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क्या एक सुंदर अनुग्रह…!!अपने शिशु पुत्र गणेशजी के साथ माता देवी पार्वती की शानदार मूर्ति..यह भारत में नहीं है,
विला सर्ना उबूड, बाली, इंडोनेशिया में है
विला सर्ना उबूड, बाली, इंडोनेशिया में है
*🛕हवा महल, जयपुर*
*🔶राजाओं और रजवाड़ो की ऐतिहासिक भूमि राजस्थान में कई ऐसे भव्य महल और किले हैं जिनकी सुंदरता की बात ही निराली है। पूरी दुनिया में इन महलों और किलों की प्रशंसा होती है।*
*🔶 हवामहल की खिड़कियों को इस तरह जालीदार बनाया गया है कि बाहर से अंदर की गतिविधियों को नहीं देखा जा सकता है परन्तु अंदर खड़ा व्यक्ति बाहर की गतिविधियों का स्पष्ट रूप से अवलोकन कर सकता है। 953 अत्यंत सुंदर खिड़कियों वाला यह पांच-मंजिला महल महाराजा सवाई प्रताप सिंह नें 1799 में बनवाया था।*
*🔶इस 5 मंजिला में किसी भी मंजिल में सिढ़ी नहीं है। हवा महल में सभी मंजिलों में जाने के लिए ढलान किए रास्तों का उपयोग किया जाता है।*
*🔶राजाओं और रजवाड़ो की ऐतिहासिक भूमि राजस्थान में कई ऐसे भव्य महल और किले हैं जिनकी सुंदरता की बात ही निराली है। पूरी दुनिया में इन महलों और किलों की प्रशंसा होती है।*
*🔶 हवामहल की खिड़कियों को इस तरह जालीदार बनाया गया है कि बाहर से अंदर की गतिविधियों को नहीं देखा जा सकता है परन्तु अंदर खड़ा व्यक्ति बाहर की गतिविधियों का स्पष्ट रूप से अवलोकन कर सकता है। 953 अत्यंत सुंदर खिड़कियों वाला यह पांच-मंजिला महल महाराजा सवाई प्रताप सिंह नें 1799 में बनवाया था।*
*🔶इस 5 मंजिला में किसी भी मंजिल में सिढ़ी नहीं है। हवा महल में सभी मंजिलों में जाने के लिए ढलान किए रास्तों का उपयोग किया जाता है।*
*🛕प्रेम मंदिर, वृंदावन*
*🔶प्रेम मंदिर को बनने में लगभग 11 वर्षों का समय लगा था। वर्ष 2000 में प्रेम मंदिर का शिलान्यास हुआ था। 14 फरवरी 2001 में कृपालु जी महाराज ने इस मंदिर के निर्माण की पहली ईंट रखी थी। फरवरी 2012 में ये बनकर तैयार हुआ।*
*🔶वृंदावन में 54 एकड़ में बना यह प्रेम मंदिर 125 फुट ऊंचा, 122 फुट लंबा और 115 फुट चौड़ा है। इसमें हरियाली भरे बगीचे, फव्वारे, श्रीकृष्ण की मनोहर झांकियां, श्रीगोवर्धन धारण लीला, कालिया नाग दमन लीला, झूलन लीलाएं दिखाई गई हैं, जिससे भक्त सरल से समझ सकें।*
*🔶ये पूरा मंदिर सफेद पत्थरों से बना है। इसे बनाने के लिए इटैलियन संगमरमर का प्रयोग किया गया है। मंदिर की दीवारों पर सफेद संगमरमर से चमचमाती बारीक नक्काशी इसकी भव्यता को कई अधिक बड़ा देती है।*
*🔶प्रेम मंदिर को बनने में लगभग 11 वर्षों का समय लगा था। वर्ष 2000 में प्रेम मंदिर का शिलान्यास हुआ था। 14 फरवरी 2001 में कृपालु जी महाराज ने इस मंदिर के निर्माण की पहली ईंट रखी थी। फरवरी 2012 में ये बनकर तैयार हुआ।*
*🔶वृंदावन में 54 एकड़ में बना यह प्रेम मंदिर 125 फुट ऊंचा, 122 फुट लंबा और 115 फुट चौड़ा है। इसमें हरियाली भरे बगीचे, फव्वारे, श्रीकृष्ण की मनोहर झांकियां, श्रीगोवर्धन धारण लीला, कालिया नाग दमन लीला, झूलन लीलाएं दिखाई गई हैं, जिससे भक्त सरल से समझ सकें।*
*🔶ये पूरा मंदिर सफेद पत्थरों से बना है। इसे बनाने के लिए इटैलियन संगमरमर का प्रयोग किया गया है। मंदिर की दीवारों पर सफेद संगमरमर से चमचमाती बारीक नक्काशी इसकी भव्यता को कई अधिक बड़ा देती है।*
*🛕सूर्य मंदिर, कोणार्क*
*🔶 विश्व धरोहर कोणार्क सूर्य मंदिर भगवान श्री सूर्य देव को समर्पित है। यह मंदिर कलिंग वास्तुकला की उपलब्धि के सर्वोच्च बिंदु को अनुग्रह, खुशी एवं जीवन दर्शन की अतरंगी शैली से दर्शाता है।*
*🔶सूर्यदेव के भारत में अनेकों मंदिर हैं। उन्हीं मंदिरों में से एक मंदिर उड़ीसा के कोणार्क का सूर्य मंदिर। भारत के 7 आश्चर्यों में भी शामिल यह सूर्य मंदिर भव्य रथ के आकार में बना हुआ है।*
*🔶मंदिर का निर्माण पूर्वी गंगा साम्राज्य के महाराजा नरसिंहदेव ने करवाया था। मंदिर की दीवारें, पिल्लर और पहिये बहुत ही किमती धातुओं से बने हुए हैं। यह मंदिर अपनी अनोखी बनावट व खूबसूरती के कारण UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज साईट में शामिल है।*
*🔶 विश्व धरोहर कोणार्क सूर्य मंदिर भगवान श्री सूर्य देव को समर्पित है। यह मंदिर कलिंग वास्तुकला की उपलब्धि के सर्वोच्च बिंदु को अनुग्रह, खुशी एवं जीवन दर्शन की अतरंगी शैली से दर्शाता है।*
*🔶सूर्यदेव के भारत में अनेकों मंदिर हैं। उन्हीं मंदिरों में से एक मंदिर उड़ीसा के कोणार्क का सूर्य मंदिर। भारत के 7 आश्चर्यों में भी शामिल यह सूर्य मंदिर भव्य रथ के आकार में बना हुआ है।*
*🔶मंदिर का निर्माण पूर्वी गंगा साम्राज्य के महाराजा नरसिंहदेव ने करवाया था। मंदिर की दीवारें, पिल्लर और पहिये बहुत ही किमती धातुओं से बने हुए हैं। यह मंदिर अपनी अनोखी बनावट व खूबसूरती के कारण UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज साईट में शामिल है।*
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🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे गोविंद*🙏🏻🌹
🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे* 🙏🏻🌹
*वीडियो👆🏻👆🏻👇🏻👇🏻*
🕰➡️1.37
*🙏🏻💐*ये जगह श्रीलंका में है। भगवान श्रीराम जब सीता जी के साथ लंका से वापस आ रहे थे तब सीता जी को प्यास लगी और उन्होंने पानी के लिए राम जी से कहा तब राम जी ने गंगा जी का आवाहन कर एक बाण समुद्र मे मार कर इस जगह मीठा पानी की धार समुद्र के बीच फूट पड़ी जो आज कूंए के रूप में स्थापित है।यह अद्भुत है कि तीन तरफ समुद्र बीच कुंवा वह भी मीठे जल का* ।।
*जय श्रीराम।।*
*जय श्री राम।।* 💐🙏🏻*
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*🙏🏻🌹 हरे कृष्ण 🙏🏻🌹*
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🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे गोविंद*🙏🏻🌹
🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे* 🙏🏻🌹
*वीडियो👆🏻👆🏻👇🏻👇🏻*
🕰➡️1.56
*🙏🏻💐दक्षिण मुख नंदि तिर्थ कर्णाटक बेंगलुरु के पास आया हुवा शिवजी का मंदिर हैं जहाँ नंदी के मुख से अविरत जलधारा बहती है जीस से शिवलिंग का अभिषेक होता रहता हैं...!!! यह मंदिर ४०० साल पुराना हैं.! 💐🙏🏻*
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*🛕 चांद बावड़ी, आभानेरी(राजस्थान)*
*🔶राजस्थान का इतिहास रहस्यों से भरा पड़ा है। यहां अनगिनत ऐसे उदाहरण है जो आज भी लोगों के लिए रहस्य ही बने हुए हैं।*
*🔶राजस्थान में जयपुर से 95 किमी दूरी पर स्थित आभानेरी गाँव में विश्व की सबसे बड़ी बावड़ी (सीढ़ियों वाला गहरा कुँआ) स्थित है, जिसका नाम है “चाँद बावड़ी”। चाँद बावड़ी का निर्माण 9वीं शताब्दी में सम्राट मिहिरभोज परिहार ने करवाया था जिसे राजा चाँद भी कहते है। ये बावड़ी बहुत सारे रहस्यों से अटी पड़ी है।*
*🔶दुनिया की सबसे गहरी यह बावडी चारों ओर से लगभग 35 मीटर चौडी है तथा इस बावडी में ऊपर से नीचे तक पक्की सीढियाँ बनी हुई हैं। 13 मंजिला यह बावडी 100 फ़ीट से भी ज्यादा गहरी है, जिसमें भूलभुलैया के रूप में 3500 सीढियाँ हैं । इसके ठीक सामने प्रसिद्ध हर्षद माता का मंदिर है। इसकी तह तक जाने के लिए 13 सोपान तथा लगभग 1300 सीढियाँ बनाई गई हैं, जो कि कला का अप्रतिम उदाहरण पेश करती हैं।*
*🔶बावड़ी में 17KM लंबी एक सुरंग भी है जिसका प्रयोग महाराज चांद युद्ध के समय करते थे।*
*🔶राजस्थान का इतिहास रहस्यों से भरा पड़ा है। यहां अनगिनत ऐसे उदाहरण है जो आज भी लोगों के लिए रहस्य ही बने हुए हैं।*
*🔶राजस्थान में जयपुर से 95 किमी दूरी पर स्थित आभानेरी गाँव में विश्व की सबसे बड़ी बावड़ी (सीढ़ियों वाला गहरा कुँआ) स्थित है, जिसका नाम है “चाँद बावड़ी”। चाँद बावड़ी का निर्माण 9वीं शताब्दी में सम्राट मिहिरभोज परिहार ने करवाया था जिसे राजा चाँद भी कहते है। ये बावड़ी बहुत सारे रहस्यों से अटी पड़ी है।*
*🔶दुनिया की सबसे गहरी यह बावडी चारों ओर से लगभग 35 मीटर चौडी है तथा इस बावडी में ऊपर से नीचे तक पक्की सीढियाँ बनी हुई हैं। 13 मंजिला यह बावडी 100 फ़ीट से भी ज्यादा गहरी है, जिसमें भूलभुलैया के रूप में 3500 सीढियाँ हैं । इसके ठीक सामने प्रसिद्ध हर्षद माता का मंदिर है। इसकी तह तक जाने के लिए 13 सोपान तथा लगभग 1300 सीढियाँ बनाई गई हैं, जो कि कला का अप्रतिम उदाहरण पेश करती हैं।*
*🔶बावड़ी में 17KM लंबी एक सुरंग भी है जिसका प्रयोग महाराज चांद युद्ध के समय करते थे।*
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🛑 *भीष्म पितामह अपनी मृत्यु के समय बाणों की शय्या पर लेटे हुए।*
🛑 *चेन्नेकेश्वर मंदिर, जिसे केशव या बेलूर के विजयनारायण मंदिर के रूप में भी जाना जाता है, भारत के कर्नाटक राज्य के हासन जिले में 12 वीं शताब्दी का एक हिंदू मंदिर है। यह 1117 ईस्वी में राजा विष्णुवर्धन द्वारा बनवाया गया था, बेलूर जो यागाची नदी के तट पर स्थित है इसलिए इसे वेलापुरा भी कहा जाता है, जो एक प्रारंभिक होयसला साम्राज्य की राजधानी थी।*
.
*जय सनातन धर्म*
🛑 *भीष्म पितामह अपनी मृत्यु के समय बाणों की शय्या पर लेटे हुए।*
🛑 *चेन्नेकेश्वर मंदिर, जिसे केशव या बेलूर के विजयनारायण मंदिर के रूप में भी जाना जाता है, भारत के कर्नाटक राज्य के हासन जिले में 12 वीं शताब्दी का एक हिंदू मंदिर है। यह 1117 ईस्वी में राजा विष्णुवर्धन द्वारा बनवाया गया था, बेलूर जो यागाची नदी के तट पर स्थित है इसलिए इसे वेलापुरा भी कहा जाता है, जो एक प्रारंभिक होयसला साम्राज्य की राजधानी थी।*
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*जय सनातन धर्म*