पवित्र पानी से भरा रहता है, फ्रेंड्स इस पवित्र स्थान श्रीराम और लक्ष्मण जी लंका जाते वक्त कुछ समय के लिए ठहरे थे ।

(श्री पेरालास्सेरी मंदिर, केरल)
हमारे मंदिरों को नष्ट करने वालों को यह पता नहीं था कि अगर एक भी स्तंभ बच गया तो वह सनातनियों के स्वाभिमान को जगाने के लिए पर्याप्त होगा ..

इन स्तंभों में सजावटी नक्काशियो वाले हिस्से को अलग से नहीं जोड़ा गया बल्कि पूरा स्तम्भ एक ही पत्थर को तोड़कर बना है । क्या इनकी फिनिशिंग देखकर आपको लगता है कि इसे मात्र छेनी से तराशा गया होगा ?

(चेलुवर्यस्वामी मंदिर, मेलुकोट)
Forwarded from सनातन संस्कृत के वीडियो
🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे गोविंद*🙏🏻🌹
🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे* 🙏🏻🌹

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🕰➡️1.37

*☝️जयपुर जिले के सामोद इलाके में अरावली की पहाड़ियों के बीच में स्थित मालेश्वर धाम में बारिश के बाद बहते झरनों का अद्भुत नजारा।*

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*🙏🏻🌹 हरे कृष्ण 🙏🏻🌹*
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