*क्या आपको पता था? 12 वीं शताब्दी के उच्च ऊँची एड़ी के जूते!*
क्या आपने कभी सोचा था कि 800 साल पहले हाई हील्स पहले से ही उपयोग में हैं? हाँ यह सही है! दक्षिण भारत में तेलंगाना राज्य में रामप्पा मंदिर के पास यह रिकॉर्ड और प्रमाण हैं। यह मंदिर अपनी अद्भुत नक्काशी के लिए बहुत प्रसिद्ध था।
जटिल अलंकरण में समृद्धता, तत्कालीन काल के दौरान प्रचलित परिधानों में पुष्प पैटर्न उत्तम रूप से अनुकरणीय थे।
हर आगंतुक इस फैशनेबल 'हाई हील / सोल' जूते (पैर और एड़ी के बीच की खाई के लिए देखो) से चकित हो जाएगा, जो इस 'मदनिका' (खगोलीय नौकरानी) ने 800 साल पहले गढ़ी थी!
स्थान: रामप्पा मंदिर, पालमपेट गांव, 70 किलोमीटर वारंगल, तेलंगाना, दक्षिण भारत।
अवधि: 12 वीं शताब्दी ई.पू.
क्या आपने कभी सोचा था कि 800 साल पहले हाई हील्स पहले से ही उपयोग में हैं? हाँ यह सही है! दक्षिण भारत में तेलंगाना राज्य में रामप्पा मंदिर के पास यह रिकॉर्ड और प्रमाण हैं। यह मंदिर अपनी अद्भुत नक्काशी के लिए बहुत प्रसिद्ध था।
जटिल अलंकरण में समृद्धता, तत्कालीन काल के दौरान प्रचलित परिधानों में पुष्प पैटर्न उत्तम रूप से अनुकरणीय थे।
हर आगंतुक इस फैशनेबल 'हाई हील / सोल' जूते (पैर और एड़ी के बीच की खाई के लिए देखो) से चकित हो जाएगा, जो इस 'मदनिका' (खगोलीय नौकरानी) ने 800 साल पहले गढ़ी थी!
स्थान: रामप्पा मंदिर, पालमपेट गांव, 70 किलोमीटर वारंगल, तेलंगाना, दक्षिण भारत।
अवधि: 12 वीं शताब्दी ई.पू.
🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे गोविंद* 🙏🏻🌹
🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे* 🙏🏻🌹
*महाकाल वन के 84 महादेव की कथा*
*ये पूरी कथा इस टेलीग्राम चैनल में भी उप्लड है जो लाभ ले सकते है चैनल के माध्यम से अवश्य लें।*
👇🏻👇🏻लिंक👇🏻👇🏻
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*💥👇🏻 विशेष सूचना 💥👇🏻*
किसी को इस कथा के पार्ट या पूरी कथा होना जो अभी तक हो चुकी है तो कृपया कर के *इस लिंक के जरिये मुझे व्हाटसअप करें 👇🏻👇🏻*
Https://wa.me/917020402947
*🙏🏻🌹हर हर महादेव🙏🏻🌹*
🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे* 🙏🏻🌹
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84 महादेव कथाएं 84 दिन
इस चैनल मे 84 महादेव (उज्जैन) की कथा का प्रसारण किया जा रहा है
किसी और को इस ग्रुप में जोड़ने के लिये उन्हें ये लिंक दे
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श्रीकांन्तेश्वर मंदिर कर्नाटक
भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र कार्तिकेय जिसे तमिल मे मुरुगन स्वामी भी कहते है।
"देवसेनापति" मुरुगन अपने वाहन मोर पर बैठ युद्ध के लिए तैयार है,बेहद खुबसूरत भाव भंगिमा उकेरी गई है।
यह मंदिर राज्य की तीर्थनगरी नंजनगुड में स्थित है।
भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र कार्तिकेय जिसे तमिल मे मुरुगन स्वामी भी कहते है।
"देवसेनापति" मुरुगन अपने वाहन मोर पर बैठ युद्ध के लिए तैयार है,बेहद खुबसूरत भाव भंगिमा उकेरी गई है।
यह मंदिर राज्य की तीर्थनगरी नंजनगुड में स्थित है।
Forwarded from सनातन संस्कृत के वीडियो
🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे गोविंद*🙏🏻🌹
🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे* 🙏🏻🌹
*वीडियो👆🏻👆🏻👇🏻👇🏻*
🕰➡️2.19
*अफ्रीका के केन्या में मुंबासा की एक गुफा में पुराना शिव मंदिर🙏हर हर महादेव🙏👆👆👆👆👇👇👇👇🚩🚩🚩🚩🚩🚩*
*👇🏻टेलीग्राम चैनल से जुड़े👇🏻*
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*🙏🏻🌹 हरे कृष्ण 🙏🏻🌹*
🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे* 🙏🏻🌹
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Video from jaikey
🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे गोविंद*🙏🏻🌹
🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे* 🙏🏻🌹
*वीडियो👆🏻👆🏻👇🏻👇🏻*
🕰➡️3.01
**शुभ प्रभात दिव्यभारत*
केरल के एक मंदिर में भगवन को यह एक भेंट स्वरुप है। यह उत्सव नम्बूदिरी परिवारों के द्वारा किया जाता है।
इसमें 12000 नारियल एक व्यक्ति द्वारा एक-एक करके एक ही बार में तोड़े जाते हैं।
ये प्रर्था बेहद रोमांचकारी है जहां चण्डे वाद्ययंत्र (आनक जैसा वहां का लोक वाद्य) के लय और ताल के अनुसार ये नारियल तोड़े जाते हैं।
तोड़ने की गति चण्डे में लय और ताल के अनुसार ही बदलती है। यहा पर तोड़ते समय दोनों हाथों का प्रयोग करते हुए ये ध्यान रखा जाता है की ताल के अनुसार ही टूटे।
यह प्रत्यक्ष में देखने लायक है।
यह नारियल भेंट तोड़ने की पूर्णता रात्रि 12 से पहले किया जाता है।
12000 नारियल एक व्यक्ति द्वारा मात्र डेढ़ घंटे के अंदर तोड़ दिए जाते हैं।
यह दुर्लभ है ।शायद प्रभु के द्वारा ही इस कार्य के लिए शक्ति दी जाती है*
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*🙏🏻🌹 हरे कृष्ण 🙏🏻🌹*
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केरल के एक मंदिर में भगवन को यह एक भेंट स्वरुप है। यह उत्सव नम्बूदिरी परिवारों के द्वारा किया जाता है।
इसमें 12000 नारियल एक व्यक्ति द्वारा एक-एक करके एक ही बार में तोड़े जाते हैं।
ये प्रर्था बेहद रोमांचकारी है जहां चण्डे वाद्ययंत्र (आनक जैसा वहां का लोक वाद्य) के लय और ताल के अनुसार ये नारियल तोड़े जाते हैं।
तोड़ने की गति चण्डे में लय और ताल के अनुसार ही बदलती है। यहा पर तोड़ते समय दोनों हाथों का प्रयोग करते हुए ये ध्यान रखा जाता है की ताल के अनुसार ही टूटे।
यह प्रत्यक्ष में देखने लायक है।
यह नारियल भेंट तोड़ने की पूर्णता रात्रि 12 से पहले किया जाता है।
12000 नारियल एक व्यक्ति द्वारा मात्र डेढ़ घंटे के अंदर तोड़ दिए जाते हैं।
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नेपाल का न्यातपोल मंदिर, जिसका निर्माण नरेश भूपतिंद्र मल्ल ने करवाया था।
इस मंदिर पर चित्तौड़गढ़ के तीसरे शाके में अकबर की विशाल सेना से लड़ते हुए वीरगति पाने वाले मेड़ता के वीर योद्धा जयमल जी राठौड़ व मेवाड़ के वीर रावत पत्ताजी चुंडावत की मूर्तियां सुसज्जित हैं।
मेवाड़ के रावल रतनसिंह के भाई कुंभकर्ण के वंशज ही नेपाल के 'राणा' हुए थे।
1837 ई. में नेपाल नरेश राजेन्द्र विक्रमशाह ने अपने कुल के रीति रिवाजों के बारे में अधिक जानकारी के लिए प्रतिष्ठित स्त्री-पुरुषों के एक समूह को महाराणा जवानसिंह जी के शासनकाल में मेवाड़ भेजा था।
पोस्ट लेखक :- तनवीर सिंह सारंगदेवोत
इस मंदिर पर चित्तौड़गढ़ के तीसरे शाके में अकबर की विशाल सेना से लड़ते हुए वीरगति पाने वाले मेड़ता के वीर योद्धा जयमल जी राठौड़ व मेवाड़ के वीर रावत पत्ताजी चुंडावत की मूर्तियां सुसज्जित हैं।
मेवाड़ के रावल रतनसिंह के भाई कुंभकर्ण के वंशज ही नेपाल के 'राणा' हुए थे।
1837 ई. में नेपाल नरेश राजेन्द्र विक्रमशाह ने अपने कुल के रीति रिवाजों के बारे में अधिक जानकारी के लिए प्रतिष्ठित स्त्री-पुरुषों के एक समूह को महाराणा जवानसिंह जी के शासनकाल में मेवाड़ भेजा था।
पोस्ट लेखक :- तनवीर सिंह सारंगदेवोत
जितनी बार मैं इस प्रतिमा को देखता हूँ मेरा यकीन बढ़ जाता है कि हमारे पूर्वजों को उन्नत तकनीकों की जानकारियां थी ।
मेरा मानना है कि शेषनाग पर बैठे भगवान विष्णु की इस प्रतिमा के प्रत्येक हिस्से को जीवंत बनाने के लिए केवल छेनी-हथौड़ी ही पर्याप्त नहीं है । पर्फेक्शन की सीमा को पार करने वाली यह प्रतिमा एक पहाड़ को खोदकर बनाई गई है।
(बादामी-गुफा-3, 580 ईसवी, कर्नाटक)
मेरा मानना है कि शेषनाग पर बैठे भगवान विष्णु की इस प्रतिमा के प्रत्येक हिस्से को जीवंत बनाने के लिए केवल छेनी-हथौड़ी ही पर्याप्त नहीं है । पर्फेक्शन की सीमा को पार करने वाली यह प्रतिमा एक पहाड़ को खोदकर बनाई गई है।
(बादामी-गुफा-3, 580 ईसवी, कर्नाटक)
वैज्ञानिक नहीं पता लगा पा रहे गंगाजल का रहस्य...
फ्रास के प्रसिद्ध डा0 डी हेरेल ने जब गंगाजल की इतनी प्रशंसा सुनी तो वे भारत आये और गंगाजल का वैज्ञानिक परीक्षण किया ।
उन्होने पाया कि इस जल में संक्रामक रोगों के कीटाणुओं की जबरजस्त शक्ति है। आश्चर्यजनक बात तो यह है कि एक गिलास में किसी नदी या कुएं का पानी लें‚ जिसमें कोई कीटाणु नाशक तत्व नहो‚ उसमें गंगाजल मिला देने पर उसमें कृमिनाशक सामर्थ्य आ जाती है । इससे सिद्ध होता है कि गंगाजी में कोई ऐसा तत्व है जो किसी मिश्रण वाले जल को भी अपने ही समान बना लेता है । यही कारण 1557 मील लम्बी गंगाजी में गोमती‚घाघरा ‚ यमुना ‚सेन ‚ पर उसकी कृमिनाशक क्षमता अक्षृण्ण बनी रही। यह एक प्रकार का चमत्कार ही है।
डा0 डी हेरेल ने अपने प्रयोगो में सिद्ध कर दिया कि इस जल में टी0बी0 अतिसार ‚ संग्रहणी‚ ब्रण‚ हैजा के जीवाणुओं को मारने की शक्ति विद्यमान है ।
डा0 केहिमान ने लिखा है– ʺकिसी की शक्ति जवाब देने लगे तो उस समय उसे गंगाजल दिया जाये तो आश्चर्यजनक ढंग से जीवनी शक्ति बढती और रोगी का ऐसा लगता है कि उसके भीतर किसी सात्विक आनन्द का स्त्रोत फूट रहा है।ʺडा0 हेनकेन आगरा में गवर्नमंण्ट सा
फ्रास के प्रसिद्ध डा0 डी हेरेल ने जब गंगाजल की इतनी प्रशंसा सुनी तो वे भारत आये और गंगाजल का वैज्ञानिक परीक्षण किया ।
उन्होने पाया कि इस जल में संक्रामक रोगों के कीटाणुओं की जबरजस्त शक्ति है। आश्चर्यजनक बात तो यह है कि एक गिलास में किसी नदी या कुएं का पानी लें‚ जिसमें कोई कीटाणु नाशक तत्व नहो‚ उसमें गंगाजल मिला देने पर उसमें कृमिनाशक सामर्थ्य आ जाती है । इससे सिद्ध होता है कि गंगाजी में कोई ऐसा तत्व है जो किसी मिश्रण वाले जल को भी अपने ही समान बना लेता है । यही कारण 1557 मील लम्बी गंगाजी में गोमती‚घाघरा ‚ यमुना ‚सेन ‚ पर उसकी कृमिनाशक क्षमता अक्षृण्ण बनी रही। यह एक प्रकार का चमत्कार ही है।
डा0 डी हेरेल ने अपने प्रयोगो में सिद्ध कर दिया कि इस जल में टी0बी0 अतिसार ‚ संग्रहणी‚ ब्रण‚ हैजा के जीवाणुओं को मारने की शक्ति विद्यमान है ।
डा0 केहिमान ने लिखा है– ʺकिसी की शक्ति जवाब देने लगे तो उस समय उसे गंगाजल दिया जाये तो आश्चर्यजनक ढंग से जीवनी शक्ति बढती और रोगी का ऐसा लगता है कि उसके भीतर किसी सात्विक आनन्द का स्त्रोत फूट रहा है।ʺडा0 हेनकेन आगरा में गवर्नमंण्ट सा
Forwarded from श्रीमद्भागवत कथा मूल पाठ
🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे गोविंद* 🙏🏻🌹
🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे* 🙏🏻🌹
*📖श्रीमद्भागवत कथा मूल पाठ📖*
*कुल भाग* ➡️2️⃣9️⃣6️⃣
*आज का भाग* ⬇️⬇️
*42._Vaarha_Avtar_Ki_Katha*
ऑडियो-📀🕰➡10.02
*एक प्राथना- सुने भी और आगे भी फारवर्ड करें📲📲 और भी लाभ ले 🙏🏻🙏🏻*
*👇🏻टेलीग्राम चैनल से जुड़े👇🏻*
https://t.me/joinchat/AAAAAEYbfl80sMpToiENaA
*🙏🏻🌹 हरे कृष्णा 🙏🏻🌹*
🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे* 🙏🏻🌹
*📖श्रीमद्भागवत कथा मूल पाठ📖*
*कुल भाग* ➡️2️⃣9️⃣6️⃣
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*42._Vaarha_Avtar_Ki_Katha*
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*🙏🏻🌹 हरे कृष्णा 🙏🏻🌹*
Telegram
श्रीमद्भागवत कथा मूल पाठ
इस चैनल श्रीमद्भागवत कथा मूल पाठ का प्रसारण किया जा रहा है
और ये channel प्रचार के लिये बनाया गया है
किसी और को इस ग्रुप में जोड़ने के लिये उन्हें ये लिंक दे
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सौ साल बनने में लगे तोड़ने में तीन सौ साल लग गये #विदिशा_के_विजय_मंदिर को जो तीन सौ फ़िट ऊँचा था।मुग़ल इतिहासकार अलबरूनी ने लिखा है कि यह मंदिर 100 गज ऊँचा था और मीलों दूर से इसका शिखर दिखाई देता था।
तीन सौ साल के ध्वंस के बाद भी जब दीवारें नहीं टूटी तब औरंगज़ेब ने इसे तोप के गोलों से उड़ाने का आदेश दिया। मंदिर को ध्वस्त कर इस विशाल मंदिर के मलवे से ही आलमगीरी मस्जिद का निर्माण कर दिया गया और शहर का नाम भी विदिशा से आलमगीरपुर कर दिया गया।
नब्बे के दशक में तेज बारिश से मस्जिद का मसला धसका और मंदिर का आधार सामने आया भारतीय पुरातत्व ने खुदाई की तब इस एक हज़ार साल पुराने मंदिर से जुड़े तथ्य और अभिलेख प्राप्त हुये। उत्खनन का विरोध हुआ और काम रोक दिया गया।तब से यही स्थिति है इस मंदिर की।
विध्वंस के अवशेष एक किलोमीटर के दायरे में जगह-जगह आज भी बिखरे पड़े हैं।कभी आईये और देखिये कि इतिहास की हत्या यहाँ कितनी बेरहमी से हुई हम नहीं कहेंगे, कहेंगे इस परिसर में फैले पड़े ध्वंस के बाद के अवशेष जो अपनी कहानी खुद बयां करने में पूरी तरह सक्षम है।
🚩🚩🚩सनातन धर्म की जय हो🚩🚩🚩
तीन सौ साल के ध्वंस के बाद भी जब दीवारें नहीं टूटी तब औरंगज़ेब ने इसे तोप के गोलों से उड़ाने का आदेश दिया। मंदिर को ध्वस्त कर इस विशाल मंदिर के मलवे से ही आलमगीरी मस्जिद का निर्माण कर दिया गया और शहर का नाम भी विदिशा से आलमगीरपुर कर दिया गया।
नब्बे के दशक में तेज बारिश से मस्जिद का मसला धसका और मंदिर का आधार सामने आया भारतीय पुरातत्व ने खुदाई की तब इस एक हज़ार साल पुराने मंदिर से जुड़े तथ्य और अभिलेख प्राप्त हुये। उत्खनन का विरोध हुआ और काम रोक दिया गया।तब से यही स्थिति है इस मंदिर की।
विध्वंस के अवशेष एक किलोमीटर के दायरे में जगह-जगह आज भी बिखरे पड़े हैं।कभी आईये और देखिये कि इतिहास की हत्या यहाँ कितनी बेरहमी से हुई हम नहीं कहेंगे, कहेंगे इस परिसर में फैले पड़े ध्वंस के बाद के अवशेष जो अपनी कहानी खुद बयां करने में पूरी तरह सक्षम है।
🚩🚩🚩सनातन धर्म की जय हो🚩🚩🚩